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बच्चों में ज्यादा शिकायतें करने की आदत में इन टिप्स से लाएं सुधार

क्या आप भी परेशान है अपने बच्चे की शिकायत करने की आदत से


आज के समय पर माता पिता अपने बच्चों की कुछ आदतों को लेकर बहुत ज्यादा परेशान रहते है जैसे आज के समय पर अक्सर बच्चे बोलते रहते है मुझे ये नहीं करना, मुझे ये मुझे पसंद नहीं, बाहर बहुत गर्मी है, दिनभर ऐसी शिकायतें करते रहते है। जिन्हें सुन कर न सिर्फ माता पिता परेशान हो जाते हैं बल्कि घर के बाकी लोग भी परेशान हो जाते है। हां ये बात अलग है कि बच्चे मूडी ज़रूर होते हैं, उनकी भी अपनी पसंद नापसंद होती हैं लेकिन जब बात हो बच्चे की हर बात पर शिकायत करने की तो ये कहीं न कहींआपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं है। अगर आप अपने बच्चे की इस आदत को अभी नहीं रोकेंगे तो कुछ समय बाद उनके दोस्त भी उनसे दूर हो जाएंगे। तो चलिए जानते है उन टिप्स के बारे में, जो आपको अपने बच्चे की शिकायत की आदत को सुधारने में काम आएंगे।

बच्चे को बताएं ये ठीक नहीं है: आज के समय पर सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े लोग भी हर छोटी छोटी बात पर शिकायत लेकर बैठे रहते हैं। बच्चों को तो पता ही नहीं होता कि वो कितनी शिकायत कर रहे हैं। बच्चे हर थोड़ी देर में किसी ना किसी शिकायत के साथ आपके पास आ ही जाते है। ऐसे में आपको बच्चों की शिकायत करने की अंदाज को मोबाइल में रिकॉर्ड कर लेना चाहिए। और कुछ समय बाद बच्चों को दिखाना और समझाना चाहिए कि उनकी अपनी बात मनवाने का ये तरीका ठीक नहीं है।

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पॉजिटिव आउटलुक दें: आप अपने बच्चे की शिकायत पर कैसे रिस्पॉन्स करते है ये बहुत मायने रखता है। अगर आपका बच्चा हर रोज स्कूल जाने में परेशान करता है तो आप उसे बता सकते हैं कि आप जब छोटे थे तो स्कूल जाना कितना एंजॉय करते थे। आज के समय पर बच्चे दोस्त के साथ खेलते समय या टीचर के साथ पढ़ते समय हर बात पर किसी ना किसी शिकायत के साथ आपके सामने आ जाते है। इस बात से आपको चिड़चिड़ नहीं होना चाहिए बल्कि आपको अपने बच्चे को पॉजिटिव तरीके से समझना चाहिए।

सिखाएं ग्रैटिट्यूड: अगर आपका बच्चा बात बात पर नेगेटिव हो रहा है तो उसका नज़रिया बदलना आपकी ज़िम्मेदारी है। आपको अपने बच्चे को समझना चाहिए कि जीवन में पॉजिटिव आउटलुक होना क्यों ज़रूरी है। उन्हें समझाएं जो चीज़ उनके पास है उसके प्रति कृतज्ञ होना ज़रूरी है। और यह आपको खुद भी फॉलो  करना चाहिए। आपको बच्चे को समझना चाहिए कि अगर आपके पास कुछ नहीं है तो उसके लिए रोने की जगह जो चीजे आपके पास है उनके लिए खुश रहे।

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अगर आप भी गुस्से में करते है अपने बच्चों की पिटाई, तो जाने इसका उनके व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ेगा

बच्चों की पिटाई करने से उनके व्यवहार पर पड़ता है नकारात्मक प्रभाव


शादी एक ऐसी चीज है जो सिर्फ दो लोगों के जीवन में खुशियां नहीं लाती बल्कि दो परिवारों के जीवन को जोड़ती है। जब किसी कपल की शादी होती है तो वो बेहद खुश होते है। और अपनी आने वाले जिंदगी के लिए कई प्लान करते है। हमारे देश में कहा जाता है कि शादी की खुशी किसी भी लड़के और लड़की के लिए काफी बड़ी होती है लेकिन ये खुशी तब दोगुनी हो जाती है जब उनके जीवन में एक बच्चा आ जाता है। फिर वो कपल माता पिता बनकर अपने बच्चे को पड़े ही लाड प्यार से पालते हैं। लेकिन कई बार गलती होने पर ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों को डांटने के साथ ही उन पर हाथ भी उठा लेते है। लेकिन क्या बच्चों की पिटाई करना सही है? और क्या पिटाई करने से बच्चे सुधरते हैं या फिर और बिगड़ते हैं ? तो चलिए जानते है ऐसी कुछ सवालों के बारे में। अभी हाल ही में एक अध्ययन सामने आया, जिसके मुताबिक बच्चों के व्यवहार में सुधार लाने के लिए पीटना या उन पर हाथ उठाने से बच्चों के व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।

जाने क्या बताती है यूसीएल की रिपोर्ट

आपको बता दे कि हाल ही में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन यानी यूसीएल और विशेषज्ञों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने बच्चों को थप्पड़ मारना और उनको पीटने को लेकर एक अध्ययन किया है। आपको बता दे कि ‘द लासेंट’ जर्नल में प्रकाशित हुए इस अध्ययन में दुनिया भर के उन 69 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन में बच्चों पर एक अरसे तक नजर रखी गई और उनके साथ डाटने, मारने, पीटने जैसी चीजें की गयी थी जिसके परिणामों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

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जाने क्या कहती है इस समीक्षा अध्ययन की मुख्य लेखिका

आपको बता कि यूसीएल और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर के दो से चार साल की उम्र के 63 फीसदी यानि की 25 करोड़ बच्चे अपने माता-पिता या फिर जो भी लोग उनकी देखभाल करते है उनके द्वारा शारीरिक दंड का शिकार होते है। आपको बता दे कि इस समीक्षा अध्ययन की मुख्य लेखिका और यूसीएल की महामारी विज्ञान एवं लोक स्वास्थ्य की डॉक्टर अंजा हेलेन ने बताया कि ‘बच्चों के साथ मारपीट करना अप्रभावी और नुकसानदेह है, इससे न तो बच्चों को कोई लाभ होना न उनके परिवार वालो को। इससे सिर्फ बच्चों का व्यवहार नकारात्मक होगा।

जाने बच्चों को पीटने पर किस देश में है रोक

ये बात तो हम सभी लोग जानते हैं कि हमारे देश में माता पिता कभी बच्चों की पढ़ाई को लेकर तो कभी उनकी गलती की वजह से उन्हें शारीरिक दंड देते है। लेकिन कई देश ऐसे भी है जहां इस पर रोक है। आपको बता दे कि स्कॉटलैंड और वेल्स समेत 62 देशों में बच्चों को उनके माता पिता या किसी अन्य द्वारा बच्चों को शारीरिक दंड देने पर रोक लग चुकी है। अभी विशेषज्ञों की मांग है कि ये नियम सभी जगह लागू हो।

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लाइफस्टाइल

जाने क्यों माना जाता है दादा दादी का साथ बच्चों के लिए जरूरी और बेहद खास

चलिए जानते है अच्छी परवरिश और अच्छे संस्कारों के लिए क्यों जरूरी है दादा दादी और नाना नानी का साथ


एक समय था जब हमारे घरों में बुजुर्गों से ही रौनक हुआ करती थी। माता पिता और दादा दादी सभी लोग मिलकर बच्चों को अच्छे संस्कार और एक अच्छी परवरिश दिया करते थे। आज अगर आप किसी के भी घर जायेगे तो आप देखेंगे ज्यादातर घरों में बच्चे अपना खाली समय या तो घटों फोन में  बिताते हैं या फिर टीवी देख कर। आज के समय में तो मानो दादा-दादी और नाना नानी की कहानियां जैसे कही खो ही गई हैं। अगर आप अपने बच्चों को एक अच्छी परवरिश देना चाहते है लेकिन शायद कहीं न कहीं हम इस फैक्ट को भूल जाते हैं कि बच्चों को एक अच्छी परवरिश और संस्कार देने में दादा-दादी, नाना-नानी का साथ, उनका प्यार , उनका मार्गदर्शन और उनका आशीर्वाद एक अहम भूमिका निभाता है। अगर आप भी एक अच्छे पैरेंटिंग के टिप्स ढूंढ रहे है तो यह बात अच्छे से समझ लें कि आपके बच्चे के लिए जितने जरूरी आप है उतने ही जरूरी उनके दादा दादी और नाना नानी भी है कैसे चलिए जानते है।

दादा दादी और नाना नानी के कारण घर में बना रहता है खुशनुमा वातावरण

जिस घर में बच्चों के पास दादा दादी या नाना नानी होते है उस घर के बच्चों को फोन या फिर टीवी देख कर अपना टाइम बिताने की जरूरत नहीं पड़ती। जब माता पिता अपने काम में लगे रहते हैं तो बच्चे अपने दादा दादी या नाना नानी के साथ अपना क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं इससें दोनों को एक दूसरे को सुनने और समझने का मौका मिल जाता है। आज के समय में लोगों का लाइफस्टाइल इतना व्यस्त होता है कि उनका पास किसी के साथ बैठ कर बात करने का या फिर सोशलाइजिंग का समय नहीं होता है। ऐसे में बच्चों का दादा दादी या नाना नानी के साथ बांड वाकई में बेहतरीन और अनमोल होता है। जिसके कारण घर में हमेशा खुशनुमा वातावरण बना रहता है।

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अच्छे संस्कार और संस्कृति

डिजिटल दुनिया से जितना हमें फायदा मिल रहा है उतना ही हमें नुकसान भी हो रहा है। आज के इस डिजिटल एरा के कारण हम अपने परिवार वालों से धीरे धीरे दूर होते जा रहे है। फोन से भले हमे पल भर में देश दुनिया की खबर मिल जाती है लेकिन इसके कारण ही आप अपने परिवार से धीरे धीरे दूर हो रहे है।अगर दादा दादी और नाना नानी साथ होते तो बच्चों को अपनी भाषा और अपनी संस्कृति का पता चलता है। आपने देखा होगा कि वर्किंग पैरेटस कई जगह पर रिवाजों के साथ कॉम्प्रोमाइज कर लेते हैं लेकिन अगर घर पर तीज त्योहारों पर कोई बुजुर्ग होता है तो वो हमे बताते रहते है कि किस त्यौहार में क्या पकवान बनाने है, कब व्रत करना है, किस दिन कौन सी पूजा होनी है। जिसके कारण हमारे साथ साथ हमारे बच्चे भी ये सारी चीजे सीखते रहते है।

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वीमेन टॉक

Mother’s Day special: जाने कोरोना महामारी के बीच कैसे मनाएं मदर्स डे

लॉकडाउन के दौरान कुछ ऐसे प्लान करें अपनी माँ के लिए सरप्राइज


जैसा की हम सभी लोग जानते है कि इस समय हमारा पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। और इस समय देश के कई राज्यों में लॉकडाउन भी लगा हुआ है। इसी बीच मदर्स डे आ रहा है। और लॉकडाउन के कारण न तो आप अपनी माँ को सरप्राइज ट्रैवल टिकिट दे सकते हैं और ना ही कही डिनर पर ले जा सकते है। बल्कि इस बार तो कई लोगों के लिए गिफ्ट देना भी काफी ज्यादा मुश्किल हो गया है एक तरफ तो लॉकडाउन दूसरी तरफ पैसों की किलत। क्योकि इस कोरोना लॉकडाउन के कारण कई लोगों ने अपनी नौकरियां खो दी है। लेकिन इन सबके बीच भी आप अपनी माँ को स्‍पेशल फील करा सकते है। हर साल मदर्स डे मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। और इस दिन का खासा उत्‍साह पूरी दुनिया में देखने को मिलता है। हमे उम्मीद है कि इस बार भी लॉकडाउन इस उत्‍साह को कम नहीं कर पाएगा। अगर आप अपनी माँ के पास है तो इस बार आप भी उनको स्पेशल फील करने के लिए ये आइडियाज ट्राई कर सकते है।

लंच या डिनर: अगर आप भी उन लोगों में से है जो इस कोरोना महामारी के बीच भी अपने माँ पापा के पास है तो आपके माँ पापा के लिए इससे बड़ा और अच्छा सरप्राइज और गिफ्ट और कुछ हो ही नहीं सकता है। आप चाहो तो मदर्स डे के मौके पर अपनी माँ के लिए घर पर ही उनका पसंदीदा लंच या डिनर बना सकते है। सबसे जरूरी, ऐसे खास मौके पर एक साथ समय बिताना सबसे ज्यादा मायने रखता है।

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ओटीटी: अगर आपकी माँ भी डिजि‍टल दुनिया से सक्रिय नहीं हैं तो इस मदर्स डे आप उनको इस डिजि‍टल दुनिया से सक्रिय करा सकते है। आप उन्हें  किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स, ZEE5, अमेज़ॅन प्राइम, हॉटस्टार की कोई शानदार वेब-सीरीज या फिर फिल्म दिखा सकते है। और उनका ये दिन स्पेशल बना सकते है।

केक बनाएं: इस मदर्स डे शेफ की कैप लगाओ और अपनी माँ के लिए स्पेशल केक या मफिन बनाओ। हम में से कई लोग ऐसे भी होते है जिनका अपने पैरेंट्स के लिए कुछ स्‍पेशल करने की इच्‍छा होती है लेकिन समय की कमी के कारण हम कुछ कर नहीं पाते। तो अब मौका है आप अपनी माँ के लिए मदर्स डे पर एक स्पेशल केक या मफिन बना सकते है।

डांस-गाना: आप इस लॉकडाउन का सबसे अच्छा फायदा मदर्स डे मनाने के लिए उठा सकते है। अगर आपकी माँ उन लोगों में से है जिनको डांस-गाना पसंद है तो आप उनके लिए घर में कुछ स्नैक्स बनाएं और डांस-गाने की पार्टी कर लें। और अपनी माँ के साथ डांस करें। और उनके पसंदीदा गाने सुनें और उन्‍हें भी गाने के लिए कहें।

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सेहत

अगर आप भी है परेशान अपने टीनेजर्स बच्चे के मानसिक समस्याओं से, तो कुछ इस तरह करें इलाज

जानें क्यों होती है टीनेजर्स बच्चों में मानसिक समस्याएं


बचपन और टीनएज दोनों ऐसी एज होती है जिसमें बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बहुत तेजी से होता है। जिनमें से कुछ बदलाव तो हर बच्चे में प्राकृतिक रूप से होता है तो कुछ बदलाव ऐसे भी होते है जो बच्चों में उनके आस पास के माहौल, वातावरण आदि की वजह से नजर आते है। आज के समय में बच्चों में बहुत छोटी उम्र में स्कूल, पढ़ाई और बिगड़ते माहौल की वजह से स्ट्रेस देखा जाने लगा है। जिसके कारण आज के समय में बच्चे बहुत छोटी उम्र में ही आस पास के माहौल, परिवार की उदासीनता, लड़ाई-झगड़े और हिंसा के चलते मानसिक रोग के शिकार हो जाते है। यह बच्चों की बेहद चिंताजनक स्थिति है। क्योंकि जिस उम्र में बच्चों को खेलना कूदना और नयी चीजें सीखनी चाहिए उस उम्र में बच्चे मानसिक समस्याओं के शिकार हो रहे है। तो चलिए आज हम आपको बतायेगे माता पिता होने के नाते आप कैसे अपने टीनेजर्स बच्चे के मानसिक समस्याओं को दूर कर सकते है।

ईटिंग डिसऑर्डर: क्या आपको पता है टीनेजर्स बच्चों में बहुत ज्यादा स्ट्रेस में होने पर या तो बहुत अधिक खाने लगते है या फिर बिलकुल ही खाना छोड़ देते हैं। इस तरह के ईटिंग डिसऑर्डर लड़कों की तुलना में लड़कियों में ज्यादा होते है। ऐसा उनमें कई बार बॉडी इमेज ईशु की वजह से भी होता है। ऐसे समय में आपको अपने बच्चे की हेल्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए उससे समय पर खाना खिलाना चाहिए और उसके साथ एक दोस्त की तरह बर्ताव करना चाहिए।

मूड डिसऑर्डर: बच्चों में मूड डिसऑर्डर होना यह एक बहुत ही कॉमन मानसिक समस्या है। इसके चलते बहुत ही कम उम्र में बच्चों का मूड और व्यवहार बदल जाता है। मूड डिसऑर्डर के कारण कई बार तो बच्चे बहुत ज्यादा उदास हो जाते है तो कई बार बहुत ज्यादा हाइपरएक्टिव नजर आते हैं। बच्चों में डिप्रेशन, उदासी, नाराजगी और बाइपोलर जैसी चीजें होना मूड डिसऑर्डर की निशानियां होती है जो बच्चों में आम तौर पर देखी जाती है। इसलिए ऐसे समय में आपको अपने बच्चे को समझना चाहिए और जब वो बहुत ज्यादा उदास हो तो आपको उसका दोस्त बनना चाहिए ताकि वो बाहर किसी से अपनी चीजें शेयर करने की जगह आपसे करें और आप उससे सही रास्ता दिखा पाएं।

एंजायटी डिसऑर्डर: आपने देखा होगा कि बहुत सारे बच्चों में सोशल एंजायटी होती है तो बहुत सारे बच्चे तरह-तरह के डरों से घिरे होते है। टीनएज में ये डर बहुत खुलकर कर बच्चों के सामने नहीं आता। लेकिन अगर बात हो पढ़ाई, करियर या किसी खास मामले की तो ये डर खुलकर बच्चों के चेहरे पर दिखता है। इस स्थिति में आपको अपने बच्चे के साथ खड़ा रहना चाहिए और उसे इस बात का विश्वास दिलाना चाहिए कि चाहे कुछ भी हो जाये आप उसके साथ हैं।

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मनोरंजन

बॉलीवुड सितारें जो सरोगेसी की सहायता से बने माता पिता

इन सितारों ने माता पिता बने के लिए किराए पर ली कोख


Bollywood stars who became parents with the help of surrogacy

इस दुनिया में हर व्यक्ति माता पिता बनने का सपना देखता है। फिर चाहे वो गरीब हो या आमीर। हर व्यक्ति माता पिता बनने का आनंद उठाना पसंद करता है। हालांकि कुछ निजी कारणों की वजह से हर महिला 9 महीने तक अपने पेट में बच्चा नहीं पाल सकती है। जिसके कारण उनको लगता है कि शायद अब वो माता पिता बनने का सुख नहीं उठा पाएंगे।लेकिन आज के समय में ऐसे महिलाओं के लिए जो किसी निजी कारण से 9 महीने तक अपने पेट में बच्चा नहीं रख सकती है। उनके लिए सरोगेसी का ऑप्शन काम आता है। सरोगेसी के द्वारा माता पिता के अंडाणु और शुक्राणु को एक टेस्ट ट्यूब में मिलाकार फ़र्टिलाइज किया जाता हैं और उसके बाद किराए की कोख देने वाली एक महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता हैं। इस तरह से बच्चे का डीएनए माता पिता का ही होता हैं। बस 9 महीने उस बच्चे की परवरिश एक दूसरी महिला करती है। तो चलिए आज हम आपको कुछ ऐसे बॉलीवुड सितारों के बारे में बतायेगे जिन्होंने माता पिता बनने के लिए सरोगेसी की सहायता ली।

शिल्पा शेट्टी: साल 2020 में 15 फरवरी को शिल्पा शेट्टी ने 7 साल बाद सरोगेसी के माध्यम से एक प्यारी सी बच्ची ‘समीषा’ को जन्म दिया। जब शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा ने यह जानकारी अपने फैंस को सोशल मीडिया पर दी तो सभी लोग हैरान हो गए थे।

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Image source – bollywood shaadis

आमिर खान: आमिर खान और उनकी दूसरी पत्नी किरण राव ने भी सरोगेसी के माध्यम से एक प्यारे से बेटे आजाद’ को जन्म दिया। इससे पहले भी आमिर खान दो बार पिता बन चुके है उनके दो बच्चे उनकी पहली पत्नी रीना दत्ता से है रीना दत्ता ने दोनों बच्चों को सामान्य तरीके से ही जन्म दिया था।

सनी लियॉन: सनी लियॉन और उनके पति डेनियल वेबर ने साल 2017 में दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। उन्होंने अपने जुड़वा बच्चों का नाम अशर और नोहा रखा है। सनी लियॉन के ये दोनों बच्चे सरोगेसी के माध्यम से ही हुए थे। साथ ही आपको ये भी बता दें कि सनी लियॉन ने इन दो जुड़वा बच्चों को जन्म देने से पहले एक बेटी ‘निशा’ को भी गोद लिया था

सोहेल खान: सलमान खान के भाई सोहेल खान और उनकी पत्नी सीमा ने भी सरोगेसी के माध्यम से एक बच्चे को जन्म दिया था। जिसका नाम उन्होंने ‘योहान’ रखा था। साथ ही आपको ये भी बता दे कि योहान से पहले भी सोहेल खान और सीमा एक बच्चे को जन्म दे चुके है।

शाहरुख़ खान: किंग ऑफ़ बॉलीवुड यानि की शाहरुख़ खान और उनकी पत्नी गौरी खान ने भी अपने सबसे छोटे बच्चे ‘अब्राहम’ को सरोगेसी के माध्यम से ही जन्म दिया था। आपको बता दे कि शाहरुख़ खान और गौरी खान के तीन बच्चे आर्यन, सुहाना और अब्राहम हैं।

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अगर आपका बच्चा भी कर रहा है परीक्षा की तैयारी, तो ये चीजे करे उसकी डाइट में शामिल, दिमाग बनेगा तेज

दिमाग तेज करने के लिए इन चीजों को करे अपने बच्चे की डाइट में शामिल


 

अपने देखा होगा कि जब भी बच्चों के परीक्षा आने वाली होती है तो उससे पहले वो बहुत ज्यादा परेशान हो जाते है कि इतना कुछ कैसे याद करें। इसके लिए वो रात-रात भर जगकर पड़ते रहते है। उनके मन में भी एक अजीब सा डर रहता है। अपना सारा सिलेबस याद करने के लिए वो दिन रात मेहनत करते है साथ ही अपने दिमाग को तेज करने के लिए तमाम कोशिशें करते हैं जिनसे उन्हें लाभ मिल सके। लेकिन बच्चे ये नहीं समझ पाते कि कुछ भी याद करने और पढ़ाई करने के लिए उनका तंदुरुस्त होना बेहद जरूरी है। लेकिन आपको माता पिता होने के नाते अपने बच्चे का ध्यान रखना चाहिए और उसकी डाइट में ऐसी चीजे शामिल करनी चाहिए जिसे उसका दिमाग तेज हो। तो चलिए आज हम आपको कुछ चीजों के बारे में बताने जा रहे है जिसे डाइट में शामिल करने के बाद आपके बच्चे का दिमाग तेज बनेगा।

 

सेब: अगर आपका बच्चा स्कूल में है और उसकी परीक्षा आने वाली है तो आपको आपने बच्चे की डाइट में डेली एक सेब को शामिल करना चाहिए। क्योकि जब भी बच्चे एग्जाम के लिए तैयारी करते हैं, तो कई बार वो कई चीजें याद नहीं हो पाती है ऐसे में रोजना एक सेब का सेवन आपके बच्चे के दिमाग को तेज बनाएगा। क्योकि सेब में क्यूरसेटिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो हमारे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करता है।

 

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अड़ा: अगर आपको अंडे खाना पसंद है तो ये आपके लिए एक अच्छी चीज है। क्योकि अंडे आपके दिमाग को तेज करने में आपकी काफी मदद कर सकते हैं। अंडे में बहुत सारे पोषक तत्व मौजूद होते है। शायद इसी लिए अंडे को प्रकृति के मल्टीविटामिन के रूप में जाना जाता है। अंडे में विाटमिनबी6, बी12, कोलीन, और फोलिक एसिड पाया जाता है।

 

सोया: सोया बच्चों के दिमाग को तेज बनाने में हमारी मदद करता है। इसके सेवन से बच्चों को चीजें याद रखने में काफी मदद मिलती है। सोया में पॉलीफेनोल्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। सोया बच्चों की याददाश्त को सही रखने में भी हमारी मदद करता है। इतना ही नहीं सोया में आइसोफ्लेवोन्स नाम का पॉलीफेनोल्स होता है, जो केमिकल एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करने के लिए जाना जाता है।

 

मांसाहारी खाना: अगर आपकी फॅमिली मांसाहारी है तो इसका फायदा आपके बच्चे को भी मिलेगा। क्योकि मछली खाने से आपके बच्चे का दिमाग तेज होगा। इससे आपके बच्चे को परीक्षा के समय चीजे याद करने में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो हमारे बच्चे के दिमाग की हेल्थ को दुरुस्त करने के लिए काफी जरूरी होता है।

 

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स्कूलों की तानाशाही, एफडी तोड़ बच्चों की फीस भरने को मजबूर है अभिभावक 

निजी स्कूलों ने दी अभिभावक को चेतावनी, फीस न भरने पर परीक्षाओं में नहीं बैठ पाएंगे बच्चे


मिलेनियम सिटी में अपने बच्चों को प्राइवेट और बड़े स्कूलों में पढ़ाना लोगों का सपना होता है. लोगों को लगता है है कि जितने बड़े स्कूल में उनका बच्चा पढ़ेगा उतनी ज्यादा उनकी शान बढ़ेगी. हर साल अभिभावक इन स्कूलों में लाखो रुपये की फीस भरते है. लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण सभी लोगों का बजट बिगड़ा गया है. कई अभिभावकों की नौकरी चली गई तो कई की सैलरी में कटौती कर दी गई . आलम यह अब यह है कि अभिभावक बच्चों की स्कूल भरने के लिए अपनी ज्वेलरी बेच रहे हैं और एफडी तुड़वा रहे हैं. इसके पीछे कारण यह है कि इस बार प्राइवेट और बड़े स्कूल अभिभावकों पर फीस का दबाव बनाने के लिए अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं और बोर्ड की परीक्षाओं का हवाला दे रहे हैं. यहाँ तक की स्कूलों ने अभिभावकों को फीस न भरने पर निजी स्कूल परीक्षाओं में बच्चों को न बिठाने की चेतावनी भी दे दी है.

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स्कूल की फीस भरने के बाद ही अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में बैठ पाएंगे स्टूडेंट्स 

हाल ही में सोशल मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार गुरुग्राम अभिभावक संगठन के सदस्य हिमांशु शर्मा ने बताया कि बहुत से अभिभावक फीस न भर पाने के कारण इतना परेशान हो चुके है कि अब उन्हें इसके लिए अपनी एफडी तुड़वानी पड़ी.  यहाँ तक की कुछ अभिभावकों ने इसके लिए अपनी ज्वेलरी भी गिरवी रखी है. अभिभावक बच्चे का नाम स्कूल से न कटे इसके लिए अब तक लाखों रुपये स्कूल में भर चुके है. अभिभावकों का कहना है कि अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है. इसलिए मजबूरी में उन्होंने अपनी एफडी तुड़वाई और ज्वेलरी भी गिरवी रखी है.

40 हजार से ज्यादा छात्रों ने छोड़े निजी स्कूल

जुलाई तक हरियाणा में 43,293 छात्र निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिशन ले चुके है. जिसमें से 2453 स्कूल गुरुग्राम से हैं. और 2074 छात्र फरीदाबाद के निजी स्कूलों को छोड़ चुके हैं. अभी यह आंकड़ा और भी बढ़ता जा रहा है. निदेशालय जल्द ही सोशल मीडिया पर दूसरी रिपोर्ट भी पेश करेगा. गुरुग्राम में बहुत बड़ी संख्या में ऐसे अभिभावकों भी है, जो अपने बच्चों का स्कूल छुड़वा कर घर पर बिठा चुके हैं.

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5 तरीके जिनसे लॉकडाउन के दौरान आप रख सकते है अपनी मां की सेहत का ख्याल

जाने कैसे रखें अपनी मां की सेहत का ख्याल


ये माँ की दुनिया भी कितनी अजीब होती है न. इनके पास पूरे परिवार के लिए बहुत सारा समय होता है. लेकिन अपने लिए एक मिनट भी नहीं होता. जिसका नतीजा यह होता है कि उम्र के साथ उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है. छोटी-मोटी परेशानियां जिनको वो हमारे कारण अनदेखा कर देती है वो एक बड़ा रूप धारण कर लेती हैं. माँ बच्चे के जन्म से ले कर सालों तक उसकी देखभाल करती है. उसका ध्यान रखती है. इसलिए बच्चों को भी बड़ा होने के बाद अपनी माँ का ख्याल उसी तरह रखना चाहिए. जैसे माँ बच्चे का बचपन में रखती है. जैसा कि हम लोग देख रहे है कि पिछले कुछ महीनों से देश में कोरोना महामारी चल रही है जिसके कारण पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ है और हम अपने घरों से बाहर नहीं जा पा रहे. ज्यादातर लोग अपने घरों से ही काम कर रहे है. और ऐसे में ये एक अच्छा समय है जब आप अपनी माँ को समय दे सकते हैं और उनका ध्यान रख सकते हो. तो चलिए आज आपको माँ का ध्यान रखने के लिए कुछ टिप्स बताते हैं. 

एक्सरसाइज: माना की माँ को समझना आसान नहीं होता, लेकिन ये भी सच है कि सेहतमंद रहने के लिए एक्टिव रहना बेहद जरूरी है इस लिए अपनी माँ को सेहतमंद रखने के लिए उन्हें कुछ एक्सरसाइज करने के लिए मनाएं. ऐसी बहुत सारी एक्सरसाइज हैं जो आप उन्हें घर पर ही करा सकते हैं. 

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उनकी दोस्त बनें: जैसा की हम लोग देख रहे है कि पिछले कुछ समय से पूरे देश में कोरोना वायरस फैला हुआ है जिसका सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्ग लोगों को ही है. ऐसे में आपके माता पिता का डर में होना और चिंतित होना स्वभाविक है.  आप उन लोगों के साथ बैठे, उनसे बात करें. उनके साथ एक दोस्त की तरह पेश आएं. ऐसे समय में आप अपने माता पिता को हौसला दे सकते है. उनके डर को कम करने की कोशिश कर सकते है.

रेगुलर हेल्थ चेकअप: उम्र बढ़ने के साथ आपकी माँ को कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. जिन्हे अक्सर वो लापरवाही में अनदेखा कर देती है. इस समय कोरोना लॉकडाउन के कारण आप घर पर हैं. तो आप अपनी माँ का रेगुलर हेल्थ चेकअप करा सकते है. इससे आपको पता चलेगा कि आपकी माँ के शरीर के किस भाग को ज्यादा केयर की जरूरत है.

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मेन्टल हेल्थ के बारे मे खुल कर बात करना है जरूरी क्योंकि ये हैं ‘Need of the hour’

डिप्रेशन से बचने के लिए जरूरी है ये बातें


जैसा की हम सब लोग देख रहे है कि पिछले कुछ समय से कोरोना वायरस ने अपना कहर मचाया हुआ है जिसने सभी लोगों का लाइफस्टाइल ही बदलकर रख दिया है। पिछले कुछ महीनों से कोरोना वायरस के कारण भारत सहित दुनिया के ज्यादातर देशों ने लॉकडाउन लगाया हुआ था। लेकिन लॉकडाउन होने के बाद भी कोरोना वायरस खत्म या कम होने का नाम ही नहीं ले रहा। स्कूल के बच्चों और कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट और युवाओं पर भी कोरोना वायरस की दोहरी मार पड़ी रही है जिसके कारण बच्चों के भविष्य को निखारने वाले स्कूल और कॉलेज सभी चीजे बंद हो चुके पड़े  है। बच्चों बड़ो सभी का अपने दोस्तों से मिलना जुलना खेलना-कूदना सब बंद हो चुका है। जिसके कारण सभी लोग अपने घरों पर ही और ये बातें इंसान के डिप्रेशन का कारण बन सकती है। इस समय बच्चों और युवाओं का चुप रहना भी बेहद खतरनाक हो सकता है।

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कैसे बचे डिप्रेशन से?

अभी हालात कुछ ऐसे बन चुके है कि हम अपने घरों से बाहर नहीं जा पा रहे है अपने किसी संबंधी से नहीं मिल पा रहे है। ऐसे में निश्चित तौर पर ऐसे हालात बच्चों और युवाओं को डिप्रेशन की ओर ले जा सकता है। ऐसी परिस्थिति में माता पिता को अपने बच्चों का मजबूत सपोर्ट बनना चाहिए उनके साथ दोस्तों की तरह  व्यवहार करना चाहिए। साथ ही बच्चों को भी ध्यान रखना चाहिए कि वो अपने माता पिता से कुछ छुपाये ।

नेगेटिव बातें न सोचें

ये ऐसा समय है जब आपको नेगेटिव बातें नहीं सोचनी चाहिए। हमेशा पॉजिटिव सोचना चाहिए। माना पिछले कुछ समय से कोरोना ने अपना कहर मचाया हुआ है और आपको सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना पड़ रहा है। जरा सोचिए, अगर यह कोरोना वायरस महामारी आज से 50-60 साल पहले हुई होती तो क्या होता। आज हमारे पास टेक्नोलॉजी है हम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों से जुड़ सकते है बात कर सकते है डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही फिल्मे देख सकते है और अपने मनोचिकित्सकों की सलाह ले सकते है। बच्चे भी ऑनलाइन अपनी पढ़ाई कर सकते है आज हमारे पास ये सारी चीजें है जो हमारे पास आज से 50-60 साल पहले नहीं थी इस लिए आपको हमेशा  पॉजिटिव सोचना चाहिए। जो चीजें आपके पास है उनके साथ खुश रहना चाहिए।

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