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जानें क्यों मनाया जाता है छठ पर्व, क्या है इसका पैराणिक कारण

सूर्य की पूजा की जाती है


श्रद्धा और आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत हो गई है। यह हिंदूओं का साल का आखिरी पर्व है। यह मुख्य रुप से बिहार और पूर्वी यूपी में मनाया जाता है। यह पर्व बहुत कठिन और आस्था का पर्व है। इसके नियम बहुत कड़े हैं। कहते है कि इस पर्व मे अगर कोई गलती हो जाएं तो उसका परिणाम बहुत बुरा होता है।

छठ पूजा करते श्रद्धालु

नहाने खाने से इसकी शुरुआत हो जाती है

चार दिन तक चलने वाले इस पर्व का आगाज नहाने के साथ शुरु हो जाता है। क्योंकि इस पर्व में साफ और सफाई का बहुत पालन होता है तो इसकी शुरुआत भी नहाने खाने से होती है। इसके बाद दूसरे दिन खरना होता है। तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ दिया जाता है। चौथे और अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ दिया जाता है। इसके साथ ही छठ का महापर्व का समापन हो जाता है।

छठ पूजा समृद्ध की कामना और दूसरे मनोरथों की पूर्ति के लिए छठ पूजा की जाती है। कई दिनों तक चलने वाला यह पर्व पवित्रता और प्राकृति से मानव के जुड़ाव का उत्सव है। इसमें उर्जा के अक्षय स्त्रोत सूर्य की अराधना की जाती है और वह भी सरोवरों, नदियों या पानी के अन्य स्त्रोतों के किनारे।

पुराण के अनुसार क्यों मनाया जाता छठ पर्व

पुराण में छठ पूजा के बारे में बताते है कि राजा प्रियंवद की कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवद की पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनाई गई दी। इससे उन्हें पुत्र हआ। लेकिन वह मरा हुआ पैदा हुआ था। प्रियवंद पुत्र को लेकर शमशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे।। उसी वक्त भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई और उन्होंने कहा- सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती है। राजन तुम मेरी पूजा करो और इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करो। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी।

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