Categories
हॉट टॉपिक्स

जानें क्यों खत्म होते-होते रह गया गाजीपुर बॉर्डर का धरना, क्यों उतरे विपक्ष के नेता किसानों के समर्थन में

जानें किसान आंदोलन से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट


नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को आंदोलन करते हुए दो महीने से ज्यादा समय हो गया है. गणतंत्र दिवस यानि की 26 जनवरी को हुई घटना के बाद कमजोर लग रहा किसान आंदोलन एक बार फिर जोर पकड़ रहा है. कल पूरे दिन जो कुछ भी हुआ उसके बाद किसान नेता राकेश टिकैत के आंखों से गिरे आंसुओं ने किसान आंदोलन को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है.  राकेश टिकैत के आंखों से गिरे आंसुओं से भिवानी, हिसार, कैथल, जींद, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर से कल रात को ही कई सारे किसानों के जत्थे गाजीपुर की तरफ निकल पड़े थे. लेकिन जैसा की हम जानते है कि 26 जनवरी के दिन किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान किसानों द्वारा हिंसा और लाल किले पर किसानों का झंडा फहराने की घटना के बाद किसानों का आंदोलन कमजोर पड़ता हुआ दिख रहा था. जिसके बाद अभी तक चार किसान संगठनों ने अपना धरना खत्म कर दिया है.  दूसरी तरफ गाजीपुर बॉर्डर पर जंग तेज करने की तैयारी हो चुकी है.

 

गाजीपुर बॉर्डर पर हाईवोल्टेज ड्रामा

कल रात के हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद अभी तक चार किसान संगठनों ने अपना धरना खत्म कर दिया है. कल आधी रात तक गाजीपुर बॉर्डर पर हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा. कल रात को गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस और फोर्स की मौजूदगी देखकर ऐसा लग रहा था कि आज आंदोलन के लिए निर्णायक रात होगी. लेकिन राकेश टिकैत के हाईवोल्टेज ड्रामे ने और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने माहौल को बदल दिया. कल गाजियाबाद प्रशासन ने आंदोलनकारी किसानों को आधी रात तक यूपी गेट खाली करने का अल्टीमेटम दिया था. लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत अपनी मांग पर अड़े रहे उन्होंने कहा वो आत्महत्या कर लेंगे लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे. इतना ही नहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राकेश टिकैत फूट-फूटकर रोने लगे थे.

 

किसान आंदोलन से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट

1. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी किसानों के समर्थन में नजर आये. अखिलेश यादव ने भी राकेश टिकैट से बात की. उन्होंने राकेश टिकैत से उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा और कहा मैं और मेरी समाजवादी पार्टी किसानों की लड़ाई में उनके साथ है.

 

और पढ़ें: क्या बजट 2021 में रियल एस्टेट और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए उम्मीद वाला बजट होगा

 

 

2. समाजवादी पार्टी के साथ साथ बीएसपी भी किसानों के समर्थन में नजर आयी.  मायावती आज किसान आंदोलन के समर्थन में संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार का फैसला किया है. मायावती ने ट्ववीट कर कहा कि बीएसपी देश के आन्दोलित किसानों के नए कृषि कानूनों के खिलाफ कर रहे आंदोलन के समर्थन में है. आज राष्ट्रपति के संसद में होने वाले अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला लिया है.

 

 

3. अभी भी टिकरी बॉर्डर पर बहुत बड़ी सख्या सुरक्षाबल तैनात है. नए कृषि कानूनों के खिलाफ अभी भी यहां किसानों का विरोध-प्रदर्शन जारी है.

 

 

 

4. किसानों द्वारा 26 जनवरी को हुई घटना के बाद दिल्ली पुलिस 6 संदिग्धों की तलाश में जुट गई है.. दिल्ली पुलिस फुटेज और फोटो के आधार पर इन 6 हुड़दंगियों को तलाश कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली पुलिस ने 10 फोटोग्राफर और 10 वीडियो कैमरे 26 जनवरी के लिए मंगवाए थे लेकिन जैसी उनको हिंसा की खबर लगी तो उन्होंने सबको हिंसा की तस्वीरें उतारने में लगा दिया गया.

 

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
हॉट टॉपिक्स

किसान आंदोलन के 59वे दिन पर जानें अब कैसे निकलेगा समाधान, साथ ही जानें आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

केंद्र सरकार के साथ किसानों की 11वें दौर की वार्ता भी रही बेनतीजा


नए कृषि कानूनों को लेकर पिछले 59 दिनों से सरकार और किसानों के बीच टकराव चल रहा है. इस बीच केंद्र सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच 11 बैठके हो चुकी है.  कल यानि की शुक्रवार को केंद्र सरकार और किसानों के बीच 11वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही और उसके बाद किसान नेताओं ने केंद्र सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है. किसानों और केंद्र सरकार के बीच कल शुक्रवार को वार्ता तब अटक गई जब किसान नेताओं ने तीनों नए कृषि कानूनों को पूरी तरह वापस लिए जाने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दिए जाने की अपनी मांग पर लगातार अड़े रहे. आंदोलनकारी किसान नेताओं ने केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को निलंबित रखने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. इसी बीच कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा की  किसानों के इस अड़ियल रवैये के लिए बाहरी ताकतें पूरी तरह जिम्मेदार बताया है. उसके बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जब किसी आंदोलन की शुचिता खो जाती है तो कोई भी समाधान निकलना मुश्किल हो जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अभी किसानों का फोकस 26 जनवरी को बुलाई गई ट्रैक्टर रैली पर है और आज किसान इस मुद्दे पर बैठक करने वाले है.

 

जाने किसान आंदोलन से जुडी महत्वपूर्ण बाते

 

1. किसान और सरकार के बीच 10 दौर की बातचीत विफल रहने के बाद कल शुक्रवार को हुई 11 दौर की बातचीत भी विफल रही साथ ही अगली बैठक की कोई तारीख भी तय नहीं हो पाई.  क्योकि दोनों पक्षों ने अपने रुख को कड़ा कर लिया. अभी केंद्र सरकार ने किसान नेताओं से कह दिया है कि यदि वो कानूनों को निलंबित रखने पर सहमत हो तो सरकार को शनिवार तक बता दे.  उसके बाद ही आगे बात होगी.

 

और पढ़ें: कोरोना के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी को लगेगी कोरोना वैक्सीन

 

 

2. पिछले बुधवार को सरकार ने नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल के लिए निलंबित रखने तथा समाधान ढूंढ़ने के लिए संयुक्त समिति बनाने की पेशकश की थी ताकि किसान दिल्ली की सीमाओं से अपने घर लौट जाये. लेकिन किसान नेताओं ने कहा वे नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने से कम किसी बात को नहीं मानेंगे.

 

3. कल यानि कि शुक्रवार को हुई बैठक भले ही पांच घंटे चली, लेकिन दोनों पक्ष मुश्किल से 30 मिनट के लिए ही आमने-सामने बैठे.  बैठक शुरू होने के साथ ही किसान नेताओं ने सरकार को सूचित किया कि उन्होंने बुधवार को पिछले दौर की बैठक में सरकार द्वारा रखे गए प्रस्ताव को खारिज करने का निर्णय किया है.

 

4. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार ने कहा है कि नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़  साल के लिए निलंबित रखने की अवधि को विस्तारित किया जा सकता है.  लेकिन किसान कृषि कानूनों को पूरी तरह वापस लिए जाने तथा फसलों की खरीद पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दिए जाने की अपनी मांगों पर अड़ी रहेंगे.

 

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
काम की बात करोना

किसान आंदोलन में स्लोगन और बॉयकॉट का नारा बना रहा है इसे और मजबूत

महिलाएं  भी हर कदम पर कंधा से कंधा मिलाकर चल रही है.


नए कृषि कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के 26 दिन हो चुके हैं. आज किसान संगठनों ने लोगों से समर्थन के तौर पर एक टाइम का खाना नहीं खाने की अपील की है. इस बीच सरकार और किसान संगठनों को बीच अब तक हुई बातचीत बेनतीजा रही है. दिल्ली के बॉर्डर को चारों तरफ से किसानों ने घेरा हुआ है. सिंघु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर लगातार पंजाब, हरियाणा, पश्चिम यूपी और राजस्थान के किसान कड़ाके की ठंड में डटे हुए हैं. इस बीच किसान आंदोलन को लेकर मीडिया में कई तरह की खबरें आ रही है. कहीं इन्हें खालिस्तानी संबोधित किया जा रहा तो कहीं आंतकवादी. बात इतनी बड़ा गई कि कुछ दिन पहले ही धरने पर बैठे लोगों में नेशनल मीडिया का ही बॉयकॉट कर दिया और उनके पत्रकारों से बात करने से भी इंकार कर दिया. लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बीच पीएम मोदी ने कहा है कि किसानों को भड़काने का काम किया जा रहा है. आज ‘काम की बात’ में हम ‘वन वर्ल्ड न्यूज’ द्वारा की गई ग्रांउड रिपोर्ट को बताएंगे कि लोग कैसे अपने-अपने स्तर नए कृषि कानून कार विरोध करे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्ष को दी नसीहत

26 नवंबर की सुबह से ही खबर आने लग गई थी किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच कर दिया था. जिन्हें रोकने के लिए सरकार द्वारा हर नामुनकिन कोशिश की गई. किसानों पर ठंड में वाटर कैनन द्वारा पानी गिराने से लेकर रास्ते के अवरुद्ध करने तक हर कोशिश की गई. लेकिन किसान रुके नहीं और दिल्ली के बॉर्डर तक आ पहुंचे. अब इस आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान होते हुए सरकार और किसान संगठन दोनों को ही नसीहत दी है. चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने किसानों को सड़कों से हटाने की अर्जी पर दोबारा सुनवाई करते कहा है कि सरकार इस कानून को होल्ड करने की संभावनों को तलाशे. वहीं किसानों के लिए ‘राइट टू प्रोस्टेट’ की बात करते हुए कहा कि  आप लोग शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं. लेकिन यह ध्यान रहे दूसरे के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए.

और पढ़ें: जानें लॉकडाउन से लेकर स्वास्थ्य संबंधी समस्या तक साल 2020 महिलाओं के लिए कैसा रहा

ठंड भी किसानों को हौसले के कम नहीं कर पा रही

कड़ाके की ठंड में जब हम घर से बाहर नहीं निकल पा रहे है किसान अपने संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए डटे हुए हैं. रिपोर्टिंग के दौरान कुलदीप भोला नाम के एक शख्स ने बताया कि ठंड बहुत ज्यादा है. हमारे घर में गिजर लगा हुआ है. किसी भी काम के लिए गर्म पानी है. लेकिन यहां तो हमलोग  खुले में ठंड पानी से नहा रहे हैं. लेकिन हम फिर भी खुश हैं क्योंकि हमें यह लड़ाई जीतनी है. हमलोग इस कानून को वापस कराने आएं है और वापस कराकर ही वापस जाएंगे.

स्लोगन बने विरोध का सहारा

इतिहास गवाह रहा है आंदोलन कितना भी बड़ा हो उसमें स्लोगन का अहम रोल रहा है. इस आंदोलन में भी विरोध के तौर पर तरह-तरह के स्लोगन लिखे जा रहे हैं. दीवारों पर भगत सिंह के नारों को लिखा गया है. बुढ़े जवान हर कोई भगत सिंह वाली लड़ाई को जीतने के लिए यह डटा हुआ है.  ज्यादातर स्लोगन पंजाबी में लिख हुए हैं. जिसे लोग लेकर घूम रहे हैं. इनमें से कुछ स्लोगन को बताते हैं.

प्रदर्शन स्थल पर गुरु ग्रंथ साहिब जी को रखा गया है. जहां अरदाश की जा रही है. इस के सामने हमें तीन कुछ महिलाएं दिखी जिन्हें अपने हाथ में एक क्लिप बोर्ड थाम रखा था. जिसमें लिखा था. ‘पगड़ी संभाल जट्टा, एक लहर पहले भी उठी थी, हम सबने मिलकर सरकार को झुका दिया था, जबकि सरकार वो भी टेढ़ी थी. एक महीने तक चला दुनिया का सबसे बडा किसान आंदोलन”.

शाहीन बाग के बाद किसान आंदोलन  में भी महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है. किसान आंदोलन में महिलाएं लंगर की सेवा देने से लेकर टैक्टर, जीप चलाने तक हर कदम पर अव्वल हैं. महिलाओं ने भी पूरा मोर्च संभाला है. रिपोर्टिंग के दौरान हमने देखा कि महिलाएं मीडिया को बाईट दे  रही है. चंडीगड से आई सीरीन अंग्रेजी में लिखा हुई क्लिप बोर्ड लेकर खड़ी थी. वह बता रही थी हम डायरेक्ट खेती से जुड़े नहीं है लेकिन हमें पता है कि यह हमारे किसान भाईयों के लिए यह कानून बहुत ही ज्यादा घातक है. सीरीन के क्लिप बोर्ड पर किसानों की आत्महत्या का भी जिक्र है.

रिपोर्टिंग का करवा जैसे-जैसे आगे  बढ़ा तरह-तरह के क्लिप बोर्ड देखने के मिलें. जिनमें ज्यादातर पंजाबी और अंग्रेजी में स्लोगन लिखा हुए थे. एक ग्रुप में कुछ लोग अलग-अलग स्लोगन लेकर खड़े थे. एक बोर्ड पर नौकरी गंवाने वाले लोगों के लिए एक अपील थी. जिसमें साफ लिखा जितने लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई है. दिल्ली बॉर्डर पर उनके लिए लंगर की व्यवस्था की गई है. वहीं दूसरी ओर जियो और रिलाइंस को बॉयकॉट करने की बात लिखी गई है. गौरतलब है कि जब से किसान आंदोलन हो रहा है जियो की सिम को लेकर लगातार बॉयकॉट करने की बात कही जा रही है.

लोग बॉयकॉट की बात पर ही नही रुके ब्लकि यहां तो लोगों ने अपने क्लिप बोर्ड पर सीजन सेल के जैसे सेल-सेल का भी नारा लिखा है. एक शख्स में अपने हाथ में जो किल्प बोर्ड पकड़ा था जिसमें लिखा था ‘भारत में सेल लगी है. अब तक 23 पीसीयू बिक चुके हैं. अगर आप भी कुछ लेना चाहते हैं तो इनसे संपर्क करें’ और नीचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की फोटो लगी थी.

यही से आगे युवाओं का एक जत्था मुख्य स्टेज की तरफ बढ़ते हुए विरोध में यह लिख रहा है कि “प्रधानमंत्री एक प्रधानसेवक की तरह कार्य करें न कि किसी सम्राट की तरह’.

विरोध का तरीका सिर्फ स्लोगन तक ही नहीं रुका है. यहां तो क्रांतिकारी कविताएं वाले क्लिप बोर्ड लिए लोग घूम रहे थे. कविता पंजाबी में है. जिसका हिंदी अनुवाद इस प्रकार है..

मांस के टुकड़े के लिए कुत्ता जैसे पूंछ मारता हुआ घुमता है

ठीक वैसे ही गोदी मीडिया सरकार की रखैल बनी हुई है

खाने के लाले हैं, हमारी जमीन छीनी जा रही है.

सड़कों पर किसानों और मजदूरों का डेरा है

और भारत का राजा अंधा और बहिरा है.

लेखक- राज काकरे

विश्व के सबसे बड़े विरोध में किसान बड़ी हिम्मत के साथ कड़ाके की ठंड में डटे हुए हैं. इससे पहले रविवार को आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई है. इस आंदोलन को लगभग एक महीना होने वाला है. अब देखना है कि इस मुद्दे पर सरकार कब नरम पड़ती है.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
हॉट टॉपिक्स

आज किसान आंदोलन का 25वां दिन: आज भूख हड़ताल पर रहेंगे किसान

आज किसान आंदोलन का 25वां दिन, जाने सिंघु बॉर्डर का लाइव अपडेट


तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते किसान आज आंदोलन के 25वां दिन पर आ पहुंचा है. आज भी किसान दिल्ली एनसीआर के बॉर्डर पर डटे हुए है.  अभी दिल्ली एनसीआर में कड़ाके की ठंड में भी किसानों ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद की हुई है. कल यानि की रविवार को किसानों ने अपने साथी किसानों को जिन्होंने आंदोलन के दौरान जान गंवाई  उन्हें याद करते हुए देश के सभी जिलों, तहसील व गांवों में श्रद्धांजलि सभाएं की थी.  किसानों ने गाजीपुर बॉर्डर और भाकियू कार्यालय समेत कई जगहों पर आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी थी. और आज किसान भूख हड़ताल पर रहेंगे.

आज किसान भूख हड़ताल पर रहेंगे

कल किसानों ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी थी.  आज केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन को तेज करते हुए भूख हड़ताल करने की बात की थी.  साथ ही उन्होंने 23 दिसंबर तक एक वक्त का भोजन छोड़ने की अपील भी की है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा है कि 25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में सभी राजमार्गों पर वो टोल वसूली नहीं करने देंगे. बीते करीब चार हफ्ते से दिल्ली एनसीआर के विभिन्न सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं और नए काले कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं.

और पढ़ें: जानें इस साल की 5 तारीख में ऐसा क्या है खास, जो हमें हमेशा याद रहेगा

3 घंटे बंद रहने के बाद शुरू हुआ किसान एकता मोर्चा का फेसबुक पेज

नए काले कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे  किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फेसबुक अकाउंट को लाइव प्रसारण के बाद ब्लॉक कर दिया गया  इतना ही नहीं इंस्टाग्राम अकाउंट पर कंटेंट डालने पर रोक लगा दी गई है, प्रदर्शनकारी किसानों का सरकार पर आरोप है कि सरकार के इस कदम ने ऑनलाइन सेंसरशिप के बारे में बहस को फिर से खड़ा कर दिया है. हालांकि 3 घंटे बंद रहने के बाद फेसबुक ने फिर से वो पेज दोबारा खोल दिया और इंस्टाग्राम कंटेंट पर लगाई गयी रोक को भी खत्म कर दिया गया.

जाने एमएसपी को लेकर क्या बोले मनोहर लाल खट्टर

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि किसानों को फसल पर मिलने वाला एमएसपी यानि की न्यूनतम समर्थन मूल्य हमेशा बना रहेगा.  क्योंकि ये हमारे किसानों के हित में है. इतना ही नहीं मनोहर लाल खट्टर ने कहा “अगर कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म करने की कोशिश करेगा, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा. लेकिन एमएसपी खत्म नहीं होने दूंगा”.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
काम की बात करोना

जानें किसान आंदोलन को पूरी दुनिया से समर्थन क्यों मिल रहे है

सरकार को इसे वापस लेना होगा


नए कृषि कानून को लेकर लगातार आंदोलन जारी है. 26 नवंबर से शुरु हुआ आंदोलन लगातार जारी है. सरकार और किसान संगठन के बीच हुई बातचीत भी अभी तक बेनतीजा रही है. इस बीच विदेशों में भी किसान आंदोलन को समर्थन मिलना शुरू हो गया है.  आज काम की बात में हम इसपर ही बात करेंगे.

अहम बिंदु

– सितंबर से विरोध शुरु हुआ
– लगातार किसान दिल्ली बॉर्डर पर डटे हैं
– पूरी दुनिया से आ रहा है समर्थन

सितंबर महीने में सरकार द्वारा लाएं गए कृषि बिल का पहले दिन से ही विरोध होना शुरू हो गया था. देश के अलग-अलग हिस्सों में दो महीने तक किसान संगठनों द्वारा विरोध किया गया. लेकिन सरकार की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई. सरकार की बेरुखी को देखते हुए किसानों ने दिल्ली आने का फैसला किया. 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली की तरफ प्रस्थान किया. किसानों को रोकने के लिए सरकार ने एड़ी चोटी का जोर लगाया. लेकिन सफल नहीं हो पाई. आज किसानों के आंदोलन को 13 दिन हो चुके हैं. अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है. इस बीच विदेशों में भी किसान आंदोलन को समर्थन मिलने लग गया है.

और पढ़ें: एनडीए सरकार में जितने भी कानूनों में संसोधन किया गया, ज्यादातर का जनता ने विरोध किया है

सबसे पहले कनाडा ने अपना समर्थन दिया

नवंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हुआ आंदोलन को सबसे पहला समर्थन कनाडा की तरफ से मिला. एक सप्ताह पहले कनाडा के पीएम जस्टिन और रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन ने इस कानून का विरोध करते हुए कहा था कि किसानों को शांतिपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार है. इस बयान पर विदेश मंत्रालय समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने इसका विरोध किया. लगातार बढ़ विरोध के बीच हमने किसान संगठन के लोगों के बात की.ऑल इंडिया किसान सभा के वाईस प्रेसिडेंट सूरत सिंह धर्मकोट का कहना है कि हम सिंघु बॉर्डर पर बैठकर  इस काले कानून को रद्द करवाना चाहते हैं. सरकार इस कानून का पोस्टमॉर्टम न करें. सरकार कह रही है कि तीन कानूनों का नाम न बदला जाए. लेकिन उसके अंदर के प्रावधानों में बदलाव कर देते हैं. हमें पता है इससे कोई लाभ नहीं होगा. हम इसे पूरी तरह रद्द कराना चाहते हैं.

दुनिया के अलग अलग हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में  बात करते हुए सूरत सिंह कहते है कि जो व्यक्ति धरती माता से प्यार करता है और यह जनता है कि इसमें से अन्न प्राप्त होता है वो सभी जन दुनिया के कोने-कोने से इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं. मोदी सरकार को इसे रद्द करना चाहिए. लेकिन सरकार अभी भी डिप्लोमेसी की बात कर रही है. उन्हें भी पता है इसमें दोष है. अब यह लड़ाई कॉरपोरेट बनाम मजदूर हो गई है. इसे सरकार को रद्द करना पड़ेगा.

और सम्बंधित लेख पढ़ने के लिए वेबसाइट पर जाएं www.hindi.oneworldnews.com

पूरी दुनिया में पंजाबी है

कनाडा के बाद विश्व के अन्य देशों में जहाँ पंजाबी ज्यादा रहते हैं. वहाँ लगातार प्रदर्शन हो रहा है.  पिछले सप्ताह इंग्लैंड में भारतीय उच्च्योग के बाहर लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया. कई लोगों को इसके बाद हिरासत में भी लिया गया. अमेरिका में भी कुछ ऐसा ही हाल है. किसानों के समर्थन में अब आते देशों के बारे में हमने सिंघु बॉर्डर पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी विक्की माहेश्वरी से बात की. उन्होंने बताया कि कृषि हर चीज़ का आधार है. इस कारण यह मुद्दा पूरी दुनिया में फैला है. पंजाब के लोग पूरी दुनिया के हर कोने में बसे है. जिसके कारण यह फैल रहा है. हमारे देश का आर्थिक आधार है. अगर इस पर कोई आंच आएगी तो किसान सड़कों पर आएंगे. यह कानून पूरी तरह से देश को बर्बाद कर देगा. कल जब अडानी और अम्बानी पंजाब या अन्य जगहों पर खेती करने जाएंगे तो किसानों गेहूं उगाने के लिए क्यों कहेंगे. वो अपने फायदे के लिए ही कृषि कराएंगे. यह हम किसानों के लिए युद्ध की तरह है. जिसे हमें जितना है.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com