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साल 2020 की महत्वपूर्ण घटनाएं जो आने वाले कल का इतिहास है

राम मंदिर से लेकर नई शिक्षा नीति तक कई अहम फैसले लिए गए हैं


साल 2020 खत्म होने के कगार पर है. यह साल कई मायनो में बहुत ही महत्वपूर्ण है. ऐसा नहीं है सिर्फ कोरोना और लॉकडाउन ने ही इसे यादगार बनाया है. बल्कि कई ऐसी घटनाएं हैं जो इस साल का इतिहास लिखेगी. इस साल की शुरुआत नागरिकता कानून के विरोध से शुरु होकर किसान आंदोलन पर आकर खत्म हो रहा है. पूरे साल लॉकडाउन हो या जीडीपी का माइन्स में चला जाना हो, ऐसी घटनाएं है जो हर शख्स के जहन में अगले कई सालों तक याद रहने वाली है. तो चलिए ‘काम की बात’ में हम 2020 में राजनीति की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं को बारे में बताएंगे.

 

 

दिल्ली चुनाव और दंगा

साल की शुरुआत में ही नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध चल रहा था. इस बीच फरवरी के महीने में देश की राजधानी में साल का पहला विधानसभा चुनाव हुआ. आम आदमी पार्टी ने हैट्रिक लगाते हुए दिल्ली पर अपना कब्जा कर लिया. आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 सीटों पर विजय प्राप्त की बीजेपी की झोली में 8 सीटें आई और कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई. चुनाव प्रचार के दौरान आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी बड़ा मजेदार था. बात यहां तक आ गई है कि एक चुनावी रैली के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा दिया कि 7 फरवरी को बटन इतना जोर से दबाएं कि करंट शाहीन बाग में लगे. इस बयान के बाद लोगों का गुस्सा भड़कना लाजमी था. प्रत्येक मीडिया में यह बात हेडलाइन के तौर पर चलाई गई. चुनाव जीतने के कुछ दिन बात ही दिल्ली के उत्तरी पश्चिमी इलाके में दंगे हो गए. नागरिकता संशोधन कानून को  लेकर लोग विरोध कर रहे थे. इसी बीच जाफराबाद में कानून के इसके समर्थन में भी कुछ लोग आगे आएं. जिसमें बीजेपी ने नेता कपिल मिश्रा भी शामिल थे. 22 फरवरी को शुरु हुए दंगे में  बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार 40 लोगों की मौत हो गई और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे.

 

मध्यप्रदेश में दोबारा बीजेपी की बारी

मध्यप्रदेश में साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में करारी हार क बाद बीजेपी सत्ता में दोबारा आना चाहती थी. वहीं दूसरी ओर सत्ता में काबिज कांग्रेस के बीच खटास का सिलसिला भी शुरु हो गया था. ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी से नाराज चल रहे थे इसी का फायदा बीजेपी को मिला. मार्च के महीने में जब लोगों को कोरोना से बचने की हिदायतें दी जा रही थी. उस वक्त सियासी उठापटक बड़ी तेजी से जारी थी. पार्टी से नाराज चल रहे ज्योतिरादित्या सिंधिया ने अपने 22 विधायकों के साथ कांग्रेस को अलविदा कह दिया और बीजेपी में शामिल हो गए . होली वाले दिन सिधिंया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था और कुछ दिन बाद बीजेपी के मुख्यालय में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्या ली. वहीं दूसरी ओर बहुमत के अभाव में कांग्रेस की सरकार गिर गई. इसी साल नवंबर में हुए उपचुनाव में बीजेपी की जीत हुई और एक बार फिर शिवराज चौहान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनें.

 

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राजस्थान में संकट

कोरोना के दौरान आंशिक लॉकडाउन खुलने के बाद ही राजस्थान की राजनीति में हलचल मच गई. जुलाई के महीने में राजस्थान की राजनीति में तूफान आ गया. सत्ताधारी पार्टी  दो धड़ों  में बंट गई. एक तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे तो दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट. इस दौरान पूरे कयास लगाए जा रहे थे कि ज्योतिरादित्य सिधिंया की तरह सचिन पायलट भी बीजेपी में शामिल हो जाएंगे. पार्टी से नराज चल रहे पायलट और उनके 18 विधायकों ने राजस्थान सरकार के खिलाफ विद्रोह किया था. जिसके बाद सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री पद और प्रदेश अध्यक्ष से बर्खास्त कर दिया गया. इल्जाम ऐसे भी लग रहे थे कि कांग्रेस पार्टी में युवाजोश को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है जिसके कारण पार्टी में इतनी सारी परेशानियां हैं. लेकिन सचिन पायलट ने सारे आरोपों पर विराम लगाते हुए राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी सारी समस्याएं रखी. इससे पहले सचिन पायलट के सोशल मीडिया प्रोफाइल से उनके राजनीतिक पद को हट दिया गया था.

 

नई शिक्षा नीति का विरोध

जुलाई महीने के अंत में बीजेपी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने के लिए नई शिक्षा नीति को लॉन्च किया गया. जो साल 2021 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगी. शिक्षा में इतना बड़ा परिवर्तन 34 साल किया गया है. लेकिन नई शिक्षा नीति ने कई लोगों को निराश किया है. जिसका जमकर विरोध किया जा रहा है. सबसे पहला विरोध तो निजीकरण को लेकर है. स्टूडेंट्स, शिक्षाविद् और जानकार लोगों का कहना है इस तरह का ढांचा शिक्षा को और महंगा कर रहा है. गरीब लोग पहले से ही शिक्षा से दूर है और इस  तरह की नीति से वह और ज्यादा शिक्षा से दूर हो जाएंगे. दूसरा विरोध मातृभाषा की अनिवार्यता पर है. इस पर  ज्यादातर लोगों का कहना है कि जब नौकरी अंग्रेजी से आसानी से मिलती है तो इसकी स्वीकृरिता को खत्म क्यों किया जा रहा है. जबकि पढ़ाई का मतलब ही नौकरी पेशा करना है.

 

राम मंदिर का निर्माण

दशकों से चली आ रही राम मंदिर की मांग पर इस साल विराम लग गया है. बीजेपी ने अपने दूसरे कार्यकाल में अपने वायदे के पूरा करते हुए राम मंदिर का शिलान्यास कर दिया है. 5 अगस्त 2020 को दोपहर 12.40 मिनट पर प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर की नींव रखी. इसके बाद ही राममंदिर का काम शुरु हो चुका है. साल 2022 को इसे पूरा करने का प्रयास है. लंबे समय से लंबित यह काम साल 2020 के इतिहास में दर्ज में हो चुका है.

 

बिहार चुनाव

पूरे साल कोरोना का कहर चलता रहा. लेकिन इसका जरा से भी असर चुनाव में देखने को नहीं मिला. अक्टूबर-नवंबर में  बिहार में हुए विधानसभा चुनाव ने राजनीति में युवा जोश  को प्रदर्शित किया. त्रिकोणीय मुकाबले के बीच युवा चेहरों को  बिहार में और ज्यादा पहचान मिली. आरजेडी के तेजस्वी यादव ने एकदिन में सबसे ज्यादा 19 रैलियां की. वहीं दूसरी ओर लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद उनके सुपुत्र चिराग पासवान ने बिहार चुनाव में पार्टी की कमान संभाली. एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा. सीट भले ही न लाई पाई हो लेकिन चिराग ने युवाओं के बीच अपनी एक छाप छोड़ी है. पहली बार बिहार की राजनीति में कदम रखने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी भले ही चुनाव में कुछ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई हो. लेकिन बिहार की राजनीति में उनकी एंट्री हो चुकी है. इस चुनाव के दौरान वह खुलकर सरकार की नीतियों का विरोध करते हुई दिखाई दी है. बिहार में 125 सीटों के साथ विजय प्राप्त करने वाली एनडीए की सरकार है. नीतीश कुमार सातवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं. 85 सीटों के साथ आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी और 84 सीटों के बाद बीजेपी ने बिहार ने अपने पांव मजबूत कर लिए हैं. वहीं 19 सीटों में विजय के साथ लेफ्ट ने एकबार फिर बिहार में वापसी की है.

 

दोस्ती में दरार

नए कृषि कानूनों को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. दिल्ली को सभी बॉर्डर को किसानों ने घेर रखा है. किसान लगातार इस कानून को वापस लेने  की मांग कर रहे हैं. किसानों का विरोध प्रदर्शन  सितंबर महीने से ही शुरु हो गया था. पंजाब, हरियाणा में लगातार किसान अपने-अपने क्षेत्र में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इस बीच जब उनकी बात को नहीं माना गया तो किसानों ने नवंबर 26 को दिल्ली के लिए कूच कर लिया. इस पहले बीजेपी की सहयोगी पार्टी ने नए कृषि कानून के खिलाफ पार्टी से अलग हो गई. बीजेपी और अकाली दल की 22 साल की दोस्ती में दरार आ गई. बढ़ते विरोध के बीच सितंबर के महीने में केंद्रीय मंत्री हरसिमरन कौर बादल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.

 

 

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केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो का बयान तृणमूल कार्यकर्ताओं से निपटने के लिए संविधान में प्रवधान मौजूद है

डर का माहौल पैदा किया जा रहा है


बंगाल में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले ही आरोप प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरु हो गया है. केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को मतदाताओं को डराना-धमकाना बंद करना चाहिए, अन्यथा संविधान में इससे निपटने के प्रावधान मौजूद है.

130 बीजेपी कार्यकर्ताओं की हुई हत्या

एक न्यूज चैनल से बात करते हुए बाबुल सुप्रियो ने कहा कि  प्रदेश में 130 बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है. प्रदेश में डर का माहौल पैदा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों को लगता है कि वह मतदाताओं को डरा धमकाकर राजनीतिक हिंसा को फैला सकते हैं. तो ऐसा नहीं हैं. इन सबसे निपटने के लिए संविधान में प्रावधान दिए गए है. जिसके द्वारा प्रदेश में शांति बनाई जा सकती है.

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जनता ने बीजेपी को वोट देने की ठान ली है

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता ने बीजेपी को वोट देने का ठान लिया है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में लाने वाले लोग अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही वर्तमान सरकार को गिराएं. गौरतलब है कि आऩे वाले साल में अप्रैल-मई के महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. जिसमें बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस एक दूसरे की प्रतिद्वंदी पार्टी है.

दो दिन पहले ही हुई थी कार्यकर्ता की मौत

आपको बता दें बंगाल में आए दिन बीजेपी कार्यकर्ताओं की मौत की खबरें आती रहती है.  अभी दो दिन पहले ही बीजेपी कार्यकर्ता की उत्तरी बंगाल के कूच बिहार जिले के तुफानगंज अस्पताल में मौत हो गई. कार्यकर्ता कालाचंद कर्मकार पोलिथ स्तर के सचिव थे. उनकी मौत के पीछे का कारण दो समुदाय के बीच की झड़प है. इसी झड़प में ही कालाचंद घायल हो गए थे. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उनकी मौत हो गई. बीजेपी के कार्यकर्तांओं का आरोप है कि मौत के पीछे तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का हाथ है.

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P Chidambaram bail: INX केस मामले में 106 दिन बाद चिदंबरम जेल से आएंगे बाहर

P Chidambaram bail: कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत


P Chidambaram bail: आईएनएक्स मनी लॉन्डिंग केस में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम को आज जमानत मिल गई है।इससे पहले चिदंबरम को सीबीआई से जुड़े केस में जमानत मिल चुकी है। आपको बता दें की चिदंबरम ने इस मामले में आए हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2 लाख के बॉन्ड के साथ यह जमानत दी है।

चिदंबरम को कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद अब बड़ी राहत मिली है। उन्हें 106 दिन से जांच एजेंसी के हिरासत में थे।जमानत देते हुए कोर्ट ने चिदंबरम से यह भी कहा है कि वो केस पर सार्वजनिक बयान या इंटरव्यू न दें।

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, आईएनएक्स केस मामले में 106 दिन बाद चिदंबरम जेल से आएंगे बाहर

आईएनएक्स मनी लॉन्डिंग केस में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम को आज जमानत मिल गई है।इससे पहले चिदंबरम को सीबीआई से जुड़े केस में जमानत मिल चुकी है। आपको बता दें की चिदंबरम ने इस मामले में आए हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2 लाख के बॉन्ड के साथ यह जमानत दी है।

चिदंबरम को कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद अब बड़ी राहत मिली है। उन्हें 106 दिन से जांच एजेंसी के हिरासत में थे।जमानत देते हुए कोर्ट ने चिदंबरम से यह भी कहा है कि वो केस पर सार्वजनिक बयान या इंटरव्यू न दें।

सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत , लेकिन नहीं कर सकते कही यात्रा

जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम पर कुछ शर्तें भी रखी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि वह बिना परमिशन के यात्रा न करें। साथ ही कोर्ट ने चिदंबरम को यह भी हिदायत दी है कि वो केस से जुड़े किसी गवाह से संपर्क न करें।वही दिल्ली हाई कोर्ट ने नवंबर में इस मामले में पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली हाई कोर्ट की एकल पीठ ने राहत प्राप्त करने की चिदंबरम की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और यह मामला उन्हें जमानत देने के लिए सही नहीं है।

साथ ही चिदंबरम दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन पर साल 2007 में केंद्रीय वित्तमंत्री रहते हुए कथित रूप से विदेशी धन लेने के बाद आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड  की मंजूरी देने में नियमों का उल्लंघन करने के आरोप हैं।

और पढ़ें: Rajiv Dhawan: वकील राजीव धवन को किया गया अयोध्या केस से आउट

सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, लेकिन नहीं कर सकते कही यात्रा

जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम पर कुछ शर्तें भी रखी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि वह बिना परमिशन के यात्रा न करें। साथ ही कोर्ट ने चिदंबरम को यह भी हिदायत दी है कि वो केस से जुड़े किसी गवाह से संपर्क न करें।वही दिल्ली हाई कोर्ट ने नवंबर में इस मामले में पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली हाई कोर्ट की एकल पीठ ने राहत प्राप्त करने की चिदंबरम की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और यह मामला उन्हें जमानत देने के लिए सही नहीं है।

साथ ही चिदंबरम दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन पर साल 2007 में केंद्रीय वित्तमंत्री रहते हुए कथित रूप से विदेशी धन लेने के बाद आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड  की मंजूरी देने में नियमों का उल्लंघन करने के आरोप हैं।

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महाराष्ट्र में इस सरकार का होगा गठन

राज्यपाल से मुलाक़ात करेंगे शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी के नेता


महाराष्ट्र में अपनी सरकार बनाने को लेकर शिवसेना में काफी हड़कम्प्प है। साथ ही महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाने पर अड़ी शिवसेना का एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाना लगभग तय माना जा रहा है। इसका एलान जल्द हो सकता है। साथ ही वही शिवसेना को वीर सावरकर को भारत रत्न देने की अपनी मांग और मुस्लिमों को पांच फीसदी आरक्षण के विरोध को खत्म पड़ सकता है। सीएम पद शिवसेना को मिलेगा और कांग्रेस तथा एनसीपी से एक-एक डिप्टी सीएम होेंगे।

खबरों के मुताबिक  तीनों दलों के नेताओं की हुई बैठक में न्यूनतम साझा कार्यक्रम का लिस्ट तैयार किया गया। इसे मंजूरी के लिए तीनों दलों के शीर्ष नेताओं को भेजा गया है। न्यूनतम साझा कार्यक्रम 1998 में एनडीए के नेशनल एजेंडा फॉर गवर्नेंस के मॉडल पर बनाया गया है। इसके तहत तीनों दल अपने वैचारिक मुद्दों को ध्यान देते हुए आगे बढ़ेंगे

इसके अलावा शिवसेना सावरकर, गोडसे, बांग्लादेशी घुसपैठियों और मुस्लिम आरक्षण पर रुख नरम करेगी और इन मुद्दों पर आक्रामक होने से बचेगी। किसानों की कर्जमाफी, मुंबई व अन्य शहरों में आधारभूत विकास, 10 रुपये में थाली, एक रुपये में मरीजों की जांच जैसे जनहित के मुद्दों पर तीनों दल मिलकर काम करेंगे। साथ ही सभी  मुद्दों को छोड़कर एक-दूसरे के प्रमुख चुनावी वादों को पूरा करने में मदद करेंगे।

आज राज्यपाल से मिलेंगे शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के नेता

ऐसा बताया जा रहा है की आज शाम 4 बजे शिव सेना ,कांग्रेस और एनसीपी के नेता राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलेंगे। सूत्रों के मुताबिक यह मुलाक़ात सिर्फ एनसीपी-कांग्रेस नेताओं के बीच होने थी लेकिन वही  फिर शिवसेना ने कहा की उसके नेता भी प्रतिनिधिमंडल  में भी शामिल होंगे। इस बैठक में सभी नेता राज्यपाल से किसानों  समस्याओं का मुद्दा भी उठाएंगे और  उनकी मदद  करने की भी अपील करेंगे इसके अलावा एनसीपी के नेता का कहना है की यह मुलाक़ात सिर्फ सरकार बनाने की दावेदारी को पेश करना ही नहीं है।  

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Sabarimala and Rafale News: राफेल और सबरीमाला मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कही यह बड़ी बात

सबरीमाला केस का फैसला बड़ी बेंच को सौंपा गया


Sabarimala and Rafale News: पिछले कुछ दिनों में सुप्रीम कोर्ट में कुछ बड़े फैसल आए हैं। इन फैसलों में अयोध्या विवाद, कर्नाटक विधायक विवाद और सीजेआइ ऑफिस आरटीआइ के मामले शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में आज तीन बड़े फैसलों का दिन है। आज सुप्रीम कोर्ट राफेल विमान सौदे, सबरीमाला विवाद और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अवमानना मामले में फैसला सुनाने जा रही है। बात करे राफेल डील की तो सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार की याचिका ख़ारिज कर दी है। आपको बता दे की इस मामले को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी ।

वही बात करे दूसरे मामले यानी राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने माफ कर दिया है। राहुल गांधी ने अपने इस बयान के लिए सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ गलत तरीके से अदालत में शिकायत करने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें राफेल मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनके ‘चौकीदार चोर है’ के नारे को गलत बताया।

और पढ़ें: महाराष्ट्र में लागू हुआ राष्ट्रपति शासन, जानिए महाराष्ट्र मामले की 10 एहम बातें

तीसरा फैसला सबरीमाला मामले परे तो सुप्रीम कोर्ट ने केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला बड़ी बेंच को सौंप दिया है। कोर्ट इस बारे में खुद  फैसला सुनाने वाला था लेकिन 5 जजों की बेंच ने कहा कि परंपराएं धर्म के सर्वमान्य नियमों के मुताबिक हों और आगे 7 जजों की बेंच इस बारे में अपना फैसला सुनाएगी। साफ है कि फिलहाल मंदिर में कोर्ट के पुराने फैसले के मुताबिक महिलाओं की एंट्री जारी रहेगी।

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अयोध्या पर फैसला आने से पहले अंबेडकर नगर में पुलिस हुई अलर्ट

प्रशासन द्वारा कॉलेजों में बनाई गई 8 अस्थाई जेल


सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या-बाबरी मस्जिद को लेकर सुनवाई खत्म हो चुकी है। लेकिन इसके फैसले को लेकर सभी की धड़कने तेज़ हो गयी है यह सोच कर की कोर्ट का फैसला किसके हित में जायेगा। वही अयोध्या पर फैसले से पहले अंबेडकर नगर के अलग-अलग कॉलेजों में 8 अस्थाई जेल बनाई गई है। प्रशासन ने ऐसा फैसला सुरक्षा के मद्देनजर लिया है।

आपको बता दें की अयोध्या में पहले से हाई अलर्ट है रखा गया है और जगह-जगह पर जवानों की तैनाती की गई है। ताकि किसी तरह का मुठभेड़ देखने को ना मिले।इसके अलावा पुलिस ने  34 जिलों के पुलिस प्रमुखों को भी निर्देश जारी कर दिए हैं। जिनमे इन जिलों के नाम शामिल है जैसे- मेरठ, आगरा, अलीगढ़, रामपुर, बरेली, फिरोजाबाद, कानपुर, लखनऊ, शाहजहांपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और आजमगढ़ आदि।

और पढ़ें: SC का दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस, कहा प्रदर्शन कर रहे जवान पर ले जल्द एक्शन

इस से पहले गोरखपुर में हाई अलर्ट लगाया गया। 6 नवंबर को यूपी पुलिस ने गोरखपुर में फ्लैग मार्च किया। इस दौरान जिले की सड़कों पर सैकड़ों पुलिसकर्मी फ्लैग मार्च में दिखे। साथ ही अयोध्या पर फैसले से पहले यूपी पुलिस ने कड़ी  सुरक्षा बढ़ा दी है।  साथ ही अफवाहों और गलत जानकारियों को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया पर भी ख़ास ध्यान रखे हुए है।

गोरखपुर में  फ्लैग मार्च इसलिए किया गया क्यूंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संसदीय क्षेत्र गोरखपुर है और राम मंदिर आंदोलन में गोरखपुर बेहद अहम रहा है। अयोध्या केस में फैसला आने से पहले नेपाल की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के इलाके में 7 आतंकवादियों के घुसने की भी खबर आयी है जिसके उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

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कांग्रेस पार्टी पर छाये संकट के बादल, 21 मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

राजनीतिक संकट से गुजर रही कांग्रेस को एक और झटका


लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राजनीति में कई नए बदलाव देखने को मिल रहे है. बीजेपी अपने पहले बजट को पेश कर अपने कार्य में जुट गयी है. कांग्रेस में आये दिन नेताओ की इस्तीफा देने की होड़ लग गयी है. लोकसभा चुनाव में मिली हार से कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और उनके साथ ज्योतिरादित्य सिंध्या ने भी अपने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है.

कर्नाटका में कांग्रेस-JDS गठबंधन की सरकार चला रहे एच.डी. कुमारस्‍वामी के मंत्रिमंडल से कांग्रेस बाहर हो गई है. कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस के सभी 21 मंत्रियों ने इस्‍तीफा दे दिया है. इस बीच सीएम कुमारस्‍वामी ने कहा है कि ‘मसला सुलझ जाएगा. सरकार आराम से चलेगी.’

वही अब इसके अलावा निर्दलीय विधायक ने भी सरकार से समर्थन वापस लेकर भारतीय जनता पार्टी का समर्थन किया है. साथ ही कांग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ट्वीट कर सभी विधायकों से अपील की है कि वह अपना इस्तीफा वापस ले लें. कांग्रेस मंत्रियों के साथ- साथ जेडीएस पार्टियों के मंत्रियों ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है और कर्नाटक में जल्द ही नया मंत्रिमंडल बनाया जा सकता है

कर्नाटका में जितने भी मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है और मुंबई चले गए है उन पर कांग्रेस पार्टी कड़े एक्शन लेंगी. अगर मंत्री पार्टी में वापस नहीं लौटते तो उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया जायेगा- कुमारस्वामी ने कहा

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जेनेवा संधि क्या है और यह किन पर लागू होता है ?

जाने जेनेवा संधि से जुड़ी यह कुछ ख़ास बातें ?


इस बात से सभी वाकिफ है कि भारत और पाकिस्तान के बीच में कितना तनाव का माहौल बना हुआ. हाल ही में हुए पुलवामा अटैक के बाद भारत ने आतंकवाद को खत्म करने के लिए कड़ी कूट निति अपनाई है . जिसमे हमारी भारतीय वायुसेना ने पाक के आतंकी कैंपो पर हमला किया और उनके 300 आतंकियों को मार गिराया.उसके बाद से पाकिस्तान में बौखलाहट मच गई है .

वहीं भारत की और से किए गए एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक के जरिए भारत के जवान के कैंपो को अपना निशाना बनाया जिसमे वह नाकाम रहे लेकिन पाक का एक जेट F- 16 क्रैश हो गया जो कि  भारत में गिरा , वही भारत का भी एक जेट MIG – 21 क्रैश हुआ जो कि पाक्सितान में गिरा लेकिन उसमे बैठे पायलट अभिनन्दन पाक की आर्मी के गिरफ्त में आ गये. लेकिन जेनेवा संधि के मुताबिक पाकिस्तान की आर्मी पायलट अभिनन्दन के साथ ही नहीं बल्कि किसी भी युद्धबंदियों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार नहीं कर सकती. तो क्या है जेनेवा संधि एक बार जान ले ?

जाने जेनेवा संधि से जुडी यह कुछ ख़ास बातें ?

जेनेवा संधि जो है वो युद्धबंदियों के अधिकारों की रक्षा करता है. साथ ही इस संधि का उद्देश्य है युद्ध के वक्त मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना. आपको बता दे की जेनेवा कन्वेंशन में मानवता को बरकरार रखने के लिए चार संधिया शामिल की गयी थी. पहली संधि 1864 में हुई थी. इसके बाद दूसरी संधि 1906 और तीसरी संधि 1929 में हुई. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी.

यहाँ भी पढ़े : भारत ने पाक पर की बमबारी , लिया पुलवामा अटैक का बदला

साथ ही इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास के मुताबिक जेनेवा संधि में युद्ध के दौरान गिरफ्तार सैनिकों और घायल लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना है इसको लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं. इसमें साफ तौर पर ये बताया गया है कि युद्धबंदियों के क्या अधिकार हैं.

यहाँ जाने की जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों के क्या अधिकार है ?

1 . इस संधि के तहत जो युद्धबंदि है उनका अच्छे से ध्यान दिया जाना चाहिए, यानी कि उनको खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जाए.

2. साथ ही उनके साथ किसी भी तरह का अमानवीय बर्ताव न किया जाए.

3. चाहे वो सैनिक पुरुष हो या स्त्री दोनों पर ही यह जेनेवा संधि लागू होती है.

4. इसमें आप युद्धबंदियों से उनकी जाति, धर्म या किसी भी बारे में नहीं पूछ सकते.

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क्या है “Public Administration”? कैसे आप इसके लिए एनरोल कर सकते है ?

जाने इस कोर्स से जुड़ी यह अहम बातें? 


अगर आपकी स्ट्रीम आर्ट्स है और आपकी दिलचस्पी पॉलिटिक्स में ज्यादा है तो आप इस कोर्स में अपना दाखिला करा सकते है, यह कोर्स है पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन। इस कोर्स में आपको राजनीति से जुडी बातें और सरकारी  मुद्दों के बारे में जानकारी प्राप्त होगी। इस कोर्स  के खत्म  होने के बाद आप सरकारी नौकरी  के लिए भी अप्लाई  कर सकते है.

बात करते है की आखिर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन है क्या ?

पब्लिक और एडमिनिस्ट्रेशन अलग- अलग शब्द है। पब्लिक का अर्थ है सार्वजनिक और एडमिनिस्ट्रेशन का अर्थ है कार्य करवाना। पब्लिक अडमिंस्ट्रेशन पब्लिक की सहूलियतों को देख कर  उनके लिए नई  पॉलिसीस तैयार करती है यानी की पब्लिक के हित में कार्य करती है.

जानते है पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के अंतर्गत क्या कार्य आते है

पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन का काम पब्लिक एजेंसियों की देख रेख करना  है, बजट तैयार करना है, और सरकारी नीतियां को बनाना है। इसके अलावा पब्लिक एडमिन्सिट्रेशन  सिर्फ इकोनोमिकल ही नहीं बल्कि हेल्थ डिपार्टमेंट में भी उतना ही अहम  रोल  निभाता  है जैसे पब्लिक हेल्थ एडमिनिस्ट्रेटर के तौरपर मेडिकल और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए काम करते हैं. पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के अंदर सभी नागरिको से जुड़ी  सेवाओं  के कार्य आते है.

इस कोर्स को करने के लिए आपको इन बात का ध्यान रखना होगा को इस कोर्स को करने के लिए आपकी जनरल नॉलेज पर पकड़ तेज होनी चाहिए.

यह कुछ अहम वजह हैं कि एडमिनिस्ट्रेशन एक इम्पोर्टेन्ट फील्ड है जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए:

1. योजना: पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन का रोल जो  है वो सरकार के अंतर्गत अलग- अलग योजनाओ को तैयार करना है जैसे अगर सरकार एक नयी  योजना लाने की तैयारी करती है तो उससे पहले पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन इन योजनाओं पर विचार करती है कि कैसे उसे सार्वजनिक तौर पर लागु किया जायेगा और वो योजना कैसे काम करेगी और उससे क्या लाभ हो सकता  है?

2. कोआर्डिनेशन: पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन का काम सभी डिपार्टमेंटस के साथ कोआर्डिनेट भी करना है कि उन्हें पता रहे है कीअंतर-विभागीय स्तर पर क्या काम हो रहा है। पी.ए विभिन्न नीति-प्रभावित समूहों के बीच संपर्क के बिंदु हैं.

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3. सलाहकार: जब सरकार के द्वारा किसी बड़ी निति को लाया जाता है तो उसमे पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन अक्सर सरकारी अधिकारियों और विधायकों साथ बैठ  कर  सलाह  मश्वरा करते  है कि उस निति को कैसे लागू किया जाता  है.

4. गैरलाभकारी व्यवहार्यता: पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन  ना सिर्फ सरकारी काम में अपना रोल निभाता है बल्कि उन पर भी काम करते है जो गैर-लाभकारी संगठन (एनपीओ) नीति-संबंधित कारणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं . इसके साथ ही  वह गैर-लाभ क्षेत्र में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेटर (एनपीओ) मैनजर्स के सलाहकार होते  हैं, और सरकारी अधिकारियों  से बात  करते है कि विधायकों और अधिकारियों के साथ मिलकर संगठन के हित में कैसे  काम करना है .

आप इस कोर्स के लिए कैसे एनरोल कर सकते है ?

अगर आप पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स के लिए अप्लाई करना चाहते है तो आप इसके लिए इग्नू कॉलेज से इसको  कर सकते है । उसके ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर https://onlineadmission.ignou.ac.in/admission/अगर आप इस कोर्स को ओपन से करना चाहते है तो आपको फ़ीस 3 ,500  हजार जमा करनी  होगी. आवदेन की आखिरी  तारीख  है 31  जनवरी 2019 .

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