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#HappyBirthdayGulzar: अपने शब्दों से हिंदी सिनेमा में दिया बड़ा योगदान 

यह है गुलज़ार द्वारा लिखी गई बेहतरीन कविताएँ


जिन्होंने अपने खूबसूरत अल्फाज़ो से गीतों को कर दिया गुलज़ार, आज है उन्ही गीतकार गुलज़ार साहब का 84 वा जन्मदिन. गुलज़ार एक अच्छे गीतकार ही नहीं बल्कि एक अच्छे स्क्रिप्ट राइटर और फिल्म निर्देशक भी है.उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपना बड़ा योगदान दिया है. गुलज़ार ने अपने करियर में बेहतरीन फिल्मों के साथ-साथ दिल को छूने वाली ऐसे कविताएं और गाने लिखे है, जिन्हें सुनकर आप कहीं खो से जाते हैं. आज उनके जन्मदिन के ख़ास मौके पर हम आपको उनके द्वारा लिखी गयी ख़ास कविताओँ के बारे में बताएँगे

यह है गुलज़ार साहब द्वारा लिखी गई बेहतरीन कविताएँ 

1.  “किताबें”
किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से,
बड़ी हसरत से तकती हैं।
महीनों अब मुलाकातें नहीं होतीं,
जो शामें इन की सोहबत में कटा करती थीं।
अब अक्सर।

2.“रात चाँद और मैं”

उस रात बहुत सन्नाटा था
उस रात बहुत खामोशी थी
साया था कोई ना सरगोशी
आहट थी ना जुम्बिश थी कोई
आँख देर तलक उस रात मगर
बस इक मकान की दूसरी मंजिल पर
इक रोशन खिड़की और इक चाँद फलक पर
इक दूजे को टिकटिकी बांधे तकते रहे
रात चाँद और मैं तीनो ही बंजारे हैं

3. “खुदा”
पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैंने
काले घर में सूरज रख के,
तुमने शायद सोचा था, मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे,
मैंने एक चिराग़ जला कर,
अपना रस्ता खोल लिया

4. इक इमारत!
इक इमारत
है सराय शायद,
जो मेरे सर में बसी है.
सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते हुए जूतों की धमक,
बजती है सर में.

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5.वक़्त को आते न जाते न गुजरते देखा,
न उतरते हुए देखा कभी इलहाम की सूरत,
जमा होते हुए एक जगह मगर देखा है.
शायद आया था वो ख़्वाब से दबे पांव ही,
और जब आया ख़्यालों को एहसास न था.

गुलज़ार साहब ने अपने करियर की शुरुआत एस.डी बर्मन के साथ एक लीरिक्स राइटर के तौर पर की थी. इस दौरान गुलजार साहब को कई बार अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है. इनमें ऑस्कर, ग्रैमी, पद्म भूषण और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी शामिल हैं. गुलजार साहब को न केवल उनके लिखे गानों के लिए बल्कि उनकी शायरी के लिए भी खूब जाना जाता है.

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लाइफस्टाइल

देश को राष्ट्रगान देने वाले एक मात्र कवी थे रविन्द्र नाथ टैगोर

जाने  रविन्द्र नाथ टैगोर की वो 5  कविताएँ जो आज बच्चो को मुँह  ज़बानी याद है


देश को राष्ट्र गान देने वाले रविन्द्र नाथ टैगोर का नाम आज भी इतिहास के पन्नो से जुड़ा है. रविन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 6  मई को कलकत्ता  में सन 1861 में हुआ था.  आज भी रविन्द्र नाथ द्वारा लिखी गयी सभी रचनाएँ और कविता स्कूल की किताबो में नजर आती है. रविन्द्र नाथ को बचपन से ही साहित्य और संस्कृत भाषा में रूचि थी उन्होंने कम उम्र से ही कविता लिखना शुरू कर दिया था.

आपको बता दे की उन्होंने अपनी पहली कविता महज आठ साल की उम्र में लिखी थी और सन 1877 में उनकी उनकी प्रथम लघुकथा पब्लिश हुई थी जब वे सिर्फ सोलाह साल के थे.

साथ ही उनके पिता एक ब्रह्म-समाजी थे जिसके कारण वे भी ब्रह्म-समाजी थे लेकिन अपनी रचनाओं व कर्म के द्वारा उन्होंने सनातन धर्म को भी आगे बढ़ाया. साथ रविन्द्र नाथ टैगोर ने सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेश भी जाकर साहित्य की पढ़ाई की.वह एक अच्छे लेखक और कवी भी थे. इसके अलावा उन्होंने कुछ पुस्तकों का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया था जिसके बाद उनकी प्रतिभा पूरे विश्व में फैली

जाने रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा लिखी गयी वो 5 कविताएँ जो आज भी बच्चों के ज़ुबान पर रहती है

1.होंगे कामयाब,

हम होंगे कामयाब एक दिन

मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास

हम होंगे कामयाब एक दिन

हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन

2 .मेरा शीश नवा दो अपनी

चरण-धूल के तल में

देव! डुबा दो अहंकार सब

मेरे आँसू-जल में

अपने को गौरव देने को

अपमानित करता अपने को,

घेर स्वयं को घूम-घूम कर

मरता हूं पल-पल में

3.अनसुनी करके तेरी बात

न दे जो कोई तेरा साथ

तो तुही कसकर अपनी कमर

अकेला बढ़ चल आगे रे–

अरे ओ पथिक अभागे रे

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4 . लगी हवा यों मन्द-मधुर इस

नाव-पाल पर अमल-धवल है;

नहीं कभी देखा है मैंने

किसी नाव का चलना ऐसा

लाती है किस जलधि-पार से

धन सुदूर का ऐसा, जिससे-

बह जाने को मन होता है

5 प्रेम, प्राण, गीत, गन्ध, आभा और पुलक में,

आप्लावित कर अखिल गगन को, निखिल भुवन को,

अमल अमृत झर रहा तुम्हारा अविरल है.

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मनोरंजन

डॉ. कुमार विश्वास के जन्मदिन पर जाने उनसे जुड़ी बातें…..

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता तथा मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास का आज जन्मदिन है। डॉ.कुमार विश्वास का जन्म 10 फरवरी 1970 को उत्तर प्रदेश के गौड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ से प्राप्त की। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उनके पिता चाहते थे कि वह इंजीनियरिंग के फील्ड में जाएं लेकिन, कुमार विश्वास की रुचि कविताओं में थी।

उन्होंने इंजीनियरिंग न करते हुए राजपूताना रेजिमेंट इंटर कॉलेज में दाखिला ले लिया और बाद में हिन्दी साहित्य में पीएच.डी की डिग्री प्राप्त की।

डॉ.कुमार विश्वास ने अपनी डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त करने के बाद 1994 में राजस्थान के एक कॉलेज में कॉलेज लेक्चरर के रूप में अपना प्रोफेशनल करियर ज्वॉईन किया। वह लगातार 16 वर्षों तक कॉलेज लेक्चरर के रूप में काम करते रहे। इस दौरान वह कवि सम्मेलनों में भी जाते जहां उनकी कविताओं को सराहा जाता।

डॉ.कुमार विश्वास

धीरे-धीरे उन्होंने टीवी धारावाहिक, मैग्जींस तथा अखबारों के लिए भी कविता लिखने का कार्य किया जिससे उन्हें पहचान मिलने लगी। उनकी कविता लोगों को इतनी भा गई कि कई मोबाइल कंपनियों ने उनकी कविताओं को कॉलर ट्यून भी बनाया।

वर्ष 2012 में डॉ. कुमार विश्वास तथा अरविंद केजरीवाल ने अपने कुछ और सहयोगियों, मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव के साथ मिलकर आम आदमी पार्टी की स्थापना की। 2015 में दिल्ली में फिर से हुए विधानसभा चुनावों में उनके दल आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर सरकार बनाई।

डॉ. कुमार विश्वास को अब तक कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें 1994 में डॉ. कुंवर बैचेन काव्य सम्मान एवं पुरस्कार दिया गया। इसके बाद वर्ष 2004 में वह साहित्य भारती द्वारा उन्नाव में डॉ. सुमन अलंकरण सम्मान से नवाजे गए, और साथ ही हिन्दी-उर्दू अवार्ड अकादमी द्वारा 2006 में ‘साहित्य-श्री’ पुरस्कार मिला। इसके अलावा भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

Picture Credit : Kuldeep Pundhir, OneWorldNews

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