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साहित्य और कविताएँ

चलो आज याद करे महात्मा गांधी के अल्फाज़ो को

महात्मा गांधी के अल्फाज़ो की महत्व


महात्मा गांधी ने हमारे देश को आज़ाद करने के लिए बहुत कुछ किया। गांधी के लिए हमारे मन में जो इज़्ज़त है उसको कोई कम नहीं कर सकता। हमें उसने इतना प्यार था कि कब वो हम सब के बापू बन गए, पता ही नहीं चला। और शायद तभी बापू को इस राष्ट्र का पिता माना जाता है। उन्हें ये दर्जा बिलकुल सही मिला है। वो हमेशा से ही प्रेम और अहिंसा में विश्वास रखते थे। महात्मा गांधी के अल्फाज़ो की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती है। उनका हर लफ्ज़ आज हमारे लिए ज्ञान के समान है।

महात्मा गांधी

तो चलिए आज याद करे महात्मा गांधी के अल्फाज़ो को:-

  1. अपने दोष हम देखना नहीं चाहते और दूसरों के दोष देखने में हमें मज़ा आता है। बहुत सारे दुःख इसी कारण से पैदा होते है।
  2. विश्वास करना एक गुण है, अविश्वास दुर्बलता की जननी है।
  3. अपने प्रयोजन में दृढ विश्वास रखने वाला एक सूक्ष्म शरीर इतिहास के रुख को बदल सकता है।
  4. पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे।
  5. मेरी अनुमति के बिना कोई भी मुझे ठेस नहीं पहुंचा सकता।
  6. आप मानवता में विश्वास मत खोइए। मानवता सागर की तरह है; अगर सागर की कुछ बूँदें गन्दी हैं, तो सागर गन्दा नहीं हो जाता।
  7. आप तब तक यह नहीं समझ पाते की आपके लिए कौन महत्त्वपूर्ण है जब तक आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देते।
  8. पृथ्वी सभी मनुष्यों की ज़रुरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन लालच पूरी करने के लिए नहीं।
  9. हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें। हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा।
  10. जिस दिन प्रेम की शक्ति, शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जायेगी, दुनिया में अमन आ जायेगा।
  11. जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं, वे साबित करते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है।
  12. सुख बाहर से मिलने की चीज नहीं, मगर अहंकार छोड़े बगैर इसकी प्राप्ति भी होने वाली नहीं। अन्य से पृथक रखने का प्रयास करे।
  13. जिज्ञासा के बिना ज्ञान नहीं होता | दुःख के बिना सुख नहीं होता।
  14. कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं।
  15.  खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं।
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क्या हमें सफल बनने के लिए शिक्षा ग्रहण करना अनिवार्य है?

“किताबी ज्ञान : सफलता का रहस्य”


शिक्षा केवल अच्छे अंक लाने या डिग्री हांसिल करने के बारे में नही है। यह ख़ुद में ही बहुत बड़ा विषय है। शिक्षा का अर्थ है किसी भी विषय पर जानकारी होना। किसी गाँव में रहने वाला कोई किसान भी शिक्षित है यदि उसे खेतों में प्रयोग होने बीज बोने वाली फ़सलो के बारे में जानकारी है। वो सफल भी होगा यदि उसे खेती के बारे में अच्छी जानकारी है तो। एक खिलाड़ी भी पूर्णत: शिक्षित होगा यदि उसे अपने खेल के बारे में पूरी जानकारी है। और दूसरी ओर वह व्यक्ति अशिक्षित हो सकता जिसने कॉलेज जा के डिग्री प्राप्त की है क्योंकि ऐसा हो सकता है की उसे ज्ञान मिला ही ना हो। सफल होने के लिए हमें मस्तिष्कों की शक्ति रचनात्मकता, सोच, निष्ठा और ज्ञान की आवश्यकता होती है और ना की केवल किताबों ज्ञान की।

यहाँ पढ़े : सह-शिक्षा की महत्ता

शिक्षा केवल वे शिक्षा माही है जो कि विद्यालयों में जाके ग्रहण की जाए। असली शिक्षा जीवन के अनुभवो से ग्रहण की जाती है। शिक्षा जीवन के मूल्यों के लिए आवश्यक है, परंतु बिना शिक्षा के भी व्यक्ति सफलता प्राप्त कर सकता है। यदि उसने निष्ठा और इच्छा है तो। एक शिक्षित व्यक्ति अमीर हो सकता है, पर ज़रूरी माही की वह समाज की बाज़ारी में क़ाबिल हो। किसी की शिक्षा और डिग्री उसकी क़ाबिलियत और क्षमता के बारे में माही बताता। पढ़ाई लिखाई सिर्फ़ बाहरी ज्ञान बढ़ाने के लिए होता है। हमारी रुचि और पसंद में शायद पढ़ाई की ज़रूरत ना हो।

शिक्षित हो कर आप किसी अच्छी और बड़ी जगह पर नौकरी पा सकते है। पर शायद आपको उस से संतुष्टि ना मिले, क्यूँकि वो आपकी क़ाबिलियत नही, मजबूरी है। लोगों को अपने जुनून का पीछा करना चाहिए, क्यूँकि शायद उन्हें इस क्षेत्र में ज़्यादा कामयाबी मिलेगी। अब देखा जाए तो एक नर्तकी को हिसाब और विज्ञान के ज्ञान की नही पर, ताल और नृत्य का ज्ञान सीखने की ज़रूरत होती है। विज्ञान, ऐल्जेब्रा और बाक़ी विषय हम आम ज़िंदगी में प्रयोग नही करते। मेरा मानना यह है की हम पढ़ाई पूरी ज़िंदगी में कभी भी कर सकते हैं परंतु अगर हमारा हुनर किताबों की दुनिया में कही खो जाए तो हम उसे कैसे ढूँढेंगे?

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