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जानें ऑफिस पॉलिटिक्स से दूर रहने और एक दूसरे को मोटीवेट करने के बेस्ट तरीके

जानें ऑफिस में एक दूसरे को मोटीवेट करना क्यों जरूरी है


अपने घर से दूर ऑफिस के नए माहौल में सेटल होना काफी मुश्किल होता है, और उससे ज्यादा मुश्किल होता है ऑफिस को अपना दूसरा घर और ऑफिस के लोगों के साथ फॅमिली मेम्बर की तरह रहना. ये और ज्यादा मुश्किल तब हो जाता है जब आप किसी ऑफिस में नए होते हैं. कई बार तो ऑफिस पॉलिटिक्स के चलते आपको अपनी जॉब भी बदलनी पड़ जाती है. आप को टीम से मोटिवेशन मिलने की जगह आप डीमोटिवेट होने लगते है और धीरे धीरे ऑफिस की पॉलिटिक्स में फसने लगते है तो चलिए आज हम आपको बतायेगे की अपनी टीम को ऑफिस पॉलिटिक्स में फ़साने की जगह आप कैसे एक दूसरे को मोटीवेट कर सकते है.

ऑफिस के लोगों को अपनी फॅमिली समझना: जैसे एक परिवार होता है और उस परिवार के कुछ सदस्य होते है. उसी प्रकार आप अपने ऑफिस को अपना घर समझ सकते है और ऑफिस के लोगों को अपने परिवार का सदस्य. जिस प्रकार आप हर छोटी बड़ी चीज में अपने परिवार का साथ देते है उनको मोटीवेट करते है उसी तरह आप अपने ऑफिस की फॅमिली की भी मदद कर सकते है और हर काम के लिए एक दूसरे को मोटीवेट कर सकते है.

एक टीम के रूप में कार्य करना: किसी भी व्यक्ति के लिए एक टीम में कार्य करना बड़ा ही रोचक होता है. इससे टीम के सभी लोगों को एक दूसरे से सीखने के लिए भी काफी कुछ मिलता है. साथ ही साथ आपको एक दूसरे के बारे में पता चलता है कि कौन कैसा है और कैसे सोचता है. इसे अगर आपकी टीम में कोई व्यक्ति कमजोर भी है तो आप सब मिल कर उसे मोटीवेट कर सकते है.

एक दूसरे को मोटीवेट करना: जब हम एक टीम के रूप में काम करते है तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता. आप टीम में मुश्किल से मुश्किल काम को भी आसानी से कर सकते है. आप लोग आपस में ही एक दूसरे को मोटीवेट कर सकते हैं क्योकि जब पूरी टीम मोटीवेट होगी तभी आप आसानी से अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं.

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एक दूसरे के प्रयासों की सराहना करनी चाहिए: जब आप एक टीम के रूप में काम करते है तो ये बहुत जरूरी हो जाता है कि आप एक दूसरे के प्रयासों की सराहना करे. इससे टीम के लोगो को मोटिवेशन मिलता है.

एक दूसरे की गलतियों को अनदेखा करे: जब भी 8, 10 लोग साथ में एक टीम की तरह काम करते है एक दूसरे के साथ रहते है तो उनके बीच में छोटी मोटी बाते तो होती ही रहती है लेकिन आपके और आपकी टीम के लिए ये बेहद जरूरी है कि आप एक दूसरे की भूल-चूक, कमियों और गलतियों को माफ करें.

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जानें कौन है पंडित नंदिनी भौमिक, जिन्होंने तोड़ी समाज की रूढ़िवादी सोच

जानें नंदिनी भौमिक ने कैसे सदियों से चली आ रही परंपरा में सेंध लगा


आपने अपने घरों की शदियों और पूजाओं में पंडितों को देखा होगा. अगर हम हिंदू रीति-रिवाजों की बात करे तो हर शादी, हर पूजा में पंडित होते हैं बिना पंडितों की कोई पूजा की कल्पना ही नहीं कर सकता. ये आपके साथ भी होता होगा, कि एक पंडित का नाम आते ही आपके ख्याल में एक आदमी की छवि घूमती होगी. क्योंकि हमने बचपन से पुरुष को ही आपके घरों में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान कराते देखा है. लेकिन अब समय बदल गया है आज के समय में महिलाएं वो सभी काम करती है जो एक समय पर सिर्फ पुरषों द्वारा किये जाते थे. आज हम आपको ऐसी ही एक महिला नंदिनी भौमिक के बारे में बताने जा रहे है जिन्होंने सदियों से चली आ रही इस परंपरा में सेंध लगा कर पूजा-पाठ का अनुष्ठान कराया.

 

जाने कौन है नंदिनी भौमिक

नंदिनी भौमिक कोलकाता की रहने वाली है.. वह पेशे से संस्कृत की प्रोफेसर और नाटक कलाकार हैं. इतना ही नहीं नंदिनी भौमिक विवाह में मंत्रोच्चारण के साथ विवाह संपन्ना कराती हैं. नंदिनी ने ये काम कोई नया शुरू नहीं किया है वो पिछले दस सालों से लगातार शादियों को संपन्न कराने का काम करती आ रही हैं.  नंदिनी भौमिक अभी तक चालीस से ज्यादा शादियां करा चुकीं. नंदिनी को संस्कृत के श्लोकों का काफी ज्यादा ज्ञान है. इतना ही नहीं नंदिनी भौमिक शादियों में संस्कृत के
श्लोकों को अनुवाद करके भी कहती हैं.

 

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शादियों में नंदिनी भौमिक किन किन भाषाओं में श्लोक पढ़ती हैं

नंदिनी भौमिक को न सिर्फ संस्कृत और हिंदी भाषा का ज्ञान है बल्कि उनको कई ओर भी भाषाओं का ज्ञान है दरअसल, जिन शादियों में दूल्हा दुल्हन को संस्कृत में श्लोक नहीं समझ आते, उन शादी में नंदिनी उस जोड़े के लिए अंग्रेजी और बंगला में श्लोकों का अनुवाद करती हैं.. जिसे की दूल्हा दुल्हन को श्लोकों का सही अर्थ समझ आ सके. इतना ही नहीं, नंदिनी शादियों में पीछे से रवींद्र नाथ टैगोर का संगीत भी बजवाती है..नंदिनी शादी में होने वाले कन्या दान की रस्म का घोर विरोध करती है. नंदिनी का मानना है कि लड़की कोई वस्तु नहीं, जिसका दान किया जाए. वो शादियों में कन्यादान नहीं करतीं. नंदिनी के इस कार्य को अब बहुत सारे लोगों की सराहना भी मिल रही है.

 

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जाने हमारे देश में आधी से ज्यादा महिलाएं क्यों नहीं लेती खुद अपने आर्थिक फैसले

क्या महिलाएं स्वयं पर निर्भर नहीं है?


अगर हम अपने देश की महिलाओं की बात करें तो हमारे देश में आधी से ज्यादा महिलाएं खुद अपने आर्थिक फैसले नहीं लेती. ये सब देख कर तो बस एक ही सवाल मन में आता है कि क्या महिलाएं स्वयं पर निर्भर नहीं है. हाल ही में किये गए एक सर्वे के अनुसार महिलाओं ने कहा कि वो अपने आर्थिक फैसलों के लिए खुद पर निर्भर नहीं हैं. यह सर्वे फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई द्वारा किया गया है. फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई में अपने साल 2020 में किये गए सर्वे में इस तरह के आंकड़े उपलब्ध कराए. हमारे देश में महिलाओं पर किया गया यह पहला सर्वे है. इस सर्वे में महिलाओं के हक की बात की गयी है।

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जाने क्या बताती है फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई सर्वे की रिपोर्ट

अगर हम फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई सर्वे की माने तो सर्वे के आंकड़ों में पता चला है कि लगभग 66 प्रतिशत सिंगल महिलाएं अपने आर्थिक फैसले खुद से नहीं लेती. जबकि 28 प्रतिशत महिलाएं वित्त के मामले में पति या पिता पर निर्भर रहती है. बाकि की 5 प्रतिशत महिलाएं अपनी माँ की मर्जी से वित्त संबंधी फैसले लेती हैं. जाने सर्वे में किस उम्र की महिलाओं को शामिल किया गया है

फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई सर्वे में 25 साल से 54 साल की 1250 महिलाओं को शामिल किया गया था. मुंबई, बेंगलूरू, दिल्ली, पुणे और जयपुर जैसे बड़े शहरों की महिलाएं इस सर्वे में शामिल हुई थी इस सर्वे में सिंगल महिलाओं को शामिल किया गया था. या फिर जो महिलाएं शादी के बाद पति से अलग हो कर बच्चों के साथ रहती हैं. 69 प्रतिशत महिलाएं अपने शादी के बाद अपने पति से अलग रहने के बाद भी अपने आर्थिक फैसले खुद नहीं लेती है उनका कहना है कि वो अपने आर्थिक फैसलों के लिए अपने पिता पर निर्भर हैं. साथ ही साथ इस सर्वे में उन महलाओं को भी शामिल किया गया है जो अपने बच्चों को सेविंग करना सिखाती हैं. हमारे देश में 91 प्रतिशत महिलाएं अपने बच्चों को पैसे से जुड़ी जानकारी देती हैं. इतना ही नहीं हमारे देश में हर दस में से नौ महिला अपने बच्चों को गुल्लक देकर सेविंग की आदत डाल रही हैं.

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जानें उन बॉलीवुड और टीवी सेलेब्स के बारे में, जो साल 2020 में शादी के बंधन में बंधे

कोरोना के बीच इन सितारों ने रचाई शादी


साल 2020 अब अपने अंतिम चरण पर है. यह साल किसी के लिए भी अच्छा नहीं था.  एक तरफ लोगों में कोरोना महामारी का खौफ है तो दूसरी तरफ साल 2020 में ही कई बॉलीवुड सितारों ने अपनी शादी की घोषणा करके फैन्स को चौकाया. कई सितारे तो ऐसे भी है. जिन्होंने महामारी के बीच में ही गुपचुप तरीके से शादी रचाई. जबकि कई ऐसे भी सितारे है जो साल खत्म होने से पहले अपनी शादी रचा रहे हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे बॉलीवुड और टीवी सितारों के बारे में बातएंगे जिन्होंने साल 2020 शादी की.

नेहा कक्कड़ और रोहनप्रीत सिंह: बॉलीवुड की जानी मानी सिंगर नेहा कक्कड़ और पंजाबी सिंगर रोहनप्रीत सिंह की शादी इस साल की सबसे बड़ी और सबसे चर्चित शादियों में से एक थी. दोनों 24 अक्तूबर 2020 को शादी के बंधन में बंधे थे. क्या आपको पता है रोहनप्रीत सिंह नेहा कक्कड़ से ‘नेहू दा व्याह’ के सेट पर मिले और वही उनको एक दूर से  प्यार हो गया.. उसके बाद दोनों ने शादी का फैसला किया.

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हार्दिक पांड्या और नताशा स्टेनकोविक: बॉलीवुड एक्ट्रेस नताशा स्टेनकोविक और इंडियन क्रिकेट टीम के प्लेयर हार्दिक पांड्या एक दूर को डेट कऱ रहे थे. बॉलीवुड एक्ट्रेस नताशा स्टेनकोविक ने अपने बॉयफ्रेंड हार्दिक पांड्या से लॉकडाउन के दौरान गुपचुप तरीके से शादी रचा ली. जिसके बाद नताशा स्टेनकोविक और हार्दिक पांड्या ने अपने सोशल मीडिया पर अपनी फोटो शेयर कर सभी लोगों को ये जानकारी दी. जिसके बाद दोनों का रिस्ता काफी सुर्खियों में रहा.

आदित्य नारायण और श्वेता अग्रवाल: बॉलीवुड सिंगर आदित्य नारायण ने भी इसी साल अपनी गर्लफ्रेंड श्वेता अग्रवाल के साथ शादी के बंधन में बधे. आदित्य नारायण और श्वेता अग्रवाल 10 साल से एक दूसरे को डेट कर रहे थे, दोनों के शादी की फोटो ने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरी थी और उनके फैन्स जमकर कमेंट भी कर रहे थे.

काजल अग्रवाल और गौतम किचलू: इस कोरोना काल में काजल अग्रवाल और बिजनेसमैन गौतम किचलू ने 30 अक्टूबर को मुंबई के ताज होटल में शादी की. काजल अग्रवाल और गौतम किचलू ने कोरोना वायरस के कारण ही अपनी शादी का आयोजन मुंबई के ताज होटल में आयोजन किया था. जिसमें सिर्फ दोनों के करीबी लोग ही शामिल हो पाए थे.

राणा दग्गुबाती और मिहेका बजाज: कोरोना महामारी में ही राणा दग्गुबाती और मिहेका बजाज शादी के बंधन में बंध गए. बॉलीवुड से लेकर साउथ फिल्म इंडस्ट्री तक अपनी एक खास पहचान बनाने वाले एक्टर राणा दग्गुबाती लम्बे समय से मिहेका बजाज को डेट कर रहे थे। अभी हाल ही में दोनों शादी के बंधन में बंध गए. आज कल दोनों की फोटो आए दिन सोशल मीडिया पर सुर्खियों में छाई रहती है.

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जाने बॉलीवुड की उन हसीनाओं के बारे में, जिन्होंने अपनी प्रेगनेंसी के दौरान भी नहीं छोड़ा योगासन करना

जाने प्रेगनेंसी के दौरान योग करने के फायदे


योगा हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद होता है ये बात शायद हमे आपको बताने की जरूरत नहीं है. आपने देखा कि अक्सर हमारे बॉलीवुड सितारें भी योगा के जरिए अपनी फिटनेस और फ्लैक्सिबिलिटी बढ़ाते रहते हैं साथ ही साथ वो योग से अपना स्ट्रेस भी घटाते रहते हैं. अनुष्का शर्मा से लेकर करीना कपूर खान तक हर बॉलीवुड सेलिब्रिटी योगा को अपना बेस्ट फ्रेंड मानते हैं. आज हम आपको उन बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के बारे में बतायेगे, जिन्होंने अपनी प्रेगनेंसी के दौरान भी योगा करना नहीं छोड़ा क्योकि प्रेगनेंसी के दौरान भी योगा बेहद फायदेमंद माना जाता है. इन योगासन को प्रीनेटल योगा कहा जाता है. प्रेगनेंसी के दौरान योगा करने से आपका शरीर फ्लैक्सिबिलिटी होने के साथ साथ आपकी मसल्स को रिलैक्स भी करता है।

करीना कपूर खान: करीना कपूर ने अपनी पहली प्रेगनेंसी के दौरान योगा करना नहीं छोड़ा था. करीना कपूर ने अपनी प्रेगनेंसी के दौरान जिम की जगह योगा को चुना क्योंकि यह आपके पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. अभी करीना कपूर दोबारा प्रेगनेंट है और इस बार भी वो योग के सहारे ही अपनी फिटनेस और फ्लैक्सिबिलिटी बनाए रखने में जुटी हैं.

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अनुष्का शर्मा: अभी अनुष्का शर्मा प्रेगनेंट हैं और इन दिनों भी उन्होंने योग करना नहीं छोड़ा। शायद आपने देखा भी होगा कि कुछ समय पहले अनुष्का शर्मा ने शीर्षासन करते हुए अपनी एक फोटो शेयर की थी. जिसमे वह अपने हाथों के बल जमीन पर हैं और उनके पैर आसमान की तरफ है. अनुष्का के डॉक्टर ने उन्हें आश्वासन दिया कि यह एक्सरसाइज उनके और उनके बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित है.

एमी जैक्सन: एमी जैक्सन अभी प्रेगनेंट नहीं है लेकिन जब उनका पहला बेबी हुआ था तो उन्होंने भी अपने  शरीर और दिमाग को एक्टिव और शांत रखने के लिए योग का सहारा लिया था। अपनी प्रेगनेंसी के दौरान एमी जैक्सन ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक फोटो शेयर करते हुए लिखा था कि वह अपने शरीर, दिमाग और आत्मा को योगा के जरिए एक्टिवेट कर रही हैं। इतना ही नहीं बच्चा होने के बाद भी एमी जैक्सन ने जिम के बजाए योग को ही चुना.

सोहा अली खान: सोहा अली खान हमेशा से ही योगा प्रैक्टिस करती रहती है सोहा अली खान अपनी प्रेगनेंसी से पहले भी अपने योगासनों की फोटो अपने सोशल एकाउंट्स पर शेयर करती रहती थी. सोहा अली खान ने प्रेगनेंसी के दौरान भी योग का साथ नहीं छोड़ा था.उनका कहना है कि योगा करने से उन्हें लेबर और हार्मोनल उतारचढ़ाव की समस्या में काफी  ज्यादा फायदा महसूस हुआ है।

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अगर आपकी भी है अपने पार्टनर के साथ पहली दिवाली, तो ऐसे करें प्‍लान और बनाएं इसे यादगार

इस तरह बनाये अपनी पहली दिवाली को खास


अगर आपकी भी नई नई शादी हुई है और ये आपकी पहली दिवाली है. तो जाहिर सी बात है की आप भी चाहते होंगे कि ये त्यौहार आपके लिए कुछ खास और यादगार हो. इस दिवाली को आप भी अपने पार्टनर के साथ ऐसे सेलिब्रेट करना चाहेगी जिसकी यादें हमेशा आपके दिलों में बनी रहे. वैसे भी इस समय आपके लिए सबकुछ नया है. नया घर, नया परिवार, नए लोग और सबसे खास आपका लाइफ पार्टनर. ऐसे में आपको खुद से कुछ अच्छा प्‍लान करना होगा ताकि आपके नए परिवार के सदस्‍यों को आप एक प्‍यार भरे बंधन में बांध सके. अगर आप अपनी पहली दिवाली पर अपने सास ससुर के साथ है. तो उसकी तैयारी आपको थोड़ी अलग करनी होगी. जबकि अगर आप सिर्फ अपने पार्टनर के साथ रहते है तो उसकी तैयारी थोड़ी अलग होगी. तो चलिए आज हम आपको बताते है कि आप अपनी पहले दिवाली को कैसे यादगार बना सकते है.
अपनी शॉपिंग पहले से ही कर ले: दिवाली के समय पर बहुत सारी खरीदारी करनी पड़ती है, ऐसे में आखिरी दिन के लिए अपनी शॉपिंग को बचा कर बिलकुल भी ना रखें. क्योकि ऐसा करने पर आपके लिए लास्ट टाइम पर चीजे अरेंज करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है और आप जल्‍दबाजी में कई चीजें भूल भी जाती है. अगर आप अपनी पहली दिवाली को अपने पार्टनर के साथ रोमांटिक बनाना चाहते है तो पहले से ही सारी तैयारियां कर के रखें. आप दिवाली के लिए रंगबिरंगी मनमोहक खुशबू वाली कैंडल्स और फूलों का इंतजाम कर सकते है. इतना ही नहीं आप अपने परिवार वालो के लिए पहले से ही कपड़े और गिफ्ट खरीद कर रख सकते है ताकि आपको लास्ट मौके पर परेशानी न हो.
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खुद से बनाएं मिठाईयां: शादी के बाद अपनी पहली दिवाली को खास बनाने का सबसे बेहतरीन तरीका है स्वीट डिश. वैसे तो अगर आप चाहो तो स्वीट डिश को बाहर से भी मगवा सकते है लेकिन अगर आप इससे खुद से बनाते है. तो ये और भी ज्यादा स्वादिष्ट हो जाती है. क्योकि खुद से बनी मिठाईयों में जो बात होती है. वो बाहर की मिठाईयों में बिलकुल भी नहीं होती. इस लिए आप चाहो तो अपने पति और परिवार के लिए आप खुद से कुछ स्पेशल बना सकते है.
घर को करें रोशन: दिवाली मतलब होता है रोशनी से जगमगाता हुआ घर. क्योकि दीवाली की असली खूबसूरती इसकी रोशनी में है. इसलिए अपने पूरे घर को अपनी पसंद के दीपों, मोमबत्तियों और दूसरे डिजाइनर बल्बस से सजाएं. ताकि घर के कोने कोने तक रोशनी रहे. अपने घर पर लाइटिंग की अरैंजमैंट कुछ ऐसी करें कि आपका घर बिल्‍कुल अलग हट कर दिखें.

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अगर आप भी सोच रहे है अपने पार्टनर को तलाक लेने की तो एक बार मनोचिकित्सकों की इन 5 सलाहों को मान ले, तो नहीं टूटेगा रिश्ता

पार्टनर से तलाक लेने से पहले मनोचिकित्सकों की इन 5 सलाहों को मान ले


जब दो लोग मिलते है और शादी के बंधन में बंधते हैं तो वो एक बहुत ही खूबसूरत जीवन यात्रा की ओर चल पड़ते हैं. लेकिन आज हम सभी लोगों का लाइफस्टाइल थोड़ा बदल गया है. आज के समय में पति पत्नी दोनों ही घर की बागडोर संभालते है. ऐसे में अपने शादी के रिश्ते हो सभालना थोड़ा मुश्किल हो जाता है क्योकि दोनों के पास अपने अपने काम और अपनी अपनी जिम्मेदारियाँ होती है. शादी जैसे प्यारे रिश्ते को निभाने के लिए सिर्फ प्यार ही काफी नहीं होता है. इसमें सम्मान, आपसी समझ, धैर्य आदि चीजों की जरूरत होती है. लेकिन जब शादीशुदा जीवन में तालमेल नहीं बैठता तो तलाक तक की नौबत आ जाती है। तलाक एक ऐसी चीज है जो दोनों लोगों में मानसिक रुप से असर डालती  हैं  और दोनों को ही अंदर से तोड़ देता है. इसीलिए  जरूरी है कि तलाक के नतीजे पर पहुंचने से पहले आपको थैरेपी, आपसी समझ करके और अपने पार्टनर को माफ करके रिश्ते को बचाना चाहिए. तो चलिए आज हम आपको मनोचिकित्सकों के कुछ सवालों के बारे में बतायेगे. जिसे एक बार आप सोच कर अपने रिश्ते को बचा सकते है.

पार्टनर कैसे है उससे वैसी स्वीकारें: शादी होने के बाद ये जरूरी नहीं कि आपकी सोच आपके पार्टनर से मिले या फिर आप दोनों एक जैसी चीजे सोचें.  आप दोनों की पसंद नापसंद अलग -अलग हो सकती है. आपको अपने पार्टनर को ज़्यादा बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, हर कोई अलग होता है.

माफ करना सीखें: गलतियां तो हर इंसान करता है. अगर आपका पार्टनर भी कोई गलती करता है और वो उस गलती को स्वीकर करके, उससे ठीक करने का प्रयत्न करता है. तो आपको उससे माफ़ करना चाहिए. क्योकि माफ करने से टूटते रिश्तों को बचाया जा सकता है. बातों की गांठ बांधने और माफ न करने से शादीशुदा जीवन में परेशानिया आती है.

अपने पार्टनर को दें प्राथमिकता: आपने  देखा होगा की अक्सर शादी के बाद इंसान की प्राथमिकता पार्टनर से ज्यादा परिवार और बच्चों की ओर चली जाती है. जिसके कारण कई बार दोनों के बीच में प्रोब्लेम्स आने लगती है. इस लिए जब भी आपको ऐसा मेहसूस हो कि आपका रिस्ता टूटने की कगार पर है, तो कोशिश करें कि पार्टनर को उस तरह से प्राथमिकता दें जिस तरह रिश्ते के शुरुआती समय में दी जाती है.

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किसी दूसरे से तुलना न करें: अगर आप अपने रिश्ते को मजबूत और अच्छा बनाना चाहते है. तो आपको बातों में या बहस के दौरान कभी भी अपने पार्टनर की तुलना अन्य लोगों के पति या पत्नी से नहीं करनी चाहिए. इससे आपके पार्टनर के मन में भाव आ सकता है कि वे इस रिश्ते के लिए उपयुक्त नहीं हैं.

थेरेपी का लें सहारा: अगर आपकी अपने पार्टनर से नहीं बनती और आप तलाक लेने की सोच रहे है. तो उससे पहले आपके लिए थेरेपी और परामर्श लेना एक बहुत अच्छा विकल्प होगा. क्योकि इससे आपके रिश्ते के बचने की संभावनाएं बढ़ जाती है. जहां पार्टनर्स एक-दूसरे की बात को सुनते नहीं या समझना नहीं चाहते, वहां थेरेपिस्ट उन दोनों की ही भावनाओं को समझते हैं. और सही तरीके से उन्हें समझाते हैं.

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अगर आप भी 40 के बाद माँ बनना चाहती हैं तो इन बातों का रखें ध्यान… 

जाने कितना सुरक्षित है 40 की उम्र में गर्भ धारण करना


पहले के समय में ज्यादातर महिलाएं 30 से 35 की उम्र में बच्चे को जन्म दे देती थी. उस समय लोग भी 35 की उम्र से पहले गर्भवती होने की सलाह देते थे. लेकिन आज समय बदल चुका है. आज  ज्यादातर महिलाएं अपने करियर के चलते लेट प्रेगनेंसी की ओर रुख कर रही हैं. क्योंकि वो महिलाएं उससे पहले प्रेग्नेंसी के लिए तैयार नहीं होती हैं. और ये उनकी अपनी पर्सनल चॉव्इस है. उम्र आपकी प्रजनन क्षमता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. अपने देखा होगा की बहुत से महिलाएं 40 की उम्र में भी बिल्कुल स्वस्थ गर्भधारण कर लेती है. और एक हेल्दी बच्चे को जन्म देती है. तो अगर आप भी 40 साल की उम्र प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही हैं तो आपको इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

हेल्थ चेकअप: अगर आप भी 40 की उम्र में कंसीव करने की सोच रहे है. तो इसे पहले आपको कुछ हेल्थ चेकअप्स करा लेने चाहिए, जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थाइरॉइड आदि. और अगर आपको पहले से किसी भी तरह की कोई प्रॉब्लम है या आपका उपचार चल रहा है. तो इसके बारे में आपको अपनी गाइनेकोलॉजिट्स को जरूर बताना चाहिए.

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जेनेटिक काउंसलिंग: कंसीव करने से पहले ये बेहद जरूरी है कि आप अपने पति के साथ जेनेटिक काउंसलिंग सेशन करा ले. इससे डॉक्टर को ये जाने में आसानी होती है कि आपके पति को या परिवार के किसी सदस्य को ऐसी बीमारी तो नहीं, जिसका जेनेटिक तौर पर बच्चे को होने का खतरा हो सकता है.

STI की जांच कराएं: बेबी कंसीव करने से पहले आपको अपनी और अपने पति की सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज का टेस्ट जरूर करना चाहिए. ये बीमारी यौन संबंध बनाते वक्त एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है. इसलिए आपको कंसीव करने से पहले STI टेस्ट जरूरी करना चाहिए.

PAP टेस्ट: बेबी कंसीव करने से पहले PAP स्मीयर टेस्ट कराएं. महिलाओं में ये टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की जांच करने के लिए कराया जाता है. इसके साथ ही महिलाओं में गांठ या असामान्यता का पता लगाने के लिए डॉक्टर ब्रेस्ट एग्जामिनेशन भी करने की सलाह देते है.

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अपने सपनों के घर का कुछ इस तरह करें डेकोर, घर से आएगी पॉजिटिविटी

घर को डेकोर करने के बेस्ट 5 टिप्स


घर वो जगह है जहा न सिर्फ आपके परिवार वाले रहते है बल्कि वहा आपका दिल, दिमाग, सपने और सोल सभी चीजे होती है। घर वो जगह होती है जहा आप दुनिया भर की टेंशन भूल कर आराम से पॉजिटिव वाइब्स के साथ रहते है। हजारों चीजों की टेंशन होने के बाद भी आपको वहा पर एक अलग तरह का सुकून मिलता है। इसलिए आपको अपने घर को अच्छी तहर साफ सूत्र रखना चाहिए जिससे घर पर पॉजिटिव वाइब्स आऐ। तो चलिए आज हम आपको बताते है घर को डेकोर करने के तरीके जिसे घर पर पॉजिटिविटी आएगी।

मिरर: आप अपने घर के डेकोरेशन में मिरर का इस्तमाल कर सकते है अगर आप अपने घर पर मिरर को सही जगह पर लागते है तो इससे घर पर स्पेस अधिक दिखता है। साथ ही मिरर वॉल डेकोरेशन के फोकल पॉइंट के तौर पर भी काम करता है। इतना ही नहीं मिरर घर पर लाइट को बढ़ाने में मदद करता है। जिसे आपका मूड अच्छा रहता है और आपको पॉजिटिविटी आती है।

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लाइब्रेरी: आज कल लोगो की लाइफ इतनी भाग दौड़ भरी हो गए है कि उनके पास खुद के लिए भी समय नहीं होता। जिसके कारण वो बहार से घर की डेकोरेशन के लिए कुछ नहीं ला पाते। लेकिन बुक ऐसी चीज होती है जो सभी लोगों के घर पर आसानी से मिल जाती है और ज्यादा तर लोगों को बुक पड़ना भी पसंद होता है जिसके कारण वो अपने घर पर तरह तरह की बुक रखते है। आप चाहो तो उन बुक्स को डेकोरेशन में भी यूज़ कर सकते हो। आप अपने घर पर एक बुक शेल्फ रख सकते है जो अधिक स्पेस नहीं लेगी और घर को भी अच्छी तरह डेकोर करने में आपकी सहायत करेगी।

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लाइटर और प्लेफुल कलर टोन: लाइट कलर्स घर में एनर्जी का सोर्स होते है। साथ ही लाइट कलर्स से घर खुला खुला सा लगता है। आप चाहो तो हल्के फर्नीचर और एक्सेसरीज़ के साथ अपने लाउंजिंग स्पेस की डेकोरेशन कर सकते है।

घर को ऑर्गेनाइज़ रखे: अगर आप भी अपने घर को ऑर्गेनाइज़ रखते है तो यह आपको आपके घर में पॉजिटिव वाइब्स देगा। इससे आपका दिमाग शांत रहेगा और आपको आपके घर पर अधिक स्पेस और फ्रीडम महसूस होगी। अगर आप अपने घर के स्पेस को सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहते है तो आप मल्टी-यूज़ेबल फर्नीचर ट्राय कर सकते है।

घर की साफ़ सफाई: घर की डेकोरेशन के लिए भले आप लाखों रुपए लगा दो। परन्तु अगर आपका घर साफ नहीं होगा तो सारी डेकोरेशन धरी की धरी रह जाएगी। क्योकि घर को साफ़ रखने से जो पॉजिटिव एनर्जी और वाइब्स आती है वो किसी और चीज से नहीं आ सकती इसलिए सबसे पहले आपअपने घर को साफ रखें।

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Father Day Special: क्यों मनाया जाता है फादर्स डे, जाने इसका इतिहास

कैसे शुरुआत हुई थी फादर्स डे की


Father’s Day 2020: माता-पिता का कोई एक दिन नहीं होता बल्कि माता-पिता से ही हर दिन होता है लेकिन क्या आपको पता है हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। इस साल 21 जून को ‘योग दिवस’ के साथ साथ फादर्स डे भी मनाया जायेगा। फादर्स डे की शुरुआत अनिधिकृत रूप से 1907 में की गयी थी। जबकि पहली बार आधिकारिक रूप से 1910 में फादर्स डे मनाया गया था। फादर्स डे मानाने का मुख्य कारण पिता के कर्तव्यों के निर्वहन के लिए उनक प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करना है। क्या आप फादर्स डे का इतिहास जानते है।

फादर्स डे का इतिहास

क्या आपको पता है फादर्स डे की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। फादर्स डे मनाने की प्रेरणा साल 1909 में मदर्स डे से ही मिली थी। फादर्स डे की शुरुआत वॉशिंगटन की सोनेरा डोड ने की थी। सोनेरा की माँ बचपन में मर गयी थी तो सोनेरा डोड के पिता ने अकेले उनकी परवरिश की थी। विलियम स्मार्ट ने सोनेरा डोड को मां की कमी कभी खलने नहीं दी। जब सोनेरा बड़ी हुई, तो उन्होंने मदर्स डे की तरह फादर्स डे मनाने पर बल दिया। वॉशिंगटन के स्पोकेन शहर में सोनोरा डॉड ने अपने पिता की याद में इस दिन की शुरुआत की थी। साल 1909 में वॉशिंगटन के स्पोकेन के ओल्ड सेंटेनरी प्रेस्बिटेरियन चर्च में मदर्स डे पर उपदेश दिया जा रहा था, जिसके बाद डोड को लगा कि मदर्स डे की ही तरह फादर्स डे भी मनाया जाना चाहिए।

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पिता का जीवन में महत्व

ये बात तो सभी लोगों को पता है कि जिन लोगों के सर पर माता-पिता का साया होता है वो बहुत खुशनसीब होते है। माँ की तरह हमारे जीवन में पिता का भी बहुत महत्व होता है। अगर माँ हमारी जन्मदाता है तो दूसरी तरफ पिता हमारे पालनहार है। कोई भी पिता भले ऊपर से कितना ही सख्त क्यों न दिखे ,लेकिन अंदर से वो अपने बच्चों के प्रति नर्म होते है। शायद इस लिए ही पिता को नारियल की तरह कहा जाता है। एक पिता अपने बच्चों के भविष्य को बनाने के लिए अपने सपनों और ख्वाहिशों को भी भूल जाता है वो सब कुछ करने को तैयार हो जाता है। एक पिता के महत्व को कुछ शब्दों में कभी बयां नहीं किया जा सकता।

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