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जानिए मुस्लिम समुदाय क्यों मानते है ईद-ए-मिलाद-नबी’

ईद-ए-मिलाद-नबी’ क्या होता है ख़ास


मुस्लिम समुदाय ‘ईद-ए-मिलाद-नबी’ त्योहार को पैगम्बर हजरत मोहम्मद के जन्म की खुशी में मनाते हैं। इस्लाम धर्म में पैगम्बर हजरत मोहम्मद आखिरी नबी हैं। जिनको खुद अल्लाह ने फरिश्ते के जरिए कुरान का संदेश देने के लिए भेजा था। मुस्लिम समुदाय के लिए यह एक बड़ा त्योहार माना जाता है,इस दिन की समाज में कई मान्यताएं हैं। इस दिन मुस्लिम धर्म के लोग मस्जिदों और घरों में इबादत करते हैं। जुलूस निकालकर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के संदेश को आम लोगों के बीच पहुंचाते हैं। इस दिन अपने लोग घरों में कुरान जरूर पढ़ते हैं। घरों में जगमग रोशनी की की जाती है। सड़कों में जगह-जगह सजावट की हुई होती है

ईद-ए-मिलाद-नबी’ को लेकर क्या है मुसलमानो में इसकी मान्यता

दरअसल मुसलमनो की मान्यता है की पैगम्बर हजरत मोहम्मद को खुदा ने खुद कुरान का संदेश देने के लिए भेजा था और वो अपने कामो से पुरे अरब में शांति फैलाएंगे यही वजह है की अफ्रीका के नीग्रो और अरब के लोग एक थाल में खाना खाते है और एक साथ नमाज़ अदा करते है । महिलाओ के लिए पहले पैगम्बर हजरत मोहम्मद ने ही सम्पति का अधिकार दिया था। लिहाज़ा मुस्लिम समुदाय पैगम्बर हजरत मोहम्मद हमेशा परम आदर भाव रखते है।

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आज के दिन शान्ति का पैगाम देते हुए आज के दिन मुस्लिम समुदाय के हज़ारो लोगो ने जुलूस निकाला था। ईद-ए-मिलाद-नबी के अवसर पर मस्जिद के ईदगाह तक जुलूस निकाला जाता है, जिसमे हज़ारों मुस्लिम हिस्सा लेते है, बड़े-छोटे सारे लोग इस जुलूस का हिस्सा होते है। सुबह-सुबह मुस्लमान मस्जिद में जाते है, जिसके बाद वो लोग एकत्रित होते है और सारी दुकानों से हो कर गुज़रते है और वहाँ से एक ईदगाह मैदान में पहुंचते है।

जिन बाज़ारो से ये जुलूस निकलता है, उन दुकानों को बेहतर तरीके से सजाया जाता है। ईदगाह मैदान में मौलाना लोगो को संबोधित करते है। इन सबके बाद लोग एक दूसरे को गले लग कर ईद की बधाई देते है। इस दौरान प्रसाशन के तरफ से भी कड़ी सुरक्षा का इंतज़ाम किया जाता है।

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Goverdhan puja 2019: गोवर्धन पूजा के  पीछे  छुपी है यह पौराणिक कथा

जाने क्या है गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त


हिन्दू धर्म में गाय के गो को बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन गाय के गो की पूजा की जाती है , वही गोवर्धन पूजा को लोग अन्नकूट के नाम से भी जानते है।   दिवाली के ठीक अगले दिन मनाई जाने वाली गोवेर्धन पूजा की अधिक मान्यता है। इस साल गोवर्धन की पूजा का यह पर्व 28  अक्टूबर को पड़ रहा है। इस दिन सभी लोग अपने घर में गौर  की पूजा करते है। द्धापर युग से शुरू हुई इस पूजा के दिन भगवान् श्री कृष्ण की भी पूजा की जाती है।

शास्त्रों के अनुसार गाय को उतना ही पवित्र माना जाता है जीतना माँ गंगा को निर्मल जल। लेकिन क्या आप जानते है की गोवर्धन पूजा के पीछे की पौराणिक कथा

गोवर्धन पूजा पौराणिक कथा 

प्राचीन समय की बात है एक बार मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने 7 दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाये रखा। जिसे इंद्र देवता क्रोधित हो गए और उन्होंने बारिश तेज़ करदी। उस गोवर्धन के नीचे सभी बृजवासी सुरक्षित थे। श्री कृष्ण ने साँतवे दिन पर्वत  को नीचे रखा और गोवर्धन पूजा के साथ अन्नकूट मनाने को कहा तब से दिवाली के अगले दिन यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मनाया जाने लगा।

और पढ़े: दिवाली के अगले दिन क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा? यहाँ जाने

यह है पूजा करने का सही शुभ मुहूर्त

गोवर्धन पूजा सांय काल मुहूर्त – दोपहर बाद 15:24  बजे से सांय 17 :36 बजे तक

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 09 :08 बजे (28 अक्टूबर ) से

प्रतिपदा तिथि समाप्त  – 06 : 13 बजे (29 अक्टूबर ) तक

गोवर्धनपूजा करने की विधि

गोवर्धन की पूजा करने के लिए आप अपने  घर के बाहर गोबर से गोवर्धन का चित्र बनाए। उसकी पूजा के लिए रोली , चावल , खीर  , बताशे , जल , दूध , पानी , केसर और फूल आदि से दीपक जलाकर उसकी पूजा करे। ऐसा करने से आपको लाभ होगा और आप पर हमेशा भगवान श्री कृष्ण  की कृपा बनी  रहेगी

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Happy Diwali 2019:दिवाली के अवसर पर अपनों को इस ख़ास अंदाज़ में करे विश

 इस दिवाली बाँटे प्यार अपनों के साथ  


आज पूरे देश में दिवाली का त्योहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जा रहा है।लोग आज अपने घरों  को सजा रहे है एक दूसरे को मिठाई  देकर आपस में प्यार बाँट रहे है। आपको बता दें की हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 27 अक्टूबर को मनाया जा रहा है । दीपावली का यह त्योहार धनतेरस से शुरू होकर नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा के बाद भाई दूज तक चलता है।

आज सभी लोग शाम को माँ लक्ष्मी की पूजा करेंगे और अपने घरों को दीपक, लाइट्स और रंगोली से सजायेंगे। ऐसे में अगर आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों तक मां लक्ष्मी का आशीष पहुंचाना चाहते हैं तो उनके साथ शेयर करें ये प्यार भरा सन्देश।

दिवाली पर इस ख़ास अंदाज़ में करे अपने दोस्तों को विश :

1. श्री राम आपके घर में सुख की बारिश करें, माता लक्ष्मी आपको धन से परिपूर्ण करें,

और दीप की रौशनी आपके घर से दुःख-कष्ट को दूर करे – दीपावली की शुभकामनाएं

2. दीपावली है दीपों का त्यौहार,

घर लाये आपके सुख, समृद्धि और प्यार – दिवाली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

3. हंसते हुए दीप तुम जलाना, जीवन में नई खुशियों लाना,

दुख दर्द अपने भूल कर,सबको गले लगाना- दीवाली की शुभकामनायें

4. अच्छे की बुरे पर विजय हो, सब जगह बस आपकी जय हो

आपके पूरे परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये

5. पल पल सुनहरे फूल खिले, कभी न हो आपका कांटो से सामना

आपकी जिंदगी  हमेशा खुशियों से भरी रहे- आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये

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6. आपको  मिले आशीर्वाद गणेश से, विद्या मिले सरस्वती से

धन मिले लक्ष्मी से, आप सभी को हैप्पी दिवाली

7. दिवाली पर बनती है रंगों की रंगोली

दीप जलाए, और साथ में खुशियाँ बाटे – हैप्पी दिवाली

8. सुख संपदा आपके जीवन में आए

लक्ष्मी जी आपके घर में समाए

भूल कर भी आपके जीवन में कभी दुःख ना आये – हैप्पी दिवाली

9. झिलमिलाते दीपों की रोशनी से प्रकशित

दिवाली आपके लिए लेकर आये सुख समृद्धि

हैप्पी दिवाली

10. पूजा की थाली, रसोई  में पकवान

आँगन में दिया , खुशियों हो तमाम – हैप्पी दिवाली

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Dhanteras 2019 – जाने अपनी राशि के हिसाब से क्या खरीदे इस धनतेरस

इस धनतेरस अपने जीवन साथी के लिए क्या खरीदना रहेगा शुभ


धनतेरस के दिन घर में सुख और समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करते है। अगर हम शास्त्रों के अनुसार देखे तो इस दिन धनवंतरी का जन्म हुआ था और यही वजह है की इस दिन को धनतेरस बोलते है। धनतेरस की शाम परिवार की मंगलकामना के लिए यम नाम का दीपक जलाया जाता है। मान्यता है की समुद्र मंथन से समय कलश के साथ माता लक्ष्मी का जन्म हुआ उसी के प्रतीक के रूप में सौभाग्य वृद्धि के लिए बर्तन खरीदने की परम्परा शुरू हुई थी। इसलिए आज हम आपको बताएँगे की आपकी राशि के लिए धनतेरस पर क्या खरीदना सबसे शुभ रहेगा।

मेष: मेष राशि के लोग पीतल के बर्तन खरीद सकते है और अगर पटनेर को गिफ्ट करना है तो आप चाँदी या सफ़ेद धातु के हार ले सकते है।

वृष: वृष राशि के लोग चाँदी के कलश खरीदना शुभ रहेगा और जीवनसाथ के लिए आप सोने की चूड़ी या अंगूठी भी ले सकते है।

मिथुन: इस राशि के लोग धनतेरस पर सफ़ेद धातु के श्री यंत्र या गणेश खरीद सकते है कांसे का बर्तन खरीदना भी सही रहेगा और जीवनसाथी के आप पीतल का कोई भी धातु खरीद सकते है।

कर्क: जीवनसाथ के लिए कर्क राशि के  लोग  मोती और हीरे की अंगूठी खरीद सकते है जो की शुभ रहेगा। इस राशि वालो के लिए पारद का शिवलिंग खरीदना भी शुभ होगा।

सिंह: इस राशि के लोग लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति सोने या पीले धातु के रूप में खरीदें। जीवनसाथी के लिए सोने या पीले पुखराज का लॉकेट लें।

कन्या: कन्या  राशि के लोग घर के लिए चाँदी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीद सकते है या फिर पारद या सोने के श्रीयंत्र  भी खरीद सकते हैं। जीवनसाथी के लिए चांदी का आभूषण ले सकते हैं।

तुला: घर के मंदिर के लिए चाँदी के श्रीयंत्र और दक्षिणवर्ती शंख लेसकते है और वही जीवनसाथी के लिए मुंगे की माला और अथवा कंगन खरीद सकते है।

वृश्चिक: तांबे के कलश, पीला कोई भी धातु खरीदना शुभ रहेगा। जीवनसाथ के लिए मोतियों की माला देना शुभ रहेगा।

धनु: इस राशि वाले लोगो के लिए पीला धातु खरीदना शुभ रहेगा और वही मुंगे का सामान खरीदना भी लाभदायक होगा।

मकर: जीवनसाथी को तो आप हीरे या चाँदी का कोई भी सामन देना शुभ रहेगा। बेडरूम के लिए सफेद धातु में मेज या कुछ भी खरीद सकते हैं।

कुंभ: इस राशि के लोग घर के मंदिर के लिए आप सफ़ेद धातु या चांदी का दीप दान लें। जीवनसाथी के लिए सोना माणिक्य या पुखराज की अंगूठी भी खरीद सकते हैं।

मीन: इस राशि के लोग अपने लिए पीला पुखराज ले सकते है या फिर आप घर के लिए चाँदी या सफ़ेद पिरामिड या गणेश या सरस्वती की मूर्ति लेना शुभ रहेगा। जीवनसाथी के लिए पन्ने या हीरे की अंगूठी लें।

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इस दिवाली पर क्या दें अपने रिश्तेदारों को तोहफा

तोहफे में कभी न दे लक्ष्मी- गणेश अंकित सिक्के उपहार में


दिवाली के अवसर पर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को गिफ्ट देने के चलन है और उन्हें गिफ्ट देने के लिए हम काफी सारी चीजें खरीदते है मगर हम में से बहुत कम लोग यह जानते है की वो गिफ्ट लोगो पर क्या प्रभाव डालते है। तो चलिए हम जानते है की इस दिवाली आप क्या गिफ्ट् दे सकते है आपने दोस्तों और रिश्तेदारों को।

गिफ्ट्स में क्या नहीं देने चाहिए:

काफी ज्योतिषो के अनुसार, दिए गए उपहार से न केवल इसे लेने वाले की बल्कि देने वाले की किस्मत भी बनती और बिगड़ती रहती है। इस अवसर पर कभी भी पानी से रिलेटेड कोई भी चीजें नहीं देनी चाहिए क्योंकि ये माता लक्ष्मी का संबंधित पर्व होता है और उनका वास भी जल में ही होता है। दिवाली और धनतेरस के अवसर पर नुकीली चीजें खरीदने से बचना चाहिए। साथ ही ऐसी कोई वस्तु जिसमें तीखे किनारे हों, अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को गिफ्ट में भी नहीं देनी चाहिए।

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सोने-चांदी के सिक्के:

अगर आप इस दिवाली किसी को भी पानी का जग और ग्लास दे रहे है तो वो नहीं देनी चाहिए, इसके बदले आप चांदी-सोने के सिक्के भी गिफ्ट के तोर पर दे सकते है।लेकिन जिसपर लक्ष्मी- गणेश अंकित हो वो सिक्के मत दे क्यूंकि दे देना शुभ नहीं माना जाता है।

शुभ चीजें जो आप दे सकते है:

दिवाली या धनतेरस पर किसी को भी अष्टधातु से बनी हुई कोई वस्तु उपहार के रूप न दे और कोई भी मिश्रित धातु भी तूफे के रूप मना दे। आप देना चाहें तो सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण दे सकते हैं। दीपावली पर लक्ष्मी और गणपति की प्रतिमा भूलकर भी किसी को भी न दे. ऐसी मान्यताएं है कि ऐसा करके आप अपना सौभाग्य किसी और को दे देते है और इसका मतलब यह भी हुआ की आप अपनी लक्ष्मी किसी और को दे रहे है। आप चाहे तो गिफ्ट के तौर पर स्टील और लोहे से बनी कोई भी चीज गिफ्ट कर सकते है। कभी भी सिल्क के कपड़े किसी को गिफ्ट न करें।अगर आप धनतेरस के दिन शॉपिंग कर रहे है, तो इस दिन सिर्फ अपने लिए ही समान खरीदें। ब्लैक कलर कोई भी सामान न ही अपने घर लाएं और न ही गिफ्ट करें।

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Diwali Special 2019 : इस दिवाली कैसे करे घर का मेकओवर?

इस दिवाली करे घर के ओल्ड लुक को बाय-बाय


दिवाली आते ही सबसे पहले शुरू हो जाती है घर की साफ़-सफाई और सफाई के तुरंत बाद नंबर आता है घर की सजावट का, तो अगर आप भी अपने घर के ओल्ड लुक से बोर हो चुके है, तो क्यों ना इस दिवाली उसे चेंज किया जाये। अपने घर को एक ट्रेडिशनल लुक दे इस बार। हर जगह त्योहार का मौहाल है ऐसे में मार्किट में काफी नई प्रोडक्ट्स आये है। इनमें क्रिस्टल, मल्टी कलर्ड स्टोन, पर्ल वर्क आदि का भी चलन हैं। आज हम आपको दिवाली के मौके पर बताएँगे की कैसे आप अपने घर को सजा सकते है और किस तरह की लाइट लगाएं। तो चलिए जानें, इस दिवाली कैसे करे घर को रोशन ।

1. फूलो की सजावट:

इस दिन घर को रोशन करने के लिए लाइट्स से सजाया जाता है। घर को लाइट्स के साथ- साथ फूलों से भी सजाये। इससे आपके घर को फेस्टिवल डेकोरेशन भी मिल जाएगी।

2. कार्नर को दियो  से सजायें:

ये तो सब लोग मानते है कि  घर की लाइटें बदल देने से ही घर का पूरा लुक चेंज हो जाता है। ऐसे में इस दिवाली पर घर को सजाने के लिए आर्टिफिशियल लाइट्स की जगह दीयों का इस्तेमाल करें और घर के हर एक कार्नर को दीए से सजाएं। दीये  घर को एक ट्रेडिशनल के साथ साथ डिफरेंट लुक देगा।

3. तोरण और कंदील:

घर के मुख्य द्वार के साथ ही हर कमरे के दरवाजे पर तोरण लगाएं। इसके लिए आप पारंपरिक पत्तों और फूल के तोरण का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। या फिर बाजार में मिलने वाले डिजाइनर तोरण का भी इसके साथ ही घर के हौल को सजाने के लिए कंदील का भी इस्तेमाल किया जा सकता है

4. कैंडल और टी लाइट्स डेकोरेशन:

आजकल तो बजार में कई तरह की कैंडल मिल जाती है। आप उससे घर को डिफरेंट और सिंपल लुक दे सकती हैं। इन कैंडल को आप खिड़की और छतों पर सजा सकती हैं और अगर आपको कैंडल लुक नहीं चाहिए घर का तो आप टी लाइट्स के इस्तेमाल भी कर सकती यही। रंगीन कांच के कंटेनर में टी लाइट्स रखकर उसे ड्राइंग रूम और डाइनिंग रूम की सीलिंग से लटका दें। इससे किसी के इनसे टकराने का खतरा भी नहीं रहेगा और ये घर को बेहद सुंदर लुक भी देंगे।

और पढ़ें: क्यों करती है माँ लक्ष्मी उल्लू की सवारी?

5. पेपर लालटेन:

दिवाली में कई तरह के सामान मार्कट में मिलते है। इन्ही में से एक है पेपर लालटेन। पेपर लालटेन से आप अपने घर को सजाएं। ये दिखने में तो खूबसूरत होती ही है साथ ही घर में रौशनी भी बिखेरती है।

6. फ्लोटिंग मोमबत्ती़:

अगर आपको नार्मल कैंडल्स या दिए थोड़ा ओल्ड या बोरिंग लुक लगता है तो आपके पास एक और बेहतरीन ऑप्शन है आप चाहें तो इस दिवाली में फ्लोटिंग मोमबत्ती का भी सहारा भी ले सकती है ये आपके घर की सजावट में चार चांद लगा देगी और घर को काफी अलग लुक देगा।
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क्यों करती है माँ लक्ष्मी उल्लू की सवारी?

उल्लू के अल्वा और कौन है माँ लक्ष्मी की सवारी


लक्ष्मी माता का वाहन है उल्लू जो पूरी रात जगता और दिन भर सौता है। भारत के कुछ भागो में उल्लू को शुभ और अशुभ दोनों तरह से देखा जाता है। ऐसा बोला जाता है की उल्लू को पहले ही महसूस हो जाता जब कोई संकट आने वाली होती है, इसलिए उल्लू को अपशगुन भी माना जाता है लेकिन कुछ लोगों ऐसा भी जो मानते है उल्लू के कुछ संकेत अच्छे और शुभ होते है। कहते है अगर कोई व्यक्ति बीमार है और उल्लू उससे छू ले तो व्यक्ति एकदम ठीक हो जाता है। उल्लू की सुबह आवाज़ सुना भी शुभ होता है। मगर क्या आप लोग जानते की लक्ष्मी माता का वाहन उल्लू क्यों है? तो चलिए आपको इसके पीछे की वहज बताते है।

उल्लू-माँ लक्ष्मी की सवारी:

लक्ष्मी माता का वहन उल्लू  ताकत और दुर की नज़र का प्रतीक होता है। दरसअल उल्लू बुरी सोच को हटाकर अच्छी सोच रखने में मदद करता है। वह भीड़ से हटकर विचार करने की शक्ति की तरफ इशारा करता है। इसका मतलब हुआ की उल्लू तब देखने की क्षमता रखता है जब सामान्य जन को नजर नहीं आता। दरअसल उल्लू निडर और शक्ति का प्रतीक माना गया है इसलिए लक्ष्मी का वाहन उल्लू है।

माँ लक्ष्मी के उल्लू के आलावा और  भी है वाहन :

उल्लू के आलावा गज भी माता की सवारी है। गज बुद्धिमत्ता व शक्ति का प्रतीक है। गज एक शक्तिशाली और विनम्र जीव होता है और इसलिए वास्तविक रूप में भी ताकतवर व्यक्ति सदैव विनम्र होता है और उसे अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की ज़रूरत नहीं होती है।

उल्लू और गज के आलावा गरुड़ भी माता की सवारी है। दरअसल गरुड़ लक्ष्मी के पति विष्णु का वाहन होता है और उसी के कारण लक्ष्मी का भी वाहन बन गया। गरुड़ पक्षी अपनी दूरदृष्टि, लक्ष्य, अनुशासन, दृढ़ता और कुशलत का प्रतीक माना जाता है।

और पढ़ें: धनतेरस के दिन क्यों खरीदे जाते है नये बर्तन?

क्यों माना जाता है उल्लू को शुभ:

उल्लू को शुभ और अशुभ दोनों का प्रतिक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है की किसी गर्भाती महिला को उल्लू छुले तो पुत्री होने के संकेत होते है और यहाँ तक की पूर्व दिशा से आ रहे उल्लू की आवाज़ सुने से धन का लाभ होता ही है और दुश्मों का भी नाश होता है। यदि आप घूमने जा रहे हो और पीछे से अपने उल्लू की आवाज़ सुनी तो आपकी यात्रा काफी अच्छी जाएगी। इन सबके अल्वा अगर आपको अपने घर के आँगन में मारा हुआ उल्लू मिलता है तो इसका मतलब होता है की परिवार में कोई कलेश होने वाला है।

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धनतेरस के दिन क्यों खरीदे जाते है नये बर्तन

बर्तन खरीदने के आलावा और क्या मान्यता है धनतेरस की


दिवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज तक रहती है।धनतेरस के दिन लक्ष्मी माता, कुबेर और भगवान धन्‍वंतरि की पूजा होती है, जिसे घर में हमेशा सुख और समृद्धि बनी रहती है। ऐसी माना जाता है इस दिन बर्तन, सोना, चांदी और झाड़ू खरीदना शूभ होता है। जिस तरह माता लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थीं उसी तरह भगवान धन्‍वंतरि भी उत्पन्न हुऐ थे। क्या आप जानते है की धनतेरस पर बर्तन खरीदने का रिवाज़ क्यों है?

बर्तन खरीदने की मान्यता:

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। दरअसल इस दिन भगवान धन्‍वंतरि महालक्ष्मी की तरह सागर मंथन से उत्पन्न हुए थे। ऐसी मान्यता है की जब भगवन धन्‍वंतरि का जन्म हुआ था तो वो एक पात्र में अमृत लिए हुए थे। भगवान धन्‍वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस अवसर पर नये बर्तन खरीदे जाते है

वैसे इसकी एक और मान्यता भी है, धनतेरस के दिन धातु खरीदना भी शुभ माना जाता है लेकिन सिर्फ शुद्ध धातु जैसे की पीतल, तांबा,  चांदी, सोना। ऐसा कहा जाता है की इस दिन ख़रीदे हुए रत्नो में नौ गुने की वृद्धि हो जाती है।

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घर के बहार दिया रखे:

धनतेरस के दिन सिर्फ बर्तन या धातु ही नहीं ख़रीदा जाता बल्कि दिए भी जलाये जाते है, मान्यता है कि अकाल मृत्यु से बचने के लिए घर के मैन गेट पर दिया रखने का भी रिवाज़ है। रात में इस दिन लंभी उर्म के लिए भगवान धन्वंतरि तथा समृद्धि के लिए कुबेर के साथ लक्ष्मी गणेश का पूजन करके लक्ष्मी माता को गुड़ और धान का लावा ज़रूर चढ़ाना चाहिए।

काले रंग के बर्तन ना ख़रीदे:

धनतेरस के दिन काले रंग की चीजों को ना ख़रीदे क्योकी धनतेरस एक बहुत ही शुभ दिन है जबकि काला रंग हमेशा से दुर्भाग्य का प्रतीक माना जाता है इसलिए धनतेरस के दिन काले रंग की चीजें को नहीं खरीदा जाता और सिर्फ यही नहीं बल्कि इस दिन आप चाकू, कैंची और दूसरी दारीदार चीज़ भी नहीं खरीदी जाती

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स्वादिष्ट पकवान

Diwali Special 2019 : दिवाली पर मेहमानों को सर्व करे यह ख़ास स्वीट डिश 

“दिवाली के दिन कुछ मीठा हो जाये”


Diwali special 2019: हमारे देश में दिवाली का त्यौहार बड़े ही धूम- धाम से मनाया जाता है, इस त्यौहार कि खास बात यह है की यह सभी को आपस में जोड़ता है। इस दिन परिवार के जितने भी लोग दूर होते है वो सारे पास आ जाते है जिस से घर में अलग सी रौनक लग जाती है। अब ऐसे में घर की रसोई से भी अच्छे पकवानों  के बनने की खुशबू  आती है। लेकिन सवाल यह है की दिवाली पर क्या ख़ास बनाया जाए? सोचिये मत इस दिवाली मेहमानों को यह ख़ास स्वीट डिश सर्व कर दिवाली विश करे।

दिवाली पर मेहमानों  को सर्व करे यह ख़ास स्वीट डिश “-

1. हलवा

हलवा भी एक ट्रडिशनल डिशेस में से एक है जो आमतौर पर हर त्यौहार पर बनाया जाता है। वैसे आज कल त्योहारों पर कई अलग- अलग तरह के हलवा बनाऐ जाते है, जिनमे सबसे ज्यादा बेसन का हलवा, गाजर का हलवा सूजी का हलवा और आटे का हलवा बनाया जाता है। लेकिन बात अगर मूंगदाल के हलवे    की हो तो सबसे ज़्यादा ज़ायकेदार यह हलवा होता है और दिवाली के अवसर पर मूंगदाल का हलवा विशेष रूप से बनाया जाता है।

2. खीर

दूध और चावल से बनने वाली यह एक अच्छी स्वीट डिश है। यह डिश दिवाली अमावस्या के दिन मनाई जाती है और ऐसी मान्यता है की इस दिन दूध बेचना शुभ नहीं होता है इसलिए प्राचीन समय से ही दूध का उपयोग करने की परंपरा बनाई गई है तभी इस दिन दूध की खीर बनाई जाती है।  खीर को बनाते समय बादाम, काजू, किशमिश, इलाइची ये सब डाला जाता है जिससे  खीर का सवाद और स्वादिष्ट हो जाता है। वैसे तो लोग इससे कभी भी बना सकते है मगर त्योहार पर इसका महत्त्व ही अलग होता है। हलवा, खीर और पूरी ऐसे व्यंजन हैं जिनका भोग देवी-देवताओं को भी लगाया जाता है।

3. केसरिया श्री खंड

कई शहरों में दिवाली के अवसर केसरिया श्री-खंड भी बनाया जाता है। ये दही, शक्कर, केसर के मिश्रण से बनने वाली एक खास स्वीट डिश है और खास बात ये है कि ये बनाने में भी काफी आसान होती है।

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4. पूरी -सब्जी

पूरी सब्जी भी त्योहार पर बनने वाला खास पकवान है। आजकल पूरियां बनाने में भी नई-नई चीज़ों का इस्तेमाल होने लगा है तो वहीं पूरी के लिए सब्जी में तरीदार और सूखी दोनों तरह की सब्जियां बनाई जाती है जैसे की  कद्दू की छोले, दमआलू, आलू जीरा लोग अपनी पसंद के हिसाब से सब्जी बनाते  है।

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शादी के बाद पहला करवाचौथ क्यों होता है हर लड़की के लिए खास, यहाँ जानें

जानिए क्या है करवाचौथ की कथा और कैसे मनायें पहला करवाचौथ


शादी के बाद सुहागनों को लिए हर व्रत और त्योहार खास होता है। उसी में से एक बहुत खास व्रत है करवाचौथ का व्रत। ये व्रत औरतें अपने पति की लम्बी उम्र की कामना के लिए रखती है। नवविवाहित औरतों के लिए ये व्रत काफी अहम होता है। वैसे तो काफी लड़कियाँ शादी के पहले भी व्रत रखती है लेकिन शादी के बाद पहला करवाचौथ व्रत काफी खास होता है। औरतें इस दिन सबसे खूबसूरत और खास दिखना चाहती हैं। जिनका पहला करवा चौथ होता है वे दुल्हन की तरह तैयार होती हैं। लाल रंग का जोड़ा शगुन के तौर पर माना जाता है। इसके अलावा कई और रंग हैं जो इस दिन पहने जाते हैं। जिनका पहला करवा चौथ है उन्हें कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

क्यों होता है  सुहागनों के  लिए  पहला करवाचौथ खास? 

लड़की के साथ साथ उसके ससुराल वालो के लिए भी करवाचौथ स्पेशल होता है। सुबह सरगी के साथ दिन की शुरुआत होती है। उसके बाद पूरे दिन तरह-तरह के व्यंजन बनते हैं और मिठाईयां भी बनती है। दूध और फेनी की मिठाई सब से खासतौर से बनाई जाती है। दुल्हन की तरह ही नवविवाहिता तैयार होती हैं। ससुराल वाले अपनी बहू को कुछ खास चीजें देती हैं जैसे जोड़ा और गहने। लेकिन कई लोगों में उनके माइके से जोड़े और तोहफों आने का रिवाज भी होता है।

शाम को स्त्रियां पूजा करके चंद्रमा को अर्क देकर अपने पति की पूजा करती हैं और उनके हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं।

व्रत की कथा:

वैसे तो काफी कहानियां है जो करवाचौथ व्रत के समय सुनी जाती है। जो सबसे प्रसिद्ध कहानी है वो है सावित्री और यमराज की कहानी। दरसअल, सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राणों की भीख मांगी थी औरकुछ खाए पिए  वो सारा दिन तपस्या करती थी ताकि  वो उनके पति को वापस लाये ।सावित्री से हार मान कर यमराज ने उनके पति को वापस कर दिया था, इसलिए करवाचौथ मनाते है और यही वजह है की इस दिन औरतें भूखी और प्यासी रहती है।

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क्यों पूजते है चाँद को ?

करवाचौथ में चंद्र को अर्क देने के बाद ही औरतें कुछ खा और  पी सकती है। अब ऐसे में आप सोच रहे होंगे की चांद की पूजा क्यों की जाती है ? तो लंका कांड में एक कथा है जब भगवान राम समु्द्र पार करके लंका पहुंचे तो उन्होने चांद पर पड़ने वाली छाया के बारे में बताया कि विष और चंद्रमा दोनों ही समुद्र मंथन से निकले थे जिस कारण से चंद्रमा विष को अपना भाई मानते है इस कारण से विष को अपने ह्रदय में स्थान दे रखा है। इसी कारण से करवा चौथ के दिन महिलाएं चांद की पूजा करती हैं और पति से दूर न रहने की कामना करती हैं।

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