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Shimla trip: अगर आप पहली बार शिमला घूमने जा रहे हैं, तो इन जगहों पर जाना न भूले

Shimla trip: शिमला की ये जगहें घूमने के लिए है बेहद खूबसूरत


Shimla trip: ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि हमारे देश में घूमने फिरने की काफी सूंदर सूंदर जगहे हैं। जिन भी लोगों को घूमना फिरना पसंद है उन सभी लोगों को हमारा देश बहुत ज्यादा पसंद आता है। हमारे देश में कई जगह ऐसी है जहां पर हर साल काफी संख्या में पर्यटक घूमने फिरने आते हैं। कोई अपने दोस्तों के साथ घूमना पसंद करता है, तो कोई अपने पार्टनर के साथ ट्रिप पर जाता है। लेकिन जैसा की हम सभी लोग जानते है कि पिछले कुछ समय से कोरोना लॉकडाउन के कारण हम कही भी घूमने फिरने नहीं जा पा रहे हैं। लेकिन अभी हमारे देश में ज्यादातर राज्य अनलॉक की तरफ बढ़ रहे है जिसके कारण अब धीरे धीरे चीजों से पाबंदियो हट रही है। और ऐसे में उन लोगों के घूमने फिरने का प्लान बन रहा है जिन्हें घूमना फिरना बहुत ज्यादा पसंद होता है। अगर आप कभी शिमला नहीं गए और लॉकडाउन के बाद पहली बार शिमला घूमने का प्लान बना रहे है तो आप इन जगहों पर जा सकते है। वैसे तो पूरा ही शिमला बेहद खूबसूरत है लेकिन अगर आप पहली बार शिमला जा रहे है तो इन जगहों पर जाना न भूले।

नारकंडा: नारकंडा घूमने के लिए एक बेहद ही खूबसूरत जगह है। शिमला से नारकंडा की दूरी लगभग 60 किलोमीटर से है। शिमला से नारकंडा की इस दूरी को तय करने में 2 घंटे से ज्यादा का समय लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये जगह काफी ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ आपको बर्फबारी देखने को मिलती है। यहाँ आपको काफी सारे एडवेंचर करने को मिलते हैं।

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Image source – Unsplash

जाखू मंदिर: आपको बता दे कि शिमला से जाखू मंदिर जाने में सड़क के रास्ते सिर्फ 20 मिनट का समय लगता है। इसके अलावा आप जाखू मंदिर मॉल रोड से रोपवे के जरिए भी जा सकते है। यहाँ जाने का अपना प्रति व्यक्ति किराय लगभग 250 रुपये है। आपको बता दे कि ये जाखू मंदिर हनुमान जी का मंदिर है, और यहां आपको हनुमान जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा देखने को मिलेगी।

कुफरी: अगर आप शिमला पहली बार गए है तो आप घूमने के लिए कुफरी जा सकते है यह घूमने के लिए बेहद ही खूबसूरत जगह है। कुफरी शिमला से महज 15 किलोमीटर की दुरी पर है। जिसके आप एक घंटे से कम समय में पार कर सकते है। यहाँ आपको सेब के बागान, घुड़सवारी, जीप की सवारी करने को मिलेगी।

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अनलॉक में न भूले कोरोना के इन बेसिक नियमों को

अनलॉक के दौरान बचें ये गलतियों दोहराने से


पिछले साल से फैला कोरोना वायरस आज भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है अभी हमारे देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर चल रही है। इस दौरान एक दिन में चार लाख से अधिक कोरोना के मामलों दर्ज किए गए थे। दूसरी लहर के वक्त कुछ ऐसी तस्वीरें निकल कर सामने आईं, जिन्हें देख कर सभी लोग सहम गया। कुछ दिन पहले ही हमे सांसों के लिए तरसते लोग, ऑक्सीजन की भारी कमी, जरूरी दवाओं की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी और अस्पतालों में बेड की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि अच्छी बात ये है कि अभी लगातार कोरोना के मामले कम होने लगे हैं। जिसके कारण कई राज्यों ने अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन हमें विशेषज्ञों की बात भूलनी नहीं चाहिए। कोरोना की दूसरी लहर के बीच कुछ विशेषज्ञों ने कहा था कि कोरोना की तीसरी लहर का आना तय है। लेकिन अगर हम सुरक्षा मानदंडों का पालन करें और कुछ गलतियों को न दोहराएं तो शायद तीसरी लहर का प्रभाव कम होगा। तो चलिए जानते है उन गलतियों के बारे में जिन्हे हमे नहीं दोहराना चाहिए।

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अपनी जिम्मेदारी को भूले न

ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि कोरोना के दौरान मास्क पहनना और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है यह हमें कोरोना से बचने में मदद करता है। लेकिन जैसे की अभी लगातार कोरोना के मामले कम होने लगे हैं। ऐसे में हमे सैनिटाइजर का इस्तेमाल और मास्क पहनना बिल्कुल भी नहीं भूलना चाहिए। हमें सभी लोगों को विशेषकर अपने परिवार वालों और दोस्तों को सावधान रहने के लिए कहना चाहिए। एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक होने के नाते हमें उन लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए, जिन्हें हम जानते हैं।

डॉक्टर से समय समय पर संपर्क करते रहें

आपने देखा होगा कि अक्सर लोग ख़ासी बुखार होने पर खुद दवा ले लेते है ये लोगों की सबसे बड़ी गलती होती है। लोगों को समझना चाहिए कि उन्हें स्वयं दवा नहीं लेनी चाहिए। कई केसों में ऐसा भी देखा गया है कि जब तक एक कोविड रोगी को बीमारी की गंभीरता का पता चलता है तब तक बहुत देर हो जाती है क्योंकि समय रहते वो बीमारी की गंभीरता से समझने में असफल रहता है वो डॉक्टर से जब तक संपर्क नहीं करता जब तक उससे डॉक्टर की बहुत ज्यादा आवश्यक न हो। लेकिन आपको बता दें कि हमेशा डॉक्टर के संपर्क में रहना और अपने स्वास्थ्य को अपडेट करना हमेशा अच्छा होता है। ताकि डॉक्टर आपको बता सकें कि आपके लिए क्या सही है।

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क्यों मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस? जाने इतिहास और थीम 2021

हर साल 5 जून को मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस


आपको बता दे कि हर साल विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है। इस विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरुक फैलाना है। आपको बता दे कि पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा द्वारा 5 जून को मनाया गया था। उसके बाद से ही हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाने लगा। आपको बता दे कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1972 में पर्यावरण और प्रदूषण पर स्टॉकहोम में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया था। सबसे पहले विश्व पर्यावरण दिवस में 119 देशों ने हिस्सा लिया था। जैसा की आप देख सकते है कि अभी हमारे देश में लोगों की जनसंख्या काफी ज्यादा बढ़ गई है जिसके चलते दुनिया भर में प्रदूषण भी काफी ज्यादा बढ़ गया है। इसी प्रदूषण को कम करने के लिए और लोगों को इसके प्रति जागरुक करने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।

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विश्व पर्यावरण दिवस थीम साल 2021

हर साल विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने के लिए एक थीम रखी जाती है। इस साल की थीम ‘Ecosystem Restoration’ यानि ‘पारिस्थितिक तंत्र की पुनर्बहाली’ है। अगर इसका मतलब सरल शब्दों में समझे तो इसका अर्थ है पृथ्वी को एक बार फिर से अच्छी अवस्था में लाना। इसके लिए हम सभी लोगों को स्थानीय स्तर से जमीनी प्रयास शुरू करने होंगे तभी हम इस पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित कर पाएंगे। इतना ही नहीं आपको बता दे कि इस बार पाकिस्तान विश्व पर्यावरण दिवस का वैश्विक मेजबान होगा।.

विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व

ये बात तो हम आपको पहले भी बता चुके है कि हर साल पर्यावरण की रक्षा के लिए और लोगों को इसके प्रति जागरुक करने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है हर साल 5 जून को बड़े ही धूमधाम से यह विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। ये हम सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि हम अपने पर्यावरण को साफ़ और सुरक्षित रखें और उसकी रक्षा करें। हमे जितना हो सकें पेड़ पौधे को कटने से रोकना चाहिए। इस विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने की समझे बड़ी वजह यही है कि इस दिन लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत किया जा सकें।

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दीपिका पादुकोण से लेकर अक्षय कुमार तक इन बॉलीवुड सितारों के पास नहीं है भारत की नागरिकता

जानें इन बॉलीवुड सितारों के पास है कौन से देश की नागरिकता है


बॉलीवुड इंडस्ट्री भला किसे पंसद नहीं है। लोग सालों मेहनत करते है तब जाकर उनको बॉलीवुड या फिर टीवी की दुनिया में एक मौका मिलता है। अगर हम बात करे बॉलीवुड सितारों की या बॉलीवुड फिल्मों की तो वो कभी खत्म ही नहीं होगी। लेकिन आज हम बात करने वाले है उन बॉलीवुड सितारों की जिनके पास भारत की नागरिकता नहीं है। यूं तो आपने देखा होगा कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में देश भक्ति पर आधारित कई फिल्में बनती रहती है लेकिन क्या आपको पता है इन देश भक्ति पर आधारित फिल्मों में काम करने वाले सितारों के पास भारत की नागरिकता तक नहीं होती। तो चलिए आज बात करते है उन सितारों के बारे में जिनके पास भारत की नागरिकता नहीं है।

अक्षय कुमार: ये बात तो शायद हमें आपको बताने की जरूरत नहीं है और न ही ये बात किसी से छुपी हुई है कि अक्षय कुमार देश से कितना प्यार करते है। वह अक्सर देश के सोल्जर के लिए मदद करते नजर आते हैं। और उन्होंने कई सारी देशभक्ति पर आधारित फिल्मों में भी काम किया है। लेकिन ये जान कर आपको भी हैरानी होगी की अक्षय कुमार के पास भारत की नागरिकता नहीं है। कई साल पहले अक्षय ने भारत को छोड़ कर कनाडा की नागरिकता हासिल कर ली थी। ऐसे में भारतीय कानून के हिसाब से न तो अक्षय एक भारतीय नागरिक है और न ही उनको वोट देने का अधिकार है।

इमरान खान: बॉलीवुड एक्टर आमिर खान के भांजे के तौर पर बॉलीवुड में एंट्री लेकिन वाले और फिर बॉलीवुड से अचानक से गायब होने वाले एक्टर इमरान खान के पास भी भारत की नागरिकता नहीं है। इमरान खान के पास यूएस की नागरिकता है।

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आलिया भट्ट: बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट को भला कौन नहीं जनता। उन्होंने काफी कम समय में बॉलीवुड में अपनी सफलता का परचम लहराया है। क्या आपको पता है। आलिया भट्ट के पास भारत देश की नागरिकता नही है। आलिया भट्ट के पास इंग्लैंड की नागरिकता है। दरअसल आलिया की माँ सोनी राजदान का जन्म इंग्लैंड में हुआ था जिसके कारण न सिर्फ सोनी राजदान के पास बल्कि आलिया भट्ट भी इंग्लैंड की नागरिकता है।

दीपिका पादुकोण: आज के समय पर दीपिका पादुकोण बॉलीवुड की एक जानी मानी अभिनेत्री बन चुकी है। आज के समय पर भारत में दीपिका पादुकोण को किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है। लेकिन क्या आपको पता है दीपिका पादुकोण के पास भी भारत की नागरिकता नहीं है। खबरों के अनुसार दीपिका का जन्म डेनमार्क में हुआ था इसलिए उनके पास उस देश की नागरिकता है।

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जाने उन भारतीय क्रिकेटर्स के बारे में जिनके पास है बेशुमार दौलत, उसके बाद भी करते है सरकारी नौकरी

इन भारतीय क्रिकेटर्स को सरकार की तरफ से दी गई है सरकारी नौकरी


क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसे हमारे देश में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। ये सिर्फ एक खेल नहीं है बल्कि इस खेल के वजह से कई बार हमारे देश का गौरव बढ़ा  है। क्रिकेट ने हमारे देश को कई बड़े खिलाड़ी दिए हैं जिनकी वजह से हमारे देश का गौरव बढ़ा है। आपको बता दे कि हमारे देश के कई खिलाड़ी तो ऐसे भी है जिनको क्रिकेट में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें सरकार की तरफ से सरकारी नौकरी भी दी गई है। क्या आपको पता है ये क्रिकेटर क्रिकेट से तो लाखों रुपये कमाते ही है साथ ही साथ सरकारी नौकरी से भी कमाते हैं। तो चलिए आज हम आपको उन क्रिकेटर्स के बारे में बतायेगे जिनके पास बेशुमार दौलत है उनके बाद भी वो सरकारी नौकरी करते है।

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धोनी: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी को तो सभी लोग जानते है उन्हें आज के समय पर किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है। ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि धोनी ने भारतीय क्रिकेट को कई सफलताएं दिलाई हैं। आपको बता दे कि धोनी के कप्तान रहते हुए हमारे देश ने दो विश्व कप जीते  और साथ ही साथ टेस्ट की नंबर एक टीम बनी। क्या आपको पता है भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल का पद धोनी के पास है। धोनी अक्सर खाली समय में भारतीय सेना के साथ समय बिताते हैं।

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सचिन तेंदुलकर: सचिन तेंदुलकर को  भला आज के समय पर कौन नहीं जानता। सचिन तेंदुलकर ने न केवल भारतीय क्रिकेट में बल्कि विश्व क्रिकेट में भी अपनी एक खास जगह बनाई है। सचिन तेंदुलकर को उनकी सफलता के लिए भारतीय वायु सेना की तरफ से सम्मानित किया गया है इसके लिए सचिन को भारतीय वायु सेना का ग्रुप कैप्टन बनाया गया है।

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कपिल देव: भारत को पहला विश्व कप दिलाने वाले कपिल देव को भला कौन नहीं जानता। आज भी लोगों को कपिल देव का 1983 का चौतरफा प्रदर्शन याद है। ये बात तो सभी लोग जानते है कि कपिल ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया है और अब वो लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में भारतीय सेना में है।

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हरभजन सिंह: भारत के बेहतरीन गेंदबाज हरभजन सिंह को भला कौन नहीं जानता। उन्हें आज के समय पर किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है। हर कोई हरभजन की फिरकी में फंस गया है। क्या आपको पता है पंजाब पुलिस ने हरभजन सिंह को एक और सितारा जोड़ते हुए उन्होंने हरभजन को पंजाब पुलिस का डीएसपी बना दिया है।

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जानें भारत के 5 टॉप न्यूज़ एंकर के बारे में, साथ ही उनके सैलरी पैकेज

जाने भारत के टॉप न्यूज़ एंकर के बारे में


ये बात तो शायद हमें आपको बताने कि जरूरत नहीं है कि एक न्यूज़ चैनल में एंकर का क्या महत्त्व होता है। किसी भी न्यूज़ चैनल में एक एंकर का रोल बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। एक एंकर ही होता है जो लोगों के सामने खबर को रखता है। सिर्फ लोगों के सामने खबर नहीं रखता बल्कि खबरों से लोगों को भी जोड़ता है। इसका सारा दारोमदार एक एंकर के हाथ में ही होता है। ये बात तो सभी लोग जानते हैं कि खबर की रोचकता सिर्फ खबर में ही नहीं बल्कि उसे पेश करने वाले एंकर और पेश करने का तरीका भी खबर के प्रति हमारी दिलचस्पी बनाए रखने का अहम तरीका है। किसी भी न्यूज़ चैनल को या न्यूज़ शो को हिट करने की जिम्मेदारी न्यूज़ एंकर पर ही है। जिसके लिए न्यूज़ चैनल उन्हें अच्छी खासी रकम भी देते हैं तो चलिए आज हम आपको भारत के बेस्ट 5 न्यूज़ एंकर के बारे में बताएंगे साथ ही आपको बतायेगे उनका सैलरी पैकेज।

बरखा दत्त: बरखा दत्त को पत्रकारिता की दुनिया में किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है। बरखा दत्त पत्रकारिता की दुनिया में एक जाना माना चेहरा है। उन्हें एक तेज-तर्रार न्यूज़ एंकर के रूप में जाना जाता है। बरखा दत्त पिछले कई सालों से NDTV से जुडी हुई है। अगर हम बात करें उनके सैलरी पैकेज की तो उन्हें हर साल करीब 3 करोड़ रुपए का पैकेज मिलता था। वर्तमान में वह मोजो न्यूज से जुड़ी हुई हैं।

रवीश कुमार: रवीश कुमार को भी पत्रकारिता की दुनिया में किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है। रवीश कुमार भी पिछले कई सालों से NDTV से ही जुड़े हुए है। रवीश कुमार को तो पत्रकारिता के क्षेत्र में कई सारे पुरस्कार भी मिल चुके है। अभी रवीश कुमार हमारे देश के सबसे प्रसिद्ध पत्रकारों में से एक है। अगर हम बात करें रवीश कुमार के सैलरी पैकेज की तो उन्हें हर साल करीब 2.16 करोड़ रुपए मिलते है।

सुधीर चौधरी: ज़ी न्यूज़ के वरिष्ठ संपादक और बिजनेस हेड सुधीर चौधरी को पत्रकारिता की दुनिया में भला कौन नहीं जानता। सुधीर चौधरी का न्यूज़ शो डीएनए दुनिया भर में काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। अगर बात की जांए सुधीर चौधरी के सैलरी पैकेज की तो उन्हें हर साल करीब  3 करोड़ रुपए मिलते है।

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अंजना ओम कश्यप: पत्रकारिता की दुनिया की जानी मानी एंकर अंजना ओम कश्यप जितना अपनी एंकरिंग के लिए प्रसिद्ध है उतना ही वो अपनी खूबसूरती के लिए भी जानी जाती है। साथ ही साथ वो अपनी बेबाक और कटाक्ष अंदाज के लिए भी जानी जाती है। अगर बात की जाए अंजना ओम कश्यप के सैलरी पैकेज की तो उन्हें हर साल करीब 1 करोड़ रुपए मिलते है।

अर्नब गोस्वामी: अर्नब गोस्वामी को भी पत्रकारिता की दुनिया में किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है। पत्रकारिता की दुनिया में अर्नब गोस्वामी अपने खास अंदाज के लिए जाने जाते हैं हालांकि अभी अर्नब गोस्वामी ने अपना खुद का चैनल खोल लिया है। उनका उनके चैनल पर ही एक शो आता है ‘पूछता है भारत’ जो कभी ज्यादा प्रसिद्ध है। अगर हम बात करें अर्नब गोस्वामी के सैलरी पैकेज की तो उन्हें हर साल करीब 12 करोड़ रुपए मिलते है।

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एक दिन में हुए कोरोना के 19.83 लाख टेस्ट, जिनमे से 3.48 लाख लोग निकले संक्रमित, जाने पॉजिटिविटी रेट का क्या है हाल

जाने कितनी गिरावट आई पॉजिटिविटी रेट में


पिछले साल से फैले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाई मचाई हुई है। अभी हमारे देश में इस कोरोना वायरस की दूसरी लहर चल रही है जिससे सभी लोग मिल कर लड़ रहे है। इस कोरोना वायरस को हराने के लिए हमारे देश में लगातार टेस्टिंग भी हो रही है। बीते दिनों हमारे देश में कोरोना टेस्टिंग का रिकॉर्ड 19 लाख 83 हजार 804 तक पंहुच गया था। यह अभी तक का एक दिन में किये गए टेस्ट का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 30 अप्रैल को 19.45 लाख टेस्ट किए गए थे। इन सबके बीच अच्छी खबर यह है कि टेस्टिंग बढ़ाने के बाद भी नए संक्रमितों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। बीते दिन 3.48 लाख लोगों में ही कोरोना की पुष्टि हुई। यानि की अभी हमारे देश में पॉजिटिविटी रेट 17.6% है। जो की दो दिन पहले 24.9% था। बीते दिन सबसे अच्छी बात यह है कि कल लगातार दूसरे दिन नए संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वाले लोगों की संख्या थी। पिछले 24 घंटे में 3 लाख 55 हजार 256 लोग कोरोना से ठीक हुए। इससे पहले सोमवार को कोरोना से संक्रमितों लोगों के 3 लाख 29 हजार 491 केस आए थे जिनमें से 3 लाख 55 हजार 930 मरीज ठीक हुए थे।

मौत के आंकड़ों ने बढ़ाई देश की चिंता

पिछले कुछ दिनों में मौत के आंकड़ों ने देश की चिंता बढ़ा दी थी। बीते 24 घंटे में 4,198 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। ऐसा तीसरी बार हुआ है जब मौत का आंकड़ा 4 हजार के पार पंहुचा गया था। इससे पहले 7 मई को 4,233 लोगों ने और 8 मई को 4,092 लोगों ने इस कोरोना वायरस महामारी से अपनी जान गंवाई थी। इन दो बीते दिनों में एक्टिव कोरोना से संक्रमितों की संख्या करीब 42 हजार घट गयी है। 9 मई को सबसे ज्यादा 37.41 लाख मरीजों का इलाज चल रहा था। जबकि अब यह आंकड़ा घटकर 36.99 लाख ही रह गया है।

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देश के 18 राज्यों में लगाई गई लॉकडाउन जैसी पाबंदियां

अभी हमारे देश के 18 राज्यों में लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाई गई है। इनमें हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा, तेलंगाना, तमिलनाडु, मिजोरम और पुडुचेरी शामिल हैं। इन राज्यों में पिछले लॉकडाउन जैसे ही कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। लोगों को अपने घरों पर ही रहने को कहा जा रहा है बिना किसी जरूरी काम के किसी को भी घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं है।

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कोरोना से रिकवर करने के बाद आप कब लगवा सकते हैं वैक्सीन?


जाने कोरोना से रिकवर करने वाले लोग कब और कैसे लगवाएं वैक्सीन?


पिछले साल से फैला हुआ कोरोना वायरस आज भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है अभी हमारे देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर चल रही है। जिसने पुरे देश में कोहराम मचाया हुआ है। लेकिन इस बार तो हमारे देश में इस वायरस से बचने के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा है। जिसे पहले 45+ वाले लोगों के लिए शुरू किया गया था लेकिन अभी हाल ही में 1 मई से टीकाकरण अभियान 18+ के लोगों के लिए भी खोल दिया गया है। अभी हमारे देश में हर रोज लाखों लोग इस कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे है। ऐसे में अभी कोरोना से रिकवर होने वाले लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि वे कब और कैसे वैक्सीन लगवा सकते हैं? क्योकि अभी कोरोना से रिकवर होने वाले लोगों के लिए वैक्सीनेशन के कोई भी खास निर्देश नहीं है। तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बतायेगे।

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जाने कब और कैसे लगवाएं वैक्सीन

सफदरजंग हॉस्पिटल के कम्यूनिटी हेड जुगल किशोर जी का कहना है कि कोरोना से रिकवर करने वाले लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए कम-से-कम 6 हफ्तों का इंतजार करना चाहिए। उसके बाद उन्होंने बताया, अगर कोई व्यक्ति कोरोना से रिकवर हुआ है और उसने कोरोना वैक्सीन का पहला डोज लगावाया है तो उसे दूसरे डोज के लिए 6 हफ्तों का इंतजार करना चाहिए। डाक्टर जुगल किशोर जी के अनुसार जिस दिन कोरोना से रिकवर हुए व्यक्ति के शरीर से कोरोना के लक्षण खत्म हो जाते हैं उसके बाद वो 6 से 8 हफ्तों के बाद कोरोना का टीका लगवा सकता है। और आपको बता दे कि कोरोना से रिकवर करने वाले लोगों की टीकाकरण प्रक्रिया भी आम लोगों के टीकाकरण प्रक्रिया की तरह ही होती है।

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6 हफ्तों से पहले वैक्सीन लगाने के नुकसान

अगर आप कोरोना से रिकवर होने के तुरंत बाद ही वैक्सीन लगवाते है तो आपके शरीर में एंटीबॉडी बनने में दिक्कत होगी। डाक्टर जुगल किशोर ने बताया कि जब भी कोई मरीज कोरोना से रिकवर हो जाता हैं तो उनके शरीर में एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। और वैक्सीन भी शरीर में जाकर एंटीबॉडी बनाती है लेकिन अगर आपके शरीर में रिकवर होने के कारण एंटीबॉडी बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है और ऐसे में आप कोरोना की वैक्सीन भी ले लेंगे तो आपको दिक्कत हो सकती है। अगर आप बिना 6 हफ्तों का इंतजार किये वैक्सीन लगवाएंगे तो वो आपके शरीर में जाकर अपना काम करने में असमर्थ होगी।

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वैक्सीन लगवाने के बाद भी बरते सावधानी

इन सारी चीजों के साथ ही डॉक्टर जुगल किशोर कहते है कि जो भी लोग कोरोना वैक्सीन के लिए जा रहे है। उनके लिए भी वैक्सीन लगवाने के बाद भी कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करना बेहद जरूरी है। क्योकि अक्सर लोगों को लगता है कि कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद वह सुरक्षित है लेकिन ऐसा नहीं है। वैक्सीन लगवाने के 2 से 6 हफ्ते के बाद व्यक्ति सुरक्षित होता है। अगर कोई व्यक्ति वैक्सीन लगवाने के बाद भी संक्रमण के संपर्क में आता है तो उसके संक्रमित होने का खतरा रहता है। इसलिए सभी लोगों के लिए बेहद जरूरी है कि वो वैक्सीन लगगवाने के बाद भी कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करें।

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मुश्किल के दौर में इंसानियत बनी सबसे बड़ा मजहब

किसी भी मजहब से ऊपर होती है इंसानियत


 ये बात तो हम सभी लोग जानते है और इस बात का तो इतिहास गवाह है कि हमारे देश में धार्मिकता की आड़ में सबसे ज़्यादा पाप और अत्याचार होते रहे हैं। कभी -कभी तो ऐसा लगता है कि अगर धर्म न होता तो लड़ने के लिए और कौन सा मुद्दा सबसे शेष होता। अगर आप एक बार सोचो तो आपको भी समझ आ जाएगा कि देश में जितने भी दंगे-फ़साद, आगजनी, हत्याएं और असंख्य अमानवीय कृत्य होते रहे हैं आखिर उनका जिम्मेदार कौन ह? क्या धर्म ही इसका मूल कारण है या फिर लोगों की मानसिकताय़? जिन्हें शायद प्रेम से घृणा है और ये अपने अपराधों का सारा ठीकरा धर्म पर थोप कर आसानी से हाथ झाड़ कर आगे बढ़ जाते हैं। इसके चक्कर में आम जनता आसानी से बेवकूफ बन जाती है। तो चलिए आज हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि किसी भी मजहब से ऊपर इंसानियत होती है या नहीं।

इस कोरोना काल में इंसानियत बनी सबसे बड़ा महजब

इस बात से तो हम इंकार नहीं कर सकते कि कई सालों से हमारे देश में धार्मिकता की आड़ में सबसे ज़्यादा पाप और अत्याचार हुए है लोग धर्म के आधार पर जानवरों की तरह लड़े भी हैं। लेकिन जैसा की अभी हम सभी लोग देख रहे हैं कि पिछले साल से ही हमारे देश में कोरोना वायरस ने अपना कहर मचाया हुआ है जो अभी तक रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। ऐसे में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई है तो वहीं दूसरी तरफ लाखों लोगों ने अपनी नौकरी भी,  जिसके कारण कई लोगों के लिए तो उनके रोजाना की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया। ऐसे में अभी सभी लोग एक दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे है इस समय पर सभी  अपना मजहब भूल कर इंसानियत को परम धर्म की तरह मान रहे हैं। ये सारी चीजें देखकर हम कह सकते हैं कि किसी भी मजहब से ऊपर होती है इंसानियत।

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तो चलिए आज हम आपको इंसानियत और मजहब से जुड़े कुछ शेर सुनाएंगे

  1. इंसान के पास सब कुछ है मगर

एक तन्हा आदमिय्यत ही नहीं।

  1. घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे

बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला।

  1. बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमां जो बस गए

इंसां की शक्ल देखने को हम तरस गए।

ये बात तो हम सभी का हृदय जानता है कि कोई भी धर्म क्यों न हो वो हमेशा हमें सही राह दिखाता हैं और अगर आप मानें तो सभी धर्म अपने आप में सर्वश्रेष्ठ है। लेकिन समझ नहीं आता उसके बाद भी आतंक का इतना गहरा साया क्यूं? अगर हम बाहरी ताक़तों की बात करें, तो उनका तो समझ आता है। पर जो घर में होता आ रहा है उसका क्या? ये सब चीजे आखिर कौन करवा रहा है? कहीं हमारी राजनीतिक पार्टियां ही वोट बैंक की लालसा में आम जनता को ही बलि का बकरा तो नहीं बना रहीं? कुछ भी कहना मुश्किल है। लेकिन अभी की चीजें देखते हुए बस इतना कहा जा सकता है कि किसी भी मजहब से ऊपर इंसानियत होती है।

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दीदी तीसरी बार बनी बंगाल की मुख्यमंत्री, जानें देश की महिला मुख्यमंत्रियों के बारे में…

आज तीसरी बार ममता बनर्जी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ


दीदी यानि की ममता बनर्जी ने बुधवार को तीसरी बार बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। ऐसा ममता बनर्जी के साथ दूसरी बार हो रहा है जब वो विधानसभा की विधायक नहीं होने के बाद भी बंगाल की कमान संभाल रही हैं। शायद आपको याद हो, जब साल 2011 में ममता बनर्जी पहली बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थीं तो उस समय वो लोकसभा में सांसद थीं। आपको बता दे कि इस बार ममता बनर्जी नंदीग्राम से अपने पुराने सहयोगी और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से चुनाव हार गई हैं। लेकिन हार के बाद भी ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बन सकती हैं। आपको बता दें कि छह महीने के भीतर ममता बनर्जी को  राज्य के किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव जीतना होगा। अगर ऐसा नहीं होता तो ममता बनर्जी को अपना मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ेगा।

जाने उन महिलाओं के बारे में जो संभाल चुकी है मुख्यमंत्री की कुर्सी

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ममता बनर्जी: आपको बता दें कि बंगाल की तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाली ममता बनर्जी साल 2011 में पहली बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थी। क्या आपको पता है ममता बनर्जी को अग्नी कन्या कहा जाता है। क्योंकि उन्होंने राजनीतिक जीवन में काफी संघर्ष किया है। शुरू में ममता बनर्जी कांग्रेस पार्टी में थी। लेकिन बाद में उन्होंने अपनी अलग पार्टी का गठन किया और उसका नाम AITMC रखा। इतना ही नहीं बंगाल में ममता दीदी ने 30 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार को हटा कर सत्ता प्राप्त की थी।

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जे जयललिता: आपको बता दे कि जयललिता पहली बार 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनी थी। उसके बाद वो कई बार मुख्यमंत्री बनी। उन्हें हमारे देश में एक मजबूत नेता के रूप मे माना जाता था। इतना ही नहीं, उन्हें एम जी रामचंद्रन का उत्तराधिकारी भी माना जाता था। जयललिता एक मजबूत नेता होने के साथ-साथ एक फिल्म अभिनेत्री भी रह चुकी है।

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मायावती: ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि मायावती हमारे देश की पहली दलित महिला है जो मुख्यमंत्री बनी। और मायावती बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख है। आपको बता दे कि मायावती कई बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी है। और मायावती कांशीराम का उत्तराधिकारी माना जाता है।

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सुषमा स्वराज: आपको बता दे कि साल 1998 में पहली बार सुषमा स्वराज दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी। इतना ही नहीं, सुषमा स्वाराज बीजेपी की तरफ से भी मुख्यमंत्री बनने वाली पहली महिला थी। लेकिन सुषमा स्वराज बतौर मुख्यमंत्री काफी कम दिनों तक ही रह सकी। क्योकि उस समय देश भर में चल रहे प्याज के संकट के कारण उनकी पार्टी दिल्ली में चुनाव हार गयी।

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शीला दीक्षित: आपको बता दे कि शीला दीक्षित पहली बार 1998 में मुख्यमंत्री बनी। जिसके बाद वो लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। आज भी सबसे लम्बे समय तक महिला मुख्यमंत्री बनने का रिकॉड शीला दीक्षित के नाम है वह कांग्रेस पार्टी की नेत्री थी।

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