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बॉलीवुड

#successstoryofAyushmankhurana: क्यों मोटी आइब्रो के चलते रिजेक्ट हुए थे आयुष्मान खुराना ? 

विक्की डोनर से अंधाधुन तक आसान नहीं था सफर 
कहते हर सफल आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है साथ ही उसकी लगन और मेहनत भी छुपी होती है. वही सिर्फ आम जीवन के लोग ही नहीं बॉलीवुड  के कुछ ऐसे एक्टर्स भी है जिन्होंने अपने जिंदगी में कई उतार- चढ़ाव देखे है. वैसे ही बॉलीवुड के मोस्ट हैंडसम और चार्मिंग पंजाबी एक्टर जिसके लोग सिर्फ आवाज़ के ही नहीं एक्टिंग के भी कायल है.जी हाँ, हम बात कर रहे है पंजाबी मुंडे आयुष्मान खुराना की. जो सिर्फ एक अच्छे  एक्टर ही नहीं एक अच्छे कवी , लेखक , गायक और अच्छे टीवी होस्ट भी है.

आयुष्मान खुराना बॉलीवुड का ऐसा चमकता सितारा है जिन्होंने इस मुकाम तक पहुँचने के लिए कड़ी मेहनत की है. एक समय ऐसा भी था जब एक टीवी शो में आने के बावजूद भी कोई यह नहीं जानता था की आयुष्मान खुराना है कौन. आज उन्होंने अपनी आवाज़ ,एक्टिंग और लेखिका से बॉलीवुड में एक ऐसी पहचान बना ली है की बच्चा- बच्चा भी आयुष्मान खुराना को जानता है.सबसे ख़ास बात यह है कि इस मुकाम पर पहुँचने  के बाद भी आयुष्मान आज भी उस जमीं से जुड़े है जहाँ से उन्होंने अपने करियर की शरुआत की थी.

आयुष्मान खुराना ने इस शो से की थी अपने करियर की शुरुआत जिसके बाद वो कही नहीं रुके

ज्यादातर लोग यह जानते है की आयुष्मान खुराना ने अपने करियर की शुरुआत 2012  में आयी फिल्म विक्की  डोनर से की थी जिस फिल्म को फैंस द्वारा काफी पसंद  भी किया गया था. हालाँकि उनका फिल्म  इंडस्ट्री  में पहला कदम था लेकिन उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक टीवी शो से की जब महज़ वो 17 साल के थे. इस दौरान उन्होंने शो “पॉपस्टार” से टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा था और यहाँ से शुरू हुआ था आयुष्मान का अपने सपने को लेकर स्ट्रगल. इसके बाद आयुष्मान खुराना ने 2004 में आया एमटीवी पर शो रोडीज़ 2  में भाग लिया था जिसके वो विनर भी रहे  है.  साथ ही उन्होंने रेडियो स्टेशन में रेडियो जॉकी का काम भी किया.

2012  में अपने पहली फिल्म विक्की डोनर आने के बाद आयुष्मान खुराना कभी ठहरे नहीं . कठनाईयो के सामने करते हुए आयुष्मान ने कई फिल्मों  में काम किया जैसे-  2013 (नौटंकी साला) , 2014  (बेवकूफियाँ) , 2015 (हवाइज़ादा ) , 2015 ( दम लगा कर हईशा )इस फिल्म की काफी सरहाना भी की गयी वही फिर 2 साल के ब्रेक के बाद आयुष्मान ने 2017 में फिल्म मेरी प्यारी बिंदु से कमबैक किया.इस बीच उनके द्वारा गाए सांग अलबम  भी लांच हुए है जो फैंस द्वारा काफी पसंद किए गए.साथ ही 2017  में उनकी दो फिल्मे और आई बरैली की  बर्फी और शुभ मंगल सावधान .

बस 2018 से मानों आयुष्मान के लिए सक्सेस का रास्ता खुल गया. जी हाँ 2018 में आयी आयुष्मान की फिल्म “बधाई हो” जिसने बॉक्सऑफिस  पर ताबड़तोड़  कमाई  की  और 200  करोड़ का आकड़ा पार कर लिया. सिर्फ बधाई हो ने ही नहीं 2019 में आयी फिल्म “अंधाधुन” जिसने इसी साल ही नेशनल अवार्ड जीता है साथ ही पुरे विश्व में ताबड़तोड़ कमाई की.

एक समय पर अपनी मोटी आइब्रो को लेकर मिले कई सारे रिजेक्शन

आयुष्मान को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था. जिसके लिए उन्होंने अपने पढ़ाई  पूरी होने के बाद कई सारे ऑडिशंस भी दिए.लेकिन वो कई रिमार्क्स  के चलते आये दिन रिजेक्ट होने लगे थे. इस रिजेक्शन का कारण था उनकी मोटी आइब्रो और उनका पंजाबी लहज़ा.लेकिन उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी और ऑडिशंस दिए.

इन सभी अवार्ड्स से किये जा चुके सम्मानित

आयुष्मान खुराना को उनके काम को लेकर कई सारे अवार्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है. 2012  में आयी फिल्म विक्की डोनर को लेकर उनको मोस्ट एंटरटेंनिंग का अवार्ड दिया जा चुका है. इसके अलावा उन्हें प्लेबैक सिंगर के लिए फ़िल्मफेयर अवार्ड्स से भी नवाज़ा गया है.साथ ही उन्हें 2018  में आयी फिल्म अंधाधुन को लेकर  बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स )के लिए फिल्मफेयर अवार्ड्स से भी सम्मानित  किया गया है. आयुष्म खुराना को उनके कई सांग एलबम्स  और कविताओं को लेकर भी अवार्ड्स दिए जा चुके है.

आपको बता दे की आयुष्मान ने चंडीगढ़ से मुंबई तक का सफर किस तरह से  तय किया था यह सब उन्होंने अपनी 2015 में आयी किताब “माय जर्नी टू बॉलीवुड ” में बताया है. इस किताब को खुद आयुष्मान खुराना ने लिखा है जिसमे उन्होंने अपने संघर्ष से लेकर सफलता तक का ज़िक्र किया है.

जल्द ही इन प्रोजेक्टस पर काम करेंगे आयुष्मान खुराना

आयुष्मान  खुराना की फिल्म ड्रीम गर्ल इसी साल 13 सितम्बर को रिलीज़ हो रही है. इसके अलावा आयुष्मान जल्द ही नए  प्रोजेक्ट पर भी काम करने वाले है जैसे फिल्म बाला जिसमे उनके साथ यामी गौतम और भूमि पेडनेकर नज़र आएँगी. साथ ही 2020  में आने वाली फिल्म गुलाबो सीताबो में भी नज़र  आएंगे जिसमें वो अमिताभ बच्चन के साथ काम करेंगे.

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बिना श्रेणी

टूथपेस्ट के कुछ ऐसे रोचक उपयोग जो बना देंगे लाइफ आसान

सिर्फ दाँतों के लिए ही नहीं ,कई सरे कामो में उपयोगी है टूथपेस्ट


सुबह होते ही हर व्यक्ति के दिन की शुरुवात टूथपेस्ट से ही होती है.दैनिक जीवन में टूथपेस्ट हर किसी की पहली जरुरत है. लेकिन क्या आप जानते हैं की दांत साफ़ करने के अलावा भी टूथपेस्ट को कई और तरीके से उपयोग किया जा सकता है जो आपकी लाइफ को आसान बना  सकते हैं

स्टैन क्लीनर – टूथपेस्ट में कैल्शियम की मात्रा काफी अधिक होती है जो कई प्रकार के दाग हटाने के लिए कारगर है,इसके लिए आपको एक स्प्रे बोतल में कोल्ड्रिंक लेनी होगी ,इसमें टूथपेस्ट डालकर अच्छी तरह से मिला लें.  गहरे दाग लगे सिंक या वाश बेसिन में स्प्रे करें और कुछ मिनटों को लिए छोड़ दें.और स्क्रब की सहायता से इसे साफ़ कर दें. पानी से लगे ज़िद्दी दाग छुटाने के लिए काफी मशक्कत करनी होती है, लेकिन इससे आप बिना मेहनत के दाग मिटा सकतें हैं

मोबाइल क्लीनर – हम अक्सर अपने  महंगे फ़ोन ,लैपटॉप और कंप्यूटर साफ़ करने के लिए बाजार से खरीद कर महंगे महंगे क्लीन्ज़र का उपयोग करते हैं मगर क्या आप जानते हैं कि काम दाम में आने वाला टूथपेस्ट आपके मोबाइल को चमका सकता है.इसके लिए सिर्फ आपको वाइप क्लॉथ में टूथपेस्ट लेकर उससे अपना फ़ोन को साधारण तरीके से साफ़ करना होगा और आपको आपका फोन नए जैसा लगने लगेगा.इससे आप प्रकार के कांच साफ़ कर सकते हैं

जलने में देगा राहत -टूथपेस्ट में कैल्शियम के साथ मिंट भी मिला होता है जो काफी ठंडी प्रवृत्ति का होता है.. यदि आपके आस पास कोई भी आग से जल जाए तो जाली हुई जगह पर तुरंत टूथपेस्ट लगा दें.ऐसे में चोट को ठण्ड भी मिलेगी और जलने का निशान भी नहीं आएगा.

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सामाजिक

वर्ल्ड वाटर डे 2018: इम्पोर्टेंस एंड सिग्निफिकेंसऑफ़ थिस डे

जल प्रकृति का अनमोल तौहफा


मानव जीवन को प्रकृति ने एक उपहार के रुप में जल दिया है। जल की वजह से ही धरती में जीवन संभव है। जल को बचाना मानव जीवन का कर्तव्य है। धरती का एक चौथाई हिस्सा पानी से घिरा हुआ है। मगर कुछ क्षेत्रो में पानी की कमी से जीव जन्तुओं को काफी ज्यादा मुश्किलो का सामना करना पड़ता है।

जल ही धरती में जीवन के जीने का एक मात्र स्त्रोत है । जीवन के सभी कार्यों को करने के लिए हमें जल की आवश्यक्ता पड़ती है जैसे के नहाना, खाने में, कपड़े धोने , पीने में और एसे अन्य कार्यों में में। जल से ही फसल का उत्पादन होता है जिससे बाद में जाकर हमें खाना मिलता है और हमारा पेट भरता है। तो बिना जल को प्रदूशित करे और बिना जल की बर्बादी करे हमें उसे सही जगह और सही तरिके से इस्तेमाल करना चाहिए।

गरमियों के दिनो में अनेको पशु-पक्षियों की मृत्यु पानी की कमी से होती है। क्योंकी उन्हें पानी पहले तो मिलता ही नहीं है और यदी मिलता है तो आधे से ज्यादा पानी प्रदूसित होता है जिसको पीकर उनका जीवन वही खत्म हो जाता है। और यही हाल मानव जीवन का भी है। इतने प्रदूषण में रहना और प्रदूशित पानी पीने से उनके स्वास्थ  में भारी  असर पड़ता है।

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तो हमें जीव-जंतु को ध्यान में रखकर पानी का इस्तमाल कम से कम करे और उसे प्रदूषित होने से बचायें ताकी हमारे साथ-साथ हमारी आने वाली पीढ़ी को पानी की वजह से मुश्किलों का सामना ना करना पड़े। इसके लिए हम कई उपाये भी अपना सकते है जैसे जल संचयन कर, बारिश के पानी को इक्ट्ठा कर या उनका संग्रहण कर हम पानी को बचा सकता है और जिस तरह से प्रकृति ने हमारे पूर्वजों को और हमारे पूर्वजों ने हमे ये तोहफा दिया है हम भी आने वाली पीढ़ी को ये प्रकृती का ये खूबसूरत तोहफा दे सकते है।

प्रकृति के द्वारा मानवता के लिये जल एक अनमोल उपहार है। जल की वजह से ही धरती पर जीवन संभव है। भारत और दूसरे देशों के बहुत सारे क्षेत्रों में पानी की कमी से लोग जूझ रहें है जबकि पृथ्वी का तीन-चौथाई हिस्सा पानी से घिरा हुआ है। जल की कमी के कारण विभिन्न क्षेत्रों में लोगों द्वारा मुश्किलों का सामना किये जाने के कारण पर्यावरण, जीवन और विश्व को बचाने के लिये जल बचाने और संरक्षण करने के लिये हमें सिखाता है।

धरती पर जीवन का सबसे जरूरी स्रोत जल है क्योंकि हमें जीवन के सभी कार्यों को निष्पादित करने के लिये जल की आवश्यकता है जैसे पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़ा धोने, फसल पैदा करने आदि के लिये। बिना इसको प्रदूषित किये भविष्य की पीढ़ी के लिये जल की उचित आपूर्ति के लिये हमें पानी को बचाने की जरुरत है। हमें पानी की बर्बादी को रोकना चाहिये, जल का उपयोग सही ढंग से करें तथा पानी की गुणवत्ता को बनाए रखें।

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लाइफस्टाइल

सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए करे ये काम

सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के तरीके


अगर आप कैलोरी के प्रति सचेत है और अधिक वजन कम करने के लिए स्वास्थ्यवधक भोजन ग्रहण करते है। एक दिलचस्प शोध मे यह पता चला है कि कम खाने से न लोगो का वजन कम करने मे मदद मिलती है और तनाव को कम करता है जिससे सेक्स लाइफ बेहतर हो जाती है।

सेक्स टिप्स

कम कैलोरी ग्रहण करने वाले समूह के लोगों की नींद बेहतर हुई है और उनका वजन भी घट गया है। मोटापे के शिकार लोग अगर कम कैलोरी ले तो उनकी नींद और यौन प्रणाली बेहतर होती है।

ऐसे मे लोग अपने पार्टनर को शारीरिक सुख की अनुभूति नही करा पाते है। लेकिन आदतों को अपनी जीवनशैली मे शामिल कर सेक्स लाइफ को बेहतर बनाया जा सकता है।

तनाव खराब सेक्स लाइफ का एक प्रमुख कारण है। इसके लिए काफी हद तक हमारा लाइफ स्टाइल जिम्मेदार है। तनाव से बचने के लिए दिन के कामो का सही प्रबंध करे और ऑफिस और घर को अलग रखें। नियमित योग कर भी तनाव से बचा जा रहा है।

एक्सरसाइज

सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के तरीके

  •  हेल्दी सेक्सुअल जीवन व अच्छे सेक्स के लिए सकारात्मक सोच जरुरी होती है।
  • सेक्स लाइफ का भरपूर आनन्द लेने के लिए शरीर का फिट रहना भी जरुरी है। इसलिए हर रोज एकसरसाइज करें।
  • इसके अलावा यदि आप चाहें, तो जाँगिंग भी कर सकती है, क्योकि जागिंग करने से भी बेहतर सेक्स मे मदद मिलती है और शरीर फिट रहता है।
  • दो टोबलस्पून आवंले के रस मे एक एक टीस्पून सूखे आवंले का चूर्ण और शहद मिलाकर दिन मे दो बार ले इससे सेक्स पावर बढ़ती है।
  • गुलाबी, लाल, बैंगनी व जामूनी रंग की प्रकति गरम होती है, ये रंग सेक्स पावर बढाती है इसलिए अपने बेडरुम मे इन रंगो का अधिक से अधिक इस्तेमाल करे।
  • अच्छी सेक्स लाइफ का केवल तन से ही लेना देना नही रहता, बल्कि आपकी मन व संतुष्टि भी मायने रखती है।

जरुरी टिप्स

  • हफ्ते मे दो-तीन बार सेक्स करने से रोगप्तिरोधक क्षमता बढ. जाती है।
  • एंकलबोन के नीचे ऐडी मे सर्कुलर मसाज करने से सेक्सुअल उतेजना बढती है।
  • ध्यान रखे कि सेक्स के बीच गैप होना भी जरुरी है, खासतौर पर कोई इंफेक्सन पीरियडस, सेक्सुअल प्राब्लम्स आदि होने पर सेक्स नही करना चाहिए।
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सुझाव एजुकेशन लाइफस्टाइल

जानिए क्या होती है गुरु की महिमा

गुरु की महिमा


किसी के भी जीवन में गुरु की महिमा का व्याख्या कोई नहीं कर सकता। वास्तव में गुरु की महिमा का पूरा वर्णन कोई नहीं कर सकता। पौराणिक काल से ही गुरु ज्ञान के प्रसार के साथ-साथ समाज के विकास का बीड़ा उठाते रहे हैं। गुरु शब्द दो अक्षरों से मिलकर बना है- ‘गु’ का अर्थ होता है अंधकार (अज्ञान) एवं ‘रु’ का अर्थ होता है प्रकाश (ज्ञान)।
गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं। हमारे जीवन के प्रथम गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। जो हमारा पालन-पोषण करते हैं, सांसारिक दुनिया में हमें प्रथम बार बोलना, चलना तथा शुरुवाती आवश्यकताओं को सिखाते हैं। अतः माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है। भावी जीवन का निर्माण गुरू द्वारा ही होता है।

गुरु की महिमा

शिक्षक में दो गुण निहित होते हैं – एक जो आपको डरा कर नियमों में बाँधकर एक सटीक इंसान बनाते हैं और दूसरा जो आपको खुले आसमा में छोड़ कर आपको मार्ग प्रशस्त करते जाते हैं। एक सफल शिक्षक वही है जो सकारात्मक हो और जो अभी उम्मीद का दामन ना छोड़े अजर अपने शिष्य को भी वही सिखाये। अगर एक गुरु ही उम्मीद छोड़ तो वो अपने शिष्य को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित नहीं कर पाते।

एक शिक्षक या गुरु सिर्फ विद्यालय तक सीमित नहीं रहता। हमे हमारी पूरी ज़िंदगी में कई शिक्षक मिलते है जो किसी इंसान का रूप नहीं लेते। समय, अनुभव और किताबें भी हमारे जीवन में एक गुरु का किरदार निभाते है। हम जहाँ से और जिनसे सीखते रहते है, वही हमारे गुरु बनते रहते है।

समय और ज़िन्दगी भी गुरु होती है।

विद्यालय में मिलने वाले गुरु हमें पढाई के अलावा भी कई चीजो का ज्ञान देते है। वही माता पिता और दोस्त भी हमारी ज़िन्दगी के लिए एक ख़ास गुरु होते है। हमारी ज़िन्दगी अपने आप में एक शिक्षा का स्त्रोत होती है। समय और ज़िन्दगी से बेहतर गुरु कोई नहीं होता।इससे हम जितना सीखेंगे उतना बेहतर होता हैं। आखिर यही तो गुरु की महिमा होती है।

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साहित्य और कविताएँ

चलो आज याद करे महात्मा गांधी के अल्फाज़ो को

महात्मा गांधी के अल्फाज़ो की महत्व


महात्मा गांधी ने हमारे देश को आज़ाद करने के लिए बहुत कुछ किया। गांधी के लिए हमारे मन में जो इज़्ज़त है उसको कोई कम नहीं कर सकता। हमें उसने इतना प्यार था कि कब वो हम सब के बापू बन गए, पता ही नहीं चला। और शायद तभी बापू को इस राष्ट्र का पिता माना जाता है। उन्हें ये दर्जा बिलकुल सही मिला है। वो हमेशा से ही प्रेम और अहिंसा में विश्वास रखते थे। महात्मा गांधी के अल्फाज़ो की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती है। उनका हर लफ्ज़ आज हमारे लिए ज्ञान के समान है।

महात्मा गांधी

तो चलिए आज याद करे महात्मा गांधी के अल्फाज़ो को:-

  1. अपने दोष हम देखना नहीं चाहते और दूसरों के दोष देखने में हमें मज़ा आता है। बहुत सारे दुःख इसी कारण से पैदा होते है।
  2. विश्वास करना एक गुण है, अविश्वास दुर्बलता की जननी है।
  3. अपने प्रयोजन में दृढ विश्वास रखने वाला एक सूक्ष्म शरीर इतिहास के रुख को बदल सकता है।
  4. पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे।
  5. मेरी अनुमति के बिना कोई भी मुझे ठेस नहीं पहुंचा सकता।
  6. आप मानवता में विश्वास मत खोइए। मानवता सागर की तरह है; अगर सागर की कुछ बूँदें गन्दी हैं, तो सागर गन्दा नहीं हो जाता।
  7. आप तब तक यह नहीं समझ पाते की आपके लिए कौन महत्त्वपूर्ण है जब तक आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देते।
  8. पृथ्वी सभी मनुष्यों की ज़रुरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन लालच पूरी करने के लिए नहीं।
  9. हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें। हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा।
  10. जिस दिन प्रेम की शक्ति, शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जायेगी, दुनिया में अमन आ जायेगा।
  11. जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं, वे साबित करते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है।
  12. सुख बाहर से मिलने की चीज नहीं, मगर अहंकार छोड़े बगैर इसकी प्राप्ति भी होने वाली नहीं। अन्य से पृथक रखने का प्रयास करे।
  13. जिज्ञासा के बिना ज्ञान नहीं होता | दुःख के बिना सुख नहीं होता।
  14. कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं।
  15.  खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं।
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लाइफस्टाइल

हमारी ज़िन्दगी में संगीत की अहमियत

संगीत की अहमियत : संगीत और ख़ुशी का अनोखा सम्बंध


संगीत उत्साह है, संगीत ऊर्जा है, संगीत ख़ुशी है, संगीत कला है, संगीत ज़िन्दगी है। सभी भावों का समावेश हम संगीत में देख पाते हैं। संगीत को हम कभी ना नही कह सकते। यदि हम बहुत ख़ुश हैं तो यह हमारी ख़ुशी को और बढ़ा देता है, यदि हम दुखी है तो संगीत से हमारा मन ठीक हो जाता है और जो अपने दुख से बाहर नही आना चाहते ये उनकी भी मदद करता है। संक्षेप में कहे तो संगीत वह माध्यम है जिसके ज़रिए हम अपने सभी भाव व्यक्त कर सकते हैं। इसलिए हमें संगीत की अहमियत को समझना चाहिए।

संगीत मानव के इतिहास की एक बहुत ही ख़ास और अहम रचना है जिसने उसकी ज़िन्दगी को सुंदरता से सँवारा है। संगीत हमारी ज़िन्दगी में एक बहुत ही अहम भूमिका निभाता है। यह हमें ग़म में ख़ुशी और तनाव में सुकून प्रदान कर हमें ख़ुश बनाता है। और तो और ये हमारे दिमाग़ को भी शांत करता है और हमें आत्मविश्वास से भर देता है। संगीत ने हमारी ज़िन्दगी के हसीन पलों को पिरोकर हमें बांधा हुआ है।


यहाँ पढ़ें : 5 तरीक़े जिनसे आप बढ़ा सकते हैं याद करने की क्षमता

देखा जाए तो संगीत हमारे चारों तरफ़ है। चाहे हम इसे रेडीओ पर सुने चाहे टेलिविज़न पर या फिर कार या मोबाइल में ही क्यों ना सुने ये हर बार अपने साथ एक अलग उल्लास लाता है।

संगीत के जितने भी प्रकार हैं वे अलग अलग मौक़ों के लिए होते हैं। संगीत के कितने ही प्रकार हैं, भजन वाला संगीत, शादी के बैंड वाला संगीत यहाँ तक की नहाते समय गाए जाने वाले संगीत का भी अपना अलग आनंद होता है। संगीत के पास हमारे मन को अपने क़ाबू में करने की शक्ति होती है। इसका हमारे भावो से एक अलग सा सम्बंध है और ऐसे भावो से ही संगीत उत्पन्न होता है।

संगीत का इतिहास भारत में बहुत पुराना है मंत्रो के उच्चारण से लेकर आज के गानो रक का सफ़र बहुत ही अद्भुत रहा है। आज हमारे पास संगीत भिन्न रूपों में उपलब्ध है। हमारे पास लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, रॉक और पॉप संगीत और हिंदी फ़िल्मों का संगीत है अर्थात आज हमारे पास संगीत की भरमार है। कई डॉक्टर ने संगीत को “Healing without medicine” की उपाधि दी है। अर्थात् इसमें इतनी शक्ति है की ये समस्याओं को बिना दवाओं के ठीक कर सकता है।

संगीत हम सभी को किसी ना किसी तरह प्रभावित करता है। जो लोग संगीत पसन्द करते है वे इसे हर समय सुन सकते हैं। वे तो काम करते समय, कही जाते हुए, था तो पढ़ते हुए भी संगीत सुनते हैं। हमारा यह कहना ग़लत नही होगा की संगीत हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है जिसे अलग करना मनुष्य के लिए सम्भव नही।

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आइए जाने धैर्य एवं सहनशीलता का महत्व

आइए जाने धैर्य एवं सहनशीलता का महत्व


धैर्य एवं सहनशीलता

आइए जाने धैर्य एवं सहनशीलता का महत्व:- परिस्थितियों की भेद्यता और प्रतिकूलता एवं मनुष्यों के स्वभाव के कारण आज हर आदमी का सहनशील बनना आवश्यक हो गया है। अक्सर जब लोग प्रतिकूल परिस्तितियो में धैर्य व सहनशीलता का पाठ भूल जाते है, तो वह ज़िन्दगी के हर पड़ाव में हार जाते है।

सहनशीलता आपको हर परिस्थिति में एक उम्मीद की किरण देती है और उस से निकलने का साहस भी।

‘सहनशीलता’ शब्द दो शब्दों की संधि से बना है, सहन + शील। इस प्रकार एक व्यक्ति को दो बाते कभी नहीं भूलनी चाहिए – १)सहनशक्ति होना २)शील स्वभाव। परिस्तितियो में किये गए समझोते को सहनशीलता का नाम नहीं दिया जा सकता। ऐसी स्थिति में एक व्यक्ति खुद को बोझ में दबा हुआ महसूस करता है। शील स्वभाव का मतलब है- धैर्य, त्याग, संतोष तथा सहजता।

असहनशील व्यक्ति हमेशा अपने आप से असंतुष्ट होता है। सहनशील व्यक्ति के अभाव में, असहनशील व्यक्ति अपने आप पर नियंत्रण खो देता है। सहनशीलता व्यक्ति को सोचने का सही विवेक प्रदान करती है। अधैर्य या क्रोध की स्तिथि में मानव इसे, यानी विवेक को भूल जाता है। सहनशील व्यक्ति हमेशा उदार होता है। असहशीलता, व्यक्ति में तनाव बढाती है।

यहाँ पढ़ें : क्‍या आप भी ये ही करती है, मम्‍मी- पापा की गैर-मौजूदगी में

समय की मार भी एक सहनशील व्यक्ति को नहीं हरा सकता।

आज का आदमी तो बहुत ही स्वार्थी हो गया है। दुनिया में हर कोई एक दूसरे को ठगने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में आदमी का अपनी स्तिथि मव टिकना बड़ा मुश्किल लगता है, लेकिन जो व्यक्ति सहनशील होते है, वह लोग खराब से खराब स्तिथि में भी खुद को अनुकूल बना लेते है और सदैव खुश व संतुष्ट रहते है। प्रतिकूल परिस्थितिया हमारी परीक्षा लेने के लिए होती हैं। जो व्यक्ति आत्मविश्वास व सहनशीलता का धनी है, वह बड़े ही आसानी से इन पर विजय प्राप्त कर लेगा।

सहनशीलता वह कसौटी है जिस पर खरा उतर कर व्यक्ति साधारण नहीं रहता, महान बन जाता है। उसका दृष्टिकोण बदल जाता है। सहनशीलता एक व्यक्ति को सत्य-असत्य का पारखी बना देती है। दुनिया में आजतक जितने भी महान पुरुष हुए है, वो सभी सहनशीलता के कारण हुए है।

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