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ऐसे बनते हैं आप अनाकर्षक और आपको पता भी नही चलता

अगर आप भी करते हैं ऐसे तो चौकन्ने हो जायें


हर कोई चाहता है की वह आकर्षक बने। दोस्तों आकर्षक केवल सूरत से नही बनते। उसके लिए अपनी आदत और बर्ताव में कुछ अच्छी बातें शामिल करनी पड़ती हैं। हमारे ख़ास दोस्तों मेल भी ऐसा कोई ना कोई ज़रूर होता है जो शक्ल से ख़ूबसूरत होने के बावजूद भी अट्रैक्टिव नही लगता । कुछ मनुष्यों की आदतें ऐसी होती है की उन्हें उन आदतों की वजह से लोग अनट्रैक्टिव और अजीब समझने लगते हैं।

अनआकर्षक

हो सकता है आपको ये बातें सामान्य लगती हों किंतु ये बातें आपके दोस्तों को आपसे दूर करने के लिए काफ़ी होती हैं। तो अगर आपको भी ऐसा लगता है कि ऐसी कुछ आदतें आप में भी हैं तो उन्हें जल्द से जल्द ख़त्म करने की तैयारी कीजिए। ऐसी कुछ आदतें निम्नलिखित हैं:-

आप आत्मलीन है : अगर आप आत्मलीन रहते हैं तो आपके अनाकर्षक बनने की सम्भावनाए काफ़ी हैं। लोग ऐसे व्यक्तियों के साथ रहना पसन्द भी करते जो बहुत ही अधिक आत्म अवशोषित रहते हैं। उन लोगों को लगता है की केवल उन्ही के विचार माइने रखते हैं। अगर आप भी ऐसा सोचते है तो आपका परिवर्तन का समय हो गया है।

आप हमेशा बाहरी सुंदरता पर ध्यान देते हैं : ऐसा देखा गया है की जो लोग बाहरी सुंदरता पर ही अधिक ध्यान देते हैं वे अपने ख़यालों से उतने सुंदर नही होते। आपको यह पता होना चाहिए की बाहरी सुंदरता सब कुछ नही होती। असली सुंदरता आपके मन और दिल की पवित्रता में होती है इसलिए बाहरी सुंदरता से बढ़कर अंदर की ख़ूबसूरती पर ध्यान दे।

आप हमेशा प्रतिस्पर्धा में रहते हैं : अगर आप अपने दोस्तों से ही प्रतिस्पर्धा का भाव रखते हैं तो आपके दोस्त आपसे अवश्य ही दूर चले जाएँगे। आपकी दोस्त या आपके दोस्त आपसे बहतेर हैं किसी भी क्षेत्र में तो फिर आपको उससे जलने और प्रतिस्पर्धा का भाव लगाने से बहतर उन्हें और प्रोत्साहित करना चाहिए।

आप अपने दोस्तों को अपने दुश्मन समझते हैं : यह देखा गया है की जो लोग अनाकर्षक होते वे अपने दोस्तों से ही लड़ाई करते हैं और चिड़चिड़े रहते हैं । वे हमेशा अपने दोस्तों पर शक करते हैं जिस कारण उनके दोस्तों को उनके साथ रहने में प्रॉब्लम होती है। जिससे कि जो भी उनके दोस्त ज़्यादा दिन तक टिक नही पाते।

आप अपनी महत्वता के बारे में दूसरो से पूछते हैं : आप अगर दूसरों से पूछते हैं की आप उनकी ज़िंदगी में क्या इम्पॉर्टन्स रखते हैं तो आपके संभालने का वक़्त आ गया है। आपकी ऐसी बातों से आपके दोस्त परेशान होने लगते हैं तो ऐसी बात न करें।

आप अपने आपको बॉस समझते हैं : दोस्तों को एक ग्रुप में कोई बॉस नही होता। परंतु अगर आप ख़ुद को हमेशा बॉस समझते हैं और चाहते है सब चीज़ें आपके अनुसार ही हों तो आप की सोच ग़लत है। आपको ऐसा सोचना छोड़ देना चाहिए और आपको समझना चाहिए की अगर आप ऐसे करते रहते हैं तो आपके दोस्त आपसे दूर हो जाएँगे।

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जानिए आपको कौन से खुद से किए वादे क्यों होते है अहम

खुद से किए वादे


हम अक्सर दुसरो को किए वादे पूरे करने में इतने व्यस्त रह जाते है की खुद से किए वादे भूल ही जाते है। खुद ही खुद की उम्मीदे पर खरे नहीं उतर पाते। हम खुद से किए वादों को भूल कर, दुसरो को इतनी ज्यादा एहमियत दे देते है कि हम अपना वजूद ही कहीं गुमा बैठते है। वादों की एहमियत हर कोई समझता है, पर वादा पूरा करना बहुत ही मुश्किल काम होता है।

खुद से हमेशा ये 5 वादे ज़रूर करे :-

  1. आप कभी अपने बीते हुए कल को,  अपने आने वाले कल को ख़राब नहीं करने देंगे। जो बीत गया उसका असर कभी आगे आने वाली अच्छी चीज़ों पर नहीं पड़ने देंगे।
  2. लोगो की बाते और विचार सुनेंगे पर उनको खुद पर हावी नहीं होने देंगे। आपको खुद के लिए जो सही लगता है वही करेंगे।
  3. सपने पूरे करने की राह में चाहे जितनी भी मुश्किलें हो, आप कभी रुकेंगे नहीं। चाहे जो हो जाए आपने अपनी मंज़िल तक बिना हार माने पहुँच कर रहना है।
  4. खुश रहना सीखेंगे
  5. ज़िन्दगी आपको चाहे जितनी बार भी मात दे, आपको कभी हार नहीं माननी है। गिरना है, गिर कर फिर से उठना है पर कभी भी हार कर रुकना नहीं है।
  6. आज का दिन पूरी तरह से जिए। फिर आने वाले कल में क्या हो कोई नहीं जानता। इसलिए जैसे जीना चाहो वेसे जियो। बिना किसी की परवाह किए।

यहाँ पढ़ें : जानिए क्या होता है कपटी और सुशील लोगो में फर्क

इन वादों को निभाना और पूरा करना है ज़रूरी है क्योंकि ये वादे हम अपने लिए करते है, अपने आप से करते है। जानते है कि क्यों इन वादों को निभाना है ज़रूरी:-

  1. अगर आप खयड से किए वादों को निभाते है तो आपकी ज़िन्दगी बहुत ही सुलझी हुई रहती है। आप सही गलत में फर्क कर पाते है।
  2. आप खुद को प्रेरित करते है। जब आप में किसी भी प्रकार की उत्साह और प्रेरणा नहीं बचटी उस समय ये वादे ही आपको आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करते है।
  3. खुद से किए वादे
  4. खुद से किए वादे से ही पता लगता है कि आपकी सोच कैसी है और आप मंज़िल तक कैसे पहुँचना चाहते है।
  5. आप बहुत खुश रहते है। जब आप दूसरों से उम्मीदे न रख कर, खुद से उम्मीदे रखते और उन पर खरे उतरते है ,तो उसकी खुशी और उसका एहसास ही बहुत अलग होता है।
  6. आप एक बेहतर इंसान बनते है। आप जब खुद की ज़रूरतों को ज़िन्दगी को समझने लगते है तभी आप खुद से कुछ वादे कर पाते है। और जब आप खुद को समझने लगते है तब आप खुद को बेहतर बनाते रेहते है।

ज़िन्दगी में आगे बढ़ना है तो खुद से किए वादे को ज़रूर निभाए। हम लोगो से वादे करके उन्ही में फँस जाते है। लोगो से निकल कर, आने बारे में भी सोचे। और खुद से किए वादे ज़रूर निभाए।

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कुछ बनना ही है तो प्रशंसात्मक बने, आलोचनात्मक नहीं

प्रशंसा करे, आलोचना नहीं


ना जाने कितनी बार ऐसा हुआ होगा की जाने अनजाने में आपने लोगो की शक्ल सूरत और उनके कपड़ो के आघार पर उनका पूरा जीवनवृत्तांत बता दिया होगा। ना जान न पहचान, पर एक नज़र में उनके बारे में सब जान लिया होगा। और उनकी आलोचना भी कर ली होगी। ‘अरे ये तो बिगड़ा हुआ होगा’, ‘लड़की के लक्षण थोड़े ठीक नहीं है, ज़रूर कुछ लफड़ा है’, ‘लड़की देर रात बाहर कैसे? पता नहीं क्या काम करती है?’, ‘लड़का फ़ैल हुआ था, ज़रूरी बुरी संगती में रहा होगा।‘

अब जितने मुंह, उतनी बातें। और जितनी आँखे, उतने नज़रिए। लोगो को एक नज़र देख के उनके चरित्र और हरकतों के बारे में तो लोग इतनी आसानी से बताते है, जैसे वो उन्ही के परिवार का हिस्सा हो और जान पहचान बहुत पुरानी हो। अरे मेमसाहब और भाईसाहब, ज़रा पीछे मुड़ के देखें आपका घर परिवार, आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। लोगों से नज़र हटाइये और अपने गिरेबान में झांकिए।

हम हर किसी की आलोचना कर सकते है। लड़की के कपडे देख कर उसके चरित्र के बारे में बात करते है। लड़के की शक्ल देख कर, उसकी आदतो के बारे में पूरी समीक्षा कर लेते है। लोगो की गाड़ी देख कर, उनकी आर्थिक स्तिथि के बारे में बता देते है। और उनकी हार देख कर, उनकी ग़लतियो का पूरा उल्लेख भी कर लेते है। एक काम के आधार पर हम लोगो की काबिलियत का निर्णय ले लेते है। और किसी के बात करने के ढंग से उन में तहज़ीब की कमी के बारे में बता देते है।

कमी, खराबी या गलती उनके काम या कपड़ो में नहीं होती। दिक्कत है, आपकी छोटी सोच में, जो कभी सुधर नहीं सकती। दिक्कत है, आपके आलोचनात्मक होने पर। दिक्कत है, आपके हर सिक्के के दूसरे पहलु को अनदेखा करने की आदत में। दिक्कत है, आपके नज़रिए में। दिक्कत है, आपकी पमानसिकता में। दिक्कत है, प्रशंसा करने पर शर्मिंदा और चूर होने वाले आपके अहँकार में।

आपकी भी हो सकती है आलोचना

यहाँ पढ़ें : जानिए क्यों ज़रूरत है आपको विवेक से काम लेने की

किसी को जज करना या उनकी आलोचना करना हमारा मकसद नही होता। अक्सर हम उन्हें अनजाने में जज कर बैठते है। हमे पता भी नही लगता और हम लोगो के बारे में एक चित्र अपने दिमाग में बना लेते है। लोगों की आलोचना हम चार कारणों की वजह से करते है :-

  • हम खुद से नाखुश होते है।

हम अक्सर खुद को पसंद नहीं करते। और ये एक बहुत बड़ा और ख़ास वजह है लोगो को जज या उनकी आलोचना करने के लिए। हम खुद से संतुष्ट नहीं होते। इसलिए हम दूसरों को नीचे खीचते है, ये सोच के ही हम उनसे ऊपर आ जाएंगे।

  • हम डरते है।

हम इस बात से डरते है कि दूसरा व्यक्ति हम से बेहतर न हो। और अगर वो हम से बेहतर होता है तो हम उसका मज़ाक उदा कर, उसकी आलोचना कर हम उसको नीचा दिखाते है। हमे लगता है कि शायद ये कर के हम उनसे बेहतर हो जाएंगे, पर ऐसा होता नहीं है।

  • हम अकेले होते है।

अक्सर जब हम अकेला महसूस करते है या सच में अकेले होते है तब हम लोगो से दोस्ती करने के लिए, उनके साथ दूसरे लोगो की आलोचना करते है। पर ये दोस्ती ऐसी होती है, जो ज़्यादा समय तक नहीं चल पाती।

  • हमे बदलाव चाहिए होता है।

खुद की जिंदगी से नाखुश, हम दूसरो की खुश ज़िंदगी को नही देख पाते। हमे अपनी ज़िंदगी बदलनी होती है, जो हम नहीं बदल पाते और इस वजह से उनकी बदलती ज़िन्दगी की आलोचना करते फिरते है।

किसी की प्रशंसा करना मुश्किल नहीं है। अगर आप उनकी खामियां और बुरी चीज़े देख सकते है तो आप उनकी खूबियां और अच्छी बातें भी देख सकते है। उन से ईर्ष्या या उनकी आलोचना करने से बेहतर है कि आप उनकी खूबियों से सीखे। हर व्यक्ति की अच्छाइयों और बुराइयों से सीखा जाए तो हम खुद एक बहुत बेहतर इंसान बनेंगे। और दूसरों की प्रशंसा और आलोचना करने के पहले आप खुद को ज़रूर देखे।

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वो क्या बाते है, जो आपको लड़को से नहीं करनी चाहिए

लड़को की अनकही भावनाओ को समझे


जाने अनजाने में हम अक्सर ऐसी बाते बोल देते है जो किसी भी व्यक्ति के भावनाओ को ठेस पहुँचा सकता है। अब यू तो हम लड़कियो से बहुत ही सोच समझ कर बात करते है, पर लड़को से हम कुछ भी कह जाते है ये सोचते नही की शायद उन्हें ये बाते बुरी भी लग सकती है।

लड़को की अनकही भावनाओ को समझे

लड़को को गहरी चोट भी पहुँचती है।

  1. उन्हें कभी उनके रंग या रूप के बारे में कुछ उल्टा सीधा न कहे। हमारी तरह उनको भी इन बातो का बुरा लग सकता है।
  2. वो जो भी काम करे वो उनकी मर्ज़ी होती है, उनके काम या उनके ज्ञान का मज़ाक ना बनाए।
  3. उनके कपडे या उनकी जीवन शैली पर हँसना, उनके आत्मसम्मान को चूर कर देता है।
  4. उनके माता पिता और उनका परिवार उनके लिए बहुत ही ख़ास होता है, इसलिए उन के बारे में कुछ भी बोलना बहुत गलत होता है।
  5. उनके पसंद और उनकी नापसंद का हम निर्णय नहीं कर सकते। इसलिए उसके ऊपर हँसना और उसका मज़ाक बनाने का भी हमे कोई हक नहीं है।
  6. उन्हें ये बताना की वो कुछ नहीं कर सकते क्योंकि वह किसी एक चीज़ में सफल नहीं उन्हें और उनके सम्मान और आत्मविश्वास को बहुत ठेस पहुँचती है।

लड़के भी हमारी ही तरह होते है। वो बताते नहीं है पर ये छोटी छोटी बाते उन्हें बहुत ठेस पहुँचाती है। वो अंदर ही अंदर घूटते रहते है। और क्योंकि वो कुछ कहते नहीं इसका मतलब ये नहीं की हम उनकी भावनाओ को नज़रअंदाज़ करे।

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