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Milkha Singh Birthday: भारत के फ्लाइंग सिख मना रहे है आज अपना 90th जन्मदिन

Milkha Singh Birthday: क्यों बुलाते थे मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख?


भारतीय दिग्गज दवक मिल्खा सिंह का आज 90वा जन्मदिन है। एशियाई गेम्स में 4 मैडल और कमनवैल्थ में 1 मैडल जीतने वाले मिल्खा सिंह के रफ़्तार की तो पूरी दुनिया दीवानी है। मिल्खा सिंह को ‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश में भी जाना जाता है और इन्हे पाकिस्तान जैसे देश से भी प्यार मिलता रहा है।

किसने दिया ‘फ्लाइंग सिख’ का टाइटल?

3 बार ओलिंपिक चैंपियन मिल्खा सिंह पार्टीशन से पहले वाले भारत के गोविंदपुरा में रहते थे लेकिन वो आज़ादी के बाद भारत आ गए । मिल्खा सिंह की प्रतिभा और रफ़्तार का इतना जलवा था कि  पाकिस्तानी प्रधानमंत्री फील्ड मार्शल अयूब खान ने ‘द फ्लाइंग सिख’ का नाम दिया था। मिल्खा सिंह पर बनी  फिल्म में भी इस घटना को दिखाया गया है। जब पाकिस्तान के स्टेडियम में मिल्खा का  नाम गूंजने लगा था क्यूंकि उन्होंने लाहौर के धावक अब्दुल खालिक को हराया था और फिर सारा स्टेडियम  उनकी जीत से झूम उठा था। दौड़ के बाद मिल्खा सिंह को पदक पहनाते हुए अयूब खान ने कंधा थपथपाकर कहा, ‘आज मिल्खा दौड़ नहीं उड़ रहे थे इसलिए हम उन्हें फ्लाइंग सिख के खिताब का नवाज़ा हैं।’

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काश मिल्खा ने पीछे मुड़  कर नहीं देखा होता:

जब मिल्खा सिंह की बात होती है तो रोम ओलंपिक्स का नाम अपने आप आजाता है। मिल्खा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी आदत थी कि वो हर दौड़ में एक दफा पीछे मुड़कर देखते थे। रोम ओलिंपिक में दौड़  ख़त्म होने के बहुत नजदीक थी और उन्होंने जबरदस्त ढंग से शुरुआत भी की थी । हालांकि, उन्होंने एक दफा पीछे मुड़कर देखा और शायद वो वही चूक गए थे।

मिल्खा सिंह की बायोपिक:

मिल्खा के जीवन पर आधारित एक बॉलिवुड फिल्म भी बन चुकी है। साल 2013 में ‘भाग मिल्खा भाग’ नाम से बनी इस फिल्म में मिल्खा का रोल फरहान अख्तर ने निभाया था। इस फिल्म ने 100 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया था।

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LK ADVANI BIRTHDAY: बीजेपी को शुन्य से शिखर तक पहुंचने वाले लाल कृष्ण अडवाणी बना रह है अपना 92 वां जन्मदिन

आखिर क्यों बुलाते थे अडवाणी को आयरन मेन


LK Adwani birthday : देश के पूर्व ग़ृह मंत्री और भाजपा को शुन्य से शिखर पर पहुंचने वाले एल.के अडवाणी मना रहे है आज अपना 92वां जन्मदिन। अडवाणी जी ने अपने जीवन की शुरुआत सवयंसेवक कार्यकर्ता के रूप में की थी और इतना ही नहीं अडवाणी ही रामजन्म भूमि के आंदोलन का चेहरा भी बने थे।

आयरन मेन के नाम से भी जाने जाते हैं अडवाणी:

लाल कृष्ण अडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था। उनके पिता का नाम केके अडवाणी था और बंटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था। शुरआती शिक्षा अडवाणी की पाकिस्तान में ही हुई थी, लेकिन भारत आने के बाद उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की शिक्षा हासिल की। इन सबके आलावा 1944 में अडवाणी जी ने कराची मॉडल हाई स्कूल में टीचर के तौर पर भी काम किया है। 1965 में अडवाणी जी ने कमला देवी से शादी की।

अडवाणी बीजेपी के तीन बार अध्यक्ष, चार बार राज्य सभा सदस्य और पांच बार लोक सभा सदस्य रह चुके हैं। अडवाणी को उनके कड़े फैसले और आक्रामक अंदाज़ की वहज से आयरन मेन भी कहा जाता है।

यथ यात्रा से बदली देश की राजनीति:

1989 में अयोधया में राम मंदिर के आंदोलन और बाबरी मस्जिद के खिलाफ कार सेवको को इक्कठा किया था और गुजरात के सोमनाथ मंदिर से ये रथ यात्रा शुरू हुई थी जिसने अडवाणी की लोकप्रियता को बड़ा दिया और वो हिंदुत्व के ‘न्यू पोस्टर बॉय’ के रूप में उभरे। अडवाणी की इस रथ यात्रा के ठीक 3 साल बाद ही, यानि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था।

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इस रथ यात्रा ने राजनीति की दिशा ही बदल दी थी, क्यूंकि इस यात्रा के ठीक दो साल बाद यानि की 1991 में बीजेपी एक बार फिर से आम चुनाव में दूसरी बड़ी पार्टी बन कर सामने आई और महज़ 5 साल बाद ही सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सत्ता में आई।

अटल बिहारी वाजपेयी के समय अडवाणी दो बार ग़ृह मंत्री बने और उप-प्रधानमंत्री का पद भी संभाला। इससे पहले 1997 में मोरारजी देसाई की सरकार गज्ज नेता मनहोर और अटल भयहारी वाजपेयी के साथ मागदर्शन मंडल में शामिल हो गये। इन सबके आलावा अडवाणी जी ने ‘माई कंट्री, माई लाइफ’ नाम से आत्मकथा भी लिखी है।

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