Categories
काम की बात करोना

सरकारी से प्राइवेट होती बैंक क्या अर्थव्यवस्था में सुधार कर पाएगो

क्या सरकार का निजीकरण का फैसला आम लोगों को खुश कर पाएगा


पिछले साल आई कोरोना महामारी ने देश की दिशा और दशाओं को बदलकर रखा दिया है. पिछले साल लगभग तीन महीने तक चले लॉकडाउन के बाद सरकार के पहले संबोधन में आत्मनिर्भर भारत के नाम पर निजीकरण की एक लिस्ट जनता को बताई गई. अब हाल यह है कि सरकारी संपत्ति को भी धीरे- धीरे निजी हाथों में दिया जा रहा है. आज काम की बात में हम बात करेंगे इस निजीकरण का लोगों की जिदंगी में कितना प्रभाव पड़ेगा.

अहम बिंदु

–         चार बैंकों का निजीकरण

–         पुरानी बैंकों की स्थिति

–         नौकरियो पर असर

–         निजीकरण का प्रभाव

 

अभी कल ही खबर आई है कि चार सरकारी बैंकों का निजीकरण किया जाएगा.  जिन चार बैंको को निजीकरण के लिए चुना गया है वो इस प्रकार है. बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया. रॉयटर्स की खबर के अनुसार दो बैंको का निजीकरण वित्त वर्ष 2021-22 में किया जाएगा. बैंक के अधिकारियों की माने तो शुरुआती दौर में सरकार छोटे से लेकर मिड-साइज के बैंको का  निजीकरण करेगी.  उसके बाद बड़ी बैंकों को भी निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा. आपको बता दें बैंकों को प्राइवेट से सरकारी इंदिरा गांधी की सरकार में किया गया था. अब यह इन्हीं सरकारी बैंको दोबारा से प्राइवेट किया जा रहा है. जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ने वाला है. अर्थशास्त्र  के जानकार अमित कुमार दिवाकर कहते बैकिंग की जगह पर मॉर्केटिंग को ज्यादा बढ़ावा दिया जाएगा. जिसके तहत बैंकों के स्टॉप को तरह-तरह के टारगेट दिए जाएंगे. जिसके तहत, म्युचुअल फंट, इंश्योरेंस कंपनी के लिए काम करने को कहा जा सकता है. बैंक अपनी फीस को बढ़ा सकती हैं. जिसके तहत फ्रॉड को बढ़ा मिलेगा. इससे साफ हो जाता है कि धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी होगी. अमित कहते  हैं कि इसका सीधा असर लोन पर पड़ेगा.  अब तक बैंको से आम आदमी को लोन लेना आसान था. लेकिन प्राइवेट हो जाने के बाद जिनका शेयर होगा वो अपने हिसाब से लोन ले पाएंगे. बैंकों में प्राइऑरटी में बदलाव आ जाएगा. बैंकों द्वारा छोटे लोन कमी होगी. लेकिन बड़े लोन आसानी से मिल पाएंगे. शेयर में बढ़ोतरी होगी.

पुरानी बैंकों की स्थिति

 सरकार बजट 2021-2022 में बैंकों के निजीकरण की बात कही है. साल 2022 तक दो बैंकों को प्राइवेट कर दिया जाएगा. इस बारे में अमित कहते हैं पुरानी बैंकों की स्थिति के बारे में बात करें तो देश की दो सबसे बड़ी बैंक आईसीआईसीआईसीआई और एचडीएफसी का हाल किसी से छुपा नहीं है. वो बताते हैं कि आईसीआईसीआईसीआई बैंक की एमडी चंदा कोचर को हम कैसे भूल सकते हैं. कैसे उन्होंने अपने करीबों को फायदा पहुंचाया था. वह कहते हैं कि प्राइवेट बैंक आपको भले ही सर्विस देती हो लेकिन इसके पीछे सिक्योरिटी के नाम आज भी आम आदमी परेशान है. हाल ही में एचडीएफसी बैंक के सर्वर रुम की ही लाइट चली गई थी. उस दौरान क्या हुआ कौन जानता है. सारा डाटा वहीं मौजूद था. इस घटना के बाद सरकार ने लोगों को ऑन ट्राजेक्शन करने के लिए मना किया. कई क्रेडिट कार्ड धारकों को अकॉउट कोलेप्स हो रहे थे. येस बैंक में क्या हुआ इससे भी सब वाकिफ हैं.

और पढ़ें: क्या बजट 2021-22 कोरोना से परेशान लोगों के जीवन को दोबारा पटरी में लाने में मदद करेगा

 

आम आदमी की पहुंच से दूर होता बैंक

देश में जितने भी लोग प्राइवेट बैंक  में अपना अकॉउट रखते हैं. उनमें से ज्यादातर लोगों का सैलरी अकॉउट होता है. इसका सबसे बड़ा कारण है प्राइवेट बैंक में खाता खुलवाने के लिए मोटी रकम चाहिए होती है. एक खबर के अनुसार वर्ल्ड बैंक द्वारा साल 2018 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के करीब 19 करोड़ वयस्कों का कोई  बैंक खाता नहीं हैं. जबकि साल 2011-2018 के बीच 80 प्रतिशत बैंक खातों में बढोतरी हुई है. इसका एक कारण जनधन योजना द्वारा बनाएं गए खाते हैं. अब सवाल यह उठता है जब इतना बढ़ी आबादी सरकारी बैंकों में 100 रुपए देकर खाता नहीं खुलवा पा रही है. वह प्राइवेट बैंकों तक अपनी पहुंच को कैसे बना पाएगी

सरकारी नौकरी में कटौती

बैंकों के प्राइवेट होने का सीधा असर रोजगार पर भी पेड़ेगा. इससे पहले रेलवे और एयरपोर्ट के निजीकरण को लेकर देश के अलग-अलग हिस्से में विरोध प्रदर्शन हुआ था. विरोध करने का सबसे बड़ा कारण है नौकरी में कटौती.  लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे है लोगों के लिए यह बहुत बुरी खबर है. क्योंकि जैसे ही बैंक प्राइवेट हो जाएगी. वैकेंसी आनी बंद हो जाएगी. लंबे समय से तैयारी कर रहे लोगों को लिए यह दोहरी मार जैसा है. पहली लंबे समय से तैयारी कर रहे लोगों की प्राइवेट कंपनी मे काम करने के लिए उम्र पार हो रही है. दूसरा काम के क्षेत्र में उनका कोई अनुभव नहीं होगा. प्राइवेट कंपनियां हमेशा से ही एक्सप्रीरियंस वाले शख्स को पहले अपने यहां काम देती है. इसलिए आने वाली पीढ़ी को पहले ही पता होता है कि उन्हे प्राइवेट कंपनी में काम करना होगा. वह शुरुआत से ही काम करेंगे. लेकिन जो लोग अभी तैयारी कर रहे हैं उनके पास यह बहुत परेशानी है. मुखर्जी नगर में तैयारी कर रहे राजीव नयन का कहना है कि निजीकरण के बाद ज्यादातर काम कॉन्ट्रेक्ट में किए जाएगा. जब ऐसा सिस्टम हो जाएगा तो शिक्षा का महत्व एकदम कम हो जाएगा. जिनके लोग पहले ही वहां मौजूद होंगे वह अपने लोगों को ही नौकरियों पर रखेंगे. जिसके कारण जो लोग एक उम्मीद से तैयारी कर रह थे कि एक सरकारी के द्वारा उनके घर की स्थिति ठीक होगी. उनके  लिए  वहां तक पहुंच पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा. नौकरियों के क्षेत्र में बड़ा गैप आ जाएगा. जिसका सीधा असर मिडिल क्लास पर पड़ने वाला है.

रेलवे का निजीकरण

देश की अर्थ का दूसरा सबसे बड़ा साधन रेलवे हैं. लेकिन अब धीरे-धीरे इस सरकारी संपत्ति को प्राइवेट किया जा रहा है. पहले प्राइवेट ट्रेन चलाई गई. उसके बाद रेलवे स्टेशन को प्राइवेट किया गया है. अडानी ग्रुप को 50 साल के लिए रेलवे स्टेशन को लीज पर दिया गया है.  मतलब साफ है ट्रेनों का रख रखाव अब रेलवे के अंतर्गत नहीं ब्लकि निजी कंपनियों के हाथ में होगा. हर ट्रेन में लगभग 16 कोच होगें. इतनी औसत स्पीड 160 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. सरकार का यह भी कहना है कि इन आधुनियों ट्रेनों को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में ही बनाया जाएगा.

निजीकरण  का प्रभाव

–         निजीकरण का सबसे ज्यादा प्रभाव समाजिक न्यायिक लड़ाई  पर पड़ेगा.  सरकारी नौकरियां के द्वारा ही देश में एससी, एसटी और ओबेसी का उत्थान हो रहा है. आरक्षण के कारण ही कई जातियों  की पहली पीढ़ी पढ़कर सरकारी नौकरी तक पहुंच पाई. लेकिन अगर दोबारा से निजीकरण कर दिया जाएगा तो इसका सीधा असर आरक्षण पर पड़ेगा.

–         निजी कंपनियों में लोगों अत्यधिक काम और टारगेट दिया जाएगा. जिसका असर आम आदमी की निजी जिदंगी पर पड़ेगा. मानसिक रुप से लोग अत्यधिक बीमार हो सकते है.

–         कॉमपटीशन अधिक बढ़ेगा. जिसके कारण नौकरियां के बारे में लोगों तक जानकारी नहीं पहुंच पाएगी.

–         निजीकरण का सीधा असर अनुंकपा वाली नौकरियों पर भी पड़ेगा.

 

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
लाइफस्टाइल

जाने दुनिया की सबसे अजीबो-गरीब जॉब्स के बारे में

जानें दुनिया की अजीबो-गरीब जॉब्स के बारे में


आज के समय में हर आदमी चाहता है कि उसके पास एक अच्छी जॉब हो, जिससे वो बहुत सारे पैसे कमा सके और एक बेहतर जिंदगी जी सके. जैसा की हम सभी लोग जानते है कि पैसा कमाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ज्यादातर लोग अच्छा पैसा कमाने के लिए नौकरी वाला रास्ता अपनाते है तो वही कुछ लोग खुद का बिजनेस भी करते है. लेकिन खुद का बिजनेस करने के लिए आपके पास इन्वेस्ट करने के लिए पैसे की जरूरत होती है.  जो सभी लोगों के पास नहीं होते. इसलिए आज के समय में इस बात से तो सभी लोग पूरी तरह सहमत है कि आज के समय में नौकरी लोगों की एक ज़रूरत बन चुकी है. वही दूसरी तरफ बेरोज़गारी भी अपने पैर पसार रही है यानि की बेरोज़गारी बहुत ज़्यादा बढ़ गई है.  इसीलिए आज के समय में लोग अपनी जरूरतो को पूरा करने के लिए कुछ भी काम करने को तैयार हो जाते हैं फिर चाहे वो नैकरी कितनी भी बोरिंग क्यों ना हो. लेकिन क्या आपको पता है दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो सब जानते हुए अजीबो गरीब नौकरियां करने के लिए तैयार होते हैं तो चलिए

 

और पढ़ें: जानें सर्दियों में अदरक का काढ़ा पीने के अद्भुत फायदे, एलर्जी से लेकर पाचन तक में है बेहद फायदेमंद

 

 

आज हम आपको कुछ अजीबो-गरीब नौकरियों के बारे में बतायेंगे.

  • धक्का देने की नौकरी: धक्का देने की नौकरी,ये सुन कर आपको थोड़ा अजीब लगेगा कि ये कैसी नौकरी है आपको बता दे कि हमारे देश में जितनी भीड़ अपने रेलवे स्टेशन या मेट्रो स्टेशन पर देखी होगी उससे कई गुना ज्यादा भीड़ जापान के मेट्रो स्टेशनों पर होती है. जिसके कारण लोगों का मेट्रो में चढ़ना मुश्किल हो जाता है.  जिसके लिए जापान में धक्का देकर मेट्रो में चढ़ाने वाले गार्ड तैनात किए जाते हैं.

 

  • सोने की नौकरी: सोने की नौकरी, ये सोना सुन कर तो सभी लोगों को लगेगा की हम गोल्ड से संबंधी नौकरी की बात कर रहे है. लेकिन यहाँ हम आराम से नींद लेकर पैसा कमाने वाली नौकरी के बारे में बात कर रहे है. अब आप सोच रहे होंगे कि भला ऐसी कौन सी कंपनी होगी जो लोगों को सोने के पैसे देती है.  तो आपको बता दें कि ऐसी बहुत सी कंपनी है जहां साइंटिफिक रिसर्च के लिए शांति से सोने वाले लोगों की जरूरत होती है. इतना ही नहीं बेड के गद्दे बनाने वाली कंपनियां भी ऐसे लोगों को हायर करती हैं.

 

  • किराये का बॉयफ्रेंड: किराये का बॉयफ्रेंड, ये सुन कर तो हमारे देश के बहुत से लड़के ये सोच रहे होंगे कि काश उनको भी ये नौकरी मिल जाये.  लेकिन क्या आपको पता है जापान के शहर टोक्यो में इस तरह की तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं.  जापान में जब भी कोई लड़की अकेलापन या खालीपन महसूस करती है तो अपना अकेलापन दूर करने के लिए किराये का बॉयफ्रेंड हायर कर लेती है.

 

 

  • खाना खाने की नौकरी: आज के समय में हम सभी लोग जितनी भी मेहनत कर रहे वो खाना खाने के लिए ही कर रहे है.  खाना खाना भला किसी पसंद नहीं होता और अगर कोई हमे खाना खाने के बदले पैसे भी दे तो यह तो सोने पर सुहागा हो जाता है.  लेकिन क्या आपको पता है हमारे देश में ऐसी बहुत सी बड़ी बड़ी कंपनियां है जो ऐसे लोगों को हायर करती हैं जो उनके तरह तरह के खाने खा पाए.

 

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
हॉट टॉपिक्स

सभी के लिए खुशखबरी, जल्द बढ़ने वाली है PF कटौतियों की लिमिट, अब 15 हजार नहीं 21 हजार तक कट सकता है PF

जाने लेबर यूनियनों की क्या है मांग


बहुत जल्द ही सभी वर्किंग लोगों को एक खुशखबरी मिलने वाली है.  सरकार जल्द ही PF कटौतियों को लेकर एक बड़ा अपडेट ला सकती है. यानि की सरकार जल्द ही  PF कटौतियों की लिमिट बढ़ा सकती है. इस मामले में पिछले कई दिनों से बातचीत जारी है. इतना ही नहीं बीते बुधवार और गुरुवार को इस मामले को लेकर लेबर मिनिस्ट्री, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और लेबर यूनियन के लोगों की आमने सामने बैठक हुई थी.  हालांकि अभी तक सरकार ने ये साफ़ नहीं किया की  उन्होने क्या फैसला किया है.  लेकिन अगर अभी की तरह आगे भी सब ठीक रहा और मांगें मान ली जाती हैं तो PF की कटौती का मानक बढ़ जाएगा. क्योकि लेबर यूनियनों की ओर से यही प्रमुख मांग भी है.

 

और पढ़ें: कोरोना के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी को लगेगी कोरोना वैक्सीन

 

जाने क्या होगा 21000 रुपये का नया मानक

 

दरअसल अभी भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि जिन कर्मचारियों का मासिक वेतन 15,000 रुपये है, उनके मासिक वेतन से PF की कटौती न की जाए.  बल्कि जिनकी सैलरी 21,000 रुपये है उसके मासिक वेतन से कर्मचारी भविष्य निधि स्कीम के तहत कटौती की जाए. यानि कि अगर हम सरल शब्दों में कहे तो 15,000 रुपये के मानक को बढ़ाकर 21,000 रुपये कर दिया जाए. अब सभी लोगों को सरकार के फैसले का इंतजार है और इस मांग पर सरकार का भी जल्द ही फैसला आ सकता है.  इतना ही नहीं कुछ समय पहले ये बात सामने आ रही थी कि भारतीय मजदूर संघ ने छुट्टियों के मामलों में भी मांग की थी. भारतीय मजदूर संघ की मांग है कि हर तरह के वर्कर्स के लिए अलग-अलग कानून बनाए जाएं.  इसके पीछे भारतीय मजदूर संघ ने दलील दी गई कि सभी लोगों का काम अलग-अलग होता है फिर चाहे वो पत्रकार हो या फिर भवन निर्माण से जुड़े कम करने वाले वर्कर्स  इसीलिए सभी लोगों के लिए कानून भी अलग अलग बनाए जाएं.

 

नए साल पर एक बड़ा तोहफा दे चुकी है सरकार

क्या आपको पता है हम सभी लोगो को नए साल पर सरकार एक बड़ा तोहफा दे चुकी है. साल 2021 शुरू होने से कुछ दिन पहले ही सरकार कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे चुकी है.  दरअसल केंद्र सरकार ने साल 2019-20 के लिए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड पर 8.5 प्रतिशत का पूरा ब्याज एक साथ देने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस रकम को 31 दिसंबर 2020 यानि कि न्यू ईयर इव तक सभी कर्मचारियों के खाते में डाल दिया गया था. नया साल शुरू होने के साथ केंद्र सरकार ने लोगों को धनवृद्धि का तोहफा दिया. इतना ही नहीं अधिकारियों ने बताया कि ब्याज दर से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा के लिए भारतीय मजदूर संघ और वित्त मंत्रालय की बैठक हुई थी.

 

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com