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नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है माँ कालरात्रि की आराधना, जाने माँ की पूजा, आरती और मंत्र

जाने कौन माँ कालरात्रि


Navratri 2020: आज शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है. आज के दिन माँ कालरात्रि की पूजा अर्चना की जाती है. पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि के कारण बहुत ज्यादा महत्त्वपूर्ण होता है. माँ कालरात्रि सभी लोगों को उनके कर्मो के अनुसार फल देती है. जिसके कारण उनको शुभंकरी भी कहा जाता है. इतना ही नहीं माँ कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने के लिए जानी जाती है. इस कारण माँ कालरात्रि का नाम कालरात्रि पड़ गया. माँ कालरात्रि को तीन नेत्रों वाली माता भी कहा जाता है. माँ कालरात्रि के समस्त अंग बिजली के समान विराल है. माँ कालरात्रि काले रंग और अपने विशाल बालों को फैलाए हुए चार भुजाओं वाली दुर्गा माता है.

माँ कालरात्रि के रूप

माँ कालरात्रि का सिंह के कंधे पर सवार विकराल रूप अद्रभुत हैं. और माँ कालरात्रि की सवारी गधा होता है। जो माँ कालरात्रि को लेकर इस दुनिया से बुराई का सर्वनाश कर रहा है. माँ कालरात्रि अपने हाथ में चक्र, गदा, तलवार,धनुष,पाश और तर्जनी मुद्रा धारण किए हुए है. तथा माथे पर चन्द्रमा का मुकुट धारण किए हुए हैं. शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की यह आरती अत्यंत खास होती है.

और पढ़ें: माँ कात्यायनी की उपासना से मिल सकता है आपको शादी का वरदान: कैसे करे उनकी पूजा?

माँ कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय-जय-महाकाली।

काल के मुह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।

महाचंडी तेरा अवतार॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।

महाकाली है तेरा पसारा॥

खडग खप्पर रखने वाली।

दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।

सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।

गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा।

कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी।

ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें।

महाकाली माँ जिसे बचाबे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।

कालरात्रि माँ तेरी जय॥

माँ कालरात्रि की पूजा विधि

शारदीय नवरात्रि के सातवां दिन माँ कालरात्रि की पूजा अर्चना की जाती है. इस दिन सुबह उठकर सबसे पहले स्नानादि से निवृत्त हो जाएं. फिर माँ कालरात्रि का स्मरण करें और माँ कालरात्रि को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य श्रद्धापूर्वक अर्पित करें. फिर माँ कालरात्रि को उनका प्रिय पुष्प रातरानी चढ़ाएं. उसके बाद माँ कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें. इसके बात आप सच्चे और अच्छे मन से माँ कालरात्रि की आरती करें. पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन माँ कालरात्रि को गुड़ जरूर अर्पित करना चाहिए. साथ ही ब्राह्माणों को दान भी अवश्य करना चाहिए.

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माँ कात्यायनी की उपासना से मिल सकता है आपको शादी का वरदान : कैसे करे उनकी पूजा ?

नवरात्रि का छठा दिन होता है माँ कात्यायनी, जाने माँ की पूजा, आरती और मंत्र


आज शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है. आज के दिन माँ कात्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है. माना जाता है कि माँ कात्‍यायनी की पूजा करने से शादी में आ रही सारी बाधाएं दूर हो जाती है. और भगवान बृहस्‍पति खुश हो कर विवाह का योग बनाते हैं. इतना ही नहीं मान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि अगर सच्‍चे मन से माँ की पूजा की जाए तो वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार माँ कात्यायनी की उपासना से भक्तों को अपने आप आज्ञा चक्र जाग्रति की सिद्धियां मिल जाती हैं. साथ ही वह माँ कात्यायनी के आशीर्वाद से इस लोक में स्थित रह कर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है. इतना ही नहीं, माँ कात्‍यायनी की उपासना से रोग, शोक, संताप और भय नष्‍ट हो जाते हैं.

जाने कौन है माँ कात्‍यायनी

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार महर्षि कात्‍यायन की तपस्‍या से खुश  हो कर आदिशक्ति ने उनकी पुत्री के रूप में जन्‍म लिया था. इस लिए उनका नाम माँ कात्‍यायनी पड़ा. इतना ही नहीं माँ कात्‍यायनी को ब्रज की अधिष्‍ठात्री देवी माना जाता है. मान्‍यताओं के अनुसार गोपियों ने श्रीकृष्‍ण को अपने पति रूप में पाने के लिए यमुना नदी के तट पर माँ कात्‍यायनी की ही पूजा की थी. कहा तो ये भी जाता है. माँ कात्‍यायनी ने अत्‍याचारी राक्षस महिषाषुर का वध कर तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया था.

और पढ़ें: अगर चाहते है वैभव और संतान सुख तो नवरात्रि के पांचवें दिन कुछ इस तरह करें माँ स्‍कंदमाता की पूजा

माँ कात्‍यायनी का ध्यान
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।

वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।

कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥
माँ कात्‍यायनी की आरती

जय-जय अम्बे जय कात्यायनी
जय जगमाता जग की महारानी

बैजनाथ स्थान तुम्हारा
वहा वरदाती नाम पुकारा

कई नाम है कई धाम है
यह स्थान भी तो सुखधाम है

हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी

हर जगह उत्सव होते रहते
हर मंदिर में भगत हैं कहते

कत्यानी रक्षक काया की
ग्रंथि काटे मोह माया की

झूठे मोह से छुडाने वाली
अपना नाम जपाने वाली

बृहस्‍पतिवार को पूजा करिए
ध्यान कात्यायनी का धरिए

हर संकट को दूर करेगी
भंडारे भरपूर करेगी

जो भी मां को ‘चमन’ पुकारे
कात्यायनी सब कष्ट निवारे

माँ कात्‍यायनी के रूप

माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भव्य होता है. माँ कात्यायनी की चार भुजाएं होती है. माँ कात्यायनी के दाहिनी तरफ का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में और नीचे वाला वरमुद्रा में होता है. बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित होता है. माँ कात्‍यायनी सिंह की सवारी करती हैं.

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अगर चाहते है वैभव और संतान सुख तो नवरात्रि के पांचवें दिन कुछ इस तरह करें माँ स्‍कंदमाता की पूजा

नवरात्रि के पांचवें दिन होती है माँ स्‍कंदमाता की पूजा


आज शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन है. नवरात्रि का पांचवां दिन माँ दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप को समर्पित होता है. नवरात्रि के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है. माना जाता है कि नवरात्रि के पांचवें दिन अगर कोई व्यक्ति अपने पूरे मन से माँ स्कंदमाता की पूजा करता है. तो उससे वैभव और संतान सुख प्राप्त होता है. इतना ही नहीं हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार माँ स्‍कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्‍ठात्री देवी हैं  और अगर कोई व्यक्ति सच्‍चे मन और पूरे विधि-विधान से माँ स्‍कंदमाता की पूजा करता है उसे ज्ञान और मोक्ष की प्राप्‍ति होती है.

जाने कौन है माँ स्कंदमाता

हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार माँ स्‍कंदमाता हिमालय की पुत्री हैं. हिमालय की पुत्री होने के कारण ही माँ स्‍कंदमाता को पार्वती कहा जाता है. साथ ही महादेव की पत्‍नी होने के कारण इन्‍हें माहेश्‍वरी भी कहते हैं. इतना ही नहीं माँ स्कंदमाता का वर्ण गौर है. जिसके कारण माँ स्कंदमाता जो हमारे देश में देवी गौरी के नाम से भी जाना जाता है. माँ स्‍कंदमाता कमल के पुष्प पर विराजित अभय मुद्रा में होती हैं. जिसके कारण कुछ लोग उनको पद्मासना देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहते है. माँ स्‍कंदमाता भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता है जिसके कारण उनको माँ स्‍कंदमाता भी कहते है.

और पढ़ें: आज है दुर्गा पूजा का चौथा दिन, माँ कुष्‍मांडा की इस तरह करें पूजा, आरती और मंत्र

माँ स्कंदमाता की पूजा

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्वनीम्।।

धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्।

अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्॥

प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्।

कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥

जाने कैसे करें माँ स्कंदमाता की पूजा

नवरात्रि के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है. इनकी पूजा अर्चना करने के लिए सबसे पहले आपको सुबह उठते ही स्‍नान करना चाहिए. उसके बाद आपको स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करने चाहिए. उसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्‍थान को अच्छे से साफ़ करें और गंगाजल से घर का शुद्धिकरण करें. उसके बाद आपको एक कलश में पानी भर कर और उसमे कुछ सिक्‍के डाल कर उसे चौकी पर रखना होगा. उसके बाद आपको पूजा का संकल्‍प लेना होगा. और मंदिर में धूप-दीपक से मां की आरती करनी होगी. आरती हो जाने के बाद घर के सभी लोगों को प्रसाद बांटें और आप भी ग्रहण करें.

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आज है दुर्गा पूजा का चौथा दिन, माँ कुष्‍मांडा की इस तरह करें पूजा, आरती और मंत्र

नवरात्रि का चौथा दिन होता है माँ कूष्माण्डा का


आज शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है. आज के दिन माँ कुष्माण्डा की पूजा अर्चना की जाती है. इस दिन साधक का मन अनाहत चक्र में अवस्थित होता है. आज के दिन माँ कुष्‍मांडा की पूजा अर्चना करने से लोगों का मन शांत रहता है और उन पर माँ कुष्‍मांडा की कृपा-दृष्टि बनी रहती है. माना जाता है कि जब इस सृष्टि का अस्तित्व नहीं था तब माँ कुष्‍मांडा ने ब्रह्मांड की रचना की थी. क्या आपको पता है माँ कुष्‍मांडा के शरीर में कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान है. माँ कुष्‍मांडा के प्रकाश से ही दसों दिशाएं उज्जवलित हैं. माँ कुष्‍मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है.

माँ कुष्‍मांडा की पूजा

दुर्गा पूजा का चौथा दिन माँ कुष्माण्डा की पूजा अर्चना का होता है. इस दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर माँ कुष्माण्डा का स्मरण करें. माँ कुष्माण्डा को धूप, गंध, अक्षत्, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सुहाग का सामान चढ़ाएं. माँ कुष्माण्डा को हलवा और दही बहुत ज्यादा पसंद है. इस लिए नवरात्रि के चौथा दिन माँ कुष्‍मांडा को इनका ही भोग अर्पित करना चाहिए. साथ ही साथ भोग लगाने के बाद, इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें. अंत में माँ कुष्‍मांडा के मंत्र और आरती गाएं.

और पढ़ें: नवरात्रि का तीसरा दिन होता है माँ चंद्रघंटा देवी का, जाने पूजा, मंत्र और स्तोत्र पाठ

माँ कुष्‍मांडा के मंत्र

1. या देवी सर्वभू‍तेषु मां कुष्‍मांडा रूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

2. वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्

सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्॥

3. दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्

जयंदा धनदां कुष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

4. जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्

चराचरेश्वरी कुष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

माँ कुष्‍मांडा की पूजा विधि

दुर्गा पूजा का चौथा दिन माँ कुष्माण्डा की पूजा अर्चना का होता है. माँ कुष्माण्डा की पूजा का विधान भी उसी प्रकार होता है। जिस प्रकार माँ ब्रह्मचारिणी और माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. इस दिन भी आपको सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए. इसके बाद आप माँ कूष्‍मांडा की पूजा करेंगे. साथ ही शप्‍तशती मंत्र, उपासना मंत्र, कवच और अंत में आरती करें.

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नवरात्रि का तीसरा दिन होता है माँ चंद्रघंटा देवी का, जाने पूजा, मंत्र और स्तोत्र पाठ

काफी शांतिदायक और कल्याणकारी होती है माँ चंद्रघंटा


नौ दिनों तक चलने वाली नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. आज नवरात्रि का तीसरा दिन है. आज के दिन दुर्गा माँ के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. इस दिन माँ चंद्रघंटा की उपासना की जाती है. ऐसा माना जाता है कि अगर इस दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाए तो उनकी कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं. इतना ही नहीं इससे दिव्य सुगंधियों का अनुभव भी होता है. दुर्गा माँ का चंद्रघंटा वाला रूप काफी ज्यादा शांतिदायक और कल्याणकारी होता है.

माँ चंद्रघंटा देवी की पूजा

नवरात्रि के तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जय है माना जाता है कि माँ चंद्रघंटा को लाल रंग बेहद पसंद है. इसलिए इस दिन माँ चंद्रघंटा को लाल रंग के पुष्प चढ़ाएं. और लाल रंग का ही प्रसाद चढ़ाएं. साथ ही माँ चंद्रघंटा को भोग लगते हुए और मंत्रों का जाप करते हुए घंटी जरूर बजाएं. इतना ही नहीं आप माँ चंद्रघंटा को दूध अर्पित करें और दुध से बनी चीजों का ही भोग लगाएं. क्योंकि माँ को दूध और दूध से बनी चीजे पसंद होती है. और अपने सामर्थ्यनुसार ही इन चीजों का दान भी करें.

माँ चंद्रघंटा का रूप

दुर्गा माँ के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण होती है. माँ चंद्रघंटा की सवारी भी शेर होता है. माँ का शरीर और उनकी सवारी शेर दोनों का शरीर सोने की तरह चमकीला होता है। माँ चंद्रघंटा के दसों हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र भी होते हैं. माँ चंद्रघंटा के माथे पर बना आधा चांद इनकी पहचान होती है. इसी आधे चांद की वजह के इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है.

माँ चंद्रघंटा का मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

माँ चंद्रघंटा का ध्यान मंत्र:

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

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Navratri Special: नवरात्रि के फ़ास्ट के दौरान प्रेग्नेंट महिलाओं को रखना होगा इन बातों का विशेष ध्यान

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए नवरात्रि फ़ास्ट टिप्स


हमारे देश में माँ दुर्गा के प्रति अपनी भक्ति और आस्था प्रकट करने के लिए कुछ लोग नवरात्रि के दौरान के दौरान फ़ास्ट रखते है. हमारे देश में नवरात्रि के दौरान नौ दिनों का फ़ास्ट रखने की मान्‍यता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी लोग नौ दिन का ही फ़ास्ट रखते है. कुछ लोग सिर्फ नवरात्रि के पहले और आखिरी दिन का फ़ास्ट रखते है. ऐसे में हमारे देश में हमेशा से ही प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए फ़ास्ट रखना सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे न सिर्फ उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है बल्कि उनके बच्‍चे कोई भी नुकसान हो सकता है. ऐसे में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि जब उनके गर्भ में एक शिशु पल रहा है. तो ऐसे में उनके लिए फ़ास्ट रखना कितना सही है.

जाने नवरात्रि में फ़ास्ट रखना कितना सही है

प्रेग्नेंसी के दौरान एक शिशु को उसकी माँ के आहार से ही पोषण मिलता है. प्रेग्नेंसी के नौ महीनों के दौरान ही बच्‍चे के विकास के लिए सबसे ज्यादा पोषण की जरूरत होती है. इसलिए ही कुछ लोगों का मानना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को फ़ास्ट नहीं रखना चाहिए. वही दूसरी तरफ कुछ लोगों का कहना है कि प्रेगनेंसी के दौरान फ़ास्ट रखना इतना भी नुकसानदायक नहीं होता. उनका कहना है कि फ़ास्ट का मतलब ये नहीं होता कि आप फ़ास्ट के दौरान कम मात्रा में पोषण लें. आप अच्छी मात्रा में पोषण ले सकते है.

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इन बातों का रखें विशेष ध्यान

1. अगर आप प्रेगनेंसी के दौरान नवरात्रि का फ़ास्ट रखना चाहते है. तो आपको गलती से भी लौंग के जोड़े या निर्जला फ़ास्ट नहीं रखना चाहिए. आपको फ़ास्ट के दौरान बहुत सारा पानी पीना चाहिए.

2. सिर्फ नवरात्रि के फ़ास्ट के दौरान ही नहीं बल्कि हर फ़ास्ट के दौरान हम लोग बहुत सारा मीठे का सेवन करते है. तो आपको उस मीठे खाने से बचना चाहिए.

3. अगर आप प्रेगनेंसी के दौरान फ़ास्ट रखते है तो आपको कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए. जिसे आपको थकावट महसूस हो या फिर पसीना आए.

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जानें इस साल क्यों एक महीने पहले मनाया जा रहा महालया

जाने क्या होता है महालय


महालया अमावस्या पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है. हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन माह की अमावस्या को महालया अमावस्या कहते हैं. इसे हमारे देश में सर्व पितृ अमावस्या, पितृ विसर्जनी अमावस्या और मोक्षदायिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. बंगाल में महालया का विशेष महत्व होता है. बंगाल के लोग साल भर इस दिन के आने का इतजार करते हैं. एक तरफ महालया के साथ ही श्राद्ध खत्म हो जाते हैं, तो दूसरी तरफ मान्यताओं के अनुसार महालया के दिन ही मां दुर्गा कैलाश पर्वत से धरती पर आगमन करती हैं, और आगे 10 दिनों तक यहीं रहती हैं. इस बार महालया 17 सितंबर को पड़ा है महालया से ही दुर्गा पूजा की शुरुआत हो जाती है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पा रहा है. इस बार महालया अमावस्या की समाप्ति के बाद शारदीय नवरात्रि आरंभ नहीं हो सकेगी. 

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महालया अमावस्या का महत्व

हमारे देश में नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान जगह-जगह पर दुर्गा प्रतिमाएं बनाई जाती है। महालया के दिन ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं के नेत्र बनाए जाते हैं. हमारे शास्त्रों में भी महालया अमावस्या का बड़ा महत्व बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि जिन भी लोगों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती है वो लोग अपने पितरों का श्राद्ध कर्म महालया अमावस्या के दिन कर सकते है। महालया अमावस्या का दिन अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा भाव दिखाने का होता है। ऐसा भी माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितृलोक से पितरदेव धरती पर अपने प्रियजनों के पास किसी न किसी रूप में जरूर आते हैं. ऐसे में सभी लोग अपने पूर्वजों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पितृपक्ष में उनका तर्पण करते हैं.

इस बार कब से शुरू होगी नवरात्रि

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल नवरात्रि 17 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है. जो 25 अक्टूबर तक चलेगी. राम नवमी 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी. हिन्दू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र पर्व शुरू होता है जो नवमी तिथि तक चलेगा.

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Chaitra Navratri 2020: नवरात्रि में क्‍यों नहीं खानी चाहिए ये 5 चीजे

नवरात्रि में ये चीजें खाने से हो सकता है आपके शरीर को नुकसान


Chaitra Navratri 2020: नवरात्रि  में मां दुर्गा का पूजन किया जाता है नवरात्रि  का व्रत मां दुर्गा के भक्‍तों के लिये बेहद खास माना जाता है। इस दौरान कुछ भक्‍तजन अपनी मुरादें पूरी करने के लिये पूरे 9 दिनों का उपवास रखते हैं और वो इन 9 दिनों तक कुछ नहीं खाते बस फलाहार पर रहते हैं। नवरात्रि का व्रत शरीर को शुद्ध करने और खुद को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने के लिये प्रभावशाली तंत्र माना गया है। शरीर शुद्ध होने से मन भी शांत और स्थिर हो जाता है। इस लिए अपने शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाये रखने के लिए व्रत धारी फलाहार तथा सात्विक भोजन का सेवन करते हैं। इस दौरान वो न सिर्फ अनाज बल्‍कि उन सभी प्रकार के खानपान से भी दूर रहते है।  जिससे शरीर को अनेक प्रकार के नुकसान हो सकते हैं। यहां जानें नवरात्रि में किन किन चीजों को खाने से आपके शरीर को नुकसान हो सकता है।

1. मांसाहारी भोजन नहीं खाना चाहिए:

नवरात्रि के व्रत के दौरान मांसाहारी भोजन, अंडे, शराब और धूम्रपान नहीं करना चाहिए। यह राजसिक श्रेणी का भोजन है। और इस समय मौसम में आ रहे बदलाव को देखते हुए इन चीजों को नहीं खाना चाहिये। इससे शरीर में गर्मी भी बढ़ती है।

2. हल्‍दी, धनिया और जीरे का प्रयोग नहीं करना चाहिए:

आम दिनों में हम खाना बनाते वक्‍त बहुत सारे मसालों का इस्‍तेमाल करते हैं। मगर नवरात्रि के नौ दिन हमको हल्‍दी, धनिया और जीरे से परहेज करना चाहिए।  माना जाता है कि ये मसाले स्‍वाद में कड़वे होते है और शरीर में गर्माहट पैदा करते हैं। इसकी जगह आप काली मिर्च या लाल मिर्च पाउडर का उपयोग कर सकते हैं।

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3. अनाज जैसे गेहूं, चावल, सूजी, बेसन आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए: 

नवरात्रि  में जो लोग भी व्रत करते है वो लोग अनाज जैसे – गेहूं, चावल, सूजी, बेसन, मकई का आटा, आदि  का सेवन नहीं करते। गेहूं जैसे ग्लूटेन खाद्य पदार्थों की जगह आप एनर्जी पैदा करने वाली चीजो का सेवन कर सकते है।

4. सब्‍जियां जैसे प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए:

नवरात्रि  में सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए। आलू, गाजर, शकरकंद, कच्चा केला, आदि सब्‍जियां स्‍वाद में भी जायकेदार होती हैं और व्रत के दिनों में शरीर के लिए अच्छी होती है और इन्‍हें खाने से शरीर में पुरे दिन एनर्जी बनी रहती है। नवरात्रि के दौरान प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्‍योंकि ये तामसिक भोजन में शामिल होते हैं।

5. नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए

नवरात्रि में नोर्मल्ली घर पर यूज़ होने वाला नमक नहीं खाना चाहिए क्युकी इसमें सोडियम की मात्रा अधिक होती है। इन नौ दिनों में सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए। क्‍योंकि इसे शुद्ध माना जाता है। और इसमें सोडियम की मात्रा भी कम होती है।
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