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काम की बात करोना

छोटे बच्चे की मांओ को कैसी हो रही है ऑनलाइन क्लास कराने में परेशानी

सुबह-सुबह एक तरफ घर का काम,तो दूसरी तरफ ऑनलाइन क्लास बनी मम्मियों की परेशानी


कोरोना महामारी को देखते हुए एक फिर देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न तरीके से लॉकडाउन लगाया जा रहा है। जिसके कारण कई सारे काम बाधित हो रहे हैं। इस दौरान साल 2020 के लॉकडाउन के बाद बाद बंद हुए स्कूल एक बारे खुले। लेकिन साल 2021 में अचनाक बढ़ते कोरोना के केस को देखते हुए एक बार 9 से 12 तक की क्लास को बंद कर दिया गया है। सभी क्लासेस दोबारा से ऑनलाइन होना शुरु हो चुकी है। पिछले एक साल से चल रही ऑनलाइन क्लासेस के बीज अभी तक कई लोग इसके साथ यूजटू नहीं हो पाए हैं। सीनियर क्लास हो या जूनियर क्लास हर किसी की इसको लेकर कई तरह की परेशानी हो रही है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटी क्लास में पढ़ने वाली बच्चों की मम्मियों और टीचर्स को हो रही है।

क्लास करवाना कई बार सिरदर्द बन जाता है…

नगमा की बेटी केजी 2 में पढ़ती है। वह बताती है कि रमजान का महीना चल रहा है। सेहरी के वक्त सुबह उठना पडता है। इस दौरान ही वह घर का सारा काम करने की कोशिश करती है। पहले जब स्कूल होता था तो सुबह बच्चे को स्कूल भेजकर सारा काम कर लिया जाता था।

उनका कहना है कि अब जब ऑनलाइन हो चुकी है। तो सुबह के वक्त बहुत होजपोज हो जाता है। मेरी एक और बेटी है वह सुबह उठते मुझे ही खोजने लगती है। ऐसे वक्त में मैं पूरी तरह से परेशान हो जाती हूं। एक को क्लास करवाऊं या दूसरी को गोद उठाई। वह बताती है कि एकदिन ऐसी स्थिति हो गई है मैं एक हाथ से बच्चे को क्लास करा रही थी दूसरे हाथ से रुम साफ कर रही थी। गर्मी बहुत ज्यादा है अगर लेट हो जाता है तो धूप बहुत तेज हो जाती है। घर का काम करने में भी परेशानी होने लगती है।

चूंकि मेरे घर में मेरे अलावा कोई और बच्चों को देखने वाला नहीं है तो ऐसी स्थिति कभी-कभी मेरे लिए बहुत सिरदर्द बन जाती है। हसबैंड सुबह ही ऑफिस चल जाते है। ऐसे में सबकुछ मुझे ही देखना होता है।

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नेटवर्क एक बड़ी समस्या है..

ऑनलाइन क्लास को लेकर छोटे से बड़े हर किसी को परेशानी होने लगी है। पिछले साल के शुरुआती दौर में तो हर किसी को यह कन्सेंप्ट अच्छा लगा था लेकिन धीरे-धीरे जैसे-जैसे समय पार होता गया। हर किसी को किसी न किसी तरह की परेशानी होने लगी। किसी को नेटवर्क की परेशानी है तो डेटा की

। छोटे बच्चों की क्लासेस तो कम होती है तो नेट की परेशानी कम होती है। लेकिन जैसे-जैसे हायर सेंकेडरी की क्लासों की तरफ बढ़ेगे तो सब्जेक्ट के हिसाब से क्लासेस भी बढ़ जाती है। कई स्टूडेंट्स का तो नेट पैक भी खत्म हो जाता है।

आशा नाम की एक और मम्मी कहना है कि पहले-पहले ऑनलाइन क्लास जब शुरु हुई थी तो लगा था कि ठीक है कुछ दिन में सबकुछ नॉर्मल हो जाएगा। धीरे-धीरे यह कारवां बढ़ता गया। आज इसे लगभग एक साल हो गया है। मेरे बेटा भी केजी में बढ़ता था। नर्सरी के वक्त वह सुबह 6 बजे स्कूल चला जाता था और दोपहर 11 बजे तक घर आ जाता था। इस दौरान मैं अपना सारा काम कर लेती थी।

 स्कूल से वापस आने के बाद बच्चे के सिर्फ होमवर्क करवाना पड़ता था। लेकिन अब क्लास सुबह 7.30 बजे शुरु होती है। यही वक्त होता घर में काम का, मेरे घर में मेरे अलावा कोई और नहीं है। जो घर का काम करें। सुबह एक तरफ क्लास करानी होती है दूसरी तरफ पानी भरना और तीसरा ब्रेकफास्ट बनाना क्योंकि इसी दौरान हैसबेंड को काम पर भी जाना होता है। मेरा खुद का सिलाई का काम है। बच्चे को पढ़ाने के चक्कर में अब यह भी नहीं हो पाता है। मैं ऑनलाइन क्लास के खिलाफ नहीं हूं लेकिन मेरी जैसी और मम्मियों को जो परेशानी हो रही है। इसका कोई निवारण तो होना चाहिए।

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क्या होता है जब माँ का अंधविश्वासों पर भरोसा ज़्यादा होता है।

माँ का अंधविश्वासों पर भरोसा


हमारी माँ सबसे प्यारी होती है। माँ हर किरदार निभाती है। उसका हर ये किरदार हमे बहुत अच्छा लगता है। पर जब हमारी माँ का अंधविश्वासों पर भरोसा बढ़ जाता है तब वही अच्छी और प्यारी माँ हमारी परेशानी का कारण बन जाती है। उसका अंधविश्वास हम सभी के लिए परेशानी पैदा कर देता है। और फिर उसे जितना भी समझा लो की उसका मान्यता विश्वास नहीं पर महज़ एक मिथ्या है।

शुभ दिन पर ये काम नहीं।

जब माँ का अंधविश्वासी पर भरोसा ज़्यादा हो जाता है तब अक्सर हमे इन सभी चीज़ो से गुज़रना पड़ता है:-

शुभ दिन का झंझट

हर मंगलवार, गुरुवार और शनिवार बहुत ही शुभ दिन हो जाते है। इन दिनों पर नाख़ून काटना, बाल कटवाना और कपडे धोना बिलकुल मना है। यही नहीं इन दिनों पर माँसाहार खाना मतलब कुछ अशुभ करना है।

बिल्ली का रास्ता काटना

अंधविश्वासों को मानने वाली माँ के लिए अगर किसी भी काम से पहले अगर बिल्ली रास्ता काट जाए या फिर कोई छींक दे तो वो काम नही करना चाहिए। अशुभ होता है। और वही काम अगर करना ज़रूरी है तो उसे कुछ समय बाद किया जाए।

‘नज़र लग गई हैं’

घर परिवार में आयी कोई भी परेशानी या बीमारियों का कारण माँ यही देती है कि घर को किसी की बुरी नज़र लग गयी है। बच्चो की बीमारी किसी और कारण से नहीं पर पड़ोसियों और रिश्तेदारों की बुरी नज़र लगने की वजह से हुई है।

पीछे से टोकना

घर से बाहर निकलते हुए अगर कोई पीछे से टोक दे तो उनको नहीं सुनना चाहिए। पीछे से टोकना बहुत बुरी बात है। अगर आप अपनी माँ को भी पीछे से टोक दे तो वो आपको बहुत डाँटती है।

बाबा जी का फंडे

अंधविश्वासों में मानने वाली माँओ में कुछ ऐसी होती है जो बाबाओं के लफड़े में फँस जाती है। परिवार का हर काम उनके अनुसार ही चलता है। उनके द्वारा दी गई आभूषण और तरीको पर ही काम किये जाए तो ही अच्छा होता है।

जानवर को खिलाओ

माँ का अक्सर ये मानना होता है कि अगर जानवरो को खाना डाला जाए तो वो हमारे लिए शुभ होता है, हमारे सारे काम बनने लग जाएंगे। ऐसा करने से हमारी सभी दुआएँ कबूल हो जाती है।

माँ की मान्यता है।

कभी वो हमारी दोस्त बन जाती है, तो कभी बच्ची बन कर हमारे साथ हर शरारत में हमारा साथ निभाती है। मम्मी की यही छोटी बड़ी बातें कभी हमे परेशान करती है तो कभी हँसने का कारण बन जाती है। माँ जैसी कोई नही होती। और माँ जैसी भी हो, उनकी मान्यताएँ चाहे जो भी हो वो हमारे भले के लिए ही होती है।

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क्यों माँ के बिना ज़िन्दगी होती हैं मुश्किल

माँ के बिना ज़िन्दगी मुश्किल


माँ के बिना ज़िन्दगी के बारे में सोचने से भी डर लगता है। माँ हमारी हर ज़रूरत को समझती है। उनको पता होता है की हमारी व्यस्त दिनचर्या में भी कैसे हमें हमारी ज़रूरते पूरी करनी है। माँ के बिना ज़िन्दगी सोचना भी मुश्किल है। माँ हमे हर चीज़ के लिए सपोर्ट करती है। मुश्किल के समय में हमे सही फैसले लेने के लिए प्रेरित करती है। पर जब हम स्वतंत्र जीवन जीते है तब हमें एहसास होता है कि के हमारी माँ ने हमारे लिए कितने कष्ट उठाए हमें। हमे अपने पैरों पर खड़े होना तो सिखाया पर उनकी ऊँगली छोड़े बिना कैसे चले वो तो हम कभी सीख ही नहीं पाए। चले तो जा रहे है पर वो ख़ुशी और वो पूर्णता कही गायब सी हो गई है।

माँ का प्यार

आखिर क्यों माँ के बिना ज़िन्दगी मुश्किल हो जाती है?

  • खाना

माँ को हमारी पसंद और नापसंद का ज्ञान सबसे बेहतार होता है। जब वो होती है तब खाने का ध्यान वही रखती है। और हमे उस बात की चिंता बिलकुल नहीं लेनी पड़ती। फ्रिज में अच्छा खाना होता है और नाश्ते से लेकर डिनर तक हमे उसकी बिलकुल टेंशन नहीं लेनी पड़ती।

  • कपड़े

हमारी माँ हमारे कपडे जितने संभाल के रखती थी हम उतने ही बिखेर के रखते है। माँ के होते हुए हमारी अलमारी और हमारे कपड़े एकदम आयोजित रहती है पर जब माँ नहीं होती तब हमे किसी चीज़ की होश ही नहीं होता।

माँ सब संभाल लेती है
  • बीमारी

बीमारी में माँ हमारा सबसे अच्छे से ध्यान रखती है। जब वो नहीं होती तो हम बस इसी उम्मीद में रहते है कि किसी तरह ठीक हो जाए। दवाइयों के सहारे बस चलते रहते है। माँ होती है तो वो हमारा पूरा ध्यान रखती है।

  • परेशानी

परेशानी छोटी हो या बड़ी माँ हमेशा हमारी मदद करती है। हमें सही बात समझाती है और हमारी हर बात सुनती है। माँ हमे सही राय भी देती है। हम सभी परेशानियां किसी और के साथ बाँटे या ना बाँटे माँ के साथ हर बात बाँट सकते है।

माँ के सहारे के बिना हमारे लिए चलना उतना ही मुश्किल है जितना बिना पानी के आग बुझाना। चल तो सकते है पर वो आत्मशक्ति नहीं मिल पाती।

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मनोरंजन

क्‍या आप भी ये ही करती है, मम्‍मी- पापा की गैर-मौजूदगी में

क्या  आप भी करती है बहुत सारी मस्ती ?


 

क्‍या आप भी ये ही करती है, मम्‍मी- पापा की गैर-मौजूदगी में  जब मम्मी- पापा घर पर ना हो तो घर पर राज बच्‍चों का होता है। साथ ही बच्‍चों को किसी का डर भी नहीं होता। जब पैरेंट्स घर पर नही हों तो बच्‍चों को पूरी आजादी होती है और मजा और मस्‍ती दुगुनी हो जाती है।

कपड़े और गहने ट्राय करना

जिस पल वो घर से जाते हैं, बच्‍चें अपने करतब दिखाना शुरु कर देते हैं, घर में शुरू हो जाती है पार्टी और दोस्तों के साथ जमकर मस्‍ती। लेकिन क्‍या आप जानते है , कि लड़कियां मम्‍मी- पापा की गैर-मौजूदगी में क्‍या करती है। नहीं जानते तो कोई बात नहीं आज हम आपके उन्‍हीं कामों के बारे में बताएगें, जो काम लड़कियां अपने मम्मी- पापा की गैर-मौजूदगी में ज़रूर करती है।

⦁ भले ही मम्मी- पापा कुछ घंटों के लिए बाहर गए हों, मगर दोस्‍तों के साथ करने का इससे अच्‍छा मौका और टाइम हो ही नहीं सकता। इसलिए मम्मी- पापा के जाते ही दोस्‍तों को कॉल करना और पार्टी के लिए घर बुलाना।
⦁ गाने तो लड़कियां सुनती ही है, लेकिन मम्‍मी- पापा के जाते ही बहुत ऊंची आवाज में म्‍यूजिक सुनना। साथ अपने पड़ोसियों की शिकायत को अनसुना करना।
⦁ हर लड़की को सजाने का शौक होता है, खास तौर से मॉम के वो सब कपड़े और गहने ट्राय करना जिन्हें आपकी मॉम आपको छूने भी नहीं देतीं। लड़कियां सबसे पहले ये काम जरूरी करती है।
⦁ मम्‍मी – पापा के जाते ही पूरी रात जागकर हॉरर फिल्में देखना और साथ में पॉपकॉर्न खाना।
⦁ मम्‍मी की चीज़ें चेक करना जैसे स्‍कूल की रिपोर्ट कार्ड, मम्‍मी की खास चीजें।

⦁ जब मम्‍मी -पापा नहीं होते तो लड़कियां बहुत देर तक सो जाती है।
⦁ लड़कियां मम्‍मी-पापा की गैर- मौजूदगी में अपने लवर को घर पर बुला लेती है ।
⦁ मम्‍मी घर पर ना हो तो किसी भी चीज की टेशन नहीं होती, इसलिए घर से बाहर जाते वक्त ये सोचकर एसी ऑन रखना कि आने पर आपका कमरा ठंडा मिले।

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