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Guru Nanak Jayanti: क्यों कार्तिक मास में ही मनाई जाती है गुरु नानक जयंती

Guru Nanak Jayanti: गुरु नानक देव और गुरु नानक जयंती से जुडी कुछ ख़ास बात


Guru Nanak Jayanti: गुरु नानक देव सिख धर्म के दसवें गुरु थे और इन्होने ही सिख धर्म की स्थापना भी की थी। समाज में व्याप्त बुराइयों को हटाने के लिए गुरु नानक देव ने बिना अपनी पारिवारिक जीवन और सुख की चिंता किये बिना बड़ी दूर-दूर तक यात्रायें की थी और लोगो के मन में बस चुकी कुरीतियों को दूर करने की दिशा दिखाई थी। इस साल 12 नवंबर को गुरु नानक देव जयंती है। गुरु नानक जयंती का जन्म प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है इसका कारण है की गुरु देव ने समाज से कुरीतियों को दूर करने के लिए सारे सुख त्याग दिए थे और मानव जीवन को नई दिशा दी थी।

नानक जी का जन्म:

नानक जी का जन्म रावी नदी के किनारे सिस्त तलवंडी में हुआ था। खास बात यह है की इनके जन्म को लेकर काफी अलग-अलग तारीख़ें बताई गई हैं, मगर जो असल जन्म तारीख़ है वो कार्तिक मास की ही मानी जाती है, जो दिवाली के 15 दिन बाद पड़ती है। इनके पिता कल्याणचन्द्र मेहता थे। तलवंडी जगह का नाम आगे चल कर ननकाना पड़ गया। बचपन से ही नानक अच्छी बुद्धि के थे मगर उनका किसी भी प्रकार से पढाई में मन नहीं लगता था और आठ साल की उम्र में ही उन्होंने पढाई छोड़ दी थी।

क्यों मानते है गुरु नानक जयंती:

गुरु नानक जयंती सिखों का बहुत महत्वपूर्ण पर्व होता है, क्योंकि इस दिन गुरु नानक देव का जन्मदिन होता है। सिखों द्वारा सभी गुरुओं के जन्मदिन मनाए जाते है और इसे ‘गुरुपर्व’ कहा जाता है। इस प्रकार गुरु नानक जयंती को गुरु नानक गुरुपुरब कहा जाता है। इसे गुरु नानक का प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है।

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गुरुपुरब के 3 बड़े स्तर:

उत्तर भारत में गुरु नानक जयंती तीन दिनों तक बड़े स्तर पर मनाई जाती है।

पहला दिन- अखंड पाठ: इस दिन गुरुद्वारों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और न केवल गुरुद्वारों में बल्कि घरों में भी 48 घंटों तक पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ बिना रुके किया जाता है। यह ‘पाठ’ जन्मदिन की सुबह ही खत्म होता है।

दूसरे दिन- प्रभात फेरी:गुरु की स्तुति करते हुए एक धार्मिक जुलूस, ‘शब्द’ के रूप में, सुबह जल्दी निकाला जाता है, और यह आस पास की गलियों से गुजरता हुआ पास के गुरुद्वारा में समापन होता है।

तीसरा दिन- गुरु नानक जयंती: गुरू नानक जयंती का वास्तविक दिन सुबह शुरू होता है, जिसमें कविताओं, भजन और उद्धरण के गायन होते हैं, जो गुरु नानक की जीवनी को कायम करते है। इसके बाद ‘ग्रंथ साहिब’ से कीर्तनों के साथ ‘कथा’ की जाती है। इन सबके बाद ‘कर्हा प्रसाद’ सभी को दिया जाता है।

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जानिए मुस्लिम समुदाय क्यों मानते है ईद-ए-मिलाद-नबी’

ईद-ए-मिलाद-नबी’ क्या होता है ख़ास


मुस्लिम समुदाय ‘ईद-ए-मिलाद-नबी’ त्योहार को पैगम्बर हजरत मोहम्मद के जन्म की खुशी में मनाते हैं। इस्लाम धर्म में पैगम्बर हजरत मोहम्मद आखिरी नबी हैं। जिनको खुद अल्लाह ने फरिश्ते के जरिए कुरान का संदेश देने के लिए भेजा था। मुस्लिम समुदाय के लिए यह एक बड़ा त्योहार माना जाता है,इस दिन की समाज में कई मान्यताएं हैं। इस दिन मुस्लिम धर्म के लोग मस्जिदों और घरों में इबादत करते हैं। जुलूस निकालकर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के संदेश को आम लोगों के बीच पहुंचाते हैं। इस दिन अपने लोग घरों में कुरान जरूर पढ़ते हैं। घरों में जगमग रोशनी की की जाती है। सड़कों में जगह-जगह सजावट की हुई होती है

ईद-ए-मिलाद-नबी’ को लेकर क्या है मुसलमानो में इसकी मान्यता

दरअसल मुसलमनो की मान्यता है की पैगम्बर हजरत मोहम्मद को खुदा ने खुद कुरान का संदेश देने के लिए भेजा था और वो अपने कामो से पुरे अरब में शांति फैलाएंगे यही वजह है की अफ्रीका के नीग्रो और अरब के लोग एक थाल में खाना खाते है और एक साथ नमाज़ अदा करते है । महिलाओ के लिए पहले पैगम्बर हजरत मोहम्मद ने ही सम्पति का अधिकार दिया था। लिहाज़ा मुस्लिम समुदाय पैगम्बर हजरत मोहम्मद हमेशा परम आदर भाव रखते है।

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आज के दिन शान्ति का पैगाम देते हुए आज के दिन मुस्लिम समुदाय के हज़ारो लोगो ने जुलूस निकाला था। ईद-ए-मिलाद-नबी के अवसर पर मस्जिद के ईदगाह तक जुलूस निकाला जाता है, जिसमे हज़ारों मुस्लिम हिस्सा लेते है, बड़े-छोटे सारे लोग इस जुलूस का हिस्सा होते है। सुबह-सुबह मुस्लमान मस्जिद में जाते है, जिसके बाद वो लोग एकत्रित होते है और सारी दुकानों से हो कर गुज़रते है और वहाँ से एक ईदगाह मैदान में पहुंचते है।

जिन बाज़ारो से ये जुलूस निकलता है, उन दुकानों को बेहतर तरीके से सजाया जाता है। ईदगाह मैदान में मौलाना लोगो को संबोधित करते है। इन सबके बाद लोग एक दूसरे को गले लग कर ईद की बधाई देते है। इस दौरान प्रसाशन के तरफ से भी कड़ी सुरक्षा का इंतज़ाम किया जाता है।

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Happy Diwali 2019:दिवाली के अवसर पर अपनों को इस ख़ास अंदाज़ में करे विश

 इस दिवाली बाँटे प्यार अपनों के साथ  


आज पूरे देश में दिवाली का त्योहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जा रहा है।लोग आज अपने घरों  को सजा रहे है एक दूसरे को मिठाई  देकर आपस में प्यार बाँट रहे है। आपको बता दें की हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 27 अक्टूबर को मनाया जा रहा है । दीपावली का यह त्योहार धनतेरस से शुरू होकर नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा के बाद भाई दूज तक चलता है।

आज सभी लोग शाम को माँ लक्ष्मी की पूजा करेंगे और अपने घरों को दीपक, लाइट्स और रंगोली से सजायेंगे। ऐसे में अगर आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों तक मां लक्ष्मी का आशीष पहुंचाना चाहते हैं तो उनके साथ शेयर करें ये प्यार भरा सन्देश।

दिवाली पर इस ख़ास अंदाज़ में करे अपने दोस्तों को विश :

1. श्री राम आपके घर में सुख की बारिश करें, माता लक्ष्मी आपको धन से परिपूर्ण करें,

और दीप की रौशनी आपके घर से दुःख-कष्ट को दूर करे – दीपावली की शुभकामनाएं

2. दीपावली है दीपों का त्यौहार,

घर लाये आपके सुख, समृद्धि और प्यार – दिवाली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

3. हंसते हुए दीप तुम जलाना, जीवन में नई खुशियों लाना,

दुख दर्द अपने भूल कर,सबको गले लगाना- दीवाली की शुभकामनायें

4. अच्छे की बुरे पर विजय हो, सब जगह बस आपकी जय हो

आपके पूरे परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये

5. पल पल सुनहरे फूल खिले, कभी न हो आपका कांटो से सामना

आपकी जिंदगी  हमेशा खुशियों से भरी रहे- आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये

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6. आपको  मिले आशीर्वाद गणेश से, विद्या मिले सरस्वती से

धन मिले लक्ष्मी से, आप सभी को हैप्पी दिवाली

7. दिवाली पर बनती है रंगों की रंगोली

दीप जलाए, और साथ में खुशियाँ बाटे – हैप्पी दिवाली

8. सुख संपदा आपके जीवन में आए

लक्ष्मी जी आपके घर में समाए

भूल कर भी आपके जीवन में कभी दुःख ना आये – हैप्पी दिवाली

9. झिलमिलाते दीपों की रोशनी से प्रकशित

दिवाली आपके लिए लेकर आये सुख समृद्धि

हैप्पी दिवाली

10. पूजा की थाली, रसोई  में पकवान

आँगन में दिया , खुशियों हो तमाम – हैप्पी दिवाली

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यह है दिल्ली की बेस्ट मार्केट्स जहाँ दिवाली का सभी सामान मिलेगा सस्ता

जाने दिल्ली की बेस्ट मार्केट्स के बारे में जहाँ आप कर सकते है दिवाली  की खरीदारी


अक्टूबर के महीने के साथ त्योहारो का सीजन भी शुरू हो गया है। दश्हरा के बाद अब दिवाली का भी त्योहार आ गया है। दीपावली को दीपों का पर्व भी कहा जाता है। दीपावली पर लोग अपने घरों में साफ-सफाई का ख़ास ख्याल रखते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग अपने घर के लिए सजावट का सामान भी ख़रीदते है। अगर आपको अपने घर की सजावट के लिए खरीदना है सामान तो यह है दिल्ली-एनसीआर की कुछ बेस्ट मार्केट्स:

जाने दिल्ली की बेस्ट मार्केट्स के बारे में जहाँ आप कर सकते है दिवाली की खरीदारी

1. चाँदनी चौक

बात चाहे कपड़ो की हो या घर की सजावट की इन सभी सामान  को खरदीने के लिए चाँदनी चौक दिल्ली के बेस्ट मार्केट्स  में से एक है।  इस मार्किट में आपको छोटी से बड़ी सभी चीज़े मिल जाएगी। अगर आपको दिवाली के लिए सजावट का सामान खरीदना है तो आप यहाँ से खरीद सकते है। जहाँ आपको मिट्टी से बने सुन्दर दीये मिल सकते हैं। आपको इस साल दीपावली के खरीदारी के लिए चांदनी चौक जरूर जाना चाहिए।

2. सरोजनी मार्किट

सरोजनी मार्किट दिल्ली की सबसे बेस्ट मार्केट्स में से एक है। सरजोनि मार्किट वैसे तो कपड़ो के लिए काफी मशहूर है लेकिन आपको यहाँ सजावट का सामना भी अच्छा मिलेगा। यह मार्केट अपने सस्तें दाम पर समान बेचने के लिए भी जानी जाती है। तो आपको इस साल की दीपावली की खरीदारी यहां से करनी चाहिए।

3.  सेंट्रल मार्किट

दिल्ली की सेंट्रल मार्किट खाने -पीने को लेकर काफी मशहूर है। लोगो को लगता है की यह मार्किट  साउथ दिल्ली मे हैं तो महंगी होगी लेकिन यह मार्किट बिलकुल भी महंगी नहीं है। इस मार्केट में आपको अच्छे कपडे से लेकर घरों की सजावट का सभी चीजें आपको असानी से मिल जाएगा। इस बार की दीपावली की खरीदारी करने के लिए आपको जरूर लाजपत नगर जाना चाहिए।

और पढ़ें: इस दिवाली कैसे करे घर का मेकओवर?

4. पहाड़गंज मार्केट

पहाड़गंज मार्केट के बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं कि यहां पर दीपावली के समय बहुत ही सुंदर घरों के सजानें के लिए सामान मिलते हैं। इस बाजार में आपको चांदी के आभूषण और चमड़े के सामान सस्ते दाम में मिल जाएंगे। इस मार्केट में आपको सड़क के किनारे कुछ बेहतरीन लैंप और मिट्टी से बने दीये आपको मिल जाएंगी। इस दीपावली आपको जरूर यहां पर जाकर खरीदारी करनी चाहिए।

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Kartik puja 2019 : कार्तिक के महीने में क्यों की जाती है तुलसी की पूजा

जाने क्या है हिन्दू धर्म में कार्तिक के महीने का महत्व


Kartik puja 2019: हर साल शरद पूर्णिमा के बाद से शुरू हो जाता है कार्तिक का महीना और इस साल कार्तिक का महीना 14 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। कार्तिक के महीने को हिन्दू धर्म में सबसे पावन माना जाता है। इस महीने में लोग तुलसी की पूजा करते है और उनका विवाह भगवान विष्णु से कराते है। पारिवारिक और वैवाहिक जीवन के लिए तुलसी की पूजा सबसे उत्तम मानी जाती है और तुलसी के पौधे की  प्लांटिंग तथा पूजन के लिए सबसे अच्छा महीना कार्तिक का ही होता है।

इस माह कि एक और ख़ास बात है की इस  महीने में भगवान विष्णु योग नींद से जागते है। वही माँ लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और भक्तों को अपना आशीर्वाद बरसाती है। यह महीना  काफी पावन माना जाता है , कहते है इस महीने में दान ,व्रत और गंगा स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

हिन्दू धर्म में कार्तिक के महीने का होता है ख़ास महत्व

कार्तिक महीने का हिंदू धर्म में खास महत्व होता है। इस महीने में कई हिंदू व्रत और त्योहार आते हैं। कार्तिक महीने की शुरुआत से लेकर पूर्णिमा तक लोग कई तरह की पूजा अर्चना करते हैं। कार्तिक मास में करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली, भाईदूज, कार्तिक पूर्णिमा जैसे कई व्रत त्योहार आते हैं। आपको बता दें की कार्तिक महीना 14 अक्टूबर से शुरू होगा और 12 नवंबर 2019 तक चलेगा।

और पढ़ें: KarwaChauth 2019: दीपवीर से लेकर प्रियंका निक तक, जानिए कैसी चल रही है करवाचौथ की तैयारी?

इसके अलावा बात करे अगर हिन्दू कैलेंडर की तो यह महीना काफी पवित्र है। इसमें आप तुलसी की पूजा करते है तो आपके घर में सुख शान्ति बनी रहती है और मनवांछित फल भी मिलता है।

इस महीने  को क्यों कहा जाता है कार्तिक का महीना ?  

यह महीना इस लिए भी पवित्र माना जाता है क्योंकि इस महीने में भगवान शिव के बड़े बेटे कार्तिक ने राक्षस तारकासुर का वध किया था। तभी से इस महीने का नाम कार्तिक पड़ा इसलिए इस महीने कार्तिक और तुलसी की पूजा की जाती है।कार्तिक का महीना जैसे ही शुरू होता है उसके चौथे दिन करवाचौथ पड़ता  है। इस साल करवा चौथ 17 अक्टूबर को है जिस दिन सभी पत्नियाँ अपने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती है।

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शादी के बाद पहला करवाचौथ क्यों होता है हर लड़की के लिए खास, यहाँ जानें

जानिए क्या है करवाचौथ की कथा और कैसे मनायें पहला करवाचौथ


शादी के बाद सुहागनों को लिए हर व्रत और त्योहार खास होता है। उसी में से एक बहुत खास व्रत है करवाचौथ का व्रत। ये व्रत औरतें अपने पति की लम्बी उम्र की कामना के लिए रखती है। नवविवाहित औरतों के लिए ये व्रत काफी अहम होता है। वैसे तो काफी लड़कियाँ शादी के पहले भी व्रत रखती है लेकिन शादी के बाद पहला करवाचौथ व्रत काफी खास होता है। औरतें इस दिन सबसे खूबसूरत और खास दिखना चाहती हैं। जिनका पहला करवा चौथ होता है वे दुल्हन की तरह तैयार होती हैं। लाल रंग का जोड़ा शगुन के तौर पर माना जाता है। इसके अलावा कई और रंग हैं जो इस दिन पहने जाते हैं। जिनका पहला करवा चौथ है उन्हें कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

क्यों होता है  सुहागनों के  लिए  पहला करवाचौथ खास? 

लड़की के साथ साथ उसके ससुराल वालो के लिए भी करवाचौथ स्पेशल होता है। सुबह सरगी के साथ दिन की शुरुआत होती है। उसके बाद पूरे दिन तरह-तरह के व्यंजन बनते हैं और मिठाईयां भी बनती है। दूध और फेनी की मिठाई सब से खासतौर से बनाई जाती है। दुल्हन की तरह ही नवविवाहिता तैयार होती हैं। ससुराल वाले अपनी बहू को कुछ खास चीजें देती हैं जैसे जोड़ा और गहने। लेकिन कई लोगों में उनके माइके से जोड़े और तोहफों आने का रिवाज भी होता है।

शाम को स्त्रियां पूजा करके चंद्रमा को अर्क देकर अपने पति की पूजा करती हैं और उनके हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं।

व्रत की कथा:

वैसे तो काफी कहानियां है जो करवाचौथ व्रत के समय सुनी जाती है। जो सबसे प्रसिद्ध कहानी है वो है सावित्री और यमराज की कहानी। दरसअल, सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राणों की भीख मांगी थी औरकुछ खाए पिए  वो सारा दिन तपस्या करती थी ताकि  वो उनके पति को वापस लाये ।सावित्री से हार मान कर यमराज ने उनके पति को वापस कर दिया था, इसलिए करवाचौथ मनाते है और यही वजह है की इस दिन औरतें भूखी और प्यासी रहती है।

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क्यों पूजते है चाँद को ?

करवाचौथ में चंद्र को अर्क देने के बाद ही औरतें कुछ खा और  पी सकती है। अब ऐसे में आप सोच रहे होंगे की चांद की पूजा क्यों की जाती है ? तो लंका कांड में एक कथा है जब भगवान राम समु्द्र पार करके लंका पहुंचे तो उन्होने चांद पर पड़ने वाली छाया के बारे में बताया कि विष और चंद्रमा दोनों ही समुद्र मंथन से निकले थे जिस कारण से चंद्रमा विष को अपना भाई मानते है इस कारण से विष को अपने ह्रदय में स्थान दे रखा है। इसी कारण से करवा चौथ के दिन महिलाएं चांद की पूजा करती हैं और पति से दूर न रहने की कामना करती हैं।

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Happy Dussehra : इस दशहरा दें अपने सभी दोस्तों को यह 10 ख़ास सन्देश

इस दशहरा खत्म करे अपने अंदर की सभी बुराईयां


Dussehra wishes: आज पूरे देश में बड़े ही धूम-धाम से विजयादशमी यानी की दशहरा मनाया जा रहा है। इस दिन पर श्री राम ने रावण को मारकर बुराई पर जीत हासिल की थी। राम ने लंकापति रावण से 9 दिनों तक युद्ध के बाद नवरात्रि के दशवें दिन यानि कि दशहरा के दिन रावण का वध किया था । इस दिन को भगवान राम की विजय के रूप में भी मनाया जाता है। इसलिए इस दशहरा पर अपने अंदर की सभी बुराईयों को खत्म कर दे और इस पावन पर्व पर अपने करीबियों को यह शुभकामनाएँ दें।

इस दशहरा  दें अपने सभी दोस्तों को यह 10  ख़ास सन्देश :

1. विनाश हो  बुराई का, दशहरा लेकर आया है उम्मीद की आस रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश – हैप्पी दशहरा

2. अधर्म पर हो अब धर्म की जीत, अन्याय पर मिले न्याय को जीत बुरे पर अच्छे की हो जय जयकार, यही है दशहरे का त्यौहार – विजयदशमी की शुभकामनाएं

3. दशहरा  बुराई के अंत की याद दिलाता है जो चलता है सच्चाई और अच्छाई की राह पर, वो विजय का प्रतीक बन जाता है – दशहरा की शुभकामनाएं

4. हो आपकी लाइफ में ढेर सारी खुशियाँ, कभी ना आये कोई झमेला सदा सुखी रहे आपका बसेरा-  हैप्पी दशहरा

5. खुशियाँ आपके घर आये, कभी ना हो दुखों से आपका सामना सुख और धन आये आपके आँगन, विजयदशमी की शुभकामनायें

6. जीवन आपका सुनहरा हो जाये, आपके घर में हमेशा रहे सुख का पहरा यह दशहरा शांति लाये अपार, राम की जय खुशी की आयी बहार – हैप्पी दशहरा

7. बुराई पर अच्छाई की जीत, झूठ पर सच्चाई की जीत अहम् ना करो गुणों पर , यही हैं इस दिवस की सीख – हैप्पी दशहरा

और पढ़ें: शारदीय नवरात्रि के समय क्यों मनाते है दशहरा?

8. बुराईयाँ खत्म हो, अच्छाई की जीत हो दशहरा के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

9. बुराई का होता है विनाश, दशहरा लाता है उम्मीद की आस, रावण की तरह आपके दुखों का भी  हो नाश, हैप्पी  विजयदशमी

10. खुशी आपके कदम चूमे..कभी ना हो दुखों का सामना..धन ही धन आये आपके अंगनां, यही है दशहरे के अवसर पर हमारी मनोकामना।

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Ram Navmi Special 2019 : राम के वो 10 गुण जो सभी को उनसे सीखने चाहिए

इन ख़ास संदेशों से दें अपने दोस्तों को राम नवमी की बधाई


Ram navmi 2019: आज पूरे देश में बड़े ही उत्साह से राम नवमी मनाई जा रही है। श्रीराम का जीवनकाल है वो पराक्रम महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य रामायण के रूप में ज़िक्र किया गया है । जिसमे रामायण में सीता के खोज में श्रीलंका जाने के लिए 25 किलोमीटर पत्थर के सेतु का निर्माण करने के बारे में बताया गया है जिसको रामसेतु कहते हैं। राम एक ऐसे पुरुष थे जो सिर्फ एक अच्छे बेटे या भाई नहीं बल्कि एक अच्छे पति और पिता भी थे। इसलिए आज राम नवमी के ख़ास दिन पर हम आपको बताएँगे श्री राम से जुड़े वो 10 गुण जो आज सभी आदमियों को उनसे सीखने चाहिए राम के वो 10 गुण जो सभी को उनसे सीखने चाहिए :

1. श्री राम ने कभी भी झूठ  नहीं कहा और न ही  किसी के लिए अभद्र  भाषा का इस्तेमाल किया।

2. श्री राम में कभी अहंकार नहीं रहा है यही वजह थी की उन्होंने हर रिश्ते में खुद से पहली की और अपने रिश्ते को मजबूत बनाया।

3. उन्होंने कभी नहीं याद रखा की उन्होंने लोगो को क्या दिया है और न ही उनपर कभी एहसान जताया।

4. श्री राम हमेशा से सभी चीजों को लेकर सकारात्मक रहे है। अगर किसी ने अपने जीवन में कई सारी  गलतियाँ की है और एक अच्छा काम किया है तो श्री राम  ने हमेशा अच्छे काम कि बात की है।

5.  श्री राम ने अपने जीवन में हर रिश्ते को बड़ी सच्चाई से निभाया है तभी उन्होंने पत्नी सीता के अलावा कभी किसी औरत की तरफ बुरी नजर से नहीं देखा।

6. श्री राम सिर्फ लोगों के ही नहीं बल्कि प्रकृति के लिए भी शुभ चिंतक रहे है।

7. महलों में रहने वाले राजा श्री राम ने कभी अमीर और गरीब में फर्क नहीं किया तभी तो उन्होंने सबरी  की कुटिया  में बिना किसी भेदभाव के झूठे  बेर  तक खाये।

8. उन्होंने कभी अपनी संपत्ति  का गलत  इस्तेमाल नहीं किया तभी एक राजा होने के बावजूद उन्होंने आम लोगो की तरह ज़िन्दगी बितायी।

9.  उन्होंने हमेशा से सच्चाई का साथ दिया इसलिए उन्होंने धरती से बुराई खत्म  करने के लिए  लंकापति रावण का वध किया।

10.  राम को आदर्श पुरुष माना जाता है; न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी।

और पढ़ें: जाने इन पौराणिक कथाओं के बारे में जो दर्शाती है माँ दुर्गा की शक्ति

इन ख़ास संदेशों से दें अपने दोस्तों को राम नवमी की बधाई 

1. सीता माँ का धैर्य, लक्ष्मण जी का तेज और राम जी का त्याग हम सभी को जीवन  की सीख देता  रहें –  राम नवमी  की  शुभकामनाएँ

2. अयोध्या के वासी राम, रघुकुल के कहलाये राम, पुरुषो में हैं उत्तम राम , सदा जपों हरी राम का नाम –  राम नवमी  की  शुभकामनाएँ

3. श्री रामचन्द्र कृपालु , भजमन हरण भवभय दारुणम्। नवकंज लोचन, कंज मुख,कर कंज, पद कंजारुणम्। राम नवमी की हार्दिक बधाई!

4. अयोध्या जिनका धाम है, जिनका नाम राम हैं, उनके चरणों में हमारा प्रणाम है – राम नवमी की हार्दिक बधाई

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Durgapujaspecial2019: सीआर पार्क में मनाई गई “Eco – friendly” दुर्गा पूजा

दुर्गा पूजा में इकोफ्रेंडली  के साथ नो- प्लास्टिक  का भी रखा  गया ख़ास ध्यान 


नवरात्रि के साथ दुर्गा माँ का पर्व भी शुरू हो गया है। ऐसे में दिल्ली के सबसे बड़े पॉश एरिया यानी सी.आर पार्क में हर साल की तरह इस बार भी दुर्गा अष्टमी की तैयारी जोरो शोरो से देखने को मिली। इसके अलावा दुर्गा माँ के कई खूबूसरत पंडाल देखने को भी मिले। साथ ही इस बार सी. आर  पार्क के ज्यादातर पंडाल में दुर्गा माँ की जो मूर्तियां है वो इकोफ्रेंडली देखने को मिली।

“No- plastic’ को ध्यान में रखते हुए मनाई गयी दुर्गा अष्टमी

आपको बता दें  की पीएम मोदी द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है No- plastic कर के जिसमे लोगो से यह अपील कि जा रही है की वो प्लास्टिक  का इस्तेमाल जितना कम करे उतना अच्छा है क्योंकि प्लास्टिक के इस्तेमाल से हमारे वातावरण पर काफी असर पड़ रहा है । जीव- जन्तु  खत्म  होते जा रहे है ।इस लिए इस अभियान को दुर्गा अष्टमी में भी लागू  करते देखा गया. लोगो ने खाने से लेकर सभी चीजों में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया।

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दुर्गा पूजा पर child safety को लेकर प्लान इंडिया संगठन  द्वारा चलाया गया अभियान

वन वर्ल्ड  न्यूज़ की टीम  जब सीआर पार्क दुर्गा अष्टमी कवर करने पहुँची तब एक एनजीओ द्वारा चाइल्ड सेफ्टी को लेकर एक अभियान चलाते  हुए भी देखा गया है जिसमे उनकी पढ़ाई से लेकर स्वास्थ्य  सभी का ख़ास ख्याल रखा  जाता है। साथ ही दुर्गा पूजा का समय है तो ऐसे में यह एनजीओ नारी सशक्तिकारण  को बढ़ावा  देते हुए जो लड़किया है उनकी सेफ्टी को लेकर भी अवेयरनेस फैलाता हुआ नजर आ आया की । प्लान इंडिया एक गैर  सरकारी संगठन है जो साउथ दिल्ली के कैलाश कॉलोनी में स्थित है। आप पूरा इंटरव्यू देखने के लिए नीचे जा कर क्लिक कर सकते है।

अगर आप अभी तक दुर्गा अष्टमी के  खूबसूरत पंडाल देखने नहीं गए है तो आप सीआर पार्क में जाकर माँ दुर्गा के खूबसूरत पंडाल  देख सकते है जो की 8 अक्टूबर तक लगे रहेंगे.जिसमे माँ दुर्गा की  काफी अच्छी मुर्तिया लगी हुई इसके अलावा यहाँ पर आप खाने और शॉपिंग का भी लुप्त उठा सकते है।

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जानिए!! माँ दुर्गा का चंद्रघंटा रूप सबसे लोकप्रिय क्यों है?

नवरात्रि के तीसरे दिन कैसे मिलेगा माँ चंद्रघंटा का आशीर्वाद?


नवरात्रि के नौ दिन तक माँ के अलग- अलग रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। शास्त्रों में माँ के सभी रूपों के बारे का  अलग- अलग महत्व बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि  जो भक्त नौ दिनों तक माता की पूजा करते है, उनकी  हर कामना माता पूरा करती है। आज नवरात्रि का तीसरा दिन है जिसमे माता के ‘चंद्रघंटा’ रूप की पूजा की जाती है। माँ चंद्रघंटा के इस रूप को काफी सौम्य  रूप कहा जाता है। माँ चंद्रघंटा शेर पर सवार  होती है और यही रूप माँ का सबसे ज़्यादा लोकप्रिय भी है। आपको बता दे कि  माँ चंद्रघंटा के सिर के ऊपर घंटे के आकर का आधा चाँद है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनकी दस भुजाएं है और हर भुजायें में अलग- अलग हथियार  होते है। माँ के  हाथो में कमल, धनुष-बाढ़ , कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा रहता है।

कौन हैं मां चंद्रघंटा?

दुर्गा माता का यह तीसरा रूप राक्षसों का वध करने के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं।इसीलिए इनके हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा और धनुष होता है। इनकी उत्पत्ति ही धर्म की रक्षा और संसार से अंधकार मिटाने के लिए हुई थी ।

मां चंद्रघंटा का ध्‍यान मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

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पूजा का महत्व:

नवरात्रि में तीसरे दिन इस देवी की पूजा का महत्व है, देवी की कृपा से साधक को अलोकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं। इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए। इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है।

किस रंग के पहनें कपड़े और क्या चढ़ाएं प्रसाद:

मां चंद्रघंटा को अपना वाहन सिंह बहुत प्रिय है और इसीलिए गोल्डन रंग के कपड़े पहनना भी शुभ माना जाता  है। इसके अलावा मां सफेद चीज का भोग जैसै दूध या खीर का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा माता चंद्रघंटा को शहद का भोग भी लगाया जाता है।

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