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Single Mother problems – 5 समस्याएं जिनका सिंगल मदर को करना पड़ता है सामना

5 बातें जो कभी भी एक सिंगल मदर से नहीं कहनी चाहिए


Single Mother problems: पहले ज़माने में कहा जाता था कि बच्चा करना बहुत मुश्किल होता है और उससे भी मुश्किल होता है उस बच्चे का लालन – पालन करना। हालाँकि पहले जॉइंट फॅमिली हुआ करती थी इसलिए बच्चे आराम से पल जाते थे। आज के समय में जहाँ माता-पिता के लिए एक से अधिक बच्चे का लालन पालन करना मुश्किल होता है वही अगर बात करें अगर एक सिंगल मदर की तो यह एवेरेस्ट चढ़ने से कम नहीं लगता। उसके ऊपर समाज हमेशा उन महिलाओं को अलग नजर से देखता है जो अकेले अपने बच्चों की परवरिश करती हैं। एकल माताओं को अक्सर कठोर बातों से गुजरना पड़ता है। वह अपने बच्चे की कितनी परवाह करती हो, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि उन्हें समाज में एक अलग नजरिये से देखा जाता है।

लेकिन अगर हम एक सिंगल मदर की एक बच्चे के लिए भूमिका को देखें तो वो इसे अच्छे और ईमानदारी से निभा सकती हैं। वो एक माँ के रूप में एक अच्छी माँ और एक अच्छे पिता की भूमिका और कर्तव्यों को पूरा कर सकती है, और ऐसी कई महिलाएं हैं जो इस बात को साबित कर रही हैं। फिर भी दुःखद बात यह है कि अभी भी समाज में हमारे चारों ओर सिंगल-मॉम-शेमिंग के बारें में बातचीत होती है।

ऐसी बातें एक सिंगल माँ के विश्वास को गहराई से प्रभावित करती है इसलिए हमें इसे रोकने की जरूरत है। इसी तरफ पहल करते हुए आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताएँगे जिन्हें किसी को भी किसी सिंगल मदर से नहीं बोलनी चाहिए।

तुम्हारी ज़िंदगी एक आदमी के बिना अधूरी है…

क्या आपको लगता कि एक महिला के जीवन मे एक आदमी का होना ही आदर्श होता है? क्या आपको लगता है कि एक आदमी के बिना महिला का जीवन अधूरा होता है। हमारे आस-पास के बहुत से लोग इस कथन पर विश्वास करते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। एक सिंगल मदर बिना किसी पुरुष के अपने आपको और अपने बच्चे को पाल सकती है। वो उसके बिना भी अपने बच्चे को वो सब कुछ दे सकती है जो उसकी हैसियत में होता है। अगर महिला को लगता है कि एक गलत आदमी घर की शांति में बाधा डाल सकता है तो उस माँ के लिए अपने बच्चे की देखभाल अकेले करना ही बेहतर होता है। अगर वह अपने बच्चे को खुद से बड़ा करने के लिए आश्वस्त है तो उसे एक आदमी को अपने जीवन में लाने के बारे में परेशान नहीं होना चाहिए। इसलिए हमें एक एकल माँ के जीवन में विपरीत लिंग के दूसरे व्यक्ति की अनुपस्थिति पर सवाल उठाना बंद कर देना चाहिए।

आप दोबारा शादी कर लो, जीवन सुधर जाएगा।

यदि एक माँ ने अपने बच्चों और खुद की देखभाल करने के लिए एकल रेहान चुना है तो क्या आपको नहीं लगता कि उसने बहुत सोच-विचार के बाद ऐसा निर्णय लिया है? हमें उसके फैसले का समर्थन करने की जरूरत है न कि उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की। हमें उससे दुबारा शादी करने का सुझाव नहीं देना चाहिए। एक महिला जीवन भर अविवाहित रह सकती है और फिर भी खुश रह सकती है। एक महिला अपनी इच्छा से अपने बच्चे और खुद को खुश रख सकती है। कौन जानता है शादी के बाद वो व्यक्ति उन्हें खुश रखेगा या नहीं। आंकड़े बताते हैं कि संयुक्त राज्य में लगभग एक तिहाई बच्चे सिंगल मदर्स द्वारा पाले जाते हैं।

परिवार को पूरा करने के लिए एक पति की आवश्यकता है।

परिवार को पूरा करने के लिए एक पति की आवश्यकता है, बेशक, ये सटीक शब्द है और आज भी हमारा समाज इस बात को मानता है कि एक महिला और उसके बच्चे के जीवन में उसके पति और बच्चे के पिता का बहुत बड़ा रोल होता है। लेकिन इसका मतलब यह है कि यह बात सुनिश्चित है। इस कथन में एक अंतर्निहित मुखरता है कि परिवार को पूरा करने के लिए एक पति की आवश्यकता है। हर कोई अलग है और जरूरी नहीं है कि हम हमेशा अपने जीवन में सही निर्णय ले सकें। संभावना है कि हम उन लोगों के साथ खुश रहें जिन्हें हम प्यार करते हैं, लेकिन कुछ वर्षों के बाद प्यार खत्म हो सकता है। यह स्वाभाविक है। महिला के एकल माँ होने का कारण कुछ भी हो सकता है – जैसे पति के साथ खुश ना रह पाना, तलाक, दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियां या कुछ अन्य। इसलिए एक सिंगल मदर अपने बच्चों के साथ और एक आदमी के बिना अपना जीवन ख़ुशी से जी सकती है।

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तुम एक अकेली माँ हो? मुझे यह जानकर दुःख है।

अगर कोई महिला एक सिंगल मॉम हैं तो आपको इस बारें में उनके सामने कोई दुःख या खेद जाहिर करने की जरुरत नहीं हैं। आप खेद क्यों महसूस कर रहे हैं? और किस लिए? सिर्फ इसलिए कि वह एक सिंगल मॉम है, आपको इस बारे में खेद नहीं होना चाहिए। आप इसके बदले उनकी प्रशंसा करें या उनके रुख की सराहना करें। इन बातों से उनका चेहरा मुस्कुराहट के साथ खुश हो सकता है। आप उनकी सराहना करें, यह उन्हें और अधिक मजबूत बनाएगा।

अकेली माँ किसी अन्य महिला के पति पर नज़र रखती है।

अगर एक महिला सिंगल मॉम है और स्वतंत्र मजबूत महिला है तो किसी अन्य महिला के पति पर नज़र रखती है। यह एक ऐसी धारणा है जो हमारे समाज में व्याप्त है। एक अकेली माँ किसी अन्य महिला के पति पर नज़र क्यों रखेगी? यह उन सभी भ्रांतियों का सबसे बड़ा कारण है जो समाज में फैला हुआ है और यह बात सिंगल मदर के लिए परेशान करने वाला होती है। अगर वह सिंगल है और वह अविवाहित है तो वो इसलिए क्योंकि उसे किसी आदमी की जरूरत नहीं है। हमें इस तरह की असंवेदनशील और आधारहीन धारणा बनाने से बचना चाहिए!

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7 बातें जो हर लड़की अपनी ज़िन्दगी में अपने परिवार से एक बार जरूर सुनती है

हमारा परिवार चाहे जितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, हमारे घर वालो की सोच की जड़े आज भी रहती पुराने ज़माने में ही है। बड़ा मुश्किल होता है अपने परिवार को ज़माने के साथ चलाना। जाने अनजाने में वो लड़का लड़की में भेद भाव कर ही देते है। पर फिर अपनी बेटी पर गर्व भी बहुत करते है। आइए जानते है कि वो कौन सी बातें है जो एक लड़की को ज़रूर सुननी पड़ती है :-

  • ‘बेटा अकेले मत जाना’

सुबह का समय हो या शाम का, अगर कोई लड़की किसी भी कारण से बाहर जाना चाहे तो सबसे सवाल उठता है ‘किसके साथ जा रही हो?’ लड़की किसी सहेली के साथ जा रही हो तो ठीक और किसी लड़के के साथ जाए तो उसे सवालो की बाढ़ में डुबो दिया जाता है। और तो और अगर वह अकेले जा रही हो तो ना जाने कैसे कैसे ख्याल माँ बाप को आने शुरू हो जाते है और उसी समय फैसला हो जाता है कि बेटी अगर जाएगी तो किसी के साथ जाएगी वरना घर पर रहेगी।

  • ‘ये पहन के जाओगी?’

परिवार का कोई उत्सव हो या किसी दोस्त का जन्मदिन, लड़कियाँ कुछ भी पहने सबसे पहले सवाल उठता है, ‘ ये पहन रही हो?’ , ‘ कपडे नहीं है क्या पहनने के लिए?’ बस फिर क्या, पूरी बात अब घूम कर कपड़ो से भरी हुई अलमारी और पहनने के लिए एक कपडा ना होने पर आ जाती है। अब इसके बाद लड़की परिवार वालो की पसंद के कुछ पहने तो खुद दुखी रहती है और अपनी पसंद से कुछ पहने तो माता पिता दुखी रहते है।

  • ‘वो लड़का कौन था?’

सह शिक्षा में पढ़ने के बाद हमारे कई दोस्त बनते है। ज़ाहिर सी बात है कि उनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल होते है। अब लड़कियां दोस्त हो तो किसी को कोई तकलीफ नहीं होती। पर अगर कोई लड़का दोस्त हो तो सिर्फ माता पिता को ही नहीं पर पूरे समाज को फिक्कत होती है। खुद को ही शर्म आ जाती है जब कोई दोस्त बहार मिल जाए और हमारे माता पिता की आँखों में सवालो की बाढ़ सिर्फ हमे दिखाई दे।

  • ‘खाना बनाना सीखो वरना कोई शादी नहीं करेगा’

हर कोई अपनी बेटी की शादी के लिए सबसे ज़्यादा चिंतित होता है फिर चाहे लड़की को पहले पढ़ाई ही क्यों न करनी हो। और शादी के लिए सबसे पहली चीज़ जो खुद लड़की के माँ बाप देखते है वो होता है खाना बनाना। उसकी खाना बनाने की कला के आधार पर ये तय किया जाता है कि वो लड़की शादी के लायक है या नहीं।

  • ‘ये सब उल्टा सीधा खाओगी तो मोटी हो जाओगी’

मोटापा मतलब बदसूरत होना और बदसूरत होना मतलब लड़का न मिलना और लड़का न मिलना मतलब शादी ना होना। किसी भी परिवार के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी ही बेटी की शादी होता है। पर कोई ये नहीं समझता की लड़की का वजन उसके गुणों से ज़्यादा ज़रूरी नहीं होता।

  • ‘तू तो हमारी सबसे प्यारी बेटी है!’

तुम चाहे एकलौते क्यों ना हो पर माता पिता ऐसे बोलते है कि अनगिनत बच्चो में से तुम सबसे अच्छी हो। अब आखिर जब इतनी बातो का बुरा लगता है तब माँ बाबा किसी ना किसी ढंग से अपनी राजकुमारी को मनाएंगे ही। इस समय में बेटी की हर खामी उसकी खासियत बन जाता है।

  • ‘अब तू नही करेगी तो कौन करेगा?’

ये पैंतरा तब अपनाया जाता है जब घर का कोई काम नहीं हो रहा होता और माता पिता का लाडला बेटा भी वो काम करने से इंकार कर देता है। ऐसे समय में हर बेटी को उसकी अहेमियत का एहसास दिलाया जाता है। उसको ये भी पता चल जाता है कि वो अपने परिवार के लिए कितनी ज़रूरी है।

हर किसी के प्यार को दर्शाने का तरीका एकदम अलग होता है। हमारा परिवार जाने अनजाने हमे कुछ भी कह ले, इस बात को कोई गलत नहीं ठहरा सकता कि वही हमसे सबसे ज़्यादा प्यार करते है। हमरी कमियों के बावजूद भी हमे अपनाते है।

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