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जाने क्यों माना जाता है हिंदू धर्म में कछुआ को घर पर रखना शुभ, जाने इसके फायदे  

कछुए की प्रतिमा को घर पर रखने से मिलती है सुख, शांति और समृद्धि


हिंदू धर्म के अनुसार कछुए को घर पर रखना बहुत ही शुभ माना जाता है. हमारे देश में प्राचीन समय से ही कछुए का प्रयोग वास्तु उपाय के लिए किया जाता है. आपने महसूस  भी किया होगा कि मंदिरों में असीम शांति अनुभव होती है, इसका मुख्य कारण है कि मंदिर के मध्य में कछुए की स्थापना.  माना जाता है कि कछुए को जहां भी रखा जाता है, वहां सुख-समृद्धि-शांति आती है. आपने देखा होगा की आज कल लोग अपने घरों पर भी कछुए की प्रतिमा रखते हैं, क्योकि कछुआ लंबी उम्र देने के साथ-साथ अगर घर और कार्य स्थल पर सही जगह पर रखा जाए, तो यह आपको धन-दौलत और शोहरत भी दिलवाता है. तो चलिए आज हम आपको कछुए के फायदों के बारे में बताते हैं.

1. माना जाता है कि कछुए को घर पर रखने से धन की प्राप्ति होती है. जिस भी व्यक्ति को धन संबंधी परेशानी हो वो अपने घर पर कछुआ रखता है तो उससे इसका लाभ मिलता है. धन संबंधी परेशानियों के लिए घर पर क्रिस्टल वाला कछुआ रखना चाहिए. साथ ही घर पर कछुआ रखने से परिवार के लोगों की उम्र भी लंबी होती है.

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2. घर पर कछुआ रखने से नौकरी और परीक्षा दोनों में सफलता प्राप्त होती है. साथ ही घर पर रखा हुआ कछुआ आपको और आपके परिवार को नजर लगने से बचाता है. इससे घर के लोगों के बीच में सुख- शांति भी बनी रहती है.

3. जब कोई व्यक्ति नया व्यापार शुरू करता है. तो वो अपने दुकान या ऑफिस में चांदी का कछुआ रख सकता है. ये उसके लिए काफी शुभ होगा. कछुआ घर में रखने से जीवन में ऊर्जा का प्रवाह एक समान होने से स्थिरता बनी रहती है और जीवन में उतार-चढ़ाव कम आते हैं.

4. घर हो या ऑफिस सभी जगह पर सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए हमें चीजों को सही जगह और सही दिशा में रखना बहुत जरूरी होता है. अगर आप अपने घर या ऑफिस में कछुआ रखना चाहते है तो आपको काले रंग का कछुआ उत्तर दिशा, ग्रीन ड्रैगन पूर्व दिशा, रेड फिनिक्स को दक्षिण दिशा, सफेद चीते को पश्चिम दिशा में रखना चाहिए.

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4 दिन तक मनाया जायेगा छठ पूजा का महापर्व, यह है पूजा का सही मुहूर्त

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य और क्या है इसका महत्व?


हर साल दिवाली के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से ही देवी छठ माता की पूजा अर्चना शुरू हो जाती है और सप्तमी तिथि की सुबह तक चलती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को लोग नहा कर भोजन ग्रहण करते है। इसमें व्रती यानी जो लोग व्रत रखते है उनका मन और तन दोनों ही शुद्ध होते हैं। इस दिन व्रती शुद्ध सात्विक भोजन करते हैं।

आपको बता दें की शुक्ल पक्ष की पंचमी पर जो लोग व्रत रखते है वो सारा दिन निराहार रहते हैं। उसके बाद शाम के समय गुड़ वाली खीर का विशेष प्रसाद बनाकर छठ माता और सूर्य देव की पूजा करके खाते हैं।षष्टि तिथि के पूरे दिन निर्जल रहकर शाम के समय अस्त होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं और सूर्यदेव से अपने मन की कामना कहते हैं।फिर सप्तमी तिथि के दिन सुबह के समय उगते सूर्य को भी नदी या तालाब में खड़े होकर जल देते हैं और अपनी मनोकामनाओं के पूर्ण  होने  के लिए प्रार्थना करते हैं।

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य

डूबते सूर्य को अर्ध्य देने के पीछे एक बहुत बड़ी मान्यता है कि सूर्य की एक पत्नी का नाम प्रत्यूषा है और यह जो डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है यह उन्हें ही दिया जाता है। संध्या के समय में अर्ध्य देने से कई तरह से लाभ होते है। ऐसा कहते है की इसे से आँखों की रौशनी बढ़ जाती है। लम्बी आयु  मिलती है। इस अर्ध्य माता या पिता ही नहीं बल्कि विद्यार्थी भी रख सकते  है जिस से उनको शिक्षा में भी लाभ मिल सकती है।

4 दिन मना जायेगा छठ पूजा का महा पर्व

छठ पूजा नहाय-खाए – 31 अक्टूबर

खरना का दिन – 1 नवम्बर

छठ पूजा संध्या अर्घ्य का दिन – 2 नवम्बर

उषा अर्घ्य का दिन – 3 नवम्बर

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अब जाने क्या है छठ पूजा का सही मुहूर्त?

इस बार  छठ पूजा का सही मुहूर्त है  2 नवंबर,को  सूर्योदय का शुभ मुहूर्त- 06:33

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का शुभ मुहूर्त- 17:35

षष्ठी तिथि आरंभ- 00:51 2 नवंबर 2019

षष्ठी तिथि समाप्त- 01:31 3 नवंबर 2019

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क्या बिना शादी के कुंवारी लड़कियाँ रख सकती है करवाचौथ का व्रत ?

कुंवारी लड़कियाँ का करवा चौथ का फ़ास्ट रखना सही है?


हर सुहागन के लिए करवा चौथ का व्रत बेहद ख़ास होता है क्योंकि इस दिन सभी सुहागने व्रत रख कर अपने पति की लम्बी आयु की मनोकामना करती है। इस साल करवा चौथ 17 अक्टूबर को मनाया जायेगा। इस दिन व्रत में सुबह सरगी खाई जाती है और शाम को चाँद देख कर व्रत खोला जाता है। इस बार उपवास का समय 13 घंटे 56 मिनट का है। सुबह 6:21 से रात 8:18 तक। इसलिए सरगी सुबह 6:21 से पहले ही खा लें।

क्या बिना शादी के कुंवारी लड़की रख सकती है करवाचौथ का व्रत ?

करवाचौथ का व्रत सिर्फ सुहागिन महिलाएं ही नहीं बल्कि कुंवारी लड़कियां भी रखती हैं। ज्योतिषी की माने तो कुंवारी लड़कियां भी करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। इससे उन्हें करवामाता का आशीर्वाद ही मिलेगा।

आज कल तो ज्यादातर कुँवारी लड़कियाँ करवाचौथ का व्रत या तो प्रेमी के लिए रखती है या फिर अपने होने वाले मंगेतर के लिए। अगर आपका अभी किसी से कोई रिश्ता नहीं बना है तो भी आप अपने भावी पति का ख्याल कर व्रत रख सकती हैं। इस व्रत को रखने के लिए जो नियम सुहागनों  के लिए बनाये गए है वही यह नियम कुंवारी लड़कियों के लिए भी रखा गया है। लेकिन एक नियम है जो कुंवारी लड़कियों के लिए अलग है अगर आप अपने प्रेमी या मंगेतर के लिए व्रत नहीं रख रहीं हैं तो निर्जल व्रत रखने की बजाय निराहार व्रत रहें।

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1. इसके अलावा कुंवारी लड़कियां करवा चौथ माता, भगवान शिव और माता गौरी की पूजा करे साथ ही उनकी कथा सुने।

2. कुंवारी लड़कीयां चाँद देख कर नहीं बल्कि तारे को देख कर अपना फ़ास्ट तोड़े।

3. कुंवारी लड़कियां बिना  छन्नी के  तारो को  जल से अर्घ्य देकर पूजा करें और व्रत खोलें।

तो यह है कुछ नियम जो हर लड़की करवा चैयत पर फॉलो कर सकती है।

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Navratri special 2019 : जाने इन पौराणिक कथाओं के बारे में जो दर्शाती है माँ दुर्गा की शक्ति

Navratri special 2019 : क्यों मानते है माँ दुर्गा को शक्ति का प्रतीक?


नवरात्रि के दिनों में  लोग माँ दुर्गा की पूजा- आराधना करते है। नौ दिनों तक घरो और मंदिरों में माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दिनों में घरों में कलश की स्थापना की जाती है और व्रत भी रखे जाते है। इन दिनों  माता के 9 अलग- अलग रूपों की पूजा की जाती है। इस साल 29 सितंबर से नवरात्रि शुरू हो रहे है । तो चलिए आज जानते है की आखिर क्यों मनाते  है नवरात्रि और हिन्दू धर्म क्या है इसकी मान्यता।

क्यों मानते है माँ दुर्गा को शक्ति का प्रतीक?  

अगर हिन्दू धर्म की कहानियों पर नज़र डाले तो नवरात्रि को मानने के दो वजह है या ये कहे की ऐसी दो पौराणिक कथाएं है जो माता की शक्तियों को दर्शता है। महिसासुर नाम का राक्षस था जो ब्रह्मा जी का बहुत बड़ा भक्त था और उसने कड़ी तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर दिया था. उसकी तपस्या से प्रसन्न हो कर ब्रह्मा ने उन्हें वरदान दिया की तीनो लोक में कोई भी देवता, दानव या पृथ्वी पर कोई भी उसे मार नहीं पायेगा।
यह वरदान पा कर महिसासुर ने तीनो लोक में आतंक मचा दिया था और इसे परेशान हो कर सारे देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ मिलकर उन्होंने शक्ति के रूप में माँ दुर्गा को जन्म दिया। उसके बाद माँ दुर्गा और महिसासुर का 9 दिन तक घमासान युद्ध हुआ और माँ ने इस युद्ध में उसका वध कर दिया। इस कथा को बुराई के ऊपर अच्छाई की जीत के लिए भी याद किया जाता है।
ऐसी ही एक और कथा है जो ये दर्शाती है कि हम नवरात्रि क्यों मनाते है। इस कहानी के अनुसार भगवान श्री राम जब लंका पर आकर्मण करने वाले थे उसे पहले उन्होंने शक्ति की माता मॉ भगवती कि आराधना की थी। रामेश्वरम में उन्होंने ने 9 दिन तक माता की पूजा- आराधना की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न हो कर माता ने उन्हें लंका पर विजय होने का आशीर्वाद दिया था। दंसवे दिन श्री राम ने लंका नरेश रावण को हारा कर विजय प्राप्त की और इस दिन को विजय दशमी के रूप में मनाया जाता है। तो यह थी वो पौराणिक कथाएँ  जिसकी वहज से हम नवरात्रि मानते है। जब किसी घर में कलश की स्थापन की जाती उस वक़्त खाने पीने पर भी ध्यान दिया जाता है जैसे प्याज़ का सेवन पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है और कुछ खास प्रकार के पकवान बनाए जाते है।
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गणेश उत्सव 2019 : अगर आपने की है घर मे गणपति की स्थापना तो इन बातो का रखे ख़ास ख्याल

गणेश उत्सव 2019: कैसे आप पा सकते है बप्पा का आशीर्वाद?


सितंबर के महीने के साथ आया है गणेश उत्सव 2019। गणेश चतुर्थी का यह महोत्सव 2 सितंबर से शुरू होकर 12 सितंबर तक चलेगा। ऐसे में भारत के कई राज्यों मे इस उत्सव को लेकर जोश देखने को मिल रहा है। सभी भक्त गणपति जी की मूर्ति घर लाकर उनकी स्थापना कर रहे है ताकि घर में सुख और समृद्धि बनी रहे। इसलिए आज हम आपको बताएँगे की कैसे गणपति जी की मूर्ति लाने से घर में बरकत आएगी।

गणपति को घर लाने पर इन बातो का रखे ख़ास ध्यान तभी आएगी बरक़त :

1. अगर आपने अपने घर में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना कर रखी है तो इसका ख़ास ध्यान रखे की उनकी पूजा करते वक्त कभी तुलसी के पत्ते न चढ़ाए। ऐसा माना जाता है कि तुलसी ने भगवान को शादी का प्रस्ताव दिया था पर गणपति ने उन्हें मना कर दिया। उसके बाद माँ तुलसी ने उन्हें श्राप दिया कि एक दिन वो अपनी मर्जी के खिलाफ जा कर शादी करेंगे इस पर गणेश भगवान ने नाराज होकर उन्हें श्राप दिया था। इसलिए उन्हें कभी तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते।

2. जब आप गणेश जी की पूजा करे उस दौरान पीले या लाल रंग के कपड़े पहनें। इन दस दिनों के लिए नीले या काले रंग के कपड़े न पहने। कोशिश करे की मन को शांत रखे और खुश रहे ।

3. घर के मंदिर में कभी भगवान गणेश की दो मुर्तिया न रखे। अगर आपके पास मंदिर में पहले से गणेश की मूर्ति है तो उसे युमना में विसर्जित कर के नई मूर्ति की स्थापना करे।

4. भगवान गणेश की मूर्ति के पास हमेशा रौशनी रखे साथ ही यह ध्यान रखे कि जब आप उनकी पूजा कर रहे हो उस समय अँधेरा न हो। क्योंकि अँधेरे में पूजा करना अशुभ माना जाता है।

5. इसके अलावा उनकी पूजा हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुख कर के करे:

6. भगवान गणेश की पूजा के दौरान उन्हें दूर्वा अर्पित करें और लड्डू का भोग जरूर लगाएं। भगवान गणेश की पूजा करने के दौरान इन सभी बातो पर दे ख़ास ध्यान। ऐसा करने से आपके घर में हमेशा सुख-शान्ति बनी रहेगी साथ ही घर में बरकत भी होगी।

और पढ़ें: कैसे महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को स्मृति ईरानी ने दी नई दिशा?

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साहित्य और कविताएँ

क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा ? बहुत ही अनोखी है वजह

कैसे करे गुरु पूर्णिमा पर गुरु की अर्चना ?


आज है गुरु पूर्णिमा और यह दिन हमारी जिंदगी में काफी महत्व रखता है. हमारी ज़िन्दगी में यह दो लोगो ज्यादा महत्व देते  है जो हमेशा हमें सही रास्ते पर चलने की सलाह देते है.एक माता-पिता और दूसरे हमारे गुरु. ये दोनों ही आपको हर गलत  मार्ग पर चलने से रोकते है और सही रास्ते पर चलने का रास्ता दिखाते है. वही हमारे देश में पौराणिक काल से गुरुओं को सम्मान दिया जाता है. ऐसा कहा जाता है किसी भी व्यक्ति को महान बनाने में माता- पिता के अलावा सबसे बड़ा हाथ उसके गुरु का होता है. जिनके ज्ञान और आशीर्वाद से वो हर मुकाम हासिल कर पाता है , जो वो पाना चाहता है.  

क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा ?

गुरु पूर्णिमा इसलिए मनाई जाती है क्योंकि इस दिन महान गुरु महर्षि वेदव्यास का जन्म  हुआ था. महर्षि वेदव्यास ने ब्रह्म सूत्र, महाभारत जैसे कई  साहित्यों की रचना की है. शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास को तीनो कालो  का ज्ञाता माना जाता है.इसके अलावा  शास्त्रों में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन की वजह से भी गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है.

क्या है गुरु पूर्णिमा का ख़ास महत्व ?

ऐसा माना जाता है कि गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती है.इसीलिए इन्हें भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया जाता है.गुरुकुल में रहने वाले विद्यार्थी इस दिन अपने गुरु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. इसलिए इस दिन का ख़ास महत्व है.इस दिन मंत्रों का जाप भी करना चाहिए ये आपको आपके काम में सफल बनाने में मदद करेगी.

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धार्मिक

हनुमान जयंती पर भूल कर भी न करे यह सब

इस समय पर करे हनुमान जी की पूजा, होगी सभी मनोकामना  पूरी


आज भी जब रामायण का पाठ  किया जाता है  तो उसमे सुन्दर  कांड  का पाठ  जरूर  पढ़ा  जाता  है उसकी वजह यह भी है अगर राम रावण को मार पाए तो सिर्फ हनुमान जी की वजह से, अगर हनुमान जी रावण का पता न लगा पाते या  समुन्दर पर पुल  न बना पाते तो शायद राम भी रावण को मार नहीं पाते और सिया को रावण के चुंगल से छुड़ा  न पाते। इसलिए तो राम के साथ जितना लक्षमण का नाम जुड़ता है उतना ही राम के साथ हनुमान जी का नाम भी जुड़ता है.

जैसे की आज हनुमान जयंती है तो आज के दिन आप यह सभी चीजे भूल कर भी न करे वरना आपको हो सकती है यह सभी दिक्कत और आज हनुमान जी की इस समय पर करे पूजा  ऐसे करने से आपकी सभी मनोकामना पूरी होगी

जाने किस समय पर करे हनुमान जी की  पूजा

हिंदू धर्म में हनुमान जयंती को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. आज शाम तक   07 बजकर 30 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगै . इसके साथ ही दोपहर पहले 11 बजकर 32 मिनट तक खुशी प्रदान करने वाला हर्षण योग और शाम 04 बजकर 42 मिनट तक धार्मिक कार्यों के लिये शुभ राज योग भी है इस समय के बीच आप कभी पूजा कर सकते है जिससे आपकी सभी मनोकामना होगी पूरी.

आज के दिन यह सब कुछ करने से जरूर बचे.

1. आप जब हनुमान जी की पूजा करे तो यह जरूर ध्यान दे की आप काले या सफ़ेद रंग के कपड़े पहन कर पूजा बिलकुल न करे नहीं तो इससे घर में नेगेटिववाइब्स आती है. पूजा आप लाल रंग का कपड़ा पहन कर करे

2.इस दिन आप नमक न खाये अगर आप इस दिन व्रत रखते है तो साथ ही दान की गयी हुई चीजे बिलकुल न खाये

3. हनुमान जी की पूजा हमेशा शान्ति मन से करे क्योंकि बजरंग बली काफी शांतप्रिय देवता माने जाते है इसलिए उन्हें अशांति बिलकुल भी पसंद नहीं इसलिए जब आपका मन शांत हो तभी उनकी पूजा करे.

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4. हनुमान जी ने कभी शादी नहीं कि वो हमेशा एक ब्रह्मचारी ही रहे है इसलिए यह भी ध्यान रखना जरुरी है की पूजा के समय औरतो को उनके चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए

तो हनुमान जी की पूजा करते समय आपको इन बातो का ख़ास ध्यान रखना होगा तभी आपकी पूजा सफल होगी और आपकी मनोकामना भी पूरी होगी