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आइए जाने धैर्य एवं सहनशीलता का महत्व

आइए जाने धैर्य एवं सहनशीलता का महत्व


धैर्य एवं सहनशीलता

आइए जाने धैर्य एवं सहनशीलता का महत्व:- परिस्थितियों की भेद्यता और प्रतिकूलता एवं मनुष्यों के स्वभाव के कारण आज हर आदमी का सहनशील बनना आवश्यक हो गया है। अक्सर जब लोग प्रतिकूल परिस्तितियो में धैर्य व सहनशीलता का पाठ भूल जाते है, तो वह ज़िन्दगी के हर पड़ाव में हार जाते है।

सहनशीलता आपको हर परिस्थिति में एक उम्मीद की किरण देती है और उस से निकलने का साहस भी।

‘सहनशीलता’ शब्द दो शब्दों की संधि से बना है, सहन + शील। इस प्रकार एक व्यक्ति को दो बाते कभी नहीं भूलनी चाहिए – १)सहनशक्ति होना २)शील स्वभाव। परिस्तितियो में किये गए समझोते को सहनशीलता का नाम नहीं दिया जा सकता। ऐसी स्थिति में एक व्यक्ति खुद को बोझ में दबा हुआ महसूस करता है। शील स्वभाव का मतलब है- धैर्य, त्याग, संतोष तथा सहजता।

असहनशील व्यक्ति हमेशा अपने आप से असंतुष्ट होता है। सहनशील व्यक्ति के अभाव में, असहनशील व्यक्ति अपने आप पर नियंत्रण खो देता है। सहनशीलता व्यक्ति को सोचने का सही विवेक प्रदान करती है। अधैर्य या क्रोध की स्तिथि में मानव इसे, यानी विवेक को भूल जाता है। सहनशील व्यक्ति हमेशा उदार होता है। असहशीलता, व्यक्ति में तनाव बढाती है।

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समय की मार भी एक सहनशील व्यक्ति को नहीं हरा सकता।

आज का आदमी तो बहुत ही स्वार्थी हो गया है। दुनिया में हर कोई एक दूसरे को ठगने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में आदमी का अपनी स्तिथि मव टिकना बड़ा मुश्किल लगता है, लेकिन जो व्यक्ति सहनशील होते है, वह लोग खराब से खराब स्तिथि में भी खुद को अनुकूल बना लेते है और सदैव खुश व संतुष्ट रहते है। प्रतिकूल परिस्थितिया हमारी परीक्षा लेने के लिए होती हैं। जो व्यक्ति आत्मविश्वास व सहनशीलता का धनी है, वह बड़े ही आसानी से इन पर विजय प्राप्त कर लेगा।

सहनशीलता वह कसौटी है जिस पर खरा उतर कर व्यक्ति साधारण नहीं रहता, महान बन जाता है। उसका दृष्टिकोण बदल जाता है। सहनशीलता एक व्यक्ति को सत्य-असत्य का पारखी बना देती है। दुनिया में आजतक जितने भी महान पुरुष हुए है, वो सभी सहनशीलता के कारण हुए है।

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