Categories
काम की बात करोना

कानपुर के दो भाईयों ने शुरु की फ्री मेडिकल सेवा, कोरोना में लोगों की ऐसे कर रहे हैं मदद

बिना किसी वैरिफिकेशन के लोगों को दी जाती हैं, मेडिकल सुविधा


भारत अनेकता में एकता वाला देश हैं। जहां कई धर्म जाति के लोग एक साथ रहते हैं। यहां के भाईचारे की पूरी दुनिया में मिसाल है। ऐसी ही मिसाल कोरोना के इस दौर में भी देखने के मिल रही है। मुसीबत की इस घड़ी में हर कोई एक-दूसरे की मदद करके लोगों को बचाना चाह रहा है। कोई किसी को दो टाइम की रोटी देकर तो कोई किसी को मेडिकल की सुविधा देकर। ऐसी ही एक मदद कानपुर के दो भाई कर रहे हैं। जिन्होंने गुरुनानक मेडिकल सेवा एनजीओ की मदद से लोगों तक दवाईयों की सुविधा पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। इतना ही नहीं कोरोना के इस दौर में लोगों तक ऑक्सीजन की मदद पहुंच रहे हैं। तो चलिए आज जानते हैं गुरुनानक मेडिकल सेवा के बारे में…

तीन साल पहले शुरु की सेवा

कानपुर निवासी दविंदर सिंह और उनके भाई गुरप्रीत सिंह लोगों को मेडिकल की सेवा दे रहे हैं। दविंदर सिंह का कहना है कि उन्होंने यह सेवा तीन साल पहले शुरु की थी। इसको शुरु करने के पीछे मुख्य मकसद था कि दवाई के अभाव किसी को अपनी जान न गंवानी पड़े। दविंदर सिंह और उनके भाई मुख्य रुप से बिजनेसमैन हैं। यह एनजीओ उन्होंने लोगों को सेवा के लिए खोला है। ताकि किसी गरीब की जान बचाई जा सकें।

और पढ़ें: 1 जून से Google बंद कर देगा अपनी मुफ्त सर्विस, अब आपको इसके लिए खर्च करने पड़ेगे इतने रुपये

कानपुर में लोगों को पोटेब्ल ऑक्सीजन बांटा जा रहा है

कोरोना के इस दौर में जब लोग अपनी-अपनी जान बचाने के लिए परेशान हैं तो इस मुश्किल दौर में भी इन दोनों भाईयों ने लोगों की जान बचाने के बारे में सोचा है। दविंदर सिंह से जब हमने बात करके कोरोना के इस दौर में उनके द्वारा दी जा रही मेडिकल सुविधा के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि फिलहाल वह लोगों को पोटेब्ल ऑक्सीजन कन्टेंर दे रहे हैं। ताकि किसी व्यक्ति को बहुत इमरजेंसी हो तो वह छह से सात घंटे के लिए इसे इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन अब हम ऑक्सीजन सिलेंडर फील करने का भी काम शुरु करेंगे। कोई भी व्यक्ति इस सुविधा का लाभ ले सकता है।

कानपुर के दो भाईयों ने शुरु की फ्री मेडिकल सेवा, कोरोना में लोगों की ऐसे कर रहे हैं मदद

अमीर-गरीब कोई भी इस सुविधा का लाभ ले सकता है…

दविंदर बताते हैं कि उन्होंने मेडिकल की इस सुविधा के लिए किसी खास तबके के लोगों को ही नहीं चुना है। बल्कि इसकी सुविधा अमीर गरीब कोई भी ले सकता है। इसके लिए हम कोई वैरिफिकेशन भी नहीं करते हैं। इस बारे में उनका कहना है कि एक तरफ लोग बीमारी से परेशान है दूसरी तरफ वैरिफिकेशन के नाम पर लोगों को परेशान करना सही नहीं है। इसलिए हमारे यहां जो भी आता है। हम उसके लिए हर संभाव मदद करते हैं। मेडिकल सुविधा के साथ-साथ ब्लड की अगर किसी को जरुरत होती है तो उनकी मदद की जाती है।

अगर आप भी कानपुर में रहते है और अगर किसी मेडिकल इमरजेंसी में फंस जाते हैं तो गुरुनानक मेडिकल सेवा से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए आप गुरुनानक मेडिकल सेवा  नाम के फेसबुक पेज पर जाकर इनसे संपर्क कर सकते हैं।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
लेटेस्ट

#SavetheNextVictim:किरण बेदी के इंडियन विज़न संस्था को हुए 25 साल पूरे 

25 सालो में बदल गया कैदियों और उनके परिवार का जीवन


जब कभी नारी सशक्तिकरण की बात होती है  तब भारत की पहली आईपीएस ऑफिसर डॉ किरण बेदी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उन्होंने हमेशा से ही सच  के लिए लड़ाई लड़ी और कई लोगो के जीवन को नई दिशा दी। जी हाँ, आज ही के दिन डॉ किरण को “Ramon Magsaysay Award” से नवाज़ा गया था और इसी दिन डॉ किरण बेदी ने 1 सितम्बर 1996 को “इंडिया विज़न फाउंडेशन” की स्थापना की थी। जिसमे रह रहे सभी केदियो के जीवन को एक नयी दिशा दी गयी।  

आपको बता दे कि 1 सितम्बर  को  इस संस्था को 25 साल पूरे हो चुके है।  इस संस्था  के 25 साल पूरे होने पर सुब्रतो पार्क में स्थित एयर फाॅर्स स्टेडियम में एक इवेंट का आयोजन किया गया जिसकी शुरुआत फाउंडर डॉ किरण बेदी,गेस्ट-मिस्टर वी.एस.के कौमदि और डॉ आर.जी आनंद ने अगरबत्ती जलाकर की।  इस ख़ास मौके कई सारे प्रोग्राम भी हुए. 

25 सालो में बदल गया कैदियों और उनके परिवार का जीवन

इंडिया विज़न संस्था यूपी, महाराष्ट्र और दिल्ली एनसीआर के अन्तर्गत सभी जेलों में रह रहे केदियो को स्किल्स ट्रैंनिंग देता है ताकि जब वो रिहा हो तो बिना समाज के डर और शर्म से अपने जीवन को एक नई दिशा दे और उसे नए सिरे से शुरू करे।  साथ ही इस संस्था के स्थापित होने के बाद 3s मॉडल की भी शुरुआत की गयी थी – शिक्षा ,स्किल और संस्कार। इन तीनो के तहत सभी केदियो को ट्रैंनिंग दी जाती है।   जिसमे म्यूजिक , योग  जैसे प्रोग्राम रखे  गए है।  इन सभी प्रोग्राम  को एक नाम दिया गया है जैसे जो कैदी  म्यूजिक में रूचि रखते है उनको म्यूजिक सिखाने के लिए सोनी  एंटरटेनमेंट द्वारा धुन प्रोग्राम लांच किया गया। इस प्रोग्राम के तहत कैदी म्यूजिक सीखते है और उनके लिए कई  म्यूजिक प्रतियोगिता आयोजित किये जाते है।  

इसके अलावा जेल में जो कैदी अपनी सज़ा काट रहे है इंडिया विज़न संस्था ने उनके बच्चो की पढ़ाई का भी सारा खर्चा उठाते है। जो महिलाएं कैदी है जिनके बच्चे छोटे है और उनके साथ  जेल में रह रहे है उनके लिए जेल के अंदर ही क्रेच खोले गए है. जहाँ उन बच्चो का ख्याल भी रखा जाता है , पढ़ाया जाता है और उन्हें खेल- खेल में ट्रैंनिंग भी दी जाती है।  

इस संस्था ने कई स्कूलों के साथ टाईअप कर रखा है जिसमे इन बच्चो को आगे की पढ़ाई के लिए भेजा जाता है। जिसमे से कुछ बच्चो ने बड़ा मुकाम हासिल भी किया है। उनमें से आज कोई टीचर है तो कोई बैंकिंग सेक्टर में जॉब कर रहा है। इस संस्था ने कई  सारे कैदियों और उनके परिवार का जीवन बदला है,  उन्हें सर उठा कर चलने के लिए  हिम्मत दी।  

जब छोटे बच्चो को जेल में देख कर परेशान हुई थी डॉ किरण बेदी 

इंडियन विज़न संस्था के 25 साल पूरे होने पर फाउंडर डॉ किरण बेदी ने इस संस्था के 25 सालों  के सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे जब वो कैदियों से मिलने तिहाड़ जेल पहुची थी। वहां उन कैदी महिलाओं के साथ छोटे बच्चो को देख कर परेशां हो गयी थी.जिन बच्चो  को स्कूल जाकर पढ़ना चाहिए  था वो अपनी माँ के साथ जेल में सज़ा काट रहे थे। इसलिए उन्होंने उन बच्चो के लिए तिहाड़ जेल की एक छोटी जगह से इस प्ले स्कूल खोला और धीरे – धीरे यह एक बड़ी संस्था में बदल दिया ।  

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com