धार्मिक

तुलसी के पौधे के साथ बरते सावधानी, वरना हो जाएँगी नाराज़

तुलसी के पौधे के साथ बरते ये सारी सावधानी


तुलसी का पौधा
तुलसी का पौधा

धार्मिक कार्यों में पूजी जाने वाला तुलसी का पौधा सिर्फ पूजा के लिए ही काम में नहीं आता बल्कि तुलसी एक बहुत ही फायदेमंद औषधि भी है। आज से नहीं बल्कि आदिकाल से ही हमारे पूर्वज तुसली का उपयोग बहुत से आयुर्वेदिक दवाइयों में कई जाता है। अपने कुछ धार्मिक महत्व के कारण तुलसी का पौधा हर हिन्दू परिवार में रखा जाता है और इसकी पूजा की जाती है। इसके पीछे एक कहावत भी है की जिस हिन्दू के घर में तुसली का पौधा होता है वो स्थान पुजनीये होता है और उस घर में कोई बीमारी और कोई बुरी आत्मा का प्रवास नहीं होता है।

तुलसी का पौधा और उसकी पूजा

ध्यान रखने वाली बातें :-

  • तुलसी का पौधा हिन्दू घरों और मंदिरों में लगाया जाता है। तुलसी की पत्तियों भगवान् विष्णु को अर्पित की जाती है। इसके औषधिय गुणों के अलावा यह कभी-कभी हमारे शरीर को नुकसान भी पंहुचा सकती है।
  • तुलसी के पौधे की पूजा प्रतिदिन करनी चाहिए, इसे ना पूजकर इसका अपमान नहीं करना चाहिए। क्योंकि माना यह भी जाता है कि तुसली का पौधे की पूजा करने वाला इंसान स्वर्ग में जाता है।
  • तुलसी के पौधे में रोज जल अर्पित करने से इंसान की आयु लम्बी होती है।
  • तुलसी के पत्ते को उपयोग में लाने और सेवन करने से पहले ये अच्छी तरह से जान लें कि इन पत्तों को चबाएं नहीं बल्कि इन्हें सीधे निगल लेना चाहिए। ऐसा करने से कई तरह के वायरल रोग और मौसमी रोगों में लाभ प्राप्त होता है। इन पत्तों में ‘पारा’ नामक तत्व पाया जाता है, जो कि चबाने से आपके दाँतों में लग जाते हैं और जिससे आपके दांतों के ख़राब होने की आशंका बनी रहती है।
  • शास्त्रों के अनुसार कुछ ख़ास दिन दिनों में तुलसी के पौधे को हाथ नहीं लगाना चाहिए। ये कुछ दिन हैं- एकादशी, रविवार और सूर्य या चंद्रग्रहण के काल में। तुलसी के पत्ते को तोडना और उसे उसे नष्ट करने के सामान ही मन गया है। वैसे तो तुलसी के पत्ते को बिना किसी उपयोग के नहीं तोडना चाहिये लेकिन खासकर इन दिनों में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। ऐसा करने से उस इंसान के ऊपर दोष लगता है और बेवज़ह पत्ते तोड़ने से मृत्यु का शाप लगता है।
  • पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, शिवलिंग पर तुलसी की पत्तियां कभी नहीं चढ़ाई जाती है और ना ही शिव जी के किसी भी पूजा में तुलसी की पतिय्याँ उपयोग में आती हैं।
    एक कथा के अनुसार, गणेश जी के पूजा में भी तुलसी के पत्ते का उपयोग वर्जित है।
  • तुसली के पौधे को हमेशा घर के बाहर ही लगाया जाता है। इसके पीछे की कहानी ये है की भगवन विष्णु को जब तुलसी माता ने उनके घर जाने के लिए कहा तो भगवन विष्णु ने मना कर दिया और कहा कि मेरा घर लक्ष्मी माता के लिए है, लेकिन मेरे दिल में तुम्हारे लिए हमेशा जगह रहेगी। इसपर तुलसी माता ने कहा कि घर के अन्दर ना सही लेकिन घर के बाहर तो उन्हें जगह मिल ही सकती है, और जिसे विष्णु भगवान् ने मान लिया। तब से लेकर आज-तक तुलसी का पौधा घर और मंदिरों के अन्दर लगने के बजाए बाहर लगाया जाता है।

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