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कैसे करे ट्रेवल और वर्क लाइफ को बैलेंस ?

 ट्रेवल करने से पहले इन बातों पर दे ख़ास ध्यान


ज्यादातर लोगो का सपना होता है कि वो पूरी दुनिया घूमे. इसी सपने को पूरा करने के लिए वो काम करते है और पैसा बचाते है ताकि उन पैसो से वो पूरी दुनिया घूम सके. लेकिन ट्रेवल और चीजों को एक्स्प्लोर करने के लिए लोगो को घर, ऑफिस और काम से ब्रेक लेना पड़ता है.वही अगर आप काम से ब्रेक लेते है तो इस से आपके ऑफिस लाइफ हैंपर होने लगती है .आपको ऑफिस से बार- बार छुट्टी  लेनी पड़ती है जिसकी  वजह से आपकी साल की 12 लीव्स जल्दी खत्म हो जाती है,सैलरी डेडक्ट होती है. इसमें नुक्सान आपका है,तो आज हम आपको बताएँगे कि कैसे बिना नुक्सान के आप अपनी वर्क और ट्रेवल लाइफ बैलेंस कर सकते है.

ट्रेवल करने से पहले इन बातो पर दे ख़ास ध्यान :

1. जगह और समय पहले तय करे

अगर आप कही घूमने का प्लान कर रहे है तो उस से पहले जगह और समय तय कर ले. क्योंकि अच्छे समय के दौरान उस जगह पर घूमने जाना अच्छा रहता है. यदि अगर आप किसी  हिल स्टेशन पर घूमने गए और वहाँ भारी बारिश हो गयी तो  लैंड स्लाइड होनी की सम्भावना रहती है इस से आपका पूरा ट्रिप ख़राब हो सकता है.इसीलिए कही जाने से पहले जगह और सही समय तय जरूर करे.

2. पैसा और बजट दोनों है जरुरी

अगर आप कही घूमने जा रहे  है तो ज़ाहिर सी  बात है पैसा खर्च होता है. चाहे वो टोल  टैक्स हो, होटल बुकिंग हो , शॉपिंग हो या फिर खाने का खर्च हो. इन सभी में पैसे खर्च होते ही है और यह बेसिक खर्च है .जरुरी है कि जब आप जगह तय करते है तो पहले ही अपने ट्रेवल,रहने और खाने का खर्च  निर्धारित कर ले ताकि बाद में वहाँ जाकर आपके पैसे ज्यादा खर्च न हो जाए.

3. अपने प्लान को लेकर हमेशा स्थिर रहे

अपने प्लान पर स्थिर रहना बहुत जरुरी है. क्योंकि ऐसा अक्सर होता है जब हम वहाँ पहुंचते है तो हमारा प्लान अपने आप बदलने लगता है इसलिए आप उस जगह पर जाने से पहले रिसर्च करे कि वहाँ घूमने के लिए कौन – कौन सी जगह है ? ताकि आप उस हिसाब से अपने बजट को मैंटेन रख पाए या उस हिसाब से चीजों पर खर्च करे.

4. छुटियों को बैलेंस करना जरुरी है

ज़ाहिर सी बात है आप कही घूमने जा रहे है तो आप ऑफिस से छुट्टी लेकर ही जायेंगे.इस से आप की आधी से ज्यादा लीव यूँ ही नहीं निकल जाती है. इसके लिए एक सही विक्लप है की आप हर साल के अंत में एक ट्रिप प्लान करे जिस जगह पर आपको घूमने के लिए कई सारी जगह मिले  और आपके 12  लीव्स उन 12  जगह को एक्स्प्लोर करने में निकल जाये.इसे आप घूम भी लेंगे  और आपको ऑफिस से ब्रेक भी मिल जायेगा.

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जानिए क्या होती है गुरु की महिमा

गुरु की महिमा


किसी के भी जीवन में गुरु की महिमा का व्याख्या कोई नहीं कर सकता। वास्तव में गुरु की महिमा का पूरा वर्णन कोई नहीं कर सकता। पौराणिक काल से ही गुरु ज्ञान के प्रसार के साथ-साथ समाज के विकास का बीड़ा उठाते रहे हैं। गुरु शब्द दो अक्षरों से मिलकर बना है- ‘गु’ का अर्थ होता है अंधकार (अज्ञान) एवं ‘रु’ का अर्थ होता है प्रकाश (ज्ञान)।
गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं। हमारे जीवन के प्रथम गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। जो हमारा पालन-पोषण करते हैं, सांसारिक दुनिया में हमें प्रथम बार बोलना, चलना तथा शुरुवाती आवश्यकताओं को सिखाते हैं। अतः माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है। भावी जीवन का निर्माण गुरू द्वारा ही होता है।

गुरु की महिमा

शिक्षक में दो गुण निहित होते हैं – एक जो आपको डरा कर नियमों में बाँधकर एक सटीक इंसान बनाते हैं और दूसरा जो आपको खुले आसमा में छोड़ कर आपको मार्ग प्रशस्त करते जाते हैं। एक सफल शिक्षक वही है जो सकारात्मक हो और जो अभी उम्मीद का दामन ना छोड़े अजर अपने शिष्य को भी वही सिखाये। अगर एक गुरु ही उम्मीद छोड़ तो वो अपने शिष्य को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित नहीं कर पाते।

एक शिक्षक या गुरु सिर्फ विद्यालय तक सीमित नहीं रहता। हमे हमारी पूरी ज़िंदगी में कई शिक्षक मिलते है जो किसी इंसान का रूप नहीं लेते। समय, अनुभव और किताबें भी हमारे जीवन में एक गुरु का किरदार निभाते है। हम जहाँ से और जिनसे सीखते रहते है, वही हमारे गुरु बनते रहते है।

समय और ज़िन्दगी भी गुरु होती है।

विद्यालय में मिलने वाले गुरु हमें पढाई के अलावा भी कई चीजो का ज्ञान देते है। वही माता पिता और दोस्त भी हमारी ज़िन्दगी के लिए एक ख़ास गुरु होते है। हमारी ज़िन्दगी अपने आप में एक शिक्षा का स्त्रोत होती है। समय और ज़िन्दगी से बेहतर गुरु कोई नहीं होता।इससे हम जितना सीखेंगे उतना बेहतर होता हैं। आखिर यही तो गुरु की महिमा होती है।

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जानिए क्या होती है घर के बुजुर्गों की उम्मीदें

घर के बुजुर्गों की उम्मीदें


कहते है हम जीवन की शुरुआत और जीवन का अंत अकेले करते है। हम ना तो किसी से के साथ आते है और ना ही किसी के साथ जाते है। पर माना जाता है कि जब हम जन्म लेते है तब दुनिया के किसी कोने में कोई व्यक्ति जन्म लेता है और उसी प्रकार जब हम मरते है तब भी दुनिया के किसी कोने में कोई आखरी साँसे ले रहा होता है। शायद तभी हमें एक परिवार मिलता है जो इस अकेलेपन को दूर करने में मदद कर सके। और शायद यही कारण होता है कि हमारे घर के बुजुर्गों की उम्मीदें अपने परिवार से ज़्यादा होती है।

बुढ़ापा एक ऐसा दौर है जहाँ लोग बहुत ही लाचार हो जाते है। उनके पास ना ही कुछ करने की क्षमता होती है और ना हिम्मत। बिमारी, कमज़ोरी और उम्र के जाल में फंसे ये सभी लोग चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते। उनकी खुशियाँ उनके परिवार के साथ होती है। उनका पूरा दिन हमारी इंतज़ार में निकल जाता है। अपने परिवार से ही घर के बुजुर्गों की उम्मीदें होती है।

बुज़ुर्गो की होती है उम्मीदें

जानते है कि उनकी उम्मीदे क्या होती है:

  • समय

हम समय की कमी के लिए परेशान होते है और वो हमारे थोड़े से समय की उम्मीद होती है। समय ऐसी चीज़ होती है जो उनके पास बहुत ज़याद होता है और उनके परिवार के पास बिलकुल नहीं होता। वो बस इसी चीज़ की उम्मीद करते है कि उनका परिवार उनके साथ कुछ समय बिताए। उनके साथ बैठ कर कुछ बाते करे।

यहाँ पढ़ें : क्यों माँ के बिना ज़िन्दगी होती हैं मुश्किल

  • पालन

अक्सर ऐसा होता है कि हम जाने अनजाने में घर के बड़े बुजुर्गों की बातों को सुन के अनसुना कर देते है। वो कोई काम हमे बोलते रह जाते है पर हम वो अपनी ज़रूरत और ऊनी सुविधा अनुसार करते है। हम ये सोचते ही नहीं की उन्हें उस चीज़ की ज़रूरत हो सकती है। हम उनके आदेशों का पालन ही नहीं कर पाते।

प्यार और इज़्ज़त की करते है उम्मीद
  • ज़रूरत

हर व्यक्ति की तरह, बुज़ुर्गो की भी कुछ ज़रूरते होती हैं। अपनी व्यस्त दिनचर्या में हम ये देख और समझ ही नही पाते की हम उनकी ज़रूरतों और इच्छाओं को नज़रअंदाज़ कर रहे है। वो कुछ ज़्यादा नही चाहते, वो बस यही चाहते हैं कि हम उनको उनकी ज़रूरत की चीजो की कमी ना होने दें।

  • इज़्ज़त

घर के बुज़ुर्गो ने ही सब को इस काबिल बनाया है कि वो अपने पैरों पर खड़ा हो कर, इज़्ज़त और शौहरत कमा सके। पर हम इज़्ज़त कमाने में इतना व्यस्त हो जाते है कि हम भूल ही जाते है कि अपने परिवार के बुज़ुर्गो की इज़्ज़त करना भूल जाते है। हम ये भूल जाते है कि इज़्ज़त और प्यार का महत्व हमे इन्होंने ही सिखाया था।

लोगो की उम्मीदों पर खरा उतरने की इस दौड़ में हम अपने नींव से इतनी आगे निकल आये है कि अब पीछे मुड़ कर देखने का हम सोचते भी नहीं है। अपने परिवार की इज़्ज़त करना सीखें, उन्हें वही समय और प्यार दे जो उन्होंने आपको दिया है। उनकी जीवन हर समय आप ही के आस पास रही है। खुद को उनसे दूर ना करे।

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जानिए के क्यों मल्टीटास्किंग हो सकती आपके लिए गलत

मल्टीटास्किंग : सही या गलत


मल्टीटास्किंग एक ऐसी चीज़ है जो हमारी दिनचर्या और जीवनशैली का हिस्सा बन चूका है। वो इसलिए क्योंकि हमारे पास समय कम होता है और काम ज़्यादा। और समय बचाने के लिए भी लोग बहुकार्य करते हैं। उदाहरण तहत – खाना बनाते या खाते हुए फोन का प्रयोग करना या ऑफिस का काम करना, कहीं चलते हुए मैसेज करना या ऑफिस में मीटिंग के दौरान ईमेल चेक करना, यह सभी उदाहरण बहुकार्य दर्शाते हैं।

अचंभे की बात नहीं होगी अगर आप कुछ और काम करते हुए यह आर्टिकल पढ़ रहे हो तो। यह अब आपके और हमारे व्यवहार में आ चुका है। जानते है कि क्या मल्टीटास्किंग हमारे लिए सही है या गलत है :-

मल्टीटास्किंग सही या गलत?
यहाँ पढ़ें : जानिए क्या होते है ज़िन्दगी के नियम
  1. मल्टीटास्किंग करने से हम थोड़े समय में ज्यादा काम कर सकते हैं। हम इस क्रिया से सीखते हैं कि कैसे अपने समय का प्रयोग किया जाए।
  2. मल्टीटास्किंग करने से हम ज्यादा बोर नहीं होते और बचे हुए समय को सही ढंग से प्रयोग में ला सकते हैं।
  3. एक समय में ज्यादा काम करने से, हम सभी कामों पर सही ढंग से ध्यान नहीं लगा पाते, जिसकी वजह से हम कुछ न कुछ गलती कर देते हैं।
  4. आपका जितना समय मल्टीटास्किंग करने से बचता है, उतनी ही संभावना समय बेकार जाने की भी होती है।
  5. आप एक समय में ज्यादा काम तो कर लेते हैं पर, हर काम में कुछ न कुछ गलती हो जाती है और वह काम बहुत ही बढ़िया ढंग से नहीं हुआ होता।
मल्टीटास्किंग से बढ़ता है तनाव

देखा जाए तो हर चीज की तरह मल्टीटास्किंग के भी फायदे और नुकसान है, पर जितने के फायदे हैं उतने ही इसके नुकसान है। गौर से देखा जाए तो नुकसान थोड़े ज्यादा है। इसका असर हमारे काम और हम पर पड़ता है। मल्टीटास्किंग करने से लोगों में तनाव बढ़ जाता है और वह ज्यादा व्याकुल रहते है। वह थोड़े समय में ज्यादा काम तो कर लेते हैं, पर उस काम में अपना पूरा नहीं दे पाते। उनको एक काम के बाद दूसरा काम होता है जिसके कारण उनके पास अपने लिए समय नहीं बचता और सारा समय काम में ही निकल जाता है। और जब काम में कोई गलती हो जाए तब तनाव और परेशानी बढ़ जाती है।

हर काम को करने के लिए एक व्यक्ति को शांत दिमाग से सोचना पड़ता है। बहुकर्य करने में दिमाग शांत नहीं होता। इसलिए हम ना तो ढंग से सोच पाते है और ना ही अपना काम अपनी पूरी क्षमता से कर पाते है। तभी, मल्टीटास्किंग हमारे लिए गलत है।

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समय का नीतिबद्ध प्रयोग करने के लाभ

समय का नीतिबद्ध प्रयोग


समय वह है जिसकी हमें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है लेकिन हम उसी का दुरुपयोग सबसे अधिक करते हैं। हम जिस तरह से अपना समय व्यतीत करते हैं वह हमारे चरित्र की भी परिभाषा देता है। समय हमारी ज़िंदगी का सबसे मूल्यवान सिक्का होता है जिसे केवल हम ही अपनी मर्ज़ी से ख़र्च कर सकते है। जब समय इतना मूल्यवान है तो उसके ख़र्चे जाने के लिए एक नीति होना आवश्यक है। कई बार हम लोगों को यह बोलते हुए सुनते हैं की इस कार्य के लिए समय ही नही निकला परंतु समय कभी कम नही होता ज़रूरत होती है तो बस मार्गदर्शन की।

हमें एक नीति बनाने के लिए सबसे अधिक आवश्यक है एक लक्ष्य अपने मस्तिष्क में रखना। बिना किसी लक्ष्य के कोई भी नीति बेकार है। अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अपने समय का विभाजन कीजिए। जो नीति आपने बनायी है उसे केवल बना कर एक तरफ़ ना रख दें उसका पालन करना अधिक आवश्यक है। यह कहना बिलकुल भी अनुचित नही होगा की समय को नियंत्रण में करना अपने जीवन को नियंत्रण में करने जैसा है। जब तक आप समय का सम्मान करते हुए उसका सदुपयोग नही करेंगे तब तक आप अपने जीवन को सम्भालने के क़ाबिल नही बन पाएँगे।

समय का नीतिबद्ध प्रयोग

यहाँ पढ़ें : ज़िन्दगी और समय से ले की यह सीख

अब हम में से ही कई लोग यह भी बोल स्काई हैं की मैं टाइम टेबल बनाने में अपना समय व्यर्थ क्यों करूँ। किंतु टाइम टेबल बनाने से समय व्यर्थ नही होगा बल्कि इससे आपके बाक़ी कामों के लिए भी समय निकल पाएगा तो आइए जाने फ़ायदे टाइम मैनज्मेंट के:-

  1. अंतिम समय पर काम (जिसे हम अंग्रेज़ी में deadline भी कहते है) करने से मानसिक तनाव बढ़ता है। जब आप टाइम टेबल बना लेंगे तो आपका तनाव कम होगा और साथ ही साथ काम भी सरलता से होगा।
  2. जब आपके पास अधिक समय होगा तब आप उसी कार्य को और बेहतर तरीक़े से करने में सक्षम होंगे। आप अपने काम के दबाव से भी जल्द से जल्द मुक्त हो पाएँगे क्योंकि इससे आपकी उत्पादकता और काम करने की क्षमता बढ़ती है।
  3. जल्दबाज़ी में किए गये कार्य में ग़लतियाँ होने की सम्भावना होती हैं। आप अपने मेरी में ज़रूरी सूचना डालना भूल जाते है जिसके कारण आपका ही कार्य मुश्किल हो जाता है। आपको वही कार्य दोबारा करना पड़ता है किंतु जब आप इसे अच्छे से करते है वी भी समय की पाबंदी के बिना तब यह कार्य दोबारा भी इतना पड़ता।
  4. हम समय ख़ुद नही बना सकते लेकिन उसका सदुपयोग कर खली समय आसानी से निकाल सकते हैं। मुश्किल कार्य में भी हम अपने लिए तो समय निकाल ही सकते हैं। यह हमारे ऊपर निर्भर करता है की हम किन चीज़ों को प्राथमिकता देते है।
  5. यह आपकी प्रतिष्ठा को भी बढ़ाता है। जब आप अपना कार्य समय पर करते है वो भी अच्छे से तो इससे आपके स्कूल और ऑफ़िस में आपका अम्माँ होता है।
  6. जब आपका समय और कार्य दोनो ही आपकी मुट्ठी में होता है तब आपके सामने और भी कई राहें खुल जाती हैं, आपको नए मौक़े मिलते हैं जिनका आनंद आप फ़ुर्सत के समय में उठा सकते हैं।
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परिक्षा के समय ध्यान दें इन खास बातों पर

परिक्षा के समय ध्यान दें इन खास बातों पर


परिक्षा के समय ध्यान दें इन खास बातों पर :- जल्‍दी ही 12वीं कक्षा के प्री- बोर्ड और कॉलेज की परिक्षा शुरू होने वाली है। दिवाली के बाद से लगातार परिक्षा का दौर शुरू हो जाएगा। ऐसे में सिर्फ पढाई ही काफी नहीं है, बल्कि अपने स्‍वास्‍थ का ध्‍यान रखना भी जरूरी है। साथ ही मौसम के बदलते ही बिमारियों का होना आम बात, ऐसे में अपने स्‍वस्‍थ का खास ध्‍यान रखना बहुत जरूरी है। बच्‍चे परिक्षा के चिंता में अपने खाने-पीने का ध्‍यान नहीं रखते है। इसलिए आज हम आप को बताएगें की बच्‍चों को खाने में क्‍या खाएं और क्‍या नहीं। साथ ही कैसे स्‍वस्‍थ रहें।

समय पर सो

ये सब जरूरी करे परिक्षा के दौरनः-

मछलीः मछली सेहत के अच्‍छी होती है। क्‍योंकि इस में बहुत सारे प्रोट्रीन और ओमेगा 3 होते है। जिससे की हमारा  दिमाग अच्‍छे से काम करता है। अगर आप को मासंहारी खाना पसंन्‍द है तो आप मछली खा सकते है।

अंडेः  अंडा  एक पौष्ट‍िक खाद्य है। अंडे में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर, विटामिन B12 और D से दिमागी स्वास्थ्य के लिए वरदान है। अंडे को आप अपने ब्रेकफास्‍ट में खा सकते है।

फल और सब्जियाः कितना हो स‍के तजे फल और सब्जियां खाएं। फल में बहुत प्रोटीन उपलब्‍ध होते है।जो हमारे शरीर को शाक्ति देने में मदद करता है।

कॉफीः  बहुत सारे लोगों की आदत  होती है, रोज कॉफी पीने की। मगर कॉफी परिक्षा के समय में सबसे अच्‍छी होती है। लेकिन ज्‍यादा ना पीएं वो सेहत के लिए अच्‍छी नहीं होती है।

फल और सब्जियां खाएं

ये सब करें परिक्षा के दौरनः-

खाने को समय देः परिक्षा के दौरन समय बहुत कीमती होता है। हर समय जल्‍दी में खाना खाना ठीक नहीं होता। इसलिए खाने का आराम से खाएं।

सोनाः समय पर सो, और समय पर उठें। नहीं तो दिमाग थका-थका रहता है और अच्‍छे काम भी नहीं कर पाता। कम से कम आठ घंटे जरूरी सोएं।

ब्रेकफास्‍टः  आप अपना सुबह का ब्रेकफास्‍ट ना छोड़े। क्‍योकि इस से पूरे दिन भर  शाक्ति मिलती है।

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