आज है मशहूर कवी गुलज़ार साहब का 84 व जन्मदिन


 गुलज़ार साहब के वो 5 बेहतरीन नज़्मे जो आपके दिल को छू जाएंगे


जिसने अपनी कविताओं , शायरी और बेहतरीन नज़्मों से लोगो के दिलो को छू लिया. आज है उन्ही मशहूर कवी गुलज़ार साहब का 84 व जन्मदिन. गुलज़ार शब् एक अच्छे कवी या शायर नहीं बल्कि एक बेहतरीन फिल्म डायरेक्टर भी रहे है . लेकिन शायद आप गुलज़ार साहब के बारे में यह बात नहीं जानते होंगे? की गुलज़ार साहब अपने कॉलेज के समय पर एक कार मैकेनिक भी थे.

गुलज़ार साहब का जन्म 18 अगस्त 1934 को बंटवारे से पहले पंजाब में झेलम जिले के दीना गांव में हुआ था, जो आज पाकिस्तान में है।गुलजार शुरु से एक लेखक बनना चाहते थे, परिवार की मर्जी के खिलाफ वो मुंबई पहुंचे और यहां एक गैराज में मैकेनिक के तौर पर काम करने लगे। साथ ही वे खाली समय में कविताएं लिखा करते थे. जिसके बाद वो अपनी लिखी कविताओं की वजह से काफी मशूहर हो गए. उसके बाद उन्हें बिमल रॉय की फिल्म ‘बंदिनी’ में अपना पहला गाना ‘मोरा गोरा अंग’ लिखने का मौका मिला.

गुलज़ार साहब
गुलज़ार साहब

यहाँ जाने गुलज़ार साहब के बेहतरीन 5 नज़्मे जो आपके दिल को छू जायेंगे:
1. आदत

साँस लेना भी कैसी आदत है
जिए जाना भी क्या रिवायत है
कोई आहट नहीं बदन में कहीं
कोई साया नहीं है आँखों में
पाँव बेहिस हैं चलते जाते हैं
इक सफ़र है जो बहता रहता है

2. कितनी गिरहें अब बाकी हैं

कितनी गिरहें खोली हैं मैने
कितनी गिरहें अब बाकी हैं
पाँव मे पायल,बाँहों में कंगन
गले में हँसली ,कमरबंद च्हहले और बिछुए
नाक कान छिदवायें गये हैं

3. आदमी बुलबुला है

टूटता भी है डूबता भी है
फिर उभरता है, फिर से बहता है
न समुंदर निगल सका इस को
न तवारीख़ तोड़ पाई है
वक़्त की हथेली पर बहता
आदमी बुलबुला है पानी का

4. अकेले

किस क़दर सीधा, सहल, साफ़ है रस्ता देखो
न किसी शाख़ का साया है, न दीवार की टेक
न किसी आँख की आहट, न किसी चेहरे का शोर
दूर तक कोई नहीं, कोई नहीं, कोई नहीं

5. आहिस्ता चलो

देखो आहिस्ता चलो और भी आहिस्ता ज़रा
देखना सोच सँभल कर ज़रा पाँव रखना
ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं
काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में
ख़्वाब टूटे न कोई जाग न जाए देखो

यह है  गुलज़ार साहब की कलम से लिखी 5 बेहतरीन  नज़्म जो आपके दिल को जरूर छू जाएगी.

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Story By : AvatarNeha Singh
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