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#successstoryofAyushmankhurana: क्यों मोटी आइब्रो के चलते रिजेक्ट हुए थे आयुष्मान खुराना ? 

विक्की डोनर से अंधाधुन तक आसान नहीं था सफर 
कहते हर सफल आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है साथ ही उसकी लगन और मेहनत भी छुपी होती है. वही सिर्फ आम जीवन के लोग ही नहीं बॉलीवुड  के कुछ ऐसे एक्टर्स भी है जिन्होंने अपने जिंदगी में कई उतार- चढ़ाव देखे है. वैसे ही बॉलीवुड के मोस्ट हैंडसम और चार्मिंग पंजाबी एक्टर जिसके लोग सिर्फ आवाज़ के ही नहीं एक्टिंग के भी कायल है.जी हाँ, हम बात कर रहे है पंजाबी मुंडे आयुष्मान खुराना की. जो सिर्फ एक अच्छे  एक्टर ही नहीं एक अच्छे कवी , लेखक , गायक और अच्छे टीवी होस्ट भी है.

आयुष्मान खुराना बॉलीवुड का ऐसा चमकता सितारा है जिन्होंने इस मुकाम तक पहुँचने के लिए कड़ी मेहनत की है. एक समय ऐसा भी था जब एक टीवी शो में आने के बावजूद भी कोई यह नहीं जानता था की आयुष्मान खुराना है कौन. आज उन्होंने अपनी आवाज़ ,एक्टिंग और लेखिका से बॉलीवुड में एक ऐसी पहचान बना ली है की बच्चा- बच्चा भी आयुष्मान खुराना को जानता है.सबसे ख़ास बात यह है कि इस मुकाम पर पहुँचने  के बाद भी आयुष्मान आज भी उस जमीं से जुड़े है जहाँ से उन्होंने अपने करियर की शरुआत की थी.

आयुष्मान खुराना ने इस शो से की थी अपने करियर की शुरुआत जिसके बाद वो कही नहीं रुके

ज्यादातर लोग यह जानते है की आयुष्मान खुराना ने अपने करियर की शुरुआत 2012  में आयी फिल्म विक्की  डोनर से की थी जिस फिल्म को फैंस द्वारा काफी पसंद  भी किया गया था. हालाँकि उनका फिल्म  इंडस्ट्री  में पहला कदम था लेकिन उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक टीवी शो से की जब महज़ वो 17 साल के थे. इस दौरान उन्होंने शो “पॉपस्टार” से टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा था और यहाँ से शुरू हुआ था आयुष्मान का अपने सपने को लेकर स्ट्रगल. इसके बाद आयुष्मान खुराना ने 2004 में आया एमटीवी पर शो रोडीज़ 2  में भाग लिया था जिसके वो विनर भी रहे  है.  साथ ही उन्होंने रेडियो स्टेशन में रेडियो जॉकी का काम भी किया.

2012  में अपने पहली फिल्म विक्की डोनर आने के बाद आयुष्मान खुराना कभी ठहरे नहीं . कठनाईयो के सामने करते हुए आयुष्मान ने कई फिल्मों  में काम किया जैसे-  2013 (नौटंकी साला) , 2014  (बेवकूफियाँ) , 2015 (हवाइज़ादा ) , 2015 ( दम लगा कर हईशा )इस फिल्म की काफी सरहाना भी की गयी वही फिर 2 साल के ब्रेक के बाद आयुष्मान ने 2017 में फिल्म मेरी प्यारी बिंदु से कमबैक किया.इस बीच उनके द्वारा गाए सांग अलबम  भी लांच हुए है जो फैंस द्वारा काफी पसंद किए गए.साथ ही 2017  में उनकी दो फिल्मे और आई बरैली की  बर्फी और शुभ मंगल सावधान .

बस 2018 से मानों आयुष्मान के लिए सक्सेस का रास्ता खुल गया. जी हाँ 2018 में आयी आयुष्मान की फिल्म “बधाई हो” जिसने बॉक्सऑफिस  पर ताबड़तोड़  कमाई  की  और 200  करोड़ का आकड़ा पार कर लिया. सिर्फ बधाई हो ने ही नहीं 2019 में आयी फिल्म “अंधाधुन” जिसने इसी साल ही नेशनल अवार्ड जीता है साथ ही पुरे विश्व में ताबड़तोड़ कमाई की.

एक समय पर अपनी मोटी आइब्रो को लेकर मिले कई सारे रिजेक्शन

आयुष्मान को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था. जिसके लिए उन्होंने अपने पढ़ाई  पूरी होने के बाद कई सारे ऑडिशंस भी दिए.लेकिन वो कई रिमार्क्स  के चलते आये दिन रिजेक्ट होने लगे थे. इस रिजेक्शन का कारण था उनकी मोटी आइब्रो और उनका पंजाबी लहज़ा.लेकिन उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी और ऑडिशंस दिए.

इन सभी अवार्ड्स से किये जा चुके सम्मानित

आयुष्मान खुराना को उनके काम को लेकर कई सारे अवार्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है. 2012  में आयी फिल्म विक्की डोनर को लेकर उनको मोस्ट एंटरटेंनिंग का अवार्ड दिया जा चुका है. इसके अलावा उन्हें प्लेबैक सिंगर के लिए फ़िल्मफेयर अवार्ड्स से भी नवाज़ा गया है.साथ ही उन्हें 2018  में आयी फिल्म अंधाधुन को लेकर  बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स )के लिए फिल्मफेयर अवार्ड्स से भी सम्मानित  किया गया है. आयुष्म खुराना को उनके कई सांग एलबम्स  और कविताओं को लेकर भी अवार्ड्स दिए जा चुके है.

आपको बता दे की आयुष्मान ने चंडीगढ़ से मुंबई तक का सफर किस तरह से  तय किया था यह सब उन्होंने अपनी 2015 में आयी किताब “माय जर्नी टू बॉलीवुड ” में बताया है. इस किताब को खुद आयुष्मान खुराना ने लिखा है जिसमे उन्होंने अपने संघर्ष से लेकर सफलता तक का ज़िक्र किया है.

जल्द ही इन प्रोजेक्टस पर काम करेंगे आयुष्मान खुराना

आयुष्मान  खुराना की फिल्म ड्रीम गर्ल इसी साल 13 सितम्बर को रिलीज़ हो रही है. इसके अलावा आयुष्मान जल्द ही नए  प्रोजेक्ट पर भी काम करने वाले है जैसे फिल्म बाला जिसमे उनके साथ यामी गौतम और भूमि पेडनेकर नज़र आएँगी. साथ ही 2020  में आने वाली फिल्म गुलाबो सीताबो में भी नज़र  आएंगे जिसमें वो अमिताभ बच्चन के साथ काम करेंगे.

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आप क्या बना रहे है: बेहतर सीवी या बेहतर इंसान

बेहतर सीवी या बेहतर इंसान


कहते है कि अगर एक अच्छी और आरामदायक ज़िन्दगी जीनी है तो उसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। सारी ज़िंदगी निकल जाती है पर वो संतुष्टि नहीं मिल पाती जिसकी हम उम्मीद करते है। बचपन में स्कूल में मेहनत करते है, फिर कॉलेज में और भी दफ्तर में। और ये सारी मेहनत हम अनुभव और कामयाबी के लिए करते जिसका प्रयोग हम अपने सीवी को बेहतर बनाने के लिए करते है।पर इस भागदौड़ में हम ये भूल जाते है कि हम आखिर चाहते क्या है? हमे चुनाव करना होता है बेहतर सीवी या बेहतर इंसान बनने में।

बेहतर इंसान बनने से मेरा मतलब है कि खुद को इस काबिल बना लो की आपकी काबिलियत आपका जूनून बन जाए। ऐसा जूनून जो हमे अपनी मंज़िल तक पहुंचाए। हम खुद अपने पैरों पर खड़े हो सके। आपको खुद का मूल्य तय करना है। आपको अपने सीवी का नहीं ओर अपनी काबिलियत और अपने व्यक्तित्व का मूल्य बढ़ाना। खुद को ऐसा बनाना है कि आपका परिचय आपका सीवी नहीं पर आपका व्यक्तित्व और आपका हुनर दे।

सीवी ज़रूरी या काबिलियत?

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अब अगर बात करे की क्यों आपका अपने मूल्य को बढ़ाना ज़रूरी है तो आपको एक उदाहरण देते है। एक 500₹ का नोट आपको दिया जाए तो आप खुशी खुशी वो ले लेंगे। अगर उसी नोट को मोड़ दिया जाए तो भी आप उसको स्वीकार कर लेंगे। और अब कर उसको मोड़तोड़ कर कुचल दिया जाए तो भी आप उसे लेना चाहेंगे। क्योंकि चाहे कुछ भी हो जाए उस नोट की कीमत और मूल्य कभी नहीं बदलेगी।

उसी प्रकार चाहे ज़िन्दगी आपको मोड़े, तोड़े या कुचले आपका अस्तित्व और आपकी कीमत कभी नहीं बदलेगी। अपने आप को और अपनी काबिलियत को इतना ज्यादा निखार लो की ज़िन्दगी चाहे कुछ भी कर ले, ज़िन्दगी के किसी भी पड़ाव में आप कमज़ोर ना पड़े और आपका मूल्य कभी कम न हो। आप चाहे कोई भी काम करते हो, पर उस काम को इतनी शिद्दत से करे की आप उस में सबसे बेस्ट हो जाए।

माना कि खुद को कुछ बनाने का सफर इतना आसान नहीं होता। पर अगर इस सफर में आप हर मान जाओ तो भी नुक्सान आप ही का है। ज़िन्दगी जीनी ही है तो एक जज़्बे के साथ जियो ताकि जब मारो तब दिमाग में सिर्फ सुन्दर यादे हो, अधूरे सपने नहीं। आपका व्यक्तित्व और हुनर ही लोगो को याद रहेगा। आपका सीवी चाहे जितना ही बढ़िया क्यों ना हो, अगर आप अच्छे इंसान नहीं है आपके उस सीवी का कोई फायदा नहीं है।

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