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7 कारण की क्यों कॉलेज वो नहीं जो आपने सोचा था

7 कारण की क्यों कॉलेज वो नहीं जो आपने सोचा था


कॉलेज की ज़िंदगी जीने के लिए हम सब कई सपने देखते है। सब सोच के रखते है कि दोस्तों के साथ क्या करेंगे और क्या नहीं। जानिए की ऐसा क्यों है

  1. इतने धक्के खाने के बाद जब कॉलेज में दाखिला होता है तब अधिकतर समय तो लोगो से जान पहचान करने में ही निकल जाता है।
  2. जब तक हम लोगो से घुलते मिलते है, तब तक परीक्षा और परियोजना कार्य बनाने का समय आ जाता है। तब सिर्फ पढाई और काम नज़र आता है।
  3. ज़्यादातर समय हम कॉलेज छात्रों के पास पैसे ही नहीं होते तो कही आना जाना हो ही नहीं पाता।
  4. घर में रहने वाले बच्चो को समय की पाबंदी होती है। चाहे वो जितने भी बड़े हो जाए, अपने माँ बाप के लिए रहते वो बच्चे ही है, इसिलए समय की सीमा भी होती है।
  5. हर कॉलेज में 75% हाज़री ज़रूरी है, जिसके कारण कक्षा में होना भी बहुत ज़रूरी है। और इसी कारण से हर इरादा वही चूर हो जाता है।
  6. जहाँ घर में रह रहे बच्चो के लिए पाबंदी होती है वही हॉस्टल में रह रहे बच्चो को नई जगह का दर। उनको मनाना बहुत ही मुश्किल होता है।
  7. दोस्तों के साथ प्लान बनाना मतलब हर किसी की अलग पसंद। और अक्सर अधितकर समय यही सोचने में गुज़र जाता है कि कहाँ जाए और क्या करे और अंत में कॉलेज की कैंटीन में समय गुज़रता है।

कॉलेज का समय एक ऐसा दौर है जहाँ हम बहुत कुछ सीखते है। नई जगह में ढलना, अनेक काम एक साथ संभालना, खुद को भविष्य के लिए तैयार करना – ये सब हम इसी समय में सीखते है। ये समय चाहे जितना भी मुश्किल क्यों न हो, इनका अपना एक अलग मज़ा होता है।

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सोशल मीडिया के फायदे और नुक्सान

सोशल मीडिया


आजकल एक क्लिक पर पूरी दुनिया चलती है। आज के समय की टेक्नोलॉजी इतनी उत्तम है कि दुनिया के एक कोने में बैठ कर हम दूसरे कोने की खबर रख सकते है। अब जितना सोशल मीडिया ने हमें आगे बढ़ाया है उतना ही पीछे भी खींच लिया है। हर सिक्के के दो पहलू होते है अगर इस सोशल मीडिया के फायदा अनेक है तो नुक्सान कम नहीं है।

शुरुआत अच्छी बातों से की जानी चाहिए, तो पहले जानते है इस अद्भुत चीज़ के फायदे क्या है :-

1) इसके माध्यम से हम खुद को अद्यतन रख सकते है। हर नई बात की जानकारी हमारी उंगलियो पर हो गई है।

2) नए लोगो से जुड़ पाना और दूर रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क करना बहुत ही आसान हो गया है। बैठे बिठाये हमे हर बात का पता चलता रहता है।

3) लोगो के जन्मदिन और हर ज़रूरी अवसर का ज्ञात अब इस सोशल मीडिया के माध्यम से अपने आप हो जाता है।

4) आप सोशल मीडिया के माध्यम से आप अपने काम या व्यापार की प्रौन्नति कर सकते है। इसके ज़रिए आपको और आपके काम को एक नईपहचान मिलती है।

5) कोई भी जानकारी आप मिनटों में लोगो तक पहुँचा सकते है। दुनिया की अधिकतर जनता सोशल मीडिया से जुडी हुई है जिसके कारण आप अपनी आवाज़ दुनिया के हर कोने तक पहुँचा सकते है।

अब देखते है सिक्के का दूसरा पहलु यानी इसके नुक्सान

1) लोग अपना अधिकतर समय सोशल मीडिया पर बिताते है जिसके कारण वह अपना समय बर्बाद करते है। लोगो को अपने काम और समय का कोई होश नहीं रहता।

2) जितनी आसानी से जानकारी भेजी जा सकती है उसके हिसाब से लोग सही गलत कोई भी जानकारी फैला सकता है, इसलिए सारी खबरे विश्वासनीय नहीं रहती।

3) सोशल मीडिया पर ज़्यादा समय बिताने से लोगो में स्वास्थ्य सम्बंधित तकलीफे बढ़ती नज़र आती है। मोटापा, कमज़ोर दृष्टि, ख़राब यादाश्त उन में से कुछ है।

4) इसके बढ़ते प्रयोग से, साइबर क्राइम भी बढ़ गए है। लोगो के प्रोफाइल को हैक कर लिया जाता है और उनके द्वारा दी गई जानकारी का प्रयोग गलत ढंग से किया जाता है।

5) लोगो की तस्वीरों को गलत ढंग से पेश करके, उन्हें धमकियां दी जाती है और इसी माध्यम से उनसे पैसे हैंठे जाते है।

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जानिये क्या करे फुर्सत के समय में

आजकल के इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में लोगो को फुर्सत का समय मिलना तो बहुत ही कठिन है। पर जब ऐसा हो जाए तो ये तय कर पाना बहुत ही मुश्किल होता है कि इस समय में क्या किया जाए। तो जानिए की आप आपने फुर्सत के समय में क्या क्या कर सकते है।

  • आराम करें

इतनी भाग दौड़ के बाद खुद को समय देना और आराम करना बहुत ज़रुरी है। कोशिश करे की ये समय आप अपने लिए रखे और इसमें अपने दिमाग व अपने शरीर को आराम दे। बहुत ज़रूरी है कि आप अच्छे से आराम करे ताकि आप आपना और भी काम कर सके।

  • किताब पढ़े

ना जाने कितनी ही ऐसी किताबें थी जो आप पढ़ना चाहते थे पर काम के कारण से पढ़ नहीं पाए। तो उन किताबो को खोल के पढ़े और अपना ज्ञान और बढ़ाए। किताबे पढ़ने से ख़ुशी तो मिलती ही है पर ज्ञान भी बढ़ता है। हर किताब चाहे वो किसी भी विषय पर हो, वो कुछ न कुछ ज़रूर सिखाती है

  • फिल्म देखे

चाहे आप रणबीर के फैन हो या अनुष्का के आप इस समय में अपनी मनपसंद मूवी ज़रूर देख सकते है। अगर आपको को पुरानी फिल्मो का शौक है तो आप कोई भी पुरानी फिल्म बिना किसी चिंता के देख सकते है।

  • पुरानी तस्वीरें देखें

कितना मज़ा आता है ना बैठ कर पुरानी यादें ताज़ा करने में। चाहे आपके बचपन की तस्वीरें हो या घर में हुए किसी उत्सव की, हर तस्वीर चेहरे पर एक मुस्कान ला देती है।पुराने दिनों को याद करना और अपने मज़ाक पर हँसना हर परेशानी भुला देता है।

  • कुछ भी लिखें

आजकल की इस ज़िन्दगी में कितने ऐसे विचार होते है जो न तो हम व्यक्त कर पाते है और ना ही किसी से उनके बारे में बात कर पाते हैं। तो अच्छा है कि इस फुर्सत के समय में आप अपने सारे विचार कविता या लेख के रूप में लिख डाले। इससे ना सिर्फ आप बेहतर महसूस करेंगे पर आपका विचारो का बोझ आपके ऊपर से उतर जाएगा।

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क्यों ज़रूरत है आज लोगो को अपनी मानसिकता बदलने की

सोच बदलो, परिस्तिथि अपने आप बदलेगी


21वीं सदी में रह कर ये तो पता चल गया कि कैसे कथनी और करनी में ज़मीन आसमान का अंतर होता है। लोगो के विचारों और कर्मो में इतना अंतर है कि कोई चाह के भी इसे खत्म नहीं कर सकता। अब देखा जाए तो सोच तो बस लोगो के सामने अपनी अच्छी छाप छोड़ने के लिए होते है। पर लोग ये भूल जाते है कि बातो से ज़्यादा समाज काम पर ध्यान देता है।

हवा में बाते तो कोई भी कर देता है, मुश्किल तो खुद को साबित करना होता है। अब जैसे की लोग कूड़ा, कूड़ेदान में डालने की जगह सड़क पर दाल देते है और फिर शिकायत करते है कि देश कितना गंदा। बात करते है लड़कियो को बराबरी का हक़ देने की, पर अंत में उसके कपडे देख उसके चरित्र के बारे में बता देते है। परेशान होते है प्रदुषण के कारण, पर दिवाली पर पटाखे फोड़ना और गाड़ियो का अनावश्यक व अत्याधिक प्रयोग करना कम नही करते।

हम कितनी ही बार जाने अनजाने में लोगो को उनकी जीवन शैली के आधार पर उनकी हरकतों और उनके चरित्र के बारे में सब कुछ तय कर लेते है। ये सोचते ही नही की शायद दूसरा व्यक्ति भी हमे गौर से देख रहा हो। अगर आज हम मांग करते है एक लौकिक, समान और शांत देश की, तो क्यों हम खुद ही धर्म और लिंग के आधार पर एक दूसरे को खाने को दौड़ते है? क्यों हम खुद ही नाम, जाती, रंग, और रूप के आधार पर भेद भाव कर देते है और इंसानियत के बारे में भूल ही जाते है?

आज के समय की मांग है कि हम कुछ करे। सिर्फ बात करने से बात नही बनेंगी। अगर हमारी सोच बदल रही है, तो उसके साथ ज़रूरी है कि हमारे कर्म भी हमारी सोच अनुसार चले। हर एक व्यक्ति अगर एक छोटा कदम भी उठाये तो उसका नतीजा बहुत ही बड़ा होगा। और जिन लोगो की सोच अभी भी वही पुरानी घिसी पिटी है तो उन्हें ज़रूरत है अपना नज़रिया बदलने की, और वक़्त के साथ उस सांचे में ढलने की।

लोगो को और उनकी सोच को अपनाना सीखे। कोई एक दूजे से अलग नहीं है। अगर और कुछ समानता ना भी हो तो एक बात तो साफ़ तौर से समान है कि हम सब इंसान है। और अगर खुद के लिए या दूसरे लोगो के लिये कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम अपने आगे आने वाली पीढ़ी के बारे में सोचे। ऐसे वातावरण में, जहाँ लोगो की सोच ही दम घोंट दे, वहाँ वो कैसे जी पाएंगे?

सोचिएगा!

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7 बातें जो हर लड़की अपनी ज़िन्दगी में अपने परिवार से एक बार जरूर सुनती है

हमारा परिवार चाहे जितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, हमारे घर वालो की सोच की जड़े आज भी रहती पुराने ज़माने में ही है। बड़ा मुश्किल होता है अपने परिवार को ज़माने के साथ चलाना। जाने अनजाने में वो लड़का लड़की में भेद भाव कर ही देते है। पर फिर अपनी बेटी पर गर्व भी बहुत करते है। आइए जानते है कि वो कौन सी बातें है जो एक लड़की को ज़रूर सुननी पड़ती है :-

  • ‘बेटा अकेले मत जाना’

सुबह का समय हो या शाम का, अगर कोई लड़की किसी भी कारण से बाहर जाना चाहे तो सबसे सवाल उठता है ‘किसके साथ जा रही हो?’ लड़की किसी सहेली के साथ जा रही हो तो ठीक और किसी लड़के के साथ जाए तो उसे सवालो की बाढ़ में डुबो दिया जाता है। और तो और अगर वह अकेले जा रही हो तो ना जाने कैसे कैसे ख्याल माँ बाप को आने शुरू हो जाते है और उसी समय फैसला हो जाता है कि बेटी अगर जाएगी तो किसी के साथ जाएगी वरना घर पर रहेगी।

  • ‘ये पहन के जाओगी?’

परिवार का कोई उत्सव हो या किसी दोस्त का जन्मदिन, लड़कियाँ कुछ भी पहने सबसे पहले सवाल उठता है, ‘ ये पहन रही हो?’ , ‘ कपडे नहीं है क्या पहनने के लिए?’ बस फिर क्या, पूरी बात अब घूम कर कपड़ो से भरी हुई अलमारी और पहनने के लिए एक कपडा ना होने पर आ जाती है। अब इसके बाद लड़की परिवार वालो की पसंद के कुछ पहने तो खुद दुखी रहती है और अपनी पसंद से कुछ पहने तो माता पिता दुखी रहते है।

  • ‘वो लड़का कौन था?’

सह शिक्षा में पढ़ने के बाद हमारे कई दोस्त बनते है। ज़ाहिर सी बात है कि उनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल होते है। अब लड़कियां दोस्त हो तो किसी को कोई तकलीफ नहीं होती। पर अगर कोई लड़का दोस्त हो तो सिर्फ माता पिता को ही नहीं पर पूरे समाज को फिक्कत होती है। खुद को ही शर्म आ जाती है जब कोई दोस्त बहार मिल जाए और हमारे माता पिता की आँखों में सवालो की बाढ़ सिर्फ हमे दिखाई दे।

  • ‘खाना बनाना सीखो वरना कोई शादी नहीं करेगा’

हर कोई अपनी बेटी की शादी के लिए सबसे ज़्यादा चिंतित होता है फिर चाहे लड़की को पहले पढ़ाई ही क्यों न करनी हो। और शादी के लिए सबसे पहली चीज़ जो खुद लड़की के माँ बाप देखते है वो होता है खाना बनाना। उसकी खाना बनाने की कला के आधार पर ये तय किया जाता है कि वो लड़की शादी के लायक है या नहीं।

  • ‘ये सब उल्टा सीधा खाओगी तो मोटी हो जाओगी’

मोटापा मतलब बदसूरत होना और बदसूरत होना मतलब लड़का न मिलना और लड़का न मिलना मतलब शादी ना होना। किसी भी परिवार के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी ही बेटी की शादी होता है। पर कोई ये नहीं समझता की लड़की का वजन उसके गुणों से ज़्यादा ज़रूरी नहीं होता।

  • ‘तू तो हमारी सबसे प्यारी बेटी है!’

तुम चाहे एकलौते क्यों ना हो पर माता पिता ऐसे बोलते है कि अनगिनत बच्चो में से तुम सबसे अच्छी हो। अब आखिर जब इतनी बातो का बुरा लगता है तब माँ बाबा किसी ना किसी ढंग से अपनी राजकुमारी को मनाएंगे ही। इस समय में बेटी की हर खामी उसकी खासियत बन जाता है।

  • ‘अब तू नही करेगी तो कौन करेगा?’

ये पैंतरा तब अपनाया जाता है जब घर का कोई काम नहीं हो रहा होता और माता पिता का लाडला बेटा भी वो काम करने से इंकार कर देता है। ऐसे समय में हर बेटी को उसकी अहेमियत का एहसास दिलाया जाता है। उसको ये भी पता चल जाता है कि वो अपने परिवार के लिए कितनी ज़रूरी है।

हर किसी के प्यार को दर्शाने का तरीका एकदम अलग होता है। हमारा परिवार जाने अनजाने हमे कुछ भी कह ले, इस बात को कोई गलत नहीं ठहरा सकता कि वही हमसे सबसे ज़्यादा प्यार करते है। हमरी कमियों के बावजूद भी हमे अपनाते है।

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इस दीवाली इन 5 तरीको से अपना घर सजाए

इस दीवाली इन 5 तरीको से सजावट करें अपने घर की


त्योहारों का समय है और हर जगह रौनकें लगी है। दुकाने, घर और सड़कों को सजाया जा रहा है। तो इस दीवाली, सजावट के लिए ये 5 तरीके ज़रूर अपनाये।

रंगोली
  • रंगोली

मुख्य द्वार पर रंगोली बनाये। रंगोली बनाना हमारी सभ्यता का हिस्सा तो है ही, पर त्योहारों के समय में रंगोली घर की शोभा और सुंदरता दोनों को चार चाँद लगा देती है। आप रंगोली फूलों और रंगों से बना सकते है।

  • लाइट

दीवाली के मौके पर अलग अलग प्रकार की लाइट्स मिलती है। रंग बिरंगी लाइट्स का प्रयोग आप अपनी मुख्य द्वार, कमरा, खिड़की पर कर सकते है। लाइट्स लगाने से आपका घर और भी आकर्षक लगेगा।

दिया

यहाँ पढ़ें : इस बार दीवाली पर दिए कुछ ऐसे सजाएं

  • दिया

घर की चौखट पर या सीढ़ियो पर दीये रखे जाए तो उनकी शोभा अलग ही होती है। अलग अलग रंग के दिये बहुत ही सुंदर लगते है। आजकल बाज़ार में ना-ना प्रकार के दिये मिलते है : मिट्टी के, प्लास्टिक के, धातु के।

फूल
  • फूल

फूल अपने आप में बहुत सुंदर होते है। जब उनका प्रयोग घर सजाने के लिए किया जाता है तो वो हर चीज़ को और भी ज़्यादा सुन्दर बना देते है। फूलो का प्रयोग आप रंगोली में, दरवाज़े पर या दियो के आस पास कर सकते है।

  • कपड़ा

इस दीवाली हर चीज़ से हटके कुछ करना हो तो आप पुराने दुपट्टा का इस्तेमाल कर सकते है। अलग अलग रंग के दुपट्टे का प्रयोग आप अपना घर सजाने में कर सकते हैं। दुपट्टे के अलावा आप नेट के कपडे का प्रयोग भी कर सकते है।

ये सब तरीके बहरी सुंदरता बढ़ाने के लिए है। अगर सच में सब आकर्षक दिखाना हो तो दिल से खुश होना। ये सबसे ज़रूरी है। और ये ख़ुशी ही आपकी और आपके घर की सुंदरता को बढ़ा कर उस पर चार चाँद लगा देगी।

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