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क्या है वो परिवार के नियम जो कभी भूलने नहीं चाहिए

परिवार के नियम


कार्यक्षेत्र से लेकर जिंदगी में हर जगह कुछ नियम होते है। उसी प्रकार हर घर के भी कुक नियम और कानून होते है। किस समय तक घर वापिस आना है, कब कैसे और क्या करना है ये सब चीज़े हम कुछ सोच समझ कर करते है। पर कुछ नियम ऐसे होते है जो ना तो कहीं लिखे जाते है और ना कभी बताए जाते है। ये होते है परिवार के नियम । इन्हें हम समय और अक्ल के साथ साथ सीखते है।

जानते है कि क्या होते है वो नियम :-

    1. दिन के किसी भी एक वक़्त खाना साथ में बैठ कर खाए। इस व्यस्त जीवन में परिवार के लिए समय निकालने का इससे बेहतर तरीका कुछ नहीं हो सकता है।
    2. आप एक दूसरे से जो वादे करे उससे बिना भूले पूरा करे। कभी भी परिवार में किसी को भी किया कोई भी वादा तोड़े नही। परिवार में हर व्यक्ति एक दूसरे से ही उम्मीद करता है। वो किसी बाहर वाले से उम्मीद नहीं करते।
परिवार का नियम
    1. कभी परिवार वालो का भरोसा ना तोड़े। आप का परिवार आप पर बहुत ज़्यादा भरोसा करता है। कभी कुछ ऐसा ना करे जिससे आपका परिवार शर्मिदा हो या आपके परिवार का आप पर से भरोसा ख़त्म हो जाए।
    2. परिवार में सब की इज़्ज़त करे। भले ही आपको वो व्यक्ति पसंद हो या नहीं हो, आप कभी किसी किसी को बेइज़्ज़त नहीं कर सकते। आपको सदैव सबकी इज़्ज़त करनी है भले ही आप उनको नापसंद भी क्यों ना करते हो।
    3. हमेशा सच का साथ दे। परिवार में अक्सर ऐसे मौके आते है जब आपको सही और गलत में चुनना पड़ता है। और उसी में अक्सर हम उनका साथ देते है जिन पर हम ज़्यादा भरोसा करते है फिर चाहे वो गलत क्यों ना हो। पर हमें हमेशा सच और सही का साथ देना चाहिए।
परिवार होता है ख़ास
  1. सबके साथ हमेशा विनम्र रहे। फिर चाहे परिवार के लोग कैसे हो। एक परिवार के हो कर भी हर व्यक्ति का व्यक्तित्व अलग होता है। हमेशा सबके साथ विनम्र रहे और सभी को अपनाए। हर व्यक्ति के भिन्नता को कबूल करे।
  2. सुख दुख में हमेशा साथ रहे। कहते है कि परिवार की एक व्यक्ति की ताकत होता है और परिवार ही हर समय हमारा सहारा बनता है। उसी प्रकार हमे भी अपने परिवार का सहारा बनना है।

परिवार से ज़्यादा ख़ास और ज़रूरी कोई और नहीं होता। परिवार के नियम हम समय के साथ अपने आप सीख जाते है। ज़रूरी है परिवार की एहमियत को समझना और इन्ही नियमो को समझ कर उनका पालन करना।

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क्या आप समझते है दोस्ती का महत्व

दोस्ती का महत्व


हमारे जन्म होने से ही हम अपनी ज़िन्दगी की शुरुआत कई रिश्तों से करते है। किसी के बच्चे होते है, किसी के पोता/पोती या भांजा/भतीजी। पर इन सभी रिश्ते से पहले हमारे माता पिता के साथ शुरू होती ही हमारी दोस्ती की शुरुआत। वो सिर्फ हमारे माता पिता नहीं होते पर वो हमारे दोस्त भी होते है। बड़े होने पर जब हम स्कूल जाते है तब भी हम कई दोस्त बनाते है। ये दोस्त बनाने का सिलसिला ज़िन्दगी के अंत तक चलता है। दोस्त और दोस्ती का महत्व समझना बहुत ज़रूरी है।

सच्ची दोस्ती

किसी रिश्ते का महत्व हम जब तक नहीं समझेंगे तब तक हम कभी उस व्यक्ति और उस रिश्ते को इज़्ज़त नहीं दे पाएँगे।दोस्ती बहुत ही प्यारा रिश्ता होता है। हमारा दोस्त हमें परिवार की तरह समझता है। कब एक दोस्त परिवार का हिस्सा बन जाता है किसी को आता भी नहीं चलता। खुशनसीब होते है वो जिनको सच्चे दोस्त बहुत जल्द मिल जाते है। वरना अक्सर ये होता है कि हम मतलब और स्वार्थ का नकाब ओढ़े लोग दोस्ती का मज़ाक बना देते है।

यहाँ पढ़ें : बातें जो आपके बॉयफ़्रेंड को नही होंगी पसंद

सच्चे दोस्त वो होते है जो हर मुश्किल में आपका साथ देते हैं। वक़्त जैसा भी हो वो हमेशा आपके साथ खड़े होते है। आपको समझते है और आपको किसी भी बात के लिए दोषी ठहराने की बजाए आपकी हर स्तिथि को समझते है। आपको सही गलत के बारे में बताते है। माँ की तरह प्यार करते है, पिता की तरह डाँटते है और फिर भाई बहन की तरह मज़ा करते है।आपका परिवार आपका दोस्त होता है और आपका दोस्त आपका परिवार। तभी हर समय में वो आपके साथ खड़े होते है।

परिवार का हिस्सा होते है दोस्त

सच्ची दोस्ती का महत्व उतना ही है जितना ज़िन्दगी जीने के लिए खाने की। खाना खाएं बिना आपके शरीर को ताकत नहीं मिलती और सच्ची दोस्ती के बिना आपकी आत्मा को ताकत नहीं मिलती। एक अच्छा और सच्चा दोस्त किसी भी रूप में मिल सकता है। अगर कोई और नही तो आपकी माँ या आपके पिता या आपके भाई/ बहन भी सच्चे दोस्त का किरदार निभा सकते है। वो आपको दोस्ती का महत्व भी समझा सकते है।

भाग्यशाली होते है वो जो ऐसे दोस्तों को समझ और परख कर, उन्हें हमेशा अपने ज़िन्दगी में संजो कर रखते है। उनके साथ पुरानी यादें भी मीठी होती है और भविष्य के ईरादे भी मज़बूत होते है। एक अच्छा और सच्चा दोस्त मिलना बहुत मुश्किल होता है। अगर आपके पास ऐसा कोई है जो आपकी कमियों के बावजूद भी आपके साथ खड़ा होता है तो उसे कभी ना खोये। ऐसे लोग बहुत ही मुश्किल से मिलते है।

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कैसे घरों के बदलते माहौल से होते है बच्चे प्रभावित

घरों में बच्चे प्रभावित होते हैं इन बातों से


यह तो हम सभी जानते हैं की कैसे आजकल घरों मे माहौल बदलता जा रहा है। लोगों की व्यस्त जीवन शैली ने उन्ही के घर के बच्चों पर प्रभाव डाला है। आजकल के बच्चे पहले जैसे बच्चो के समान नहीं हैं। अब उनकी आदतों में काफी परिवर्तन आये  हैं। माना कि परिवर्तन इस संसार कस नियम है परंतु क्या इतना बदलाव सही है?

आजकल घर में सभी लोगों के पास स्मार्टफोन होते हैं जिसमे सभी सदस्य दिन भर आँख गढ़ाकर बैठे रहते हैं और अपना समय छोटे बच्चो के साथ व्यतीत करने की जगह वे सारा समय फोन पर बर्बाद कर देते हैं। इससे बच्चे माता पिता से दूर होने लगते हैं और अपनी दुनिया अपने ही ख्यालों में कही बना लेते हैं। कई बार वे चजड़चिढे भी हो जाते हैं क्योंकि उन्हें उनका समय नही मिल पाता।

यह देखा गया है की बच्चे अधिकतर अपने माता पिता से फ़ोन मांगने की ज़िद करते हैं। जब वे ऐसा करते हैं तब माता पिता को भी गुस्सा आता है परंतु सोचने की बात यह है की ऐसी परिस्थिति उत्पन्न ही क्यों होती है जिसमे बच्चे भी फोन लेने की ज़िद करें। इसका उत्तर यह है कि सभी सदस्य उनकी आँखों के सामने ही फोन इस्तेमाल करते हैं जिससे उन्हें भी फ़ोन में गेम खेलने का या उसे चलाने का मन करने लगता है।

यहाँ पढ़ें : क्या होता है जब माँ का अंधविश्वासों पर भरोसा ज़्यादा होता है

यह ज़्यादा समय पहले की बात नहीं है जब पड़ोस के सभी बच्चे मिलकर खेला करते है। उनके खेल में उल्लास की सीमा ही नही होती थी। अपने कपास जैसे कोमल पैरो से एक छत से दूसरी छत पर बच्चे कूदते दिख जाते है। ये बचपन की सुन्दर यादें थी और अब, अब बच्चो को घरों में मूंदकर रखा जाता है जिससे उनका विकास उतने अच्छे तरीके से नहीं हो पाता।

बच्चों की मासूमियत अब कही खोकर रह गयी है। तमीज़ और तहज़ीब के नाम पर उनपर बड़े होने का बोझ डाल दिया जाता है। एक 5 या 6 साल के बच्चे से बड़ों की तरह पेश आने की उम्मीद कैसे रख सकते हैं। परंतु कुछ परिवार अब ऐसे है जो बच्चों से ऐसी उम्मीद रखते हैं।

घरों में माहौल के परिवर्तन के साथ साथ केवल रहन सहन में परिवर्तन नही आया है , इसके साथ साथ  उनके खाने की आदतों में भी परिवर्तन आये हैं। अब वे जंक फूड ज़्यादा खाना पसंद करते हैं। जिससे उनको सही पोषण नहीं मिल पाता है और इससे उनका स्वास्थ्य का नुक्सान होता है।

आने वाली पीढ़ियों में अधिक अहँकार का भाव होता है क्योंकि उन्हें उनके माता पिता से कम समय मिलता है जिससे उन्हें सही संस्कार नहीं मिल पाते। भारतिय संस्कारों के अनुसार तो व्यक्ति को सादा जीवन जीना चाहये क्योकि इसी से मनुष्य का व्यक्तित्व सुन्दर बनता है।

आजकल के बच्चे बहुत अड़ियल हो गए हैं इसका कारण भी शायद यही है की उन्हें उनके माता पिता का प्रेम नहीं मिलता ओर धीरे धीरे वे ज़िद्दी होते चले जाते हैं। ऐसे बच्चों की बिगड़ने की संभावना ज़्यादा होती है। और इसका प्रभाव उनके माता पिता पर ही पड़ता है।

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जानिए क्या होती है घर के बुजुर्गों की उम्मीदें

घर के बुजुर्गों की उम्मीदें


कहते है हम जीवन की शुरुआत और जीवन का अंत अकेले करते है। हम ना तो किसी से के साथ आते है और ना ही किसी के साथ जाते है। पर माना जाता है कि जब हम जन्म लेते है तब दुनिया के किसी कोने में कोई व्यक्ति जन्म लेता है और उसी प्रकार जब हम मरते है तब भी दुनिया के किसी कोने में कोई आखरी साँसे ले रहा होता है। शायद तभी हमें एक परिवार मिलता है जो इस अकेलेपन को दूर करने में मदद कर सके। और शायद यही कारण होता है कि हमारे घर के बुजुर्गों की उम्मीदें अपने परिवार से ज़्यादा होती है।

बुढ़ापा एक ऐसा दौर है जहाँ लोग बहुत ही लाचार हो जाते है। उनके पास ना ही कुछ करने की क्षमता होती है और ना हिम्मत। बिमारी, कमज़ोरी और उम्र के जाल में फंसे ये सभी लोग चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते। उनकी खुशियाँ उनके परिवार के साथ होती है। उनका पूरा दिन हमारी इंतज़ार में निकल जाता है। अपने परिवार से ही घर के बुजुर्गों की उम्मीदें होती है।

बुज़ुर्गो की होती है उम्मीदें

जानते है कि उनकी उम्मीदे क्या होती है:

  • समय

हम समय की कमी के लिए परेशान होते है और वो हमारे थोड़े से समय की उम्मीद होती है। समय ऐसी चीज़ होती है जो उनके पास बहुत ज़याद होता है और उनके परिवार के पास बिलकुल नहीं होता। वो बस इसी चीज़ की उम्मीद करते है कि उनका परिवार उनके साथ कुछ समय बिताए। उनके साथ बैठ कर कुछ बाते करे।

यहाँ पढ़ें : क्यों माँ के बिना ज़िन्दगी होती हैं मुश्किल

  • पालन

अक्सर ऐसा होता है कि हम जाने अनजाने में घर के बड़े बुजुर्गों की बातों को सुन के अनसुना कर देते है। वो कोई काम हमे बोलते रह जाते है पर हम वो अपनी ज़रूरत और ऊनी सुविधा अनुसार करते है। हम ये सोचते ही नहीं की उन्हें उस चीज़ की ज़रूरत हो सकती है। हम उनके आदेशों का पालन ही नहीं कर पाते।

प्यार और इज़्ज़त की करते है उम्मीद
  • ज़रूरत

हर व्यक्ति की तरह, बुज़ुर्गो की भी कुछ ज़रूरते होती हैं। अपनी व्यस्त दिनचर्या में हम ये देख और समझ ही नही पाते की हम उनकी ज़रूरतों और इच्छाओं को नज़रअंदाज़ कर रहे है। वो कुछ ज़्यादा नही चाहते, वो बस यही चाहते हैं कि हम उनको उनकी ज़रूरत की चीजो की कमी ना होने दें।

  • इज़्ज़त

घर के बुज़ुर्गो ने ही सब को इस काबिल बनाया है कि वो अपने पैरों पर खड़ा हो कर, इज़्ज़त और शौहरत कमा सके। पर हम इज़्ज़त कमाने में इतना व्यस्त हो जाते है कि हम भूल ही जाते है कि अपने परिवार के बुज़ुर्गो की इज़्ज़त करना भूल जाते है। हम ये भूल जाते है कि इज़्ज़त और प्यार का महत्व हमे इन्होंने ही सिखाया था।

लोगो की उम्मीदों पर खरा उतरने की इस दौड़ में हम अपने नींव से इतनी आगे निकल आये है कि अब पीछे मुड़ कर देखने का हम सोचते भी नहीं है। अपने परिवार की इज़्ज़त करना सीखें, उन्हें वही समय और प्यार दे जो उन्होंने आपको दिया है। उनकी जीवन हर समय आप ही के आस पास रही है। खुद को उनसे दूर ना करे।

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क्या आप जानते हैं कौन है आपकी ज़िन्दगी के ख़ास लोग

ज़िन्दगी के ख़ास लोग


हमारी एक जिंदगी में ना जाने हम कितने लोगों से मिलते है। और हम में से अधिकतर लोग ऐसे होते हैं जो हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी में एक ख़ास जगह दे देते हैं। हर किसी पर बहुत ही आसानी से भरोसा कर लेते हैं और फिर जब भरोसा टूटता है, तो फिर जिंदगी के हर व्यक्ति से मुंह फेर कर बैठ जाते हैं। हम ये समझ ही नहीं पाते कि वह कौन लोग हैं जो हमारी जिंदगी के खास लोग हैं। हमारे लिए इन खास लोगों में और बाकी आम लोगों में फर्क करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। जिसको खास समझना चाहिए उस को समझते नहीं और जो कुछ समय के लिए जिंदगी में होता है उसको खास समझ बैठते हैं।

तो जानते हैं कि कौन होते हैं हमारी जिंदगी के खास लोग:-

  1. माँ

माँ वह होती है, जिसने हमें 9 महीने तक अपने अंदर पाला होता है। बिना किसी शिकायत के हर दर्द सहा होता है। हमारी हर अनकही बात को समझ जाती है। हमारे हर दर्द या हर परेशानी के लिए उसके पास एक सुझाव या उत्तर जरूर होता है। वह हमारी दोस्त, हमारी टीचर और हमारी माँ सभी का किरदार निभाती है।

ज़िन्दगी के ख़ास लोग

यहाँ पढ़ें : कैसे रहें ख़ुश, स्थिर, और सकारात्मक

  1. पिता

हमारे पिता हमारे लिए ना जाने कितने कष्ट उठाते है। दिन रात एक कर के, इतनी मेहनत करते हैं वह भी सिर्फ हमारी खुशी के लिए। पिता एक ऐसा दोस्त होता है, जो शायद अपने भावों को लफ्जों के द्वारा बयान ना करता है पर वह हमारी खुशी और हमारी सफलता की परवाह सबसे ज्यादा करता है।

  1. भाई-बहन

भाई बहन तो बचपन के दोस्त होते है, जिनके साथ हम हर अच्छी बुरी कहानी जीते हैं। वह हमें हर चीज के लिए प्रेरित करते हैं। हर चीज में हमारा साथ देते हैं। और हम चाहे जितना भी झगड़ा कर लें, हमें पता होता है की वह सदैव हमारे साथ रहेंगे। और हम हर छोटी बडी बात अपने भाई बहन के साथ शेयर कर सकते हैं, उन पर भरोसा कर सकते हैं।

  1. दोस्त

माता-पिता और भाई-बहन, यह सभी हमारे दोस्त होते हैं। पर कुछ दोस्त ऐसे होते हैं जो हमें अपने परिवार से बाहर मिलते हैं। ऐसे दोस्त जिंदगी भर आपके साथ रहते हैं। परिवार की ही तरह ऐसे सच्चे दोस्त हर कठिन समय में आपके साथ होते हैं। और सच्चे दोस्त का पता भी कठिन समय में ही लगता है।

परिवार दोस्त और दोस्त परिवार होता है।
  1. साथी

हम जिस व्यक्ति से सबसे ज्यादा प्यार करते हैं उनसे हम बहुत कुछ सीखते हैं और चाहे हो पहला प्यार क्यों न हो। हम जिसके साथ ज़िन्दगी बिताने का फैसला करते है, वो हर पल हमारे साथ रहता है। हर कठिन और अच्छे समय में वो आपके साथ खड़े होते है।

  1. बच्चे

आपके बच्चे आपका ही हिस्सा होते है। वो आपको सही मायनों में पूरा करते है। आप उनसे एक नई ज़िन्दगी की शुरुआत करते हो। उन्ही के साथ, उन्ही के ढंग से आप बहुत सी नई चीज़े सीखते हो। वो आपको, खुद से पहले दुसरो को प्यार करना सीखाते है।

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क्या आप कर रहे है अपने बच्चों से सही ढंग से बात

बच्चों से सही ढंग से बात करें


बच्चे बहुत ही नासमझ होते है। ये बच्चे सही और गलत में फर्क नहीं समझ पाते और उन को कुछ बाते समझाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। वह यह समझ नहीं पाते की उनको कौन सी बात किस ढंग से कही जा रही है इसलिए कई बार वो छोटी-छोटी बातों का बहुत बुरा मान जाते हैं। यही छोटी बातें उनके दिल में बैठ जाती है, जो हमेशा के लिए उन पर एक गलत छाप छोड़ देती है। हमारी कुछ बातें हैं जो शायद हमारे लिए सही हो, वह उन्हीं बातों को गलत ढंग से समझते हैं, इसलिए जब भी बच्चों को कुछ भी बोलें तो याद रखें कि वह गुस्से में आकर गलत ना हो। आप जब भी बात करें तो बच्चों से सही ढंग से बात करें।

उन्हें समझने की कोशिश करे
  • उन्हें कभी रोने से ना रोके

अगर आप उन्हें रोने से रोकेंगे या आप उन्हें उनकी भावनाओ को व्यक्त नहीं करने देंगे, तो उन्हे लगेगा कि ऐसा करना गलत होता है। और वह जिंदगी भर अपनी भावनाएं हर किसी से छुपाते रहेंगे। उनको रोके नहीं, बस उनको सांत्वना दें और भरोसा दिलाएं की यह गलत नहीं है और आप हमेशा उनके साथ है।

यहाँ पढ़ें : जानिए की क्यों बच्चे होते है ख़ास

  • उनको गलत न बता कर, सही बात बताए

अगर आप बच्चों को उनकी गलतियों के लिए डांटते रहेंगे तो उन्हे लगेगा कि वह हर चीज गलत करते है। ऐसे में वह कुछ भी नया करने की कोशिश नहीं कर पाएंगे। और जब तक कोई गलती नहीं करता तब तक कोई कुछ सीखता नहीं है। इसलिए बच्चों को यह ना बताएं कि उन्होंने क्या गलत किया, बल्कि उन्हें यह बताएं कि क्या सही चीज है।

उन्हे प्यार से समझाए
  • उनकी बात सुने

जिस तरह आप चाहते हैं कि बच्चे आपकी बात बच्च सुने और समझे उसी तरह बच्चे चाहते हैं कि आप भी उनकी बात को सुनकर उन्हें समझने की कोशिश करें। उन्हें बिना किसी बात के डांटने से पहले उनसे पूछे कि उन्होंने वो कदम क्यों उठाया। उनका हिस्सा जानना और सुनना बहुत जरूरी है।

बच्चों को समझना और समझाना थोड़ा मुश्किल होता है। पर अगर आप प्यार से उनसे बात करे और उन्हें सही ढंग से बाते समझाए तो वो आपको समझेंगे और आपकी बातों का पालन भी करेंगे।

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जानिए बच्चो के लिए क्यों ख़ास होते है दादा-दादी

क्या ख़ास होते है दादा-दादी


किसी भी घर में बड़े बुजुर्गों का होना अपने आप में बहुत ही ख़ास होता है। उनकी छाया और उनका आशीर्वाद ही हम सभी के लिए बहुत ज़रूरी होता है। उनकी छत्रछाया और उनकी परवरिश में बड़े होना किसी भी बच्चे का सौभाग्य होता। यही नहीं, बच्चे अपने दादा दादी से बहुत कुछ सीखते है। माता पिता की अनुपस्थिति में बच्चे अपने दादा दादी के साथ रहे, तो उनके लिए ये एक पूरा अलग एहसास होता है। भाग्यशाली होते है वो, जो अपने दादा-दादी के साथ रहते है। इसलिए बच्चो के लिए बहुत ही ख़ास होते है दादा-दादी ।

जानिए की क्यों ख़ास होते है दादा-दादी :-

  • वो कभी किसी चीज के लिए मना नहीं करते

हम उनके साथ रह गए जो करना चाहे वह कर सकते हैं। वह हमें कभी किसी चीज के नहीं रोकते हैं। वो हमें खेलने देते हैं, ज्यादा देर के लिए सोने देते हैं, जो खाना चाहे वह खाने देते हैं और शरारत करने पर डांटते भी नहीं है।

यहाँ पढ़ें : कैसा होता है अपने घर से दूर विदेश में रहना

  • वो हमें समझते है

अक्सर ऐसा होता है कि, हमे हमारे माता पिता से ज़्यादा हमारे, दादा-दादी हमे समझते है। वो हमें बहुत ही अच्छी और बहुत फायदेमंद सलाह देते है। क्योंकि वो हमें और हमारी अवस्था को समझते है, इसलिए वो कोई शिकायत भी नहीं करते।

  • हमे माँ पापा की डाँट से बचाते है

ये तो हम सभी बच्चो के का मनपसंद है। हमारे लिए दादा दादी सबसे प्यारे इसलिए होते है क्योंकि वो हमे माँ पापा के गुस्से और डाँट से बचाते है। वो हमेशा हमारा साथ देते है। चाहे जो हो जाए वो हर बार माँ पापा के गुस्से से हमे बचाते है।

  • वो हमे प्यार करना सीखाते है

हमारे लिए उनका बेशुमार प्यार, हमे प्यार का महत्व और उसकी कद्र करना सिखाता है। प्यार बहुत ही बड़ी चीज़ होती है। और इस भावना को महसूस करना और इस को समझना, हमारे दादा दादी कितनी आसानी से सीखा देते है।

  • हमे अच्छी चीज़े देते है

सीख और समझ से हट कर, हमारे दादा दादी हमे अच्छा खाना, अच्छे तोहफे और अच्छे कपड़े देते है। उनका प्यार उनके हर चीज़ में झलकता है। उनको हमारी पसंद और हमारी नापसंद के बारे में सब पता होता है। और वो उसी हिसाब से हमे बहुत सारी चीज़े भी देते है।

दादा दादी एक बहुत ही अहम किरदार निभाते है। जितने ख़ास वो हमारे लिए होते है, उतने ही खास उनके लिए हम होते है। उन लोगो के लिए ये बेहद खुशी की और ख़ास बात इसलिए होती है क्योंकि वो अपने बच्चो के बच्चो के साथ समय बिता पाते है। एक नई पीढ़ी को शुरू होते देख पाते है।

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विज्ञान

पश्चिमी घाट पर मेंढकों की 2 नई टरटराती प्रजातियाँ

प्रोफ़ेस्सेर सत्यभामा दास बीजू ने की मेंढकों की 2 ओर प्रजाति की खोज


प्रफ़ेसर सत्यभामा दास बीजू जो स्थल-जलचर जीव विज्ञानी हैं जिन्हें “फ़्रॉगमैन ऑफ इंडिया” की उपाधि दी गयी है, उन्होंने मेंढकों की 2 नई प्रजाति की खोज की है। इसी के साथ उनकी 80 खोज पूरी हो चुकी हैं। इनकी सबसे पहली खोज साल 2003 में सभी के सामने आई। इनकी सबसे नई खोज केरल और कर्नाटक में की गयी। जो प्रजाति केरल में पायी गई उसे रॉकी टेरैन लीपिंग फ़्रॉग (indirana paramakri) नाम दिआ गया और कर्नाटक में मिली प्रजाति को भद्रा लीपिंग फ़्रॉग (indirana bhadrai) नाम दिआ गया।

मेढ़क, प्रतीकात्मक तस्वीर

पश्चिमी घाट हमेशा से ही स्थल-जलचर जीवों का संग्रह रहा है। 2014 में प्रफ़ेसर सत्यभामा दास बीजू और उनके साथियों ने यहीं पर 7 प्रजातियों की खोज की थी। 2012 में प्रफ़ेसर एस.डी.बीजू और उनके साथियों ने यहीं पर बिना पैर वाले उभयचरों की खोज की थी जिन्हें सिसेलियन (caecillians) नाम दिआ गया।

Indirana paramakri प्रजाति के मेंढक वयनाड ज़िले के सेट्टूकनु और सुगंधागिरी वन में नदी की धाराओं के पास पड़े गीले पत्थरों पर पाए गए। इन्हें इनके लाल-भूरे रंग और काली धारी से पहचाना जा सकता है। indirana bhadrai का नाम यह इसलिए है क्योंकि यह भद्राई वन्यजीव अभ्यारण्य में पाए गये। इनका रंग हल्के भूरा होता है और उस पर गहरे भूरे रंग के धब्बे होते हैं।

मेंढकों की ये दोनो प्रजाति ranixalidae परिवार की हैं जो मेंढकों के सबसे पुराने 3 परिवारों में से एक है। इस परिवार की आधी से ज़्यादा प्रजातियाँ जिन्हें पहचाना जा सकता है उनकी खोज पिछले 3 सालों में की गयी है। अब इस परिवार के नए सदस्यों की भी खोज की जा चुकी है।

यह खोज ना केवल प्रफ़ेसर सत्यभामा दास बीजू के लिए एक उपलब्धि है बल्कि यह हमारे देश के लिए भी उपलब्धि है की आज भी हमारे देश में स्थल-जलचर या उभयचर जीव लुप्त नही हुए है और इतनी संख्या में हमारे देश के पश्चिमी घाटों में पाए जाते है।

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जानिए कैसे संभाले छोटे बच्चो को

कैसे संभाले छोटे बच्चो को


बच्चे बहुत ही शैतान होते है। और उनकी शैतानियां कभी कभी इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि उनको संभालना बहुत ज़्यादा मुश्किल हो सकता है। आपको उनकी शरारते और मस्तिया चाहे जितनी भी प्यारी लगे, कभी-कभी किसी वजह से आप उन को नहीं संभाल पाते और जो आपको और उस बच्चे, दोनों को परेशान कर देता है। तो इसलिए जाने की कैसे संभाले छोटे बच्चो को:-

  • उनके साथ शाँत रहे।

आपका दिन चाहे जितना भी खराब रहा हो, आपको देख कर बच्चे ज़्यादा उत्साहित हो जाते है और इसी कारण से उनकी मस्तिया और शरारते ज़्यादा बढ़ जाती है। इसलिए उनके साथ शांत रहे।

बच्चे बहुत शरारती होते है

यहाँ पढ़ें : हर रिश्ते के लिए हमे क्यों चाहिए एक खास दिन

  • उन्हें ज़्यादा डाँटे नहीं।

अगर आप उन्हें डांटेंगे तो उन्हें ये लगेगा कि वो कुछ गलत कर रहे है और अगली बार आपके सामने या आपके साथ हँसी मज़ाक करने से डरेंगे। आप उन्हें प्यार से समझाए।

  • कहानियां सुनाए।

कभी अगर ऐसा हो की वो बच्चे आपकी बात ना मान रहे हो, तो उन्हें कहानियां बना के सुनाए। उनको ऐसी रोचक और नयी कहानियां बहुत पसंद आती है। और ना जाने कैसे वो इन बातों में यकीन भी कर लेते है। तो इसलिए उन्हें कहानियो के जरिए समझाए।

  • उनका ध्यान भटकाए।

उन्हें दूसरी चीजो में उलझा कर, उनका ध्यान उनकी पहली हरकत से भटकाए। इससे वो उस नयी चीज़ में उलझ कर रह जाएंगे और आपको परेशान भी नहीं करेंगे।

  • उनके साथ अलग गेम्स खेले।

उनकी शक्ति और क्षमता का सही दिशा में प्रवाह करे। उनके साथ अलग अलग गेम्स खेले। ऐसे खेल जिन में उनकी क्षमता ज़्यादा प्रयोग हो और वो पूरी तरह से उसमे उलझ जाए। ऐसे में वो नयी नयी चीज़े भी सीखेंगे और वो शाँत भी रहेंगे।

  • उन्हें इनाम दे।

उनके अच्छे व्यवहार के लिए उन्हें इनाम दे। इससे उनको पता चलेगा कि उन्होंनो कुछ अच्छा काम किया है। पर इसे उनकी आदत न बनाएं। अगर आप हर बात पर उन्हें इनाम देंगे तो लालची हो जाएंगे। उनकी प्रसंशा करे और उन्हें सही और गलत के बारे में समझाए।

बच्चे हर परिवार की जान होते है। उनकी हँसी से पूरे परिवार में ख़ुशी का और सकरात्मकता का एक माहौल बन जाता है। बच्चे शरारती और मस्तीखोर ज़रूर होते है पर ये उनका स्वभाव होता है। उन्हें शरारत करने से न रोके, पर उन्हें सही और गलत के बारे में बताए।

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जानिए की क्यों बच्चे होते है ख़ास

बच्चे और परिवार


बच्चे परिवार की जान होते है। वो परिवार की सभ्यता और संस्कृति को आगे बढ़ाते है। बच्चा शरारती हो या गंभीर, परिवार की ख़ुशी का कारण वही होते है। अपने माता पिता को चाहे जितना भी परेशान करे ले, वो फिर भी माँ पिता के लिए ज़रूरी होते है।

बच्चों का उत्साह हमें उत्साहित करता है

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जानिए की क्यों बच्चे अपने माता पिता और परिवार के लिए होते है ज़रूरी :-

  1. छोटे बच्चे परिवार में एक जान सी भर देते है। परिवार के वृद्ध लोगो एक नई आशा और उम्मीद की किरण मिल जाती है।
  2. उनके आने से घर में हँसी ख़ुशी का वातावरण बन जाता है। खुशियाँ मानो पूरे परिवार को छाया दे रही हो।
  3. उनकी मासूमियत और शरारते हर किसी को उनकी तरफ आकर्षित करती है।
  4. बच्चो के साथ परिवार का हर व्यक्ति बच्चा बन जाता है। उन सभी में एक अलग तरह का उत्साह होता है
  5. घर और परिवार में सकारात्मकता बढ़ जाती है। उनकी मुस्कान सबका गुस्सा शाँत कर देती है।
  6. उनकी चंचलता सभी का मन मोह लेती है।
  7. उनकी खुशी सबको खुश कर देती है और उनकी तकलीफ सभी को दुखी कर देती है।

बच्चे इस दुनिया के हर छल से दूर होते है। वो बहुत ही साफ़ मन के होते है। तभी उनके होने से परिवार में एक बहुत ही प्यारा और सकारात्मक सा माहौल बन जाता है। तभी बच्चे परिवार के लिए बहुत ही ज़रूरी और ख़ास होते है।

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