आग कि लपटों से सबको लगता है डर , जाने कहाँ से हुआ अग्नि का जन्म

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क्या है अग्नि का अद्भुत रहस्य? 


इंसानो को खासतौर पर इन चीजों से डर  जरूर लगता है ऊँचाई और आग. लेकिन  क्या आप यह  जानते  है कि  आग का जन्म  हुआ  कैसे?  इसके पीछे एक बहुत बड़ी कहानी है. ऐसा कहते है कि जो बृहस्‍पति जी की पत्नी थी चान्द्रमसी जिनको तारा  के नाम से भी जाना जाता है.  उन्होंने पुत्र में छ: पवित्र अग्नियों को और एक पुत्री को भी जन्‍म दिया था.

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यहाँ जाने कितने प्रकार कि है अग्नियां ?

पहली अग्नि – ऐसा कहते है कि  पौर्णमास में  प्रधान आहुतियों को देते समय जिस अग्नि के लिये सबसे पहले  घी की आहुति दी जाती है, वह बृहस्‍पति का पहला पुत्र  है जिसे ‘शंयु’ नाम से जाना जाता है .

दूसरी अग्नि – बृहस्‍पति के दूसरे पुत्र का नाम ‘निश्च्यवन’ है जो कि यश, तेज और कान्ति से कभी चालाक नहीं होते हैं. निश्च्यवन अग्‍नि केवल पृथ्‍वी की प्रशंसा करते हैं। वे निष्‍पाप, निर्मल, विशुद्ध और तेज पुज्‍ज से प्रकाशित हैं .

तीसरी अग्नि – बृहस्‍पति के तीसरे पुत्र का नाम ‘विश्वजित’ है . वह पूरे विश्व की बुद्धि को अपने वश में करके स्थित हैं, इसीलिये अध्‍यात्‍मशास्‍त्र के विद्वानों ने उन्‍हें ‘विश्वजित’ अग्‍नि कहा है .

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चौथी अग्नि – बृहस्‍पति के चौथे पुत्र का नाम विश्वभुक है.वह अग्नि ब्रह्मचारी, जिंदगी और सदा प्रचुर व्रतों का पालन करते हैं। कहते है जो  ब्राह्मण लोग होते है वो रसोईघर में इन्‍हीं की पूजा करते हैं.

पाँचवी अग्नि – बृहस्‍पति के पाँचवे पुत्र  का नाम ‘ऊर्ध्वभाक है. जो कि भयंकर लेहरो से समुद्र का जल सोखते रहते हैं .

छठीं अग्नि – बृहस्‍पति के छठें पुत्र का नाम  ‘स्विष्‍टकृत है. जो कि घर के किसी भी नए काम को लेकर पूजा में अग्नि के लिये सदा घी की ऐसी धारा दी जाती है, जिसका फ्लो उत्तर की ओर हो और इस प्रकार दी हुई उस आहुति से आपकी मनचाही इच्छा पूरी होती है.

सांतवीं अग्नि – बृहस्‍पति की सांतवीं पुत्री का नाम स्वाहा है .वह उपद्रवी एवं क्रूर कन्‍या सम्‍पूर्ण भूतों में निवास करती है.

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