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Jharkhand Election 2019: मतदान के बीच हुआ नक्सली हमला, जान-माल का कोई नुकसान नहीं

Jharkhand Election 2019: विकास के स्तर को रोकने के लिए नक्सलियों की चाल, मतदान के बीच उड़ाया पुल


Jharkhand Election 2019: झारखंड विधानसभा के प्रथम चरण के चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है। यहां दोपहर 3 बजे तक मतदान होगा। चुनाव आयोग ने प्रथम चरण में नक्सल प्रभावित इलाकों के होने के कारण मतदान का समय 3 बजे तक रखने का फैसला लिया गया है। यहां नक्सल प्रभावित 6 जिलों की 13 विधानसभा सीटों पर 37,83,055 मतदाता 189 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। सबसे अधिक 28 उम्मीदवार भवनाथपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

गृह मंत्री की अपिल:

गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड के लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है। अमित शाह ने ट्वीट कर कहा है कि, झारखंड को भ्रष्टाचार और नक्सलवाद से मुक्त रखने और यहां विकास की गति को बनाये रखने के लिए एक स्थिर और पूर्ण बहुमत वाली सरकार आवश्यक है। प्रथम चरण के सभी मतदाताओं से अपील करता हूं कि अधिक से अधिक संख्या में मतदान कर झारखंड को विकास के पथ पर आगे बड़ाऐ रखने में योगदान दें।

मतदान के बीच नक्सली हमला:

झारखंड में मतदान के बीच बड़ी खबर आ रही है, गुमला जिले के विष्णुपुर विधानसभा क्षेत्र में नक्सलियों ने मतदान को प्रभावित करने के लिए बड़ा धमाका कर एक पुल को ही उड़ा दिया है। विष्णुपुर विधानसभा क्षेत्र में आज मतदान हो रहा है। हालांकि इस घटना में अबतक किसी के घायल होने की खबर नहीं आई है। गुमला के डिप्टी कमिश्रनर शशि रंजन ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि हमले की वजह से मतदान पर कोई असर नहीं पड़ा है। पुलिस ने इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

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7.12 फीसदी ही हुई है वोटिंग:

झारंखड में मतदान धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। अब तक राज्य में 7.12 फीसदी वोटिंग हो चुकी है। ताजा अपडेट के मुताबिक अब तक लोहरदगा में 11.68 फीसदी, डाल्टेनगंज में 10.07 प्रतिशत, पांकी विधानसभा में 9.02 फीसदी, विश्रामपुर में 9.5 फीसदी वोटिंग हुई है। छतरपुर विधानसभा में अब तक 10.08 फीसदी, हुसैनाबाद में 9.07 फीसदी वोटिंग की खबर है। नक्सल प्रभावित गढ़वा में अब तक 11 फीसदी मतदान हुआ है। वहीं भवनाथपुर में 10 प्रतिशत मतदाता अबतक वोट डाल चुके हैं।

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#MondayMotivation : कैसे महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को स्मृति ईरानी ने दी नई दिशा?

स्मृति ईरानी – मैकडॉनल्ड्स में वेटर की नौकरी करने से लेकर कैबिनेट मिनिस्टर बनने तक का सफ़र 


कहते है हर व्यक्ति का एक अतीत होता है और कुछ लोगों का अतीत ऐसा होता है जो दूसरों के लिए मिसाल बन जाता है। ऐसा ही अतीत रहा है हमारी टेलीविजन की स्टार और “सास भी कभी बहू थी’ की तुलसी यानि स्मृति ईरानी का। जी हाँ, हम बात कर रहे है यूनियन कैबिनेट मिनिस्टर स्मृति ईरानी की जिनका टेलीविज़न से लेकर राजनीति तक का सफर बहुत ही दिलचस्प रहा है।

वेट्रेस से मॉडलिंग और एक्टिंग का सफर 

मॉडलिंग से एक्टिंग और टेलेविज़न इंडस्ट्री की तुलसी राजनीति में अपने पैर ज़मा चुकी हैं। लेकिन क्या आप जानते है वो कभी मैकडॉनल्ड्स में वेटर की नौकरी करती थी। 23 मार्च 1976 को दिल्ली में जन्मी स्मृति ईरानी 3 बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते बचपन से ही समझदार थी। होली चाइल्ड ऑक्जिलियम स्कूल से अपनी स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया। उसके बाद मिस इंडिया कॉम्पिटिशन और 1998 में मिस इंडिया पेजेंट फाइनलिस्ट में अपनी पहचान बनाने के बाद स्मृति ने मीका सिंह के साथ एक एल्बम ‘सावन में लग गई आग’ के गाने ‘बोलियां’ पर परफॉर्म किया। फिर उन्हें छोटे पर्दे पर “सास भी कभी बहू थी” में तुलसी की भूमिका मिली जिसे वो भारतीय महिलाओ के बीच एक प्रसिद्ध चेहरा बन गई।

राजनीति का सफर

एक्टिंग के बाद टीवी ने उन्हें ऐसी पहचान दी जिससे उन्हें राजनीति में एंट्री का मौका मिला और फिर शुरू हुआ उनका राजनीति का सफर जो अभी तक एक सफल दिशा में जा रह है। 2003 में स्मृति ईरानी ने भारतीय जनता पार्टी में आने का फैसला किया। एक साल बाद महाराष्ट्र की यूथ विंग का वाइस प्रेसिडेंट बनकर उन्होंने लोगों का विश्वास जीता। इसी विश्वास के दम पर वो अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में टेक्सटाइल मिनिस्टर के पद पर कार्य कर रही हैं। इससे पहले वो केंद्र में मानव संसाधन मंत्री रह चुकी हैं।

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आने वाले नए साल में इकॉनमी के सामने आने वाली है कई चुनौतियां

भारत की अर्थव्यवस्था सुधरने के लिए नया साल सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण


रोजगार बढ़ाने और करप्शन खत्म करने के नाम पर, मोदी सरकार के लिए 2019 लोकसभा चुनाव से पहले का साल 2018, सबसे चुनौतीपूर्ण साल रहने वाला है। 2019 में मई से पहले चुनाव वाले हैं जिसमें सरकार को देश के विकास पर रिपोर्ट कार्ड वोटरों को दिखाना होगा। पूरा देश अभी भी नोटबंदी और उसके बाद के जीएसटी के शॉक से अभी तक नहीं संभल पाया है। ऐसे में ये देखना काफी दिलचस्प होगा कि क्या 2018 में, मोदी सरकार की अर्थव्यवस्था की स्पीड बढ़ पाएगी?

भारतीय अर्थव्यवस्था

ग्रोथ 7% से कम रहेगी

नोटबंदी से अप्रैल-जून 2017 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5.7 प्रतिशत के साथ तीन साल में सबसे कम देखी गई थी। जुलाई-सितंबर 2017 में मामूली-सा कुछ फर्क आया और रिकवरी के साथ नार्मल प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2003-04 से 2011-12 के बीच जीडीपी ग्रोथ 7% से अधिक रही थी। इसका मतलब यह है कि अर्थव्यवस्था क्षमता के मुताबिक अच्छा ग्रोथ और परफॉर्म नहीं कर पा रही है। वैसे वित्त वर्ष 2018 और 2019 के लिए जो अनुमान आए हैं, उनमें अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ने का दावा किया गया है।

इकनॉमिक रिकवरी जारी रहेगी

एक दशक से अधिक समय में भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाने वाली अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी ‘मूडीज’ का कहना है कि अगले साल मार्च में खत्म होने वाले वित्त वर्ष 2018 में ग्रोथ 7.5 प्रतिशत और 2019 में 7.7 प्रतिशत रहेगी। अमेरिकी बैंक गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि 2018 में ग्रोथ 6.4 प्रतिशत रहेगी, लेकिन अगले वित्त वर्ष में 8 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। वित्त वर्ष 2019 के लिए इन एजेंसियों ने 7.3 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान दिए हैं। इसका मतलब यह है कि साल 2018 में अर्थव्यवस्था की हालत इस साल से कुछ अच्छी रहेगी।

पिछले बुधवार ही सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेने का ऐलान किया था। इससे वित्त वर्ष 2018 में 3.2% के वित्तीय घाटे के लक्ष्य के चूक जाने की आशंका बढ़ गई है। इससे बॉन्ड मार्केट से कर्ज लेना भी महंगा पड़ सकता है। इसका यह भी मतलब है कि रिजर्व बैंक के लिए लोन सस्ता करने की गुंजाइश कम हो जाएगी। कंपनियां लोन सस्ता होने पर निवेश बढ़ाती हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आती है।

बजट
गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कम सीटें मिलने के बाद, बजट के लोक-लुभावन होने की अटकलें लग रही हैं। अगर इसके लिए अगले वित्त वर्ष के वित्तीय घाटा लक्ष्य में बदलाव किया जाता है तो उससे मार्केट पर बुरा असर होगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था

कच्चा तेल
कच्चे तेल की कीमत अभी 66 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। इसके 70 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। अगर ऐसा होता है तो इससे महंगाई दर में बढ़ोतरी होगी और सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ेगा। इससे भी लोन सस्ता करने के मामले में रिजर्व बैंक के हाथ बंध जाएंगे।

राज्यों में चुनाव
नए साल में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित 8 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। इन आगामी चुनावों में BJP के परफॉरमेंस देखने लायक होंगी।

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नोटबंदी को लेकर अरुण जेटली पर राहुल गांधी ने कसा तंज

अर्थव्यवस्था आईसीयू में चली गई है


 

गुजरात में विधानसभा चुनाव की तरीखों का ऐलान होती चुनावी कार्यक्रम शुरु हो गया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने वित्तमंत्री अरुण जेटली की आर्थिक नीतियों को लेकर उन पर निशाना साधा है।

 

 

राहुल गांधी

 
लगातार जेटली की आलोचना कर रहे है राहुल

अमेठी सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट किया डॉ जेटली,नोटबंद और जीएसटी से अर्थव्यवस्था आईसीयू मे हैं। आप किसी से कम नहीं , राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार और वित्त मंत्री की देश की अर्थव्यवस्था को लेकर आलोचना कर रहे है। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनावी रैलियों के दौरान राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा रहें है और लगातार टैक्स बढ़ाए जाने की आलोचना कर रहे हैं। इसको लेकर लगातार दोनों ओर से जुबानी जंग भी देखने को मिल रही है।
नोटबंदी ने आमलोगों को परेशान किया
राहुल गांधी ने सोमवार को गुजरात के गांधीनगर में पीएम मोदी और अरुण जेटली पर बड़ा हमला करते हुए कहा था कि जीएसटी का मतलब ‘गब्बर सिंह टैक्स’ है। जिसका नोटबंदी के बाद बदहाल देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। राहुल गांधी ने कहा कि मोदी ने पिछले साल नोटबंदी को लागू कर देश की जनता को परेशान किया। जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताने वाले राहुल गांधी के बयान पर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जिन लोगों की टूजी स्पेक्ट्रम और कोयला आवंटन घोटालों की आदत है, उन्हें टैक्स देने में परेशानी हो रही है। अब राहुल गांधी ने ट्वीट के जरिए जेटली पर तंज कसा है।

 

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सोनिया गांधी के आवास पर कांग्रेस कमेटी की बैठक, राहुल की ताजपोशी पर होगी चर्चा

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं


गुजरात और हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस अपने रणनीति की तैयारी कर रही है।

आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी की एक बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में कांग्रेस के नए अध्यक्ष बनाने के लेकर चर्चा की जाएंगी।

राहुल गांधी

24 अक्टूबर को हो सकती है ताजपोशी

खबरों की मानें तो 24 अक्टूबर को राहुल गांधी की कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी हो सकती है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी कांग्रेस की पार्टी की सर्वोच्च कमेटी है। पार्टी के संविधान ने इस कमेटी को अध्यक्ष चुनने की शक्ति दी हुई है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी में 10 निर्वचित और 10 नामांकित सदस्य होते हैं।

पिछले एक साल से राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने के चर्चा चल रही थी। बीते साल भी अक्टूबर में राहुल को अध्यक्ष बनाने की खबरों ने खूब सुर्खियां बटोरी थी।

सूत्रों की मानें तो राहुल को अध्यक्ष चुने जाने के लिए किसी तरह की वोटिंग नहीं होगी। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि लगभग सारी राज्य ईकाईयों, यूथ कांग्रेस और महिला मोर्चा आदि पहले ही राहुल को अध्यक्ष बनाने के तैयार है।

लगतर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की चर्चा जा रही थी

राहुल गांधी को 2014 लोकसभा चुनाव से पहले उपाध्यक्ष बनाया गया था। उसके बाद से सोनिया गांधी की तबीयत बार-बार बिगड़ने के चलते राहुल को अध्यक्ष बनाने की मांग उठती रही है.

आपको बता दें इससे पहले पंजाब के गुरुदासपुर में हुए उपचुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। इसके साथ ही डीयू में हुए छात्रसंघ चुनाव के दौरान कांग्रेस की छात्र ईकाई एनएसयूआई की जीत हुई थी। इन्हीं को देखते हुए कांग्रेस आने वाले अपने आप को चुनाव के लिए तैयार करना चाह रही है।

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विपक्ष ने महात्मा गांधी के पोते को उपराष्ट्रपति पद के लिए बनाया उम्मीदवार

नीतीश कुमार को मनाने की तैयारी


राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई को होने वाला है। राष्ट्रपति पद के लिए सत्ता पक्ष से रामनाथ कोविंद उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर विपक्ष की तरफ से दलित कार्ड का खेल खेला गया और पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया गया।

गोपाल कृष्ण गांधी को बनाया गया उम्मीदवार

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के बाद अब बारी है उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार की। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पोते गोपाल कृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है।

गोपाल कृष्ण गांधी

मंगलवार को विपक्ष की बैठक में कुल 18 दल मौजूद थे। कांग्रेस ने गोपाल कृष्ण का नाम ऐलान करने के बाद कुछ समय से नाराज चल रहे नीतीश कुमार को मनाने की कोशिश की है। वहीं दूसरी ओर इस निर्णय से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी साधने की कोशिश की गई है।

पहले राष्ट्रपति की उम्मीदवारी के लिए नाम की चर्चा हुई थी

गौरतलब है कि जिस समय राष्ट्रपति के उम्मीदवार की तलाश चल रही थी तो ममता ने गोपाल कृष्ण के नाम की चर्चा की थी। लेकिन कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों ने मीरा कुमार के मान पर सहमति जताई थी। सोनिया गांधी से कुछ नेताओं ने इस बारे में चर्चा की थी। सोनिया गांधी मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाने के पक्ष में थी।

विपक्ष की तरफ से ममता और लेफ्ट ने गोपाल कृष्ण के नाम की चर्चा की थी। कांग्रेस इसे मान भी गई थी। लेकिन बाद में यह तय हो कि पहले एनडीए को अपने उम्मीदवार की घोषणा करने दी जाएं। उसके बाद ही विपक्ष अपने उम्मीदवार के बारे में बताएंगे। अंत में एनडीए ने दलित उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को उतारा, उसके को देखते हुए विपक्ष ने भी दलित उम्मीदवार मीरा कुमार के नाम की घोषणा कर दी।

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 मून जे इन बने दक्षिण कोरिया ने नए राष्ट्रपति, उत्तर कोरिया से बनाना चाहते हैं अच्छे संबंध

आह्न चेओल सू को हराया


 

उत्तर कोरिया की तानाशाही और दक्षिण कोरिया के साथ बढ़ते तनाव के बीच दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति चुनाव संपन्न हो गया है। दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति ‘मून जे इन’ होगें। इससे पहले 64 वर्षीय मून जे इन राष्ट्रपित चुनाव लड़े थे। तब उन्हें पार्क गून हे ने करारी हारी दी थी।

मून जे इन डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ कोरिया के उम्मीदवार और उदारवादी विचारधारा के उम्मीदवार दें। उन्होंने मध्यमार्गी विचारधारा के आह्न चेओल सू को हराया है।

पूर्व राष्ट्रपति को पद से हटाया गया था

इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति पार्क गून हे को भ्रष्टाचार में लिप्त होने के बाद पद से हट दिया गया था। जिसके बाद दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति चुनाव करवाएं गए।

मून जे  इन


 

मून जे इन उत्तर कोरिया के साथ अच्छे संबंध बनाना चाहते है। लेकिन इससे पहले पार्क गून हे इसके पक्ष में नहीं थे। वह उत्तर कोरिया के साथ संबंध खत्म करना चाहते थे।

चुनाव प्रचार के दौरान बहुमत का दावा करते हुए मून जे इन ने कहा कि पार्क गून हे के राष्ट्रपति पद से हटाने के बाद देश में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो गई। उनके राष्ट्रपति बनने से यह विभाजन मिट सकता है। जबकि राज्यों में चुनाव प्रचार करते हुए आह्न चेओल-सू ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि चुनाव में वो ही जीतेंगे।

व्हाइट हाउस से मिलें मुबारकबाद

दक्षिण कोरिया के चुनाव आयोग के अनुसार मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी के मून को 42.2 प्रतिशत मत का समर्थन किया। जबकि मून के प्रतिद्वंद्वी होंग जून-प्यो को महज 25.2 प्रतिशत मत मिले और आह्न चेओल-सू को 21.5 प्रतिशत मत मिले। होंग ने मून को उत्तर कोरिया समर्थक वामपंथी कहा था। वाशिंगटन से एक रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने मून को जीत के लिए मुबारकबाद दी।

गौरतलब है कि मून की जीत से उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कठोर रुख को जटिलता का सामना पड़ सकता है।

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मिर्जापुर रैली- यह चुनाव कांग्रेस, सपा और बसपा का मुक्ति अवसर है- मोदी

मिर्जापुर रैली के दौरान पीएम ने सपा और बसपा पर जमकर बरसे


यूपी में सातवें और अंतिम चरण के चुनाव के लिए चुनाव प्रचार जोरशोर से किया जा रहा है। सातवें चरण का चुनाव आठ मार्च को होने वाले हैं। अंतिम चुनाव 7 जिलों की 40 सीटों के लिए होगा।

सातवें और अंतिम चरण के चुनाव प्रचार के लिए आज पीएम मोदी ने मिर्जापुर में एक रैली को संबोधित किया। इस चरण के चुनाव में मिर्जापुर की चार विधानसभा सीट शामिल है।

पीएम की रैली में सैंकडो को संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी है। रैली में किसी प्रकार गड़ब़ड़ी न हो इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
रैली के दौरान पीएम ने सपा और बसपा पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि यह चुनाव कांग्रेस, सपा और बसपा का मुक्ति अवसर है। सवाल यह नहीं है कि सरकार किस की बनाएंगे । अखबार टीवी देख लीजिए, हर कोई कह रहा है यूपी का ये चुनाव एक उत्सव है।

रैली को संबोधित करते पीएम मोदी

रैली के दौरान क्या कहा पीएम ने

  • आपने तो कमाल कर दिया है। आज यूपी मे जहां भी जाता हूं। एक से बढ़कर एक रैलियां हो रही है। सारे रिकॉडर्स तोड़ दिए। मतदान में आप रिकॉर्ड तोड़कर रहेंगे।
  • सपा और बसपा दोनों की सरकार प्रदेश में रही है। लगभगण 13 साल पहले बरेली और मिर्जापुर के बीच पुल निर्माण की मुलायम सिंह यादव ने आधारशिला रखी थी। लेकिन वह अभी तक पूरा नहीं हुआ है। लेकिन सीएम तो कहते है कि काम बोलता है।
  • पिता से किया हुआ कोई भी वायदा कभी अधूरा नहीं छोड़ता है। लेकिन यहां तो बेटे ने बाप के इरादों को ही पूरा नहीं किया।
  • अखिलेखजी, मुझे भी काम बताते रहते हैं। वे पीएम है, मैं यहां से सांसद हूं । वे काम बताएं तो मुझे करना ही चाहिए। मुझसे कहा कि तार पकड़कर देखो बिजली जाती है कि नहीं।
  • यहां तो खाट सभा की गई लेकिन लोग तो खाट उठाकर ही ले गए।
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गुरूवार से चलेगा यूपी की सड़क पर ‘समाजवादी विकास रथ’

समाजवादी विकास रथ चुनाव प्रचार के लिए तैयार किया गया है

समाजवादी विकास रथ

अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर हर पार्टी वोटर  को लुभाने में लगी है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री ने अपने कामों के प्रचार करने के लिए एक ‘रथ’ तैयार करवाया है। वो ‘रथ’ बेहद शानदार है। ‘रथ’10 पहियों वाला है। यह रथ  ‘समाजवादी विकास रथ’ है। दरअसल ये रथ मर्सिडीज़ की बस है, जिसे अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदलाव कर ‘चुनावी रथ’ का रूप दिया गया है। उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अगले कई दिनों तक रथ ही घर होगा।

देखो मगर छूओ मत

बता दें, अखिलेश यादव ‘समाजवादी विकास रथ’ में अपने दौरे की शुरुआत गुरुवार से करने वाले है। जब यह  रथ लखनऊ में 5, कालिदास मार्ग स्थित उनके आधिकारिक आवास और कार्यालय पहुंचा तो तुरंत ही आकर्षण का केंद्र बन गया। मगर मीडिया से यह कहा गया, कि आप इस रथ को देख सकते हैं, मगर छू नहीं सकते है।

समाजवादी विकास रथ

रथ की खास बात

इस रथ में एक खास बात यह थी, कि रथ में एक हाइड्रॉलिक लिफ्ट लगाई गई है, जिसकी मदद से अखिलेश यादव को ऊंचा उठाया जा सकता है। जिससे अखिलेश रोड शो और रैलियों में जनता को इस बस में रहकर ही संबोधित कर सकेंगे। ‘समाजवादी विकास रथ’ में हर एक सुविधा दी गई है, जैसे  सीसीटीवी कैमरे, एलसीडी टेलीविज़न, सोफासेट और बिस्तर भी मौजूद है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पिता और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की दो तस्वीरों को बस के पीछे के हिस्से में लगाया गया है। बस की दीवार के एक तरफ एक साथ लोहिया, जनेश्वर और जयप्रकाश नारायण की तस्वीर को जगह मिली है। तो इसी  दीवार पर मुलायम सिंह यादव की भी बड़ी सी तस्वीर मौजूद है। वहीं दूसरी तरफ साइकिल पर सवार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं। इस ओर सिर्फ अखिलेश की अकेली तस्वीर है। जिस तरफ से रथ में जाने के लिए गेट बनाया गया है। मगर सपा के प्रदेश अध्यक्ष और अखिलेश यादव के चाचा  शिवपाल यादव का चेहरा इस रथ में कहीं नहीं दिखता है।

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जय‍ललिता ने नहीं किए साइन, दस्‍तावेजों पर लगाया अंगूठा

जय‍ललिता ने दस्तावेजों पर साइन की जगह लगाया अंगूठा


तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जय‍ललिता ने अस्पताल से चुनाव के संबंधित कागजात पर सिर्फ अंगूठा लगाया है। अंगूठा लगने की वजह जयललिता के दाहिने हाथ में सूजन बताई जा रही है। शुक्रवार यानि कल रात को सामने आए दस्‍तावेजों इस बात का पता चला है।

दरअसल, तमिलनाडु राज्‍य में तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इसके लिए अन्नाद्रमुक उम्‍मीदवारों को उम्मीदवारी फॉर्म पर मुख्‍यमंत्री जयललिता के साइन की जरूरत थी। जिस से की वो चुनाव आयोग में इस बात को साबित कर सकें कि वो अन्नाद्रमुक के उम्मीदवार हैं।

स्‍वास्‍थ्‍य अपडेट

पिछले हफ्ते ही जयललिता का इलाज कर रहे, डॉक्‍टरों द्वारा जानकारी जारी की गई थी, जिसमें कहा है, कि वह बातचीत कर रही हैं और उनका स्‍वास्‍थ्‍य धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। चेन्‍नई के अपोलो अस्‍पताल के डॉक्‍टरों के अलावा लंदन के एक विशेषज्ञ और एम्‍स के तीन डॉक्‍टरों की एक टीम उनके इलाज में जुटी है।

मुख्यमंत्री जे. जय‍ललिता

यहाँ पढ़ें : प्रदूषण का बढ़ता स्तर, सांस लेना हुआ मुश्किल

स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना

जयललिता के स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना के लिए ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 3,000 से भी अधिक सदस्यों ने कुछ दिन पहले  एक यज्ञ में हिस्‍सा लिया था। इस सामूहिक यज्ञ में करीबन 200 पुजारियों ने पूजा-अर्चना की थी। सूत्रों को हवाले से ख़बर है, कि अब तक पूजा अर्चना पर 35 लाख रुपये खर्च हो चु‍के है।

एक महीने से ज्‍यादा

आप को बता दें, 68 साल की जयललिता 22 सितंबर से चेन्‍नई के ओपोल अस्‍पताल में भर्ती हैं। जयललिता को  बुखार और शरीर में पानी की कमी की शिकायत के चलते अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन बाद में उनकी स्‍वास्‍थ्‍य जानकारी देते हुए, डॉक्‍टरों ने यह जानकारी दी  थी, कि उनके फेंफड़ों में संक्रमण है और वह रेस्पिरेटरी सपोर्ट पर हैं। मुख्‍यमंत्री जयललिता की अनुपस्थिति में उनके मंत्रिमंडल में वित्तमंत्री रहे ओ. पनीरसेल्वम ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जयललिता के मंत्रालयों और कैबिनेट बैठकों की अध्यक्षता का कार्यभार संभाल रखा है।

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