वर्षो से चली आ रही वर्जिनिटी टेस्ट की प्रथा पर लगेगा अब लगाम

0

प्रथा के नाम पर महिलाओं पर यौन हमला


कई वर्षों से भारत के अलग- अलग जिलों में निति ,प्रथा और कुरीतियों के नाम पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार होता चला आ रहा है ,चाहे वो जबरदस्ती किसी व्यक्ति से सम्बन्ध स्थापित करना हो या शादी से पहले तमाम पंचायत के सामने महिलाओं का वर्जिनिटी टेस्ट करवाना हो। महिलाओं और पुरुष में कभी समानता हो पाना शायद बड़े शहरों में संभव हो लेकिन आज भी कुछ पिछड़े गांव और जिले ऐसे हैं जहाँ महिलाओं को एक साधारण सी जिंदगी में खुद को दुनिया की नज़रों में पवित्र साबित करने के लिए भी पुरुषों की कई तरह की अग्नि परीक्षाओं से होकर गुजरना पड़ता है सदियों से चली आ रही है

दूषित मानसिकता से शरीर को पवित्र साबित करने की प्रथा

कई स्थानों में आज भी चली आ रही है ऐसी घटनाये जहाँ महिलाओं का खुद को कुंवारी साबित करना अनिवार्य होता है आपको बता दे कि कंजरभाट समुदाय में सुहागरात के समय कमरे के बाहर पंचायत के लोग मौजूद रहते हैं. वहीं लोग बेडशीट को देखकर यह तर करते हैं कि दुल्हन वर्जिन है या नहीं. अगर दूल्हा खून का धब्बा लगी चादर लेकर कमरे से बाहर आता है तो दुल्हन टेस्ट पास कर लेती है. लेकिन अगर खून के धब्बे नहीं मिलते तो पंचायत सदस्यों द्वारा दुल्हन को अपवित्र साबित कर दिया जाता है चाहे वजह कुछ भी हो

यहाँ भी पढ़े:महिलाओं का वोट लोकतंत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण-संघर्षो के बाद मिला अवसर

महाराष्ट्र द्वारा महिलाओं के लिए बड़ी राहत

आत्म सम्मान को प्रथा के नाम पर ठेस पहुंचाने से रोकने के लिए महाराष्ट्र में एक बहुत बड़े फैसले को अंजाम दिया गया है महाराष्ट्र में अब किसी भी महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए बाध्य करना दंडनीय अपराध होगा। प्रदेश के गृह राज्यमंत्री रंजीत पाटिल ने हाल हि में बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ सामाजिक संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात भी की है. शिवसेना प्रवक्ता नीलम गोरहे भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं. मंत्री ने कहा, “वर्जिनिटी टेस्ट को यौन हमले की तरह समझा जाएगा. उन्होंने विधि एवं न्याय डिपार्टमेंट के साथ बातचीत करने के बाद यह बताया कि अब एक परिपत्र जारी किया जाएगा और इसे दंडनीय अपराध भी घोषित किया जाएगा.”

संस्थाओं द्वारा प्रथा के खिलाफ मोर्चा जारी

ऐसी घटिया मानसिकता वालो की सोच बदलवाने के लिए कई लोगो द्वारा आवाज़ उठायी जा रही है दो साल पहले एक महिला ने ‘स्टॉप द V टेस्ट’ नाम से एक आंदोलन शुरू किया था.दिसंबर 2017 में नवविवाहित तमाईचिकर और उनके पति विवेक ने इस प्रथा का विरोध किया. इस कैंपेन को कई युवाओं का समर्थन मिला.

भारत के इतने विकसित होने के बावजूद इन पुरानी रीतियों को लोगो पर थोपा जा रहा हैं और समाज द्वारा ऐसी दूषित मानसिकता को बढ़ावा रहा हैं ,महिलाओं के मन को शुद्ध होने से ज्यादा आज भी उनके शरीर का पवित्र होना महत्व रखता है ऐसे देश में जहाँ महिलाओं को एक तरफ पूजा जाता है वहीँ जिंदगी के हर चरण में उनसे अग्नि परीक्षा ली जाती है क्या वाकई में किसी से सम्बन्ध बनाना शरीर को अशुद्ध कर देता है ?क्या जिन लड़कियों ने रेप जैसी घटनाओं को झेला है वो शुद्ध नहीं हैं ? क्या उनको भी शारीरिक परीक्षा में विफल करने के बाद अशुद्ध घोषित कर वैवाहिक जीवन से अनछुआ कर दिया जायेगा ?ऐसे कई सवाल उठते आ रहे हैं कुछ पुरुषों की विकलांग मानसिकता के कारण महिलाओं के मन में ऐसे सवाल उठते ही रहेंगे।

Have a news story, an interesting write-up or simply a suggestion? Write to us at info@oneworldnews.in

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here