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Women’s day special- गुल्लक के पैसों से 11वीं में एडमिशन करवाने वाली प्रियंका आज बनी मैथ्स की प्रोफेसर

ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई पूरी की.


 

महिलाओं का शिक्षित होना अति आवश्यक है। महात्मा गांधी जी का कथन था अगर एक महिला शिक्षित होती है तो वह पूरे परिवार को शिक्षित करती है।

ऐसी ही कहानी है झारखंड की कोयला नगरी धनबाद की डॉ. प्रियंका कुमारी वर्मा की। जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर न सिर्फ शिक्षा हासिल की। बल्कि इसी शिक्षा के दम पर अपने पूरे की स्थिति को बदला दिया है महिला दिवस के मौके पर वन वर्ल्ड न्यूज कुछ ऐसी ही महिलाओं के जीवन के बारे में बताना जा रहा है। जिन्होंने अपनी इच्छा शक्ति के बल पर बदलाव लाया है।

 

बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा पूरा की

ड़ॉ. प्रियंका कुमारी का जन्म झारखंड की कोयला राजधानी धनबाद में हुआ था। डॉ. प्रियंका बताती है कि बचपन में उनके घर की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। उनके पिताजी की छोटी से दुकान थी। जिससे वह चार बच्चों को पालन पोषण करते थे। उन्होंने अपनी आमदानी के हिसाब से हम सबको सरकारी स्कूल में पढ़ाया। अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए डॉ. प्रियंका बताती है कि बड़े होने के नाते मेरी जिम्मेदारियां भी ज्यादा होती थी। 10वीं पास करने के बाद मेरे पिताजी के पास मेरे एडमिशन के लिए  पैसे नहीं थे। लेकिन मुझे आगे पढ़ना था। मेरी इसी सोच ने मुझे हार नहीं मानने दिया। मैंने अपनी गुल्लक को तोड़कर धनबाद के एसएसएलएनटी कॉलेज में एडमिशन करवाया।  आगे की पढ़ाई का  खर्च भी मुझे खुद ही उठाना था। इसलिए मैंने ट्यूशन पढ़ाना शुरु कर दिया। सुबह पहले मैं ट्रेन से कॉलेज जाती थी। उसके बाद शाम को घर वापस आने के बाद बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। ताकि मैं अपनी पढ़ाई पूरी कर सकूं। इससे मैं अपनी और अपने भाई बहन की पढ़ाई का खर्च निकालती थी। मेरी मेहनत की बदौलत ही मेरे बाकी भाई-बहन भी आज अच्छी-अच्छी जगह पर कार्यरत है।

 

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Priyanka kumari verma

आईएसएम से पढ़ाई पूरी की

धनबाद के एसएसएलएनटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. प्रियंका ने आईएसएम(इंडियन स्कूल ऑफ माइनिंग) से मैथ्स में एमएससी और पीएचडी पूरी की।  डॉ. प्रियंका बताती है कि जब वह पीएचडी कर रही थी। उस दौरान ही उनकी शादी हो गई थी। शादी के बाद भी उन्होंने अपनी सफलता का सबसे  बड़ा हथियार पढ़ाई को नहीं छोड़ा। इस दौरान वह मां भी बनी। वह बताती है उनके पीएचडी सबमिशन के दूसरे दिन ही उन्होंने एक नन्ही सी बेटी को जन्म दिया। इसके बाद ही उनके जीवन की असली परीक्षा शुरु हुई। डॉ. प्रियंका बताती हैं एक महिला के लिए सबसे दुविधा वाला समय तब होता है जब वह मां बन जाती है। मेरे लिए भी कुछ ऐसा ही था। एक तरफ मेरी बेटी थी दूसरी तरफ मेरा करियर। लेकिन ऐसे दौर में भी मैंने सोच समझकर एक सही निर्णय लिया कि पहली  बेटी को बड़ा करुंगी और बाद में नौकरी करुंगी और मैंने ऐसा ही किया। आज मेरी दो बेटियां हैं। मैं उनका पालन-पोषण करने के साथ-साथ नौकरी भी कर रही हूं।

 

ट्यूशन टीचर से प्रोफेसर बनने तक का सफर

अपने जीवन के शुरुआती दौर में ड़ॉ. प्रियंका ने ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई पूरी की और अपने करियर को एक उड़ान दी। आज ड़ॉ. प्रियंका एक आम ट्यूशन टीचर से मैथ्स की प्रोफेसर बन गई है। आईएसएम से पढ़ाई करने बाद उन्होंने धनबाद में ही एक प्राइवेट कॉलेज में एक असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर एक साल तक पढ़ाया। आज  डॉ. प्रियंका कुमारी वर्मा धनबाद के बीआईटी कॉलेज सिंदरी में मैथ्स की असिस्टेंट  प्रोसेफर है। अपने जीवन में काफी न हार मानने वाली डॉ. प्रियंका बताती हैं कि जीवन में बहुत सारी परेशानियां आती है लेकिन हमें सबकुछ संतुलित करके चलना पड़ता है। जिससे की जो हमारा लक्ष्य है उसे हम पा सकें।

 

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