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बड़ी मुशकिलो  से शूट हुआ था गाना  ‘ज़िन्दगी  की यही रीत हैं’ – अनिल कपूर ने शेयर किया दिलचस्प किस्सा 

जाने फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से


बॉलीवुड अभिनेता अनिल कपूर ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है। उनमे से एक है ‘मिस्टर इंडिया’। अनिल कपूर की सुपरहिट फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ को 34 साल पूरे हो गए है। इस मौके पर अनिल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस फिल्म का गाना ‘जिंदगी की यही रीत है’ का वीडियो शेयर किया है। इसके साथ ही उन्होंने यह बताया कि यह गाना किन मुश्किलों के बीच बनकर तैयार हुआ। अनिल कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने कैप्शन में लिखा ‘मिस्टर इंडिया मेरे लिए हमेशा एक महत्वपूर्ण फिल्म रहेगी। उन्होंने कहा मुझे याद है जब 34 साल पहले हमने इस सफर की शुरुआत की थी तो मैं चीजों की जानकारी के लिए जुनूनी हुआ करता था। जब मैं ‘जिंदगी की यही रीत है’ गाने की धुन सुना करता था। तो मै इसमें सिर्फ किशोर दा की आवाज इमेजिन करता था। तब लोग किशोर कुमार और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ काम करना नहीं चाहते थे। किशोर दा के संपर्क में आने में भी महीनों लग गए’।

कैसे शुरू हुआ था अनिल कपूर का बॉलीवुड करियर

अभी अनिल कपूर को फिल्म इंडस्ट्री में 40 साल से ज्यादा का समय हो गया है। उन्होंने 12 साल की उम्र में ही फिल्मी दुनिया में कदम रख दिया था। उन्होंने एक बाल कलाकार के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। अनिल कपूर ने सबसे पहले फिल्म ‘तू पायल मैं गीत’ में काम किया था। इस फिल्म में उन्होंने शशि कपूर के बचपन का रोल निभाया था। हालांकि, यह फिल्म थिएटर में रिलीज नहीं हुई थी, जिसके बाद अनिल कपूर ने फिल्म ‘हमारे तुम्हारे’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। तब से लेकर अब तक वह बॉलीवुड में लगातार अपनी पैठ बनाए हुए है।

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अनिल कपूर कितना रहते है सोशल मीडिया पर एक्टिव

अनिल कपूर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर काफी एक्टिव रहते है हाल ही में उन्होंने सुनीता कपूर के साथ अपनी शादी की 36वीं सालगिरह मनाई थी। इस मौके पर उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर खास पोस्ट किया है। साथ ही उन्होंने अपनी शादी की दिलचस्प अपने फैंस के साथ शेयर की थी। आपको बता दे की अनिल कपूर और सुनीता कपूर ने 1984 में शादी रचाई थी।
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राजा राम मोहन राय के बर्थ एनिवर्सरी पर जाने क्यों उनको ‘आधुनिक भारत का जनक’ कहा जाता है? 

कौन है राजा राम मोहन राय?


Why Raja Ram Mohan Roy known as a ‘father of modern India’

राजा राम मोहन राय का जन्म बंगाल में एक ब्राह्मण परिवार में 22 मई 1772 को हुआ था। उनको दुनिया ‘आधुनिक भारत के जनक’ के नाम से भी जानती है। राजा राममोहन राय ऐसे भारतीय थे जिन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी की नौकरी छोड़ खुद को राष्ट्र समाज में झोंक दिया। उन्होंने रूढ़िवादी हिंदू अनुष्ठानों और मूर्ति पूजा को बचपन से ही त्याग दिया था। जबकि उनके पिता रामकंटो रॉय एक कट्टर हिंदू ब्राह्मण थे। उन्होंने आजादी से पहले भारतीय समाज को सती प्रथा, बाल विवाह से निजात दिलाया। राजा राम मोहन राय को 15 साल की उम्र में बंगाली, संस्कृत, अरबी तथा फ़ारसी भाषा का ज्ञान हो गया था। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में ‘ब्रह्ममैनिकल मैग्ज़ीन’, ‘संवाद कौमुदी’ में काम किया था

क्यों राजा राम मोहन राय अपना घर त्याग कर हिमालय और तिब्बत की यात्रा पर चले गए?

राजा राम मोहन राय के पिता रामकंटो रॉय एक कट्टर हिंदू ब्राह्मण थे। छोटी सी उम्र से ही राजा राम मोहन राय का अपने पिता से धर्म के नाम पर मतभेद होने लगे थे। जिसके कारण वो छोटी उम्र में ही अपना घर त्याग कर हिमालय और तिब्बत की यात्रा पर चले गए। जब राजा राम मोहन राय अपने घर वापस लौटे तो उनके माता-पिता ने उनमें बदलाव लाने के लिए उनका विवाह करा दिया। परन्तु उसके बाद भी राजा राम मोहन रॉय ने धर्म के नाम पर पाखंड को उजागर करने के लिए हिंदू धर्म की गहराईयों का अध्ययन करना जारी रखा।

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राजा राम मोहन राय एक महान समाज सुधारक

राजा राम मोहन राय आधुनिक शिक्षा के समर्थक थे उन्होंने गणित एवं विज्ञान पर अनेक लेख तथा पुस्तकें लिखीं थी। 1821 में उन्होंने ‘यूनीटेरियन एसोसिएशन’ की स्थापना की। राजा राम मोहन राय के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी सती प्रथा को खत्म करना। उन्होंने अनेक प्रयासों से सरकार द्वारा इस कुप्रथा को ग़ैर क़ानूनी घोषित करवाया था। राजा राममोहन राय की भाभी भी सती प्रथा का श‍िकार हुई थी। राजा राम मोहन राय किसी काम से विदेश गए थे इसी बीच उनके भाई की मृत्यु हो गई। उसके बाद समाज के ठेकेदारों ने सती प्रथा के नाम पर उनकी भाभी को जिंदा जला दिया। जिसके बाद उन्होंने ये निष्चय कर लिया था की वो सती प्रथा को ख़तम कर के ही रहेंगे।
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Bihar board 10th result 2020:  इस बार दोबारा चेक हुईं 10वीं के टॉपर्स की कॉपियां 

Bihar board 10th result 2020: आज जारी हो सकते है बिहार बोर्ड के 10वीं के नतीजे


आज बिहार के 10वीं क्लास के 15 लाख स्टूडेंट्स का इंतजार भी खत्म हो जायेगा। आज कभी भी बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड 10वीं क्लास का रिजल्ट जारी कर सकता है जानकारी के मुताबिक बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड ने कॉपी चेकिंग का काम खत्म करने के बाद रिजल्ट तैयार कर लिया है। आज किसी भी टाइम 10वीं कक्षा का रिजल्ट जारी कर सकता है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इससे पहले बिहार बोर्ड ने अप्रैल के पहले सप्ताह में 10वीं क्लास के रिजल्ट 2020 घोषित करने का निर्णय लिया था। परन्तु लॉकडाउन के कारण उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन आधा रह गया था हालांकि बिहार बोर्ड ने 24 मार्च को ही क्लास 12वीं का परीक्षा रिजल्ट घोषित कर दिया था।

कोरोना वायरस लॉकडाउन से हुई देरी

बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड 10वीं के रिजल्ट में कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन से काफी देरी हुई। बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड की घोषड़ा के अनुसार 10वीं और 12वीं क्लास का रिजल्ट मार्च के अंत तक या अप्रैल के पहले सप्ताह में आने की सभावना जताई गई थी जिसमे 12वीं क्लास का रिजल्ट तो सयम पर आ गया। परन्तु 10वीं क्लास का रिजल्ट अब तक नहीं आ पाया। अगर लॉकडाउन न हुआ होता तो 10वीं क्लास का रिजल्ट भी मार्च या अप्रैल के पहले सप्ताह में ही घोषणा हो गया होता।

ऐसे चेक करें अपना रिजल्ट

सबसे पहले इंटरनेट पर बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड की वेबसाइट खोलें। उसके बाद वेबसाइट पर रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद एक नया पेज खुलेगा, जिसमे आपको अपना रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर डालना होगा और उसके बाद सबमिट करना होगा। उसके बाद आपसे कुछ और डीटेल्स मांगी जाएगी जिसे आपको डाल कर सबमिट करना होगा। जैसी आप ये सारी चीजे सबमिट आपके सामने आपकी पुरे साल की मेहनत आपका रिजल्ट होगा।

क्यों दोबारा चेक हुईं टॉपर्स की कॉपियां?

बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड ने 10वीं क्लास की उत्तरपुस्तिका का दोबारा मूल्यांकन 6 मई को शुरू किया था। जो पिछले सप्ताह ही पूरा हुआ था उसके बाद छात्रों के अंकों को कंप्यूटर में फीड किया गया और टॉपर सूची बनाई गई। उसके बाद 10 रैंक धारकों की उत्तरपुस्तिकाओं को दोबारा चेक किया। इसी के साथ पैनल ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए इंटरव्यू आयोजित करने का फैसला लिया था। अब बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड बिना किसी देरी के 10वीं क्लास के रिजल्ट 2020 की घोषित करेगा।

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HIV Vaccine Awareness Day 2020: क्या है एचआईवी एड्स और इसके लक्षण, साथ ही जाने इसके कारण और उपचार

क्यों मनाया जाता है HIV Vaccine Awareness Day?


HIV Vaccine Awareness Day: एचआईवी वैक्सीन अवेयरनेस डे को विश्व एड्स वैक्सीन डे के नाम से भी जाना जाता है। एचआईवी वैक्सीन अवेयरनेस डे हर साल 18 मई को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य कारण लोगों को वैक्सीन और टीके के प्रति जागरूक करना और एचआईवी एड्स के प्रति शिक्षित करना। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने दुनिया के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों से एड्स के लिए एक टीका बनाने की दिशा में काम करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि एचआईवी के प्रसार को सीमित करने और इसे मिटाबे का एकमात्र तरीका है एचआईवी वैक्सीन।

एचआईवी एड्स के लक्षण

एचआईवी से संक्रमित लोगों में लम्बे समय तक तो एड्स के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते। जब एचआईवी व्यक्ति में उन्नत चरण तक पहुंचने लगता है, तो उससे थकान, सिरदर्द, चक्कर आना, वजन कम होना, लगातार दस्त, रात को पसीना आना, बुखार और सूखी खांसी जैसे लक्षण नजर आने लगते है।

कैसे फैलता है एचआईवी एड्स?

हमारे देश में अभी भी बहुत से ऐसे लोग है जो ये नहीं समझते है कि एचआईवी कैसे फैलता है। एचआईवी शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। जैसे माँ के दूध से, रक्त, मासिक धर्म के एवं लार या मल-मूत्र में आने वाले रक्त से भी एचआईवी एड्स फेल सकता है।

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एचआईवी एड्स के उपचार

एचआईवी एड्स की वजह से बहुत सारे लोगों को अपमान सहना पड़ता है जिसे उनकी शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक क्षमता भी प्रभावित होती है। लेकिन अच्छी बात ये है कि इस बीमारी का उपचार संभव है। एड्स के उपचार में एंटी रेट्रोवाइरल थेरपी और दवाइयों का उपयोग किया जाता है। ये दवाइया  शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और अवसरवादी रोगों को ठीक करती है।

36.9 मिलियन लोग है एड्स से ग्रस्त

विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2017 के आंकड़ों के अनुसार, 36.9 मिलियन लोग एचआईवी एड्स से ग्रस्त हैं, जिसका मुख्या कारण लोगों में एचआईवी एड्स के प्रति जागरूकता की कमी है। हालांकि, विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इस पर बहुत शोध करने की जरुरत है। मगर शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर इसके बारे में आपको सही जानकारी हो तो बचाव किया जा सकता है।

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क्या आप भी कोरोना वायरस के बीच जा रहे है ऑफिस, तो इन बातों का रखें खास ध्यान

वर्कप्लेस पर कोरोना वायरस से बचाएंगे ये खास चीजें


कोरोना वायरस ने न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा है। लोगों के बीच कोरोना वायरस को लेकर डर का माहौल बना हुआ है। अब तक भारत में कोरोना वायरस के 78194 मामले सामने आ चुके है। इसलिए आपको हर छोटी से छोटी सावधानी बरतनी पड़ेगी। इस समय उन लोगों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, जो रोज ऑफिस जा रहे जा रहे है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले व्यक्ति और उसके परिवार वालों के मन में काफी सवाल है। जैसे ऑफिस जाना कितना सेफ है, रास्ते में या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कोरोना हो सकता है। ऐसे बहुत सारे सवाल आपके और आपके परिवार वालों के मन में आ सकते है, तो चलिए आज हम आपको बताएँगे कैसे आप ऑफिस में रख सकते है अपना ख्याल।

अपने डेस्क को खुद से साफ करें: आपका डेस्क भले ही पहले से साफ हो। परन्तु आपको खुद भी क्लीनिंग जेल को डेस्क पर छिड़क कर टिश्यू पेपर लेकर डेस्क को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। ऐसा हो सकता है कि आपके ऑफिस में कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो। परन्तु वह इस बात से अंजान हो। तो वो व्यक्ति आपके डेस्क पर वायरस छोड़ सकता है। इस लिए रोज काम शुरु करने से पहले आपके डेस्क को अच्छी तरह साफ़ करे।

सर्दी-जुकाम वाले लोगों से दूर: अगर आपके ऑफिस में किसी भी व्यक्ति को खांसी, जुकाम या कफ की समस्या है। तो इसका मतलब ये नहीं की उससे कोरोना वायरस हो गया है। उससे डराए न, उससे बोले की तुंरत चेकअप कराए। साथ ही साधारण फ्लू होने पर भी मास्क, टिश्यू, जैसी चीजों का इस्तेमाल जरूर करें।

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अपनी चीजें ऑफिस में किसी से शेयर न करे:
 ऑफिस में दिन भर में आप अपने पड़ोस वाले से कुछ न कुछ जरूर शेयर करते है। इन शेयरिंग के दौरान आप कई लोगों के द्वारा छुई हुई चीजों को अपने हाथों से टच करते है। इस दौरान छींक या खांसी से परेशान लोग आपको फ्लू का संक्रमण भी दे सकते है। इसलिए कोशिश करे कि आप न तो किसी की कोई चीज ले, और न किसी को अपनी कोई चीज दे।

ऑफिस मैनेजमेंट इन बातों का रखे ख्याल

1. अगर कोई भी व्यक्ति ऑफिस में बीमार हो तो उन्हें मास्क पहनने को कहें या फिर उसे वर्क फ्रॉम होम करने को बोले।
2. ऑफिस के दरवाज़ों को खुला रखें, ताकि लोग उसे बार-बार छूने से बचे।
3. किचन और पैंट्री की साफ-सफाई का खास ध्यान रखे।
4. ऑफिस में पानी, चाय और कॉफी के लिए डिस्पोज़िबल कप्स का इस्तेमाल करे।
5.ऑफिस में जरूरी सामान जैसे टिशू, लिक्विड सोप, थर्मल स्कैनर, मास्क, ग्लव्स जैसी चीजों की पूरी व्यवस्था रखे।

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ट्रेनों के बाद अब दिल्ली में जल्द शुरू होगी मेट्रो सेवा

आरोग्य सेतु ऐप और फेस मास्क हो सकता है अनिवार्य


कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण 22 मार्च से मेट्रो सेवाएं बंद है। 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू की घोषणा की थी। इसके साथ ही मेट्रो सेवाओं का परिचालन बंद कर दिया था। अब अनुमान लगाया जा रहा है की लॉकडाउन 0.3 खत्म होते – होते शायद ज्यादातर पब्लिक ट्रांसपोर्ट आंशिक रूप से शुरू हो जाएंगे। भारतीय रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया है। अब दिल्ली मेट्रो मे भी जल्द सेवाएं शुरू हो सकती है। इस पर खुद दिल्ली मेट्रो रेल सेवा (DMRC) ने इसके संकेत दिए है। दिल्ली मेट्रो ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट कर लिखा है कि मेट्रो स्टेशनों में विशेष रूप से प्रशिक्षित हाउसकीपिंग स्टाफ रखे गए है। जो लगातार पैसेंजर मूवमेंट एरिया को साफ करेंगे।

सफाई और मेंटिनेंस का काम

DMRC ने कहा कि कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए हम लोग दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों को विशेष रूप से साफ-सुथरा करने का काम कर रहे है। इसमें दिल्ली मेट्रो के 264 स्टेशन, 2200 कोच, 1100 एक्सक्लेटर और 1000 लिफ्ट शामिल है। इन सभी को विधिवत साफ करने का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि ट्रेन और स्टेशनों पर सोशल डिस्टेंसिंग के लिए प्रोटोकॉल कैसा रहेगा उस पर अभी काम किया जा रहा है।

और पढ़ें: हजारों किलोमीटर पैदल चलकर कर घर लौट मजदूरों का आँखो से छलका दर्द

आरोग्य सेतु ऐप और मास्क हो सकता है अनिवार्य

सोशल मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक इस बार दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी हो सकते है। ऐसा भी हो सकता है कि मेट्रो में प्रवेश करने के लिए आपको आरोग्य सेतु ऐप अपने फोन में रखना अनिवार्य हो सकता है। साथ ही किसी भी यात्री को बिना मास्क यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि अभी तक दिल्ली मेट्रो ने इस बात पर कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की है।

मेट्रो कब से शुरू होंगी, इस पर क्या बोले दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल

इसका जवाब मुख्यमंत्री ने जनता से ही पूछ लिया है। 12 मई को केजरीवाल ने कहा, ‘मैं दिल्ली के लोगों से जानना चाहता हूं कि 17 मई के बाद वो क्या चाहते हैं। आप लोग मुझे अपने फीडबैक और सलाह भेजें।’ इसके लिए उन्होंने दिल्ली की जनता को 13 मई शाम 5 बजे तक का समय भी दिया था। मुख्यमंत्री ने लोगों से पूछा कि शहर में बस और मेट्रो चलनी चाहिए या नहीं। उन्होंने ये भी पूछा कि मेट्रो और बस के चलने पर सोशल डिस्टैन्सिंग कैसे मेंटेन होगी।

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हजारों किलोमीटर पैदल चलकर कर घर लौट मजदूरों का आँखो से छलका दर्द

प्रवासी मजदूरों के पलायन की ऐसी कहानी सुनकर आँखे नम हो जाएगी


Heart-breaking stories of migrant workers


अभी पूरी दुनिया में कोरोना वायरस नामक महामारी का प्रकोप छाया हुआ है, जिसके कारण दुनिया के ज्यादातर देशों में लॉकडाउन लागू है। कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूर भूखे-प्यासे पैदल ही हजारों किलोमीटर दूर अपने गांवों के लिए चले जा रहे है। यह मंजर 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 21 दिन के लिए पुरे भारत को लॉकडाऊन करने की घोषणा के बाद सामने आया है। तब से शुरू हुआ यह सिलसिला आज श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के चलने के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा।

पीएम मोदी के पुरे भारत को लॉकडाउन करने की घोषणा के बाद देश के मजदूरों पर बिजली गिर पड़ी। खासकर वो मजदूर जो बड़े शहरों में रोजी-रोटी कमाने के लिए आए थे। वो घबरा कर अपने परिवार के साथ भूखे-प्यासे सैकड़ो किलोमीटर दूर घर के लिए पलायन करने लगे। देश भर में लाखों मजदूर सड़कों पर आ गए। हजारों परिवार पैदल ही चल पड़े। सबसे ज्यादा पलायन दिल्ली और मुंबई से हुआ।

उत्तराखंड से पैदल बिजनौर पहुंचे मजदूर

जब से भारत से लॉकडाउन शुरू हुआ है रोज मजदूरों के दर्द की कहानियां  सामने आती रहती है। अभी कुछ दिन पहले ही उत्तराखंड के हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी से बड़ी संख्या में मजदूर उत्तर प्रदेश के बिजनोर पहुंचे। हाथों में सामान का थैला, कंधे पर बैठे बच्चे, आंखों में आंसू, भूख से अकड़ रहे पेट, इन मजदूरों की कहानी बयां करती है। ये मजदूरआपके घरों से दूर वहां रोटी कमाने गए थे।

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स्पेशल ट्रेन के बारे में कितनी जानकारी है मजदूरों को

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में रहने वाले मजदूरों के एक जत्थे से जब पूछा गया कि वो स्पेशल ट्रेनें की जगह पैदल क्यों जा रहे है। तब उनमें से एक ने कहा कि मुझे स्पेशल ट्रेन के बारे में कोई जानकारी नही है। मैं पैदल इसलिए चल रहा हूं क्योंकि मैं दिल्ली में नहीं, अपने गांव में मरना चाहता हु। वही दूसरी तरफ तालकटोरा रोड के आसपास रहने वाले करीब 90% प्रवासी मजदूर घर वापस जाने की मांग कर रहे है उनमे से एक ने कहा 7 दिन पहले मेरी बहू को बच्चा हुआ था लेकिन हमारे पास घर में खाने के लिए कुछ नही है।

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क्या आ रहा है लॉकडाउन 4.0, मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के बाद क्या बोले पीएम मोदी

पीएम मोदी ने बोला 17 मई के बाद भी जारी रखना होगा लॉकडाउन


कल पीएम मोदी ने देश के तमाम मुख्यमंत्रियों के साथ करीब छह घंटे तक वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात चीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने, लॉकडाउन से चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलने और आर्थिक गतिविधियां तेज करने के उपायों पर मुख्यमंत्रियों से बातचीत की। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, पीएमओ, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रिय शामिल हुए थे। राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह चौथी बैठक थी। सोशल मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 17 मई के बाद भी लॉकडाउन को जारी रखना होगा। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से देश की अर्थव्यवस्था दोबारा खोलने को लेकर भी सुझाव मांगे।

पीएम ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मांगे सुझाव

कल छह घंटे तक चली वीडियो कॉन्फ्रेंस में पीएम ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से प्लान मांगा गया है। जिसमें लॉकडाउन को खोलने, आर्थिक गतिविधियों को चालू रखने और ग्रीन-रेड-ऑरेंज जोन को लेकर सुझाव हो। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस बात की मांग की थी कि ज़ोन को तय करने की ताकत राज्य के हाथ में दे दी जाए। इसी तरह सभी मुख्यमंत्रियों वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान अलग-अलग राय रखते हुए नज़र आए। जैसे ममता बनर्जी ने केंद्र पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि हर किसी का साथ में होना जरूरी है, वहीं उद्धव ठाकरे ने कहा बिना लॉकडाउन के आगे बढ़ना काफी मुश्किल हो सकता है, दूसरी तरफ तेलंगाना, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में ट्रेन सेवा की शुरुआत करने को मना किया।

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देश में 24 घंटे में 3500 से अधिक नए केस

देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 70 हजार को पार कर गया है। पिछले 24 घंटे में करीब 3500 नए केस और 87 लोगों की हुई मौत। अभी देश में एक्टिव केस की संख्या 46 हजार से अधिक है। भारत में कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है। यहां अब तक 23401 मामले सामने आ चुके है, जिसमें से 868 लोगों की मौत हो चुकी है। महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर गुजरात है। गुजरात में भी तेजी से संक्रमण बढ़ रहा है। यहां अब तक 8541 मामले सामने आ चुके है, जिसमें 513 लोगों की मौत हो चुकी है।

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Coronavirus Updates: कोरोना का बढ़ता कहर, पिछले 24 घंटे में 4200 से अधिक नए केस, 2200 लोगों की मौत

पिछले 24 घंटे में 4213 नए मामले, 97 लोगों की मौत


देश में कोरोना से संक्रमित की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 4213 नए मामले सामने आए है। और  97 लोगों की मौत हुई है। अभी देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 67 हजार को पार कर गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ताजा अपडेट के मुताबिक, कुल कोरोना संक्रमित कंफर्म केसों की संख्या 67152 हो गई है, जिसमें 2206 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20917 लोग ठीक हो चुके है, अभी कोरोना के एक्टिव केसों की संख्या 44029 है। भारत में कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित होने वाला राज्य महाराष्ट्र है। यहां पर अब तक कोरोना संक्रमित कंफर्म केसों की संख्या 22171 हो चुकी है। जिसमें 832 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4199 लोग ठीक हो चुके है। महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर गुजरात है। गुजरात में भी संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। यहां अब तक 8194 मामले सामने आ चुके है, जिसमें 493 लोगों की मौत हो चुकी है।

5वीं बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से करेंगे ‘मन की बात’

आज कोरोना संकट को ले कर 5वीं बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से ‘मन की बात’ करने जा रहे है। आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वो राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत होगी। ऐसा माना जा रहा है की इस बैठक में 17 मई के बाद की रणनीति और लॉकडाउन में दिए गए छूट के असर पर चर्चा की जा सकती है। आने वाले समय में लॉकडाउन को लेकर इस बैठक के बाद अहम फैसले लिए जा सकते है।

और पढ़ें: National technology day: क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, जाने इसका इतिहास और 2020 का थीम

दूसरे राज्यों से केरल में लौटे लोगों के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी

केरल के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने देश के अन्य हिस्सों से राज्य में आने वाले लोगों को उनके घर में ही क्वारंटाइन रहने लिए कहा है इसके लिए घर लौटने वाले सभी लोगों को चिकित्सा परीक्षण कराना होगा। किसी व्यक्ति के बीमार होने या लक्षण पाए जाने पर उसे उपचार होने तक अस्पताल में भर्ती रखा जाएगा। केरल सरकार ने कहा कि आरटी-पीसीआर टेस्ट में जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है, जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए है, उन्हें घर में ही 14 दिन के लिए क्वारंटाइन में रहना चाहिए।

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National technology day: क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, जाने इसका इतिहास और 2020 का थीम

National technology day: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का इतिहास



National technology day: हर साल की तरह इस साल भी 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन देश में टैक्नोलॉजी क्रांति आई थी। इस दिन को 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों और अंतरिक्ष में भारत की तकनीकी प्रगति की वर्षगांठ का प्रतीक माना जाता है। 11 मई 1998 को, भारत ने राजस्थान में भारतीय सेना के पोखरण टेस्ट रेंज में ऑपरेशन शक्ति मिसाइल को सफलतापूर्वक फायर किया था। जो पोखरण में पांच परमाणु परीक्षणों में से पहला था। परीक्षण का नेतृत्व एयरोस्पेस इंजीनियर और दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था। बाद में प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को एक परमाणु संपन्न देश घोषित किया था। उसके बाद भारत परमाणु क्लब देशों में शामिल होने वाला छठा देश बना गया था। इसलिए, 1999 से 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

टेक्नोलॉजी का हमारे जीवन में महत्व

आज के समय में टेक्नोलॉजी का हर किसी के जीवन में खास महत्व है क्योंकि यह न सिर्फ व्यक्ति का विकास करती है, बल्कि देश-दुनिया के विकास में भी अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाती है। इस समय हमें टेक्नोलॉजी ने इस तरह  घेर रखा है कि हम अपनी हर जरुरत को पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी पर निर्भर है। इतना ही नहीं इंसान लगातार टेक्नोलॉजी पर निर्भर होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण है, टेक्नोलॉजी हमारे हर काम को बेहतर और आसान बनाने में हमारी सहायता करती है। किसी देश या देश के नागरिकों को विकास करने के लिए टेक्नोलॉजी की बहुत ज्यादा जरुरत है।

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस थीम 2020

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस को भारत की केंद्र सरकार, अनुसंधान विभाग एवं संबंधित कार्यालय मिलकर मनाते है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस को मनाने के लिए हर साल एक नई थीम रखी जाती है, इस साल 2020 की थीम है “विज्ञान में महिलाएं”

कैसे मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस

1. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के मौके पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग कार्यक्रमों का आयोजन करता है।
2. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के मौके पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा कुछ होनहार वैज्ञानिकों को पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।
3. इस दिन भारत के लगभग सभी टेक्निकल कॉलेज में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।
4. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के मौके पर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कामयाबी के बारे में लोगों को उजागर किया जाता है।
5. कॉलेजों द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रतियोगिताओं में छात्रों के माता पिता को भी आमंत्रित किया जाता है।

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