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26/11 Mumbai Attack को हुए 11 साल, आज भी ताज़ी है उस शाम की यादें

26/11 Mumbai Attack : 11 साल पहले दहली थी मुंबई


 

MORE THAN A DECADE TO 26/11

जब भी 26 नवंबर 2008 की बात होती है तो अपने आप लोगो को मुंबई के उस आतंकी हमले की याद आ जाती है जिसने पुरे देश को हिला कर रख दिया था। ये वो तारीख जिसने पुरे देश को दहला कर रख दिया था। इस दिन मुंबई शहर में हर तरफ दहशत और मौत दिखाई दे रही थी। आज  इस हमले को 11 साल हो चुके है, लेकिन इसकी डरावनी यादें आज भी हमारे ज़ेहन से गई नहीं है। 10 आतंकवादी के करीब 60 घंटे तक मुंबई डरा कर रहते हुए 164 निर्दोष लोगो की जान ली थी।

दिल दहलाने वाली शाम:

हमेशा की तरह 26 नवंबर 2008 की शाम  को भी मुंबई अपबने शबाब पर थी, यह शाम ख़त्म ही होने वाली थी की शहर  के एक कोने से गोलियों की आवाज़ आना शुरू होगी। इस हमले की शुरुवात  लियोपोल्ड कैफे और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से हुई थी। पहले तो ऐसा कोई अंदाज़ा नहीं था की  यह हमला इतना बड़ा होने वाला है, लेकिन धीरे-धीरे मुंबई की अलग – अलग जगह से हमले  की खबर आने लगी।  आधी रात तक मुंबई में आतंक का असर नज़र आने लगा।

ताज में चली सबसे लम्बी लड़ाई:

26 नवंबर की रात में ही आतंकियों ने अपना रुख पूरी तरह से ताज होटल की तरफ मोड़ लिया था। यहां आतंकियों ने कई लोगो को बंधक बना कर रखा हुआ था, जिनमें सात विदेशी नागरिक भी शामिल थे  और इसके साथ ही ताज होटल के हेरीटेज विंग में भी आग लगा दी गई थी।  27 नवंबर की सुबह एनएसजी के कमांडो आतंकवादियों का सामना करने पहुंच चुके थे।  सबसे पहले होटल ओबेरॉय में लोगो को मुक्त कराकर ऑपरेशन 28 नवंबर की दोपहर को खत्म हुआ था, और उसी दिन शाम तक नरीमन हाउस के आतंकवादी भी मारे गए थे।  लेकिन होटल ताज के ऑपरेशन को उसके अंजाम तक पहुंचाने में 29 नवंबर की सुबह तक का वक्त लग गया था।

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शामिल थे 10 आतंकवादी

मुंबई हमले की पूरी राजनीती देख कर इस हमले के पीछे कितने आतंकवादी  थे  इसका अंदाज़ा लगना काफी मुश्किल था। लेकिन हमले के खत्म होने के बाद और कसाब के हिरासत में आने के बाद ये साफ़ होगया की इस हमले में 10 आतंकवादी शामिल थे ,उन्हें पाकिस्तान मे  ट्रेनिंग दी गई थी। उसके बाद वो आतंकी 26 नवंबर को एक बोट से समंदर के रास्ते भारत में घुसे थे।  पुलिस ने जली हुई बोट को भी बरामद कर लिया था।

शहीद हुए 11 जवान:

मुंबई के आतंकी हमले को नाकाम करने के अभियान में मुंबई पुलिस, एटीएस और एनएसजी के 11 जवान शहीद होंगे थे।  इनमें एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे, एसीपी अशोक कामटे, एसीपी सदानंद दाते, एनएसजी के कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसआई विजय सालस्कर, इंसपेक्टर सुशांत शिंदे, एसआई प्रकाश मोरे, एसआई दुदगुड़े, एएसआई नानासाहब भोंसले, एएसआई तुकाराम ओंबले, कांस्टेबल विजय खांडेकर, जयवंत पाटिल, योगेश पाटिल, अंबादोस पवार और एम.सी. चौधरी शामिल थे। इसके अलावा इस हमले में 137 लोगों की मौत हो गई थी जबकि लगभग 300 लोग घायल हो गए थे।

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Constitution day 2019: 26 नवंबर को मनाया जाता है संविधान दिवस, जाने इससे जुडी कुछ खास बातें

Constitution day 2019: क्यों मानते है संविधान दिवस??


Constitution day 2019: आज़ादी मिलते ही देश को सही तरीके से चलाने के लिए संविधान बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया था। भारतीय संविधान को 29 अगस्त 1947 को स्थापित किया गया था और इसके अध्यक्ष थे डॉ. भीमराव अंबेडकर। दुनिया भर के संविधान को बारीकी से पढ़ने के बाद डॉ. अंबेडकर ने बाकी सदस्यों सहित भारतीय संविधान का मसौदा तैयार कर लिया। 26 नवंबर 1949 को इसे भारतीय संविधान सभा के सामने लाया गया और इसी दिन संविधान को सभा द्वारा अपना लिया गया। यही वजह है की हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है।

विश्व का सबसे बड़ा संविधान:

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है, और इसी के आधार पर भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र माना जाता है। भारतीय संविधान में 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां शामिल हैं। यह 2 साल 11 महीने और 18 दिन में बनकर तैयार हुआ था। जनवरी 1948 में संविधान का पहला प्रारूप चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया। 4 नवंबर 1948 से शुरू हुई यह चर्चा तकरीबन 32 दिनों तक चली थी। इस अवधि के दौरान 7,635 संशोधन प्रस्तावित किए गए जिनमें से 2,473 पर विस्तार से चर्चा हुई।

संविधान की स्थापना:

26 नवंबर, 1949 को लागू होने के बाद संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान पर हस्ताक्षर किए, और इन सबके बाद 26 जनवरी को भारतीय संविधान लागू कर दिया गया। ऐसा कहा जाता है की जिस दिन संविधान पर हस्ताक्षर किये जा रहे थे उस दिन बहुत ज़ोर से बारिश भी हो रही थी, और प्राचीन भारतीय मान्यताओं के अनुसार इसे शुभ संकेत के रूप में देखा गया।

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टाइपिंग से नहीं लिखा गया था संविधान:

भारतीय संविधान की मूल कृति हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही हस्तलिखित है। भाषाओं में संविधान की मूल प्रति को प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने लिखा था। रायजादा का खानदानी पेशा कैलिग्राफी का था। उन्होंने नंबर 303 के 254 पेन होल्डर निब का इस्तेमाल कर संविधान के हर पेज को बेहद खूबसूरत इटैलिक लिखावट में लिखा है।

हीलियम से भरे गैस कक्ष में रखा गया है संविधान:

भारतीय संविधान के हर पेज को चित्रों से आचार्य नंदलाल बोस ने सजाया है। इसके अलावा इसके प्रारंभिक पेज को सजाने का काम राममनोहर सिन्हा ने किया था। वह नंदलाल बोस के ही शिष्य थे। संविधान की मूल प्रति भारतीय संसद की लाइब्रेरी में हीलियम से भरे केस में रखी गई है।

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Maharashtra politics news updates: महाराष्ट्र में महा ड्रामा: एक और ट्विस्ट के चलते बीजेपी को पेश होना होगा सुप्रीम कोर्ट में

Maharashtra politics news updates: अजित पवार को मनाने में जुटी NCP


Maharashtra politics news updates: महाराष्ट्र में नई सरकार को लेकर अभी भी वॉर जारी है।  शनिवार को देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जिसका शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी ने विरोध  किया है।  अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है।  सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने याचिका दाखिल कर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है जिसमें उन्होंने सूबे में सरकार बनाने के लिए देवेंद्र फडणवीस को आमंत्रित किया था। आज इस मामले पर जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच सुनवाई करेगी। यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट नंबर 2 में रविवार सुबह 11:30 बजे से होगी

NCP का 51 विदायको का दवा:

51 विधायकों के हस्ताक्षर के साथ एनसीपी विधायक दल के नेता जयंत पाटील राजभवन पहुंचे हैं। जयंत पाटील का कहना है कि राज्यपाल ‘भगत सिंह कोश्यारी’ दिल्ली में हैं, ऐसे में उनसे मुलाकात नहीं हो पाई है।

थोड़ी देर में शुरू होगी सुनवाई:

महाराष्ट्र मामले पर थोड़ी देर में सुनवाई शुरू होने वाली है और दोनों पक्षों के लोग कोर्ट पहुंचने लगे हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता पृथ्वीराज चव्हाण, रणदीप सुरजेवाला, अभिषेक मनु सिंघवी अभी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। अभिषेक मनु सिंघवी से पत्रकारों ने सवाल किया तो वह बिना कोई प्रतिक्रिया दिए मुस्कराते हुए आगे बढ़ गए।

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मुंबई होटल में शिफ्ट हुए कांग्रेस विधायक:

कांग्रेस के विधायकों को अब जयपुर नहीं भेजा जाएगा। 30 विधायकों को मुंबई के JW मेरिएट होटल में शिफ्ट किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में होगा आज फैसला:

शनिवार सुबह अचानक बीजेपी सरकार ने शपथ दिलाने के खिलाफ शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट रविवार को सुबह 11.30 बजे सुनवाई करेगी। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस शनिवार शाम सुप्रीम कोर्ट पहुंची और नई सरकार को 24 घंटे के भीतर बहुमत साबित करने का निर्देश देने की अपील की थी। बीजेपी से नाता तोड़ चुकी पार्टी ने इस मामले में शीर्ष अदालत से शनिवार ही रात याचिका पर सुनवाई करने का अनुरोध किया है।

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Sanjay Raut: महाराष्ट्र की राजनीति में आया नया मोड़, ठाकरे नहीं तो राउत बन सकते है मुख्यमंत्री

Sanjay Raut: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की रेस में संजय राउत भी चल रहे है आगे


Sanjay Raut: महाराष्ट्र की राजनीति  में हलचल ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी गठबंधन पर आज यानी शुक्रवार को मुहर लग सकती है लेकिन इन सब से पहले एक खबर आ रही है की अगर मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे नहीं मानते हैं तो पार्टी के सांसद संजय राउत ये पद संभाल सकते हैं। हालांकि, शिवसेना और बीजेपी दोनों अब भी यह दावा कर रही है कि सरकार बनने के सारे रास्ते खत्म नहीं हुए हैं।

संजय राउत भी चल रहे है आगे:

शिवसेना में उद्धव ठाकरे के बाद सीएम पद की रेस में संजय राउत ही आगे चल रहे हैं।इससे पहले गुरुवार को हुई बैठक में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे को समझाने की कोशिश  कि उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में उतरना चाहिए। बैठक में मौजूद रहे शिवसेना सांसद संजय राउत और आदित्य ठाकरे ने भी उद्धव को सीएम पद संभालने के लिए कहा। शुक्रवार को दिल्ली के बाद मुंबई में मुलाकातों का फाइनल दौर होगा।  जहां पर शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी आपस में बैठक भी करने वाले है। ऐसा माना जा रहा है कि शाम में प्रेस कॉन्फ्रेंस में नई सरकार के फॉर्मूले का ऐलान भी  होगा।  यह भी तकरीबन तय है कि उद्धव ठाकरे ही अगले मुख्यमंत्री होंगे।

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पत्रिकरता के दौरान हुई थी मुलाक़ात

15 अक्टूबर 1961 को जन्मे राउत सोमवंशी के समुदाय से आते है। मुंबई के एक कॉलेज में स्नातक करने के बाद उन्होंने बतौर पत्रकार अपने करियर की शुरुआत मराठी अखबार से की थी। पत्रकारिता के दौरान ही राज ठाकरे से मुलाकात हुई और फिर राउत की जिंदगी में नया मोड़ आ गया। उस वक्त राज ठाकरे की शिवसेना में चलती थी और वह बालासाहेब ठाकरे के बेहद करीब थे।

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पाकिस्तान में दुल्हन ने पहने टमाटर के गहने: कब तक यू ही गुस्से मे लाल रहेगा टमाटर, भाव पहुंचा 300 के पार

Tomato prices in Pakistan: जानिए!! पाकिस्तान में किस भाव बिक रहे है टमाटर


Tomato prices in Pakistan: पाकिस्तान में टमाटर की कीमत 320 रुपए तक पहुंच गई है। इससे दिक्कत की बात यह है की अब टमाटर के चोरी होने की भी खबरे आने लगी है। यही वजह है कि किसानों के लिए टमाटर बेशकीमती हो चुके है। प्रधानमंत्री इमरान खान के आर्थिक सलाहकार डॉक्टर अब्दुल हफीज ने दावा किया था कि कराची में टमाटर 17 रुपए किलो हैं और इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका जम कर मजाक उड़ा था।

टमाटर की चोरी:

शुक्रवार को कराची की थोक मंडी में टमाटर 320 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर बिकेऔर वही  सिंध में टमाटर की फसल सबसे ज़्यादा ख़राब हुई थी। लेकिन, खेतों पर लुटेरों की नजर है। टमाटर लूट की कुछ घटनाएं हुईं तो किसान सतर्क हो गए है। एक न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, टमाटर सुरक्षा के लिए किसानों ने अपने खर्च पर हथियारबंद गार्ड तैनात कर दिए हैं। बादिन जिले के किसान लूट की घटनाओं के प्रति ज्यादा आशंकित हैं।

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बाकी सब्जियों के दाम छू रहे है आसमान:

सिर्फ टमाटर ही नहीं  लौकी और दूसरी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। लौकी यहां 170 रुपए किलोग्राम तक बिक रही है। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉक्टर अब्दुल हफीज के बयान ने अवाम के जख्मों पर नमक छिड़क दिया है। उन्होंने कहा है की  कराची में टमाटर का भाव 17 रुपए प्रति किलो है। मीडिया ने उनसे पूछा कि आप जगह या मंडी का नाम बताएं, जहां इस सब्जी का यह दाम है। इस पर हफीज गोलमोल जवाब देने लगे। लोगों की नाराजगी से घबराई सरकार ने ईरान से टमाटर आयात करने का आदेश दिया है । एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयात होने बावजूद टमाटर 150 रुपए किलो से कम नहीं हुआ है।

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Anil Ambani resigns: रिलायंस कम्युनिकेशन के डायरेक्टर अनिल अम्बानी ने दिया इस्तीफा, हुआ था 30 हज़ार करोड़ का घाटा

Anil Ambani resigns: जानिए क्यों दिया रिलायंस कम्युनिकेशन के डायरेक्टर ने इस्तीफा


Anil Ambani resigns: बंद हो चुके टेलीकॉम कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन के चैयरमेन अनिल अम्बानी ने निर्देशक के पद से इस्तीफा दे दिया है। शुक्रवार को जारी तिमाही नतीजों के अनुसार कंपनी को 30 हजार करोड़ से अधिक का घाटा हुआ था। यह कॉर्पोरेट इतिहास में वोडाफोन-आइडिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा घाटा है।

और किन-किन अधिकारीयों ने दिया इस्तीफा:

कंपनी ने बयान जारी करते हुए कहा है कि अनिल अंबानी के अलावा छाया विरानी, रायना कारानी, मंजरी काकेर और सुरेश रंगाचर ने भी इस्तीफा दे दिया है। इनमें से अनिल अंबानी, छाया विरानी और मंजरी काकेर ने 15 नवंबर को इस्तीफा दिया था, वहीं रायना कारानी ने 14 नवंबर और सुरेश रंगाचर ने 13 नवंबर को इस्तीफा दिया था।

कितने का हुआ घाटा:

प्राइवेट सेक्टर इन दिनों मंदी की जबरदस्त मार झेल रहा है। कई मल्टीनेशनल कंपनियों पर आर्थिक मंदी का असर साफ दिखाई दे रहा है। इस कड़ी में देश की कंपनियों में शामिल रिलायंस कम्युनिकेशंस भी इससे बची नहीं है। क़र्ज़ के बोझ से बड़ी रिलायंस कम्युनिकेशन को जुलाई-सितंबर की तिमाही में करीब 30,142 करोड़ रुपये का एकीकृत घाटा हुआ है। उच्चतम न्यायालय द्वारा सांविधिक बकाये पर फैसले के मद्देनजर देनदारियों के लिए प्रावधान की वजह से कंपनी का घाटा इतना ज्यादा पहुंच गया है।

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दिवाला प्रक्रिया में चल रही कंपनी ने इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,141 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। उच्चतम न्यायालय के दूरसंचार कंपनियों के सालाना समायोजित सकल राजस्व की गणना पर फैसले के मद्देनजर कंपनी ने 28,314 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। आरकॉम ने कहा कि यदि इसके लिए प्रावधान किया जाता तो उसका नुकसान 1,668 करोड़ रुपये और बढ़ जाता। तिमाही के दौरान कंपनी की परिचालन आय घटकर 302 करोड़ रुपये रह गई जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 977 करोड़ रुपये थी।

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Odd-Even Rule: आज है ओड-इवन का आखरी दिन, स्कीम को आगे बढ़ाने के है आसार

Odd-Even Rule: ओड इवन को बढ़ाने पर फैसला आज, दिल्ली की इमेज की है फ़िक्र


Odd-Even Rule: ओड इवन का आज दिल्ली में आखरी दिन हैं और प्रदुषण के स्तर को देखते हुए शायद ओड इवन की स्कीम को आगे बढ़ाया जायेगा। इसके संकेत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने पहले ही दे दिए थे। उन्होंने कहा की, ज़रूरत पढ़ने पर ओड इवन को बढ़ाया जा सकता है। अगर दिल्ली में प्रदूषण के स्तर की बात करे तो आज भी खतरनाक है। द्वारका इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स 700 के पार दर्ज किया गया है।

ओड-इवन को बढ़ाने पर फैसला आज:

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 4 से 15 नवंबर तक ऑड-ईवन योजना लागू करने का फैसला किया था और इसके अनुसार शुक्रवार को यह योजना का आखिरी दिन है। ऐसे अनुमान लगाए जा रहे हैं की जिस तरह से प्रदुषण बढ़ रहा है शायद ओड इवन को आगे बढ़ाया जा सकता है, और आज दिल्ली सरकार इस मामले पर फैसला ले सकती है।

और पढ़ें: राफेल और सबरीमाला मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कही यह बड़ी बात

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वायु प्रदूषण पर बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा था कि, मुझे लोगों की सेहत की चिंता है और देश की राजधानी दिल्ली की जो इमेज बन रही है उसकी भी चिंता है। अगर दिल्ली में इतना स्मोग होगा तो क्या इमेज बनेगी।’

उन्होंने कहा, ‘हम सब देख रहे हैं कि दिल्ली में प्रदूषण 10 अक्टूबर से पराली जलने की वजह से बढ़ा। पंजाब, हरियाणा में बारिश की वजह से दिल्ली में धुआं कम हो गया था, लेकिन बारिश थमते ही दिल्ली में प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ गया है, क्योंकि पराली अभी भी जलाई जा रही है।

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Delhi University protest: पहली बार ‘डीयू’ में स्टूडेंट्स और टीचर्स मिलकर कर रहे हैं विरोध

39 मंजिला बिल्डिंग के निर्माण पर लिखा पीएम को लेटर


Delhi University protest: दिल्ली यूनिवर्सिटी में चल रहे विरोध ने पहली बार टीचर्स और स्टूडेंट्स एक साथ ला दिया है। दरअसल सेंट्रल गवरन्मेंट डीयू के साथ वाली ज़मीं पर एक 39 मंजिला बिल्डिंग बनाना चाहती है, लेकिन अब इस बिल्डिंग के निर्माण को रोकने के लिए टीचर्स और स्टूडेंट पूरा ज़ोर लगा रहे है। स्टूडेंट्स हड़ताल पर बैठ चुके है और विरोध शुरू हो चूका है। इस मामले पर मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स असोसिएशन (DUTA) की ओर से प्रधानमंत्री को लेटर भी लिखा गया है। इस लेटर में कहा गया है की जमीन पर प्राइवेट बिल्डिंग की जगह हॉस्टल बनाए जाए। आज शिक्षक और स्टूडेंट इस मामले के तहत ‘एलजी हाउस’ तक साइकल रैली निकलेंगे और वहीं दूसरी ओर एबीवीपी (ABVP) और एनएसयूआई (NSUI) की ओर से भी प्रदर्शन को आंदोलन में बदलने की तैयारी चल रही है।

DUTA के वाईस-प्रेजिडेंट डॉ. आलोक रंजन का कहना है उन्होंने ने इस मामले पर पीएम को लेटर लिखा है की इस मसले पर वो अपनी नज़र डाले, और 39 मंजिला इमारत के निर्माण पर रोक लगवाने का आदेश भी दिया है। उन्होंने ने लेटर में ये भी लिखा है की इस बिल्डिंग की जगह हॉस्टल बनाए जाएं क्योंकि कई सारे स्टूडेंट्स को हॉस्टल नहीं मिल पाता है। अगर इस पर रोक नहीं लगवाई कई तो हमें कोर्ट जाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

और पढ़ें: महाराष्ट्र में लागू हुआ राष्ट्रपति शासन, जानिए महाराष्ट्रा मामले की 10 एहम बातें

क्या है पूरा मामला:

सोमवार को डीयू की आर्ट्स फैकल्टी धरने के साथ-साथ क्रमिक भूख हड़ताल भी शुरू हुई है। इसमें शामिल डीयू के कैंपस डिवेलमेंट कमिटी के मेंबर डॉ. रसाल सिंह कहते हैं की, यह जमीन डिफेंस की है और दिल्ली रेल कॉरर्पोरेशन को पब्लिक यूज के लिए दी गई थी। मगर डीएमआरसी (DMRC) ने इसे प्राइवेट बिल्डिर को दे दिया। वहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) जल्द ही इस मसले को लेकर रक्षा मंत्रालय, एलजी, डीएमआरसी से के अधिकारियों से मिलेगी। डूसू का कहना है कि यह निर्माण डीयू प्रशासन के सुस्त रवैए का नतीजा है। डूसू और एबीवीपी जल्द ही सीनियर अधिकारियों से मिलेगा। डूसू सभी कॉलेजों की यूनियन को भी इस मुद्दे से जोड़ रहा है। डीयू प्रशासन की ओर से इस मसले पर राष्ट्रपति और एलजी से अपील की जा चुकी है।

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Delhi Air Quality: राजधानी में सांस लेना हुआ फिर से मुश्किल, AQI पंहुचा 700 से पार

Delhi Air Quality: दिल्ली में जहरीली हवा का कहर, लोगों का हाल हुआ बेहाल


दिल्ली-एनसीआर की हवा मंगलवार की सुबह फिर से बेहद खराब की स्थिति पर पहुँच गयी है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 700 के पार दर्ज जिया गया। दिल्ली के पटपड़गंज में एक्यूआई (AQI) 565, ओखला में 533, आरके पुरम में 426 और मंदिर मार्ग में 522 रिकॉर्ड किया गया। सबसे बुरा हाल दिल्ली से सटे शहरों का है। नोएडा सेक्टर 62 में एक्यूआई 714 और गाजियाबाद के वसुंधरा में 654 रिकॉर्ड किया गया, जो की सबसे खतरनाक क्ष्रेणी में आता है।

बारिश और तेज हवा के कारण कुछ दिन के राहत के बाद राजधानी की हवा फिर से जहरीली होने लगी है। सोमवार की तरह मंगलवार को भी कई इलाकों में एक्यूआई (AQI) सुबह से ही 500 के पार जा पहुंचा। दिल्ली एनसीआर में सुबह की धुंधली शुरुआत हुई। स्मॉग की चादर ने इंडिया गेट को तो मानों अपने आगोश में ही ले लिया। पिछले दिनों प्रदूषण कम होने पर जो लोग इंडिया गेट घूमने आए, उन्हें सोमवार और मंगलवार निराश होना पड़ा। सैलानियों को खुली हवा में सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन का सामना करना पड़ा।

और पढ़ें: जेएनयू के छात्रों का प्रदर्शन जारी, आमने सामने हुए छात्र और पुलिस

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का असर नहीं

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भी प्रदूषण कम होता नहीं दिख रहा है। बीते दिनों प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकारों को कड़ी फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि राज्य सरकारों को चुनाव में ज्यादा दिलचस्पी है, लेकिन यहां पर लोग मर रहे हैं।

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JNU protest: जेएनयू के छात्रों का प्रदर्शन जारी, आमने सामने हुए छात्र और पुलिस

JNU protest: जानिएक्यों कर रहे है जेएनयू के छात्र ये प्रदर्शन


JNU protest: दिल्ली के जहरवाला नेहरू विश्वविद्यालय में सोमवार को जहां ऑडिटोरियम के अंदर चल रहे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु का सम्बोधन चल रहा था, उसी ऑडिटोरियम के बहार छात्र-छात्राओं का जोरदार प्रदर्शन भी जारी था। प्रदर्शन के जोरदार होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई बार छात्रों और पुलिस के बीच नोकझोंक देखने को मिली। फिलहाल प्रदर्शन जारी है और छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। पिछले 15 दिनों से जेएनयू कैंपस में चल रहे आंदोलन से फीस वृद्धि के साथ अन्य मांगों को लेकर छात्र-छात्राएं प्रदर्शन कर रहे हैं। फीस में इजाफे के बाद छात्रों का कहना है कि 40 फीसद गरीब छात्र कैसे पढ़ाई करेंगे।

क्या है छात्रों की मांग:

गौरतलब है की दीक्षांत समारोह के बीच कैंपस में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अपनी कई मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं का कहना है कि बिना सस्ती शिक्षा के जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह उन्हें मंजूर नहीं है। साथ ही उनका यह भी कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं प्रदर्शन जारी रहेगा।

और पढ़ें: World Education Day: 70 सालों में भारत में क्या है शिक्षा का स्तर

आपको बता दे कि सोमवार को हो रहे दीक्षांत समारोह में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के साथ उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु भी शामिल हुए हैं। अफगार सूत्रों की बात माने तो, जेएनयू के तीसरे दीक्षांत समारोह स्थल के बाहर विश्वविद्यालय के छात्रों की तरफ से छात्रावास की फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। पुलिस ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के ऑडिटोरियम से पहले जहां समरोह हो रहा है, वहां पर बेरिकेडिंग लगा कर छात्रों को रोक रखा है।

छात्रों का क्या है कहना:

छात्रों ने मीडिया को बोलते हुआ कहा की, ‘पिछले 15 दिनों से हम फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। जेएनयू में 40 फीसद छात्र गरीब परिवारों से आते हैं। ऐसे में कैसे हम शिक्षा ग्रहण कर पा रहे हैं’।

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