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जानिए क्या होती है गुरु की महिमा

गुरु की महिमा


किसी के भी जीवन में गुरु की महिमा का व्याख्या कोई नहीं कर सकता। वास्तव में गुरु की महिमा का पूरा वर्णन कोई नहीं कर सकता। पौराणिक काल से ही गुरु ज्ञान के प्रसार के साथ-साथ समाज के विकास का बीड़ा उठाते रहे हैं। गुरु शब्द दो अक्षरों से मिलकर बना है- ‘गु’ का अर्थ होता है अंधकार (अज्ञान) एवं ‘रु’ का अर्थ होता है प्रकाश (ज्ञान)।
गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं। हमारे जीवन के प्रथम गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। जो हमारा पालन-पोषण करते हैं, सांसारिक दुनिया में हमें प्रथम बार बोलना, चलना तथा शुरुवाती आवश्यकताओं को सिखाते हैं। अतः माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है। भावी जीवन का निर्माण गुरू द्वारा ही होता है।

गुरु की महिमा

शिक्षक में दो गुण निहित होते हैं – एक जो आपको डरा कर नियमों में बाँधकर एक सटीक इंसान बनाते हैं और दूसरा जो आपको खुले आसमा में छोड़ कर आपको मार्ग प्रशस्त करते जाते हैं। एक सफल शिक्षक वही है जो सकारात्मक हो और जो अभी उम्मीद का दामन ना छोड़े अजर अपने शिष्य को भी वही सिखाये। अगर एक गुरु ही उम्मीद छोड़ तो वो अपने शिष्य को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित नहीं कर पाते।

एक शिक्षक या गुरु सिर्फ विद्यालय तक सीमित नहीं रहता। हमे हमारी पूरी ज़िंदगी में कई शिक्षक मिलते है जो किसी इंसान का रूप नहीं लेते। समय, अनुभव और किताबें भी हमारे जीवन में एक गुरु का किरदार निभाते है। हम जहाँ से और जिनसे सीखते रहते है, वही हमारे गुरु बनते रहते है।

समय और ज़िन्दगी भी गुरु होती है।

विद्यालय में मिलने वाले गुरु हमें पढाई के अलावा भी कई चीजो का ज्ञान देते है। वही माता पिता और दोस्त भी हमारी ज़िन्दगी के लिए एक ख़ास गुरु होते है। हमारी ज़िन्दगी अपने आप में एक शिक्षा का स्त्रोत होती है। समय और ज़िन्दगी से बेहतर गुरु कोई नहीं होता।इससे हम जितना सीखेंगे उतना बेहतर होता हैं। आखिर यही तो गुरु की महिमा होती है।

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क्यों महिला सुरक्षा अभी भी एक विचारणीय विषय है?

महिला सुरक्षा


महिला सुरक्षा” एक ऐसा संवेदनशील विषय है जिस पर जितनी चर्चा की जाए कम है। महिला यानि स्त्री जो काली, दुर्गा के रूप में पूजी जाती है और सभी की रक्षा करते हुए दुष्टों का संहार करती है – आज उसी की सुरक्षा की आवश्यकता क्यों पड़ी? ये विचारणीय प्रश्न है।

हम स्त्रियोचित, धर्म, संस्कार निभाने की बात स्त्रियों को कह तो सकतें है कि वो इसका पालन करें और अपने दायरे में ही रहें परंतु छोटी-छोटी अबोध बालिकाओं जिन्होने अभी बोलना, सुनना और समझना ही नहीं सीखा, वे पुरुषों की घृणित मानसिकता का शिकार होती है, तो उन संसकारों का क्या करेंगे? इन दिनों महिलाओं के साथ बलात्कार की बढ़ती घटनाओं ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।

“निर्भया” हो या “गुड़िया”, ऐसा लगता है मानो सभी हमारे ही बीच वीरान आँखों से पुकारती हमसे इंसाफ की भीख मांगती दम तोड़ रही है और हम रैलियाँ निकालते, मोमबत्तियाँ जलाते, हाय-हाय करते अपने आप को माफ करते जा रहें है कि हमने इंसाफ के लड़ाई तो की। पर निष्कर्ष? कुछ नहीं। हम जितना ज्यादा प्रगतिवादी होते जा रहें हैं उतनी ही ज्यादा हमारी मानसिकता कुंठित और संकुचित होती जा रही है। शहर हो या गाँव, कहीं भी महिलाओं को अपने सुरक्षित होने का अहसास नहीं होता। यदि गहराई से सोचा जाये तो कौन इन सब बातों का जिम्मेदार है? जिम्मेदार केवल हम सब  ही हैं।

महिला सुरक्षा

एक ओर तो हम स्त्रियों की पूजा करतें हैं तो दूसरी ओर उन्ही से पुत्र प्राप्ति की कामना करतें हैं। पुत्र होने पर उन्ही को तिरस्कृत कर पुत्र की सेवा में लगे रहते हैं। इसीलिए पुत्र यानि पुरुष के मन में शुरू से ही स्त्रियों के प्रति श्रद्धा व आदर का भाव आ ही नहीं पाता है। यही मानसिकता लिए वे बड़े होते हैं व पीढ़ी दर पीढ़ी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।

आज जरूरत है इस सोच को बदलने की। सर्वप्रथम घर से ही स्त्रियों के प्रति आदर व सम्मान की भावना की शुरुआत होनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा तो सब जगह है और कहीं भी नहीं है। सिर्फ हमारी सोच और व्यवहार ही उसे बनाता और बिगाड़ देता है। आज हम जितना भी महिलाओं को अधिकार दे दे पर यदि हम मन से स्त्रियों का सम्मान नहीं करतें हैं तो उन अधिकारों का कोई औचित्य ही नहीं है।

फिर भी महिलाएँ अपने आप से सुरक्षा के कुछ ऐसे इंतजाम सकतीं हैं जिससे वे स्वयं सुरक्षित हो सकें, जैसे अपने आसपास के वातावरण पर नज़र रखें, संदिग्ध व्यक्तियों पर पैनी दृष्टि रखेँ और उनको अपने घर के आसपास फटकने न दे और छोटी बच्चियों को घर में व घर के आस पास अकेला न छोड़े। लड़कियों को चाहिए कि वो अपने पास कुछ ऐसी सामग्री हमेशा साथ रखें जैसे, पेपर स्प्रे , छोटा चाकू, पिन इत्यादि। माता पिता का दायित्व है कि वो अपने बच्चों को अच्छा ज्ञान दें, संस्कार दें जिससे उनमें स्त्रियॉं के प्रति अच्छे विचार रहें और उनकी रक्षा करने का भाव रहे। सरकार की ओर से भी सख्त कानून बनने चाहिए जिसमें बचाव का सीधा रास्ता न हो।

लड़कियो को शिक्षित करे और उन्हें सिखाये

जगह-जगह पुलिस बीट बॉक्स लगने चाहिये व उनमें 24 घंटे पुलिस कर्मी तैनात रहने चाहिए। पीसीआर वैन को लगातार गश्त लगाते रहना चाहिए, सुनसान इलाकों में बिजली की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए। खंडहर, वीरान पड़ी इमारतों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। किसी भी प्रकार की शिकायत पर तुरंत कार्यवाही होनी चाहिये। लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा से ही अपनी सुरक्षा के उपाय सिखाये जाने चाहिए, उन्हे जूडो-कराटे, टाइक्वांडो आदि की ट्रेनिंग मिलनी चाहिए।

सबसे बड़ी बात, घर के बड़े बुजुर्ग उनको मानसिक रूप से शक्तिशाली बनाए जिससे उनमें आत्म विश्वास जागे। महिला सुरक्षा के लिए सम्मेलन आयोजित करने से ज्यादा उनका ध्यान रखने की आवश्यकता है। ये जरूरी नहीं कि स्त्रियाँ घर के अंदर ही सुरक्षित हैं। उन्हे तो केवल इस आश्वासन की जरूरत हैं कि वो जहां कहीं भी जाएँ वहाँ किसी की गिद्ध दृष्टि उन पर न पड़े। केवल अपने आत्मविश्वास के साथ वो हर दिशा में कदम बढ़ा सकें।

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एजुकेशन

क्यों है ज़रूरत यौन शिक्षा की?

बेहतर समाज के लिए ज़रूरी है यौन शिक्षा


यौन शिक्षा एक ऐसा विषय है जिसके बारे में कोई खुल कर बात नही करना चाहता परंतु क्या आप यह जानते है की इसका इतना गुप्त रखे जाना आने वाली पीढ़ी और हमारे समाज के लिए ही हानिकारक है। यह देखा गया है कि बच्चे अपने माता पिता से इस विषय पर बात करने में कतराते हैं शायद वह इसलिए कि उन्हें लगता है की वे क्या बोलेंगे और माता पिता भी कभी इस विषय पर चर्चा नही करते जिससे बच्चों की कन्फ़्यूज़न और मन में उठ रहे प्रश्नों के जवाब उन्हें मिल सकें जब उन्हें यहाँ से जवाब नही मिलते तब वे बाक़ी दोस्तों और इंटर्नेट से जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं जो उनके मस्तिष्क के लिए सही नही होता।

तो आख़िर यौन शिक्षा या सेक्स एजुकेशन है क्या? यौन शिक्षा मानव यौन शरीर रचना विज्ञान, लैंगिक जनन, यौन गतिविधियाँ, यौन संयम, गर्भनिरोध सहित मानव कामुकता से सम्बंधित अनुदेशों को कहा जाता है। अधिकतर संस्कृतियों में युवाओं को यौन शिक्षा नही दी जाती क्योंकि इसे वर्जित माना जाता है। पहले ज़माने में माता पिता तह शिक्षा उन्हें शादी के समय तक नही देते थे जिससे उनके मन में कई धारणाएँ जन्म ले लेती थी। सेक्स एजुकेशन की शुरुआत अमेरिका के कुछ विद्यालयों में यह सामाजिक स्वच्छता के रूप में आरम्भ किया गया।

वैसे तो हमारे देश में भी यौन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोग्राम चलाए गए हैं किंतु वे अपने आप में काफ़ी नही हैं। अब विद्यालयों में यौन शिक्षा के तहत एड्ज़ जैसी बीमारीयो और और  भी कई विषयों को बच्चों की शिक्षा में शामिल किया गया है। आइए जानिए किस कारण से यौन शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण बनती है।

  • यौन शिक्षा से अनचाहे गर्भ की समस्या को ख़त्म किया जा सकता है। यह परिस्थिति तब उत्पन्न होती है जब वे बिना सही जानकारी के ख़ुद को यौन गतिविधियों में शामिल कर लेती हैं जिससे उनका आने वाला भविष्य ख़राब हो जाता है।
  • इससे वे सही और ग़लत के बारे में निर्णय ले पाना सीखते हैं। इससे वे अच्छे और बुरे सम्बन्धों में फ़र्क़ करना सीख जाते हैं।
  • सेक्स एजुकेशन उन्हें केवल सेक्स के बारे में उचित और अनुचित के बारे में नही सिखाती बल्कि उन्हें यह भी बताती है कि उनके  शरीर और उसके साथ होने वाली गतिविधियों के बारे में निर्णय लेने का  केवल उन्हें हक़ है।
  • इससे दोनो लिंग के युवा एक दूसरे का सम्मान करना सीखते है जिससे ईव टीज़िंग और सेक्शूअल असॉल्ट जैसी समस्याएँ हल हो जाती है।
  • इससे उनका भविष्य ख़राब होने से बच जाता है। यदि उन्हें सही शिक्षा  दी जाए तो वे ग़लत जानकारी से ग़लत राहों पर जा सकते हैं जिससे उनकी पढ़ाई का नुक़सान होगा।
  • इससे एक स्वस्थ माहौल बनता है जो पूरे समाज के लिए अच्छा होता है।

ये सभी कारण सेक्स एजुकेशन को अनिवार्य बनाते हैं। देखा जाए तो इसे केवल विद्यालयों में नही घर पर भी देना चाहिए क्योंकि इससे माता पिता और बच्चों के बीच में बेहतर सम्बंध बनेंगे। इसे सभी उम्र के लोगों को दिया जाना चाहिए। कई देशों में इसे सभी उम्र के बच्चों को पढ़ाया जाना अनिवार्य है जो की उचित भी है। एक उज्जवल भविष्य की और अग्रसर होने के लिए यौन शिक्षा बहुत अधिक ज़रूरी है।

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लाइफस्टाइल

जानिए की क्यों कहे अपने स्कूल को शुक्रिया

कहे स्कूल का शुक्रिया


स्कूल हमारे जीवन का सबसे अच्छा और सबसे सुंदर सफर होता है। स्कूल में बिताए वो 14 साल हमारे को असल दुनिया में खुद को साबित करने के लायक बनाता है। हमारे गुरु हम को एक बेहतर इंसान बनाते है। किताबी ज्ञान के अलावा हमे ज़िंदगी का का ज्ञान भी सिखाता है। और जब हम बात करते है स्कूल की, तब हम स्कूल से जुडी हर उस चीज़ की बात करते है जो आगे जाके हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाता है। तो हमे अपने स्कूल का शुक्रिया तो कहना ही चाहिए।

स्कूल के वो दिन

ना जाने ऐसी कितनी और बाते है जिनके लिए हमे अपने स्कूल का शुक्रिया करना चाहिए। तो जानते है कि और किन कारणों से हमे अपने स्कूल का शुक्रिया करना चाहिए :-

  1. आप आज जो भी है, अपने स्कूल की वजह से है। आपको सारी शिक्षा और सभी ज्ञान यही से मिला है। आपकी कला को बढ़ावा दिया। और आपको, खुद को साबित करने की हिम्मत और मौका भी।
  2. स्कूल ने आपको तहज़ीब और नैतिकता का मूल्य समझाया। हमे सभी अच्छी आदतें सिखाई। अपनी भावनाओ को व्यक्त करना और दूसरों की भावनाओं की इज़्ज़त करना सिखाया।
  3. स्कूल ने ही हमें सही और गलत में फर्क करना सिखाया। हम किसी ने भेदभाव ना करें, सभी की इज्जत करें यह हमें हमारे स्कूल ने ही सिखाया।
  4. स्कूल में हर व्यक्ति एक अलग जगह से आता है फिर भी हम कभी किसी को अलग नहीं समझते। हर कोई हमारा दोस्त होता है। स्कूल में हमें दोस्ती का सही मतलब सिखाया और हमें कुछ ऐसे दोस्त दिए है जो जिंदगी भर हमारे साथ रहेंगे।
  5. यहाँ पढ़ें : क्या हर प्रतियोगिता में जीतना ज़रूरी हैं?

    थैंक यू स्कूल
  6. हमें स्वाभिमान और अपनी खुद की इज्जत का महत्व समझाया। हम यह कभी ना समझ पाते कि हमारी इज़्ज़त कितनी ज्यादा जरूरी है, पर स्कूल ने हमें खुद की और दूसरों की इज्जत करना सिखाया।
  7. किताबी ज्ञान से आगे बढ़ कर कुछ अलग करने की सोच हमें स्कूल में ही सिखाई गई। कुछ नया करने की हिम्मत और उम्मीद हमें स्कूल में ही मिली। तभी आज हम वह कर पाए हैं जो हम सच में करना चाहते थे।
  8. सही ढंग से बात करना और सही प्रकार से खुद को दूसरों के सामने प्रस्तुत करना यह भी हमें स्कूल ने ही सिखाया। खुद पर भरोसा कैसे और पूरे आत्मविश्वास के साथ खुद को प्रस्तुत करने की हिम्मत हमें स्कूल ने ही दी।

आज हम जो हैं, जैसे हैं, हमारे स्कूल की वजह से हैं। स्कूल मे मिला हर व्यक्ति आज हमारे बहुत खास है। हमारे गुरुओ ने हमें बहुत कुछ सिखाय। स्कूल से हमें जो सबसे प्यारी चीज मिली, वह है यादें। हमारा स्कूल का पूरा सफर एक अच्छी याद बनकर रह गया है। हम उस दुनिया को बहुत पीछे छोड़ा आए है। इसलिए आज हमें जरूरत है कि हम अपने स्कूल का शुक्रिया करें। हम आभारी है कि हमें ऐसा स्कूल मिला जहां हमें इतना अच्छा ज्ञान, इतने अच्छे दोस्त और इतनी प्यारी यादें मिली जो में जिंदगी भर हमारे साथ रहेगी।

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एजुकेशन

क्या हमें सफल बनने के लिए शिक्षा ग्रहण करना अनिवार्य है?

“किताबी ज्ञान : सफलता का रहस्य”


शिक्षा केवल अच्छे अंक लाने या डिग्री हांसिल करने के बारे में नही है। यह ख़ुद में ही बहुत बड़ा विषय है। शिक्षा का अर्थ है किसी भी विषय पर जानकारी होना। किसी गाँव में रहने वाला कोई किसान भी शिक्षित है यदि उसे खेतों में प्रयोग होने बीज बोने वाली फ़सलो के बारे में जानकारी है। वो सफल भी होगा यदि उसे खेती के बारे में अच्छी जानकारी है तो। एक खिलाड़ी भी पूर्णत: शिक्षित होगा यदि उसे अपने खेल के बारे में पूरी जानकारी है। और दूसरी ओर वह व्यक्ति अशिक्षित हो सकता जिसने कॉलेज जा के डिग्री प्राप्त की है क्योंकि ऐसा हो सकता है की उसे ज्ञान मिला ही ना हो। सफल होने के लिए हमें मस्तिष्कों की शक्ति रचनात्मकता, सोच, निष्ठा और ज्ञान की आवश्यकता होती है और ना की केवल किताबों ज्ञान की।

यहाँ पढ़े : सह-शिक्षा की महत्ता

शिक्षा केवल वे शिक्षा माही है जो कि विद्यालयों में जाके ग्रहण की जाए। असली शिक्षा जीवन के अनुभवो से ग्रहण की जाती है। शिक्षा जीवन के मूल्यों के लिए आवश्यक है, परंतु बिना शिक्षा के भी व्यक्ति सफलता प्राप्त कर सकता है। यदि उसने निष्ठा और इच्छा है तो। एक शिक्षित व्यक्ति अमीर हो सकता है, पर ज़रूरी माही की वह समाज की बाज़ारी में क़ाबिल हो। किसी की शिक्षा और डिग्री उसकी क़ाबिलियत और क्षमता के बारे में माही बताता। पढ़ाई लिखाई सिर्फ़ बाहरी ज्ञान बढ़ाने के लिए होता है। हमारी रुचि और पसंद में शायद पढ़ाई की ज़रूरत ना हो।

शिक्षित हो कर आप किसी अच्छी और बड़ी जगह पर नौकरी पा सकते है। पर शायद आपको उस से संतुष्टि ना मिले, क्यूँकि वो आपकी क़ाबिलियत नही, मजबूरी है। लोगों को अपने जुनून का पीछा करना चाहिए, क्यूँकि शायद उन्हें इस क्षेत्र में ज़्यादा कामयाबी मिलेगी। अब देखा जाए तो एक नर्तकी को हिसाब और विज्ञान के ज्ञान की नही पर, ताल और नृत्य का ज्ञान सीखने की ज़रूरत होती है। विज्ञान, ऐल्जेब्रा और बाक़ी विषय हम आम ज़िंदगी में प्रयोग नही करते। मेरा मानना यह है की हम पढ़ाई पूरी ज़िंदगी में कभी भी कर सकते हैं परंतु अगर हमारा हुनर किताबों की दुनिया में कही खो जाए तो हम उसे कैसे ढूँढेंगे?

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