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COVID 19 outbreak के दौरान क्यो ज़रूरी हैं Emotional Health को चेक मे रखना ?

कैसे रखे अपनी emotional health को चेक मे ?


कोरोना का कहर तो पूरा विशव देख रहा हैं. जहां देखो वही कोरोना की बात. लोगो से लेकर सोशल मीडिया तक. ऐसे मे लोगो मे डर इतना ज़्यादा हैं कि ज़रा सी खांसी  को भी लोग कोरोना समझ रहे हैं. भारत मे  ये खतरनाक virus अभी दूसरे चरम पर हैं और अब भी देश के पास 30 दिन हैं इसे महामारी बनने से रोकने के लिए. ताजा आकडो की बात करे तो अब तक 153 मामले सामने आये हैं.
लोगो मे डर हैं ऐसे मे ज़रूरी हैं कि हम अपनी emotional health का भी ख्याल रखे. यहां हैं पांच तरीके जिस से आप रख सकते हैं अपना मुड लाइट:
1. अपने खास लोगों से बात करे:  फ़ोन करे और बात करे. पुरानी यादे ताजा करे और अच्छी बाते करे. जितना हो सके कोरोना की बात न ही करे.
2. अच्छा  खाना बनायें और फैमिली के साथ करे enjoy:  घर का खाना भी अच्छा लगता हैं अगर सब साथ हो. अभी मौका भी हैं सब घर पर हैं तो अच्छा खाना बनायें  और खाये. साथ मे फिल्म देखे और games खेले.

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3. सोशल मीडिया को कहे न: ज़्यादा फेक खबरे देखने से negativity ही होती हैं ऐसे मे थोड़ा ब्रेक ले और सोशल मीडिया से दूरी बना ले.
4. Gardening करे: plants का रखे ख्याल ये आपको अच्छा फील  कारवाने मे मदद करेगा.
5. Meditation करे: थोड़ा ध्यान लगाये. ये आपके दिमाग को शांत रखेगा और आपको positve फील करने मे करेगा मदद.
आखिर मे एक चीज याद रखे “बुरे दिन के बाद अच्छे दिन आते हैं” ये ग्लोबल आपदा हैं इस भी डरना नही हैं बल्की लड़ना हैं.
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Dhanteras 2019 – जाने अपनी राशि के हिसाब से क्या खरीदे इस धनतेरस

इस धनतेरस अपने जीवन साथी के लिए क्या खरीदना रहेगा शुभ


धनतेरस के दिन घर में सुख और समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करते है। अगर हम शास्त्रों के अनुसार देखे तो इस दिन धनवंतरी का जन्म हुआ था और यही वजह है की इस दिन को धनतेरस बोलते है। धनतेरस की शाम परिवार की मंगलकामना के लिए यम नाम का दीपक जलाया जाता है। मान्यता है की समुद्र मंथन से समय कलश के साथ माता लक्ष्मी का जन्म हुआ उसी के प्रतीक के रूप में सौभाग्य वृद्धि के लिए बर्तन खरीदने की परम्परा शुरू हुई थी। इसलिए आज हम आपको बताएँगे की आपकी राशि के लिए धनतेरस पर क्या खरीदना सबसे शुभ रहेगा।

मेष: मेष राशि के लोग पीतल के बर्तन खरीद सकते है और अगर पटनेर को गिफ्ट करना है तो आप चाँदी या सफ़ेद धातु के हार ले सकते है।

वृष: वृष राशि के लोग चाँदी के कलश खरीदना शुभ रहेगा और जीवनसाथ के लिए आप सोने की चूड़ी या अंगूठी भी ले सकते है।

मिथुन: इस राशि के लोग धनतेरस पर सफ़ेद धातु के श्री यंत्र या गणेश खरीद सकते है कांसे का बर्तन खरीदना भी सही रहेगा और जीवनसाथी के आप पीतल का कोई भी धातु खरीद सकते है।

कर्क: जीवनसाथ के लिए कर्क राशि के  लोग  मोती और हीरे की अंगूठी खरीद सकते है जो की शुभ रहेगा। इस राशि वालो के लिए पारद का शिवलिंग खरीदना भी शुभ होगा।

सिंह: इस राशि के लोग लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति सोने या पीले धातु के रूप में खरीदें। जीवनसाथी के लिए सोने या पीले पुखराज का लॉकेट लें।

कन्या: कन्या  राशि के लोग घर के लिए चाँदी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीद सकते है या फिर पारद या सोने के श्रीयंत्र  भी खरीद सकते हैं। जीवनसाथी के लिए चांदी का आभूषण ले सकते हैं।

तुला: घर के मंदिर के लिए चाँदी के श्रीयंत्र और दक्षिणवर्ती शंख लेसकते है और वही जीवनसाथी के लिए मुंगे की माला और अथवा कंगन खरीद सकते है।

वृश्चिक: तांबे के कलश, पीला कोई भी धातु खरीदना शुभ रहेगा। जीवनसाथ के लिए मोतियों की माला देना शुभ रहेगा।

धनु: इस राशि वाले लोगो के लिए पीला धातु खरीदना शुभ रहेगा और वही मुंगे का सामान खरीदना भी लाभदायक होगा।

मकर: जीवनसाथी को तो आप हीरे या चाँदी का कोई भी सामन देना शुभ रहेगा। बेडरूम के लिए सफेद धातु में मेज या कुछ भी खरीद सकते हैं।

कुंभ: इस राशि के लोग घर के मंदिर के लिए आप सफ़ेद धातु या चांदी का दीप दान लें। जीवनसाथी के लिए सोना माणिक्य या पुखराज की अंगूठी भी खरीद सकते हैं।

मीन: इस राशि के लोग अपने लिए पीला पुखराज ले सकते है या फिर आप घर के लिए चाँदी या सफ़ेद पिरामिड या गणेश या सरस्वती की मूर्ति लेना शुभ रहेगा। जीवनसाथी के लिए पन्ने या हीरे की अंगूठी लें।

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धार्मिक

क्यों करती है माँ लक्ष्मी उल्लू की सवारी?

उल्लू के अल्वा और कौन है माँ लक्ष्मी की सवारी


लक्ष्मी माता का वाहन है उल्लू जो पूरी रात जगता और दिन भर सौता है। भारत के कुछ भागो में उल्लू को शुभ और अशुभ दोनों तरह से देखा जाता है। ऐसा बोला जाता है की उल्लू को पहले ही महसूस हो जाता जब कोई संकट आने वाली होती है, इसलिए उल्लू को अपशगुन भी माना जाता है लेकिन कुछ लोगों ऐसा भी जो मानते है उल्लू के कुछ संकेत अच्छे और शुभ होते है। कहते है अगर कोई व्यक्ति बीमार है और उल्लू उससे छू ले तो व्यक्ति एकदम ठीक हो जाता है। उल्लू की सुबह आवाज़ सुना भी शुभ होता है। मगर क्या आप लोग जानते की लक्ष्मी माता का वाहन उल्लू क्यों है? तो चलिए आपको इसके पीछे की वहज बताते है।

उल्लू-माँ लक्ष्मी की सवारी:

लक्ष्मी माता का वहन उल्लू  ताकत और दुर की नज़र का प्रतीक होता है। दरसअल उल्लू बुरी सोच को हटाकर अच्छी सोच रखने में मदद करता है। वह भीड़ से हटकर विचार करने की शक्ति की तरफ इशारा करता है। इसका मतलब हुआ की उल्लू तब देखने की क्षमता रखता है जब सामान्य जन को नजर नहीं आता। दरअसल उल्लू निडर और शक्ति का प्रतीक माना गया है इसलिए लक्ष्मी का वाहन उल्लू है।

माँ लक्ष्मी के उल्लू के आलावा और  भी है वाहन :

उल्लू के आलावा गज भी माता की सवारी है। गज बुद्धिमत्ता व शक्ति का प्रतीक है। गज एक शक्तिशाली और विनम्र जीव होता है और इसलिए वास्तविक रूप में भी ताकतवर व्यक्ति सदैव विनम्र होता है और उसे अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की ज़रूरत नहीं होती है।

उल्लू और गज के आलावा गरुड़ भी माता की सवारी है। दरअसल गरुड़ लक्ष्मी के पति विष्णु का वाहन होता है और उसी के कारण लक्ष्मी का भी वाहन बन गया। गरुड़ पक्षी अपनी दूरदृष्टि, लक्ष्य, अनुशासन, दृढ़ता और कुशलत का प्रतीक माना जाता है।

और पढ़ें: धनतेरस के दिन क्यों खरीदे जाते है नये बर्तन?

क्यों माना जाता है उल्लू को शुभ:

उल्लू को शुभ और अशुभ दोनों का प्रतिक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है की किसी गर्भाती महिला को उल्लू छुले तो पुत्री होने के संकेत होते है और यहाँ तक की पूर्व दिशा से आ रहे उल्लू की आवाज़ सुने से धन का लाभ होता ही है और दुश्मों का भी नाश होता है। यदि आप घूमने जा रहे हो और पीछे से अपने उल्लू की आवाज़ सुनी तो आपकी यात्रा काफी अच्छी जाएगी। इन सबके अल्वा अगर आपको अपने घर के आँगन में मारा हुआ उल्लू मिलता है तो इसका मतलब होता है की परिवार में कोई कलेश होने वाला है।

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धनतेरस के दिन क्यों खरीदे जाते है नये बर्तन

बर्तन खरीदने के आलावा और क्या मान्यता है धनतेरस की


दिवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज तक रहती है।धनतेरस के दिन लक्ष्मी माता, कुबेर और भगवान धन्‍वंतरि की पूजा होती है, जिसे घर में हमेशा सुख और समृद्धि बनी रहती है। ऐसी माना जाता है इस दिन बर्तन, सोना, चांदी और झाड़ू खरीदना शूभ होता है। जिस तरह माता लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थीं उसी तरह भगवान धन्‍वंतरि भी उत्पन्न हुऐ थे। क्या आप जानते है की धनतेरस पर बर्तन खरीदने का रिवाज़ क्यों है?

बर्तन खरीदने की मान्यता:

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। दरअसल इस दिन भगवान धन्‍वंतरि महालक्ष्मी की तरह सागर मंथन से उत्पन्न हुए थे। ऐसी मान्यता है की जब भगवन धन्‍वंतरि का जन्म हुआ था तो वो एक पात्र में अमृत लिए हुए थे। भगवान धन्‍वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस अवसर पर नये बर्तन खरीदे जाते है

वैसे इसकी एक और मान्यता भी है, धनतेरस के दिन धातु खरीदना भी शुभ माना जाता है लेकिन सिर्फ शुद्ध धातु जैसे की पीतल, तांबा,  चांदी, सोना। ऐसा कहा जाता है की इस दिन ख़रीदे हुए रत्नो में नौ गुने की वृद्धि हो जाती है।

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घर के बहार दिया रखे:

धनतेरस के दिन सिर्फ बर्तन या धातु ही नहीं ख़रीदा जाता बल्कि दिए भी जलाये जाते है, मान्यता है कि अकाल मृत्यु से बचने के लिए घर के मैन गेट पर दिया रखने का भी रिवाज़ है। रात में इस दिन लंभी उर्म के लिए भगवान धन्वंतरि तथा समृद्धि के लिए कुबेर के साथ लक्ष्मी गणेश का पूजन करके लक्ष्मी माता को गुड़ और धान का लावा ज़रूर चढ़ाना चाहिए।

काले रंग के बर्तन ना ख़रीदे:

धनतेरस के दिन काले रंग की चीजों को ना ख़रीदे क्योकी धनतेरस एक बहुत ही शुभ दिन है जबकि काला रंग हमेशा से दुर्भाग्य का प्रतीक माना जाता है इसलिए धनतेरस के दिन काले रंग की चीजें को नहीं खरीदा जाता और सिर्फ यही नहीं बल्कि इस दिन आप चाकू, कैंची और दूसरी दारीदार चीज़ भी नहीं खरीदी जाती

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शरद पूर्णिमा के दिन क्यों खाते है खीर, क्या है इसका महत्व ?

जाने क्या है शरद पूर्णिमा के अन्य नाम और इसका सन्देश ?


शरद पूर्णिमा को हिन्दू धर्म में काफी खास माना जाता है। इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। ऐसी मान्यता है की शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणें औषधीय गुणों से भरी हुई होती है। दरअसल चंद्रमा की किरणें अमृत की वर्षा होती है। देश के अलग- अलग हिस्सों में शरद पूर्णिमा को अलग- अलग नाम से जाना जाता है। इसी दिन देवी- देवताओ का जन्म भी हुआ है तो इसलिऐ शरद पूर्णिमा का नाम उनसे भी जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं में ऐसी मान्यता है कि  माता लक्ष्मी आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि यानी शरद पूर्णिमा को समुद्र मंथन से निकली थीं। तो चलिए आपको बताते है शरद पूर्णिमा के बारे में कुछ रोचक तथ्यों के बारे में…

1.कोजागरी पूर्णिमा:

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा या कोजागरी पूनम भी कहते हैं। इसे बंगाल में कोजागरी लक्ष्मी पूजा भी कहते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

2. कौमुदी व्रत:

आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को कौमुदी व्रत करते है और  इसे कोजागरी व्रत भी कहते है। दरअसल, माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिऐ आती है और उस दौरान पूछती हैं कि कौन जाग रहा है? जो जागता है, वो उसके घर में वास करती हैं।

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3. कुमार पूर्णिमा:

भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े बेटे कार्तिकेय का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। इस वजह से शरद पूर्णिमा को कार्तिकेय पूर्णिमा भी कहते है। ओड़िशा में अविवाहित लड़कियां  इस दिन सूर्य और चंद्रमा की पूजा करती हैं ताकि उनको अच्छे जीवनसाथी मिले।

4. रास पूर्णिमा:

ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा के दिन ही गोपियों संग महारास रचाई थी, इस कारण से शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहते है।

शरद पूर्णिमा को खीर का महत्व:

ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत गीरता है तभी इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखने का रीवाज़ है। जो शरद पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रमा के उज्जवल किरणों से आलोकित हुई खीर का सेवन करते हैं, मान्यता है कि उन्हें उत्तम स्वास्थ्य के साथ मानसिक शांति का वरदान भी मिलता है।

शरद पूर्णिमा का संदेश:

चंद्रमा हमारे मन का प्रतीक है। हमारा मन भी चंद्रमा के समान घटता-बढ़ता यानी सकारात्मक और नकारात्मक विचारों से भरा रहता है।जिस तरह अमावस्या के अंधेरे से चंद्रमा निरंतर चलता हुआ पूर्णिमा के पूर्ण प्रकाश की यात्रा पूरा करता है, ठीक  उसी तरह मानव के मन से भी नकारात्मक विचारों के अंधेरे से आगे बढ़ता हुआ सकारात्मकता के प्रकाश को पाता है। यही मानव जीवन का लक्ष्य है और यही शरद पूर्णिमा का संदेश भी है।

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निराशा में आशा की सुनहरी किरणें छुपी होती है

हर निराशा में आशा की किरण ज़रूर होती है


यह बात हमने कई बार सुनी है की हर निराशा में एक आशा की किरण छिपी होती है परंतु आपको पता होना चाहिए की यह केवल बात नही है यह सर्वथा सत्य है। और भी आसान शब्दों में कहें तो इसका अर्थ यह है की आपका हर परिस्थिति में सकारात्मक होना मुमकिन है आपको बस परिस्थिति के उस पहलू को ढूँढने की ज़रूरत है।

हम कयी बार ऐसी परिस्थितियों में फँस जाते हैं की ना तो हम उसमें ख़ुश रह पाते और ना ही उससे बाहर आ पाते हैं। हमें वह परिस्थिति फिर कठिन और ख़राब लगने लगती है। हमारी बातें भी तब तनाव से युक्त प्रतीत होती हैं। हमारी बातों से नाकरात्मक भाव व्यक्त होते हैं। हम समझ नही पाते हमें क्या करना चाहिए और हमारे मूड की वझह से कभी कभी तो हम अपने प्रियजनो को भी खो देते हैं।

यह कहावत किसी एक इंसान के लिए नही है बल्कि यह सभी लोगों के लिए उपयुक्त है क्योंकि इस संसार मेल कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जो दुखों के समय में भी ख़ुशी को ढूँढना नही छोड़ते। कही ना कही कभी ना कभी हम सभी निराशा के पलों में भूल जाते हैं की हमारे पास ख़ुश होने के कितने कारण हो सकते हैं। मशहूर नॉवलऔर मूवी हैरी पॉटर में एक डाइयलोग है जो एकदम उचित है- “अंधेरों के समय में भी ख़ुशियाँ हांसिल की जा सकती हैं अगर थाम के रखें रोशनी का दामन”। कई बार फ़िल्मे भी हमें कोई ना कोई अच्छा संदेश दे जाती हैं यदि ध्यान से उन्हें जीवन में उतार जाए तो।

दोस्तों इस दुनिया में किसी की ज़िंदगी बिलकुल स्मूध नही होती। उतार चढ़ाव हर किसी के जीवन का एक अभिन्न अंग होते हैं जिन्हें चाहकर भी अलग नही किया जा सकता। आप चाहे अपनी ज़िन्दगी को कितने भी अच्छे से प्लान क्यों ना कर लें परंतु समय के चक्र साथ प्लानिंग में भी बदलाव आते हैं जिससे कई बार बहुत हताश होना पड़ता है। “ज़िंदगी : उतार चढ़ाव का खेल” यह कहना अनुचित नही होगा। जीवन अपने साथ दुख और बंधन लाता है तो यदि हम ऐसी परिस्थितियों में ख़ुद को क़ाबिल ना समझने की भूल के बैठे तो यह उचित नही होगा।

हर किसी व्यक्ति का दुःख वाला समय ज़रूर होता है तो हर व्यक्ति को अपने दिमाग़ से यह बात नही निकालनी चाहिए की रात के बाद ही सुबह आती है जो रात के अंधेरे को हटाकर नया उजाले वाला दिन लेकर आती है। जब भी आपको लगे की यह आपका कठिन समय है तो ऐसे में ख़ुद को यह समझाए की यह थोड़े से समय की बात है कुछ समय बाद यह कठिन समय कही लुप्त हो जाएगा। जब आप ऐसा सोचेंगे तो वह बुरा समय ख़ुद ही ख़त्म हो जाएगा या फिर ये कहे की आपके अंदर उसका सामना करने की शक्ति आ जाएगी।

समय सभी घावों को भर देता है और यदि बात यादों की है तो आपको यह बात याद रखनी चाहिए की समय के साथ साथ लोग भी बदलते हैं तो इसे जीवन का एक पहलू समझ के अपनाने की कोशिश करें। आपके रोते रहने या दुखी रहने से धरती घूमना नही बंद करेगी। तो फिर ख़ुद को दुखी लेने का क्या फ़ायदा जब आपके दुखी होने से आपको लाभ नही। तो कभी भी उदासी में आशा की किरण को ना भूल जाएँ क्योंकि यदि आप ऐसा लेते हैं तो यह ख़ुद के साथ नाइंसाफ़ी होगी।

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जानिए कैसे कैसे करे क्रिसमस की सजावट

क्रिसमस की सजावट


2016 खत्म होने में कुछ ही समय बचा है। लोग बहुत ही ज़्यादा उत्साहित है क्रिसमस और नए साल की ख़ुशी और जश्न मनाने के लिए। हर बच्चे को क्रिसमस की छुट्टियों का इंतज़ार होता है। विदेशों की ही तरह भारत के लोगो में भी क्रिसमस और नए साल का उत्साह और ख़ुशी उतनी होती है। भारत में भी लोग पूरी साज सजावट करते है। और यही नहीं वो पुरी ख़ुशी और उत्साह से साथ इन दो दिनों को मनाते है। क्रिसमस की सजावट ऐसी की जाती है कि वो नए साल तक रहती है। वही रौनक और ख़ुशी का माहौल दो-तीन हफ़्तों तक बना रहता हैं।

तो जानिए कैसे कर सकते है आप क्रिसमस की सजावट

  • रिबन से करे सजावट।

रिबन का प्रयोग करना सबसे आसान है। आप इससे अपने कमरे से लेकर दरवाज़े तब सब जगह इस्तेमाल कर सकते है। आप इससे माल्यार्पण (व्रेथ) बना सकते है। गहरे और हलके हरे को संयोजित करके आप उसका प्रयोग कर सकते है।

रिबन व्रेथ
  • खिड़की को सजाये

घर की खिड़कियां अगर सजी हुई हो तो घर और भी ज़्यादा सुंदर और आकर्षक लगता है। आप अपने घर की खिड़की पर लाइट लगा सकते है। इसके अलावा आप अपनी खिड़की पर रंग बिरंगे नेट या रिबन से भी सजावट कर सकते है।

  • खुद का क्रिसमस ट्री बनाए।

सच मुच का पेड़ लगाने से अच्छा आप घार पर रखे हुए सामान से खुद का एक पेड़ बना सकते है। इसमें आपके पैसे भी बचेंगे और जगह भी कम घेरेगा। आप इसमें अपने पसंद के रंगों का प्रयोग कर सकते है।

क्रिसमस ट्री
यहाँ पढ़ें : शादी में कैसे करे फूलो से सजावट
  • रंगों से खेले

क्रिसमस और नया साल दोनों में ही बहुत रौनक होती है। सब कुछ बहुत रंगीन होता है। कोशिश करे की आप भी सब अलग अलग रंगों का सम्मिश्रण करे। आप मेटालिक कलर्स से लेकर आम रंगों को मिला सकते है। गोल्डन और सिल्वर का प्रयोग कर सकते है।

रंगों से खेले
  • खुद सजावट की चीज़ें बनाए

अगर आप पैसे बचाने की सोच रहे है और आप कुछ अलग बनाना चाहते है तो आप घर पर रखी पुरानी चीज़ों का प्रयोग करके नहीं चीज़े बना सकते है। कागज़ से लेकर धागों और चुन्नी तक सब आपके काम आएगा।

क्रिसमस की उत्सुकता बहुत ही ज़्यादा है। ख़ुशी की बात तो ये है कि भारत में भी लोग इसे अपने त्यौहार की तरह मनाते है। सजावट के साथ कुछ नया कोशिश करे। जुराबो से लेकर पेड़ तक कुछ परिक्षण करे। और अगर कुछ नहीं तो घर पर लाइट्स लगाए और वही आप काम कर देगा।

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जानिए क्यों एकांत में रहना होता है अच्छा

एकांत में रहना: सही या गलत


इस व्यस्त सी जीवनशैली में हम अक्सर खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते। और हर व्यक्ति के लिए एकांत में रहना और खुद को समय देना बहुत ज़रूरी है। एक व्यक्ति चाहे जितना भी खुला और बहिर्मुखी क्यों न हो, उसे भी ऐसे समय की ज़रूरत पड़ती है जहाँ वो कुछ समय खुद के लिए बिता सके। यहाँ अकेल या एकांत में रहने से हमारा मतलब ये नहीं है कि आप खुद को सबसे के अलग करके एकदम अकेले रहे। पर हमारा मतलब ये की आप अपने लिए समय निकले। इस भागदौड़ और इस व्यस्त समय में जानिए की क्यों जरूरी है अकेले समय निकालना।

आप ज़्यादा खुश रहने लगेंगे
यहाँ पढ़ें : कैसे बढ़ायें शब्दों का ज्ञान
  1. एकांत में रह कर आप चीज़ो को बेहतर ढंग से समझते है और इसी वजह से आप बेहतर फैसले ले पाते है।
  2. आपकी रचनात्मकता बढ़ती है। आपकी काम करने की क्षमता बढ़ती है और आप ज़्यादा रचनात्मक ढंग से अपना काम करते है।
  3. आप एकांत में रह कर हर तरह की तकलीफ और तनाव से मुक्त हो सकते है। एकांत में परिस्तिथियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
  4. आप खुद को बेहतर ढंग से समझ पाते है। और आपको खुद में ही एक दोस्त मिल जाता है जो आपको समझता है।
  5. अकेले समय बिताने से आपकी एकाग्रता बढ़ती है और आप ज़िंदगी के नए अवसरों के बारे में सोच विचार कर सकते है।
  6. एकांत में समय बिताने से आप ज्यादा शाँत होते है और आप खुद की ज़िन्दगी की समीक्षा कर सकते है।

अकेले समय बिताना शायद थोड़ा बोरिंग लगे, पर इसके फ़ायदे बहुत होते है। आपको पूरे दिन में कम से कम एक घंटा अकेले एकांत में बिताना है। और ये एक घंटा सिर्फ आपका होगा। इसमें ना तो आप अपने फ़ोन का प्रयोग करेंगे और ना ही किसी और वस्तु का। इससे आपका सारा ध्यान आप पर होगा। कोशिश करे की आप ये एक घंटा सोने से पहले ले, इससे आपको नींद भी बेहतर आएगी और अगले दिन के लिए आप ज़्यादा सकारात्मक भी होंगे।

जब ये प्रक्रिया आपके नियमित कार्यक्रम का हिस्सा बन जाएगा तब आप संझेंगे की कैसे ये समय आपको बदल पाया है। खुद को समय देने से आपका ही फायदा होता है। आपको खुद के बारे में बेहतर महसूस होने लगेगा। इसलिए खुद के लिए समय निकाले और लोगो से हटकर, एकांत में रहना सीखे।

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