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धनतेरस पर पूजा में इन सामग्री को करे शामिल, होगी धन की प्राप्ति

पाना चाहते है धन की प्राप्ति यह सब करे जरूर


आज पूरे देश भर में धनतेरस का त्योहार जोरो शोरो से मनाया जा रहा है। लोग आज धनतेरस के लिए अपने घरो में सोना और वाहन जैसी चीजों को खरीदकर उनकी पूजा कर रहे है। अगर आप चाहते है की हमेशा आप पर धन की प्राप्ति हो तो धनतेरस  की पूजा में आप इन सामग्री को जरूर करे शामिल।

पाना चाहते है धन की प्राप्ति यह सब करे जरूर :

पान: धनतेरस पर पूजा की सामग्री के लिए पान का इस्तेमाल जरूर करें। ऐसा माना जाता है की पान के पत्ते में देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए धनतेरस और दिवाली की पूजा में इसका इस्तेमाल शुभ माना जाता है।

सुपारी: धनतेरस की पूजा में सुपारी का इस्तेमाल के बिना पूजा शुरू ही नहीं होती है। सुपारी को ब्रह्मदेव, यमदेव, वरूण देव और इंद्रदेव का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस के दिन पूजा में प्रयोग की गई सुपारी को तिजोरी में रखना लाभदायक होता है।

साबुत धनिया: धनतेरस के दिन आप साबुत धनिया खरीदकर लेकर आएं और इसे मां लक्ष्मी के सामने अर्पित करें। इससे आपकी सारी आर्थिक परेशानी दूर हो जाएगी।

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बताशा और खील: बताशा माता लक्ष्मी का सबसे प्रिय भोग है। माता लक्ष्मी की पूजा में बताशे का प्रयोग करने से हर समस्या का समाधान होता है।

कपूर: मां लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धनवंतरी की पूजा में कपूर जरूर जलाएं। कपूर जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर जाती है और सकारात्मक ऊर्जा घर में आती है।

धनतेरस पर इन चीज़ो की न करे खरीदारी

धनतेरस के दिन लोहा, कांच और एल्मुनियम के बर्तन नहीं खरीदना चाहिए। इससे आपके ग्रहो पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जब भी कोई बर्तन ख़रीदे कर लाये तो उसमे कोई अन्न रख कर लेकर आये। यह बात  हमेशा ध्यान दे की घर में कभी खली बर्तन नहीं लाना चाहिए। साथ  ही आपको इस दिन काले रंग से बचना चाहिए। यह अशुभ माना जाता है।

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Dhanteras 2019 – जाने अपनी राशि के हिसाब से क्या खरीदे इस धनतेरस

इस धनतेरस अपने जीवन साथी के लिए क्या खरीदना रहेगा शुभ


धनतेरस के दिन घर में सुख और समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करते है। अगर हम शास्त्रों के अनुसार देखे तो इस दिन धनवंतरी का जन्म हुआ था और यही वजह है की इस दिन को धनतेरस बोलते है। धनतेरस की शाम परिवार की मंगलकामना के लिए यम नाम का दीपक जलाया जाता है। मान्यता है की समुद्र मंथन से समय कलश के साथ माता लक्ष्मी का जन्म हुआ उसी के प्रतीक के रूप में सौभाग्य वृद्धि के लिए बर्तन खरीदने की परम्परा शुरू हुई थी। इसलिए आज हम आपको बताएँगे की आपकी राशि के लिए धनतेरस पर क्या खरीदना सबसे शुभ रहेगा।

मेष: मेष राशि के लोग पीतल के बर्तन खरीद सकते है और अगर पटनेर को गिफ्ट करना है तो आप चाँदी या सफ़ेद धातु के हार ले सकते है।

वृष: वृष राशि के लोग चाँदी के कलश खरीदना शुभ रहेगा और जीवनसाथ के लिए आप सोने की चूड़ी या अंगूठी भी ले सकते है।

मिथुन: इस राशि के लोग धनतेरस पर सफ़ेद धातु के श्री यंत्र या गणेश खरीद सकते है कांसे का बर्तन खरीदना भी सही रहेगा और जीवनसाथी के आप पीतल का कोई भी धातु खरीद सकते है।

कर्क: जीवनसाथ के लिए कर्क राशि के  लोग  मोती और हीरे की अंगूठी खरीद सकते है जो की शुभ रहेगा। इस राशि वालो के लिए पारद का शिवलिंग खरीदना भी शुभ होगा।

सिंह: इस राशि के लोग लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति सोने या पीले धातु के रूप में खरीदें। जीवनसाथी के लिए सोने या पीले पुखराज का लॉकेट लें।

कन्या: कन्या  राशि के लोग घर के लिए चाँदी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीद सकते है या फिर पारद या सोने के श्रीयंत्र  भी खरीद सकते हैं। जीवनसाथी के लिए चांदी का आभूषण ले सकते हैं।

तुला: घर के मंदिर के लिए चाँदी के श्रीयंत्र और दक्षिणवर्ती शंख लेसकते है और वही जीवनसाथी के लिए मुंगे की माला और अथवा कंगन खरीद सकते है।

वृश्चिक: तांबे के कलश, पीला कोई भी धातु खरीदना शुभ रहेगा। जीवनसाथ के लिए मोतियों की माला देना शुभ रहेगा।

धनु: इस राशि वाले लोगो के लिए पीला धातु खरीदना शुभ रहेगा और वही मुंगे का सामान खरीदना भी लाभदायक होगा।

मकर: जीवनसाथी को तो आप हीरे या चाँदी का कोई भी सामन देना शुभ रहेगा। बेडरूम के लिए सफेद धातु में मेज या कुछ भी खरीद सकते हैं।

कुंभ: इस राशि के लोग घर के मंदिर के लिए आप सफ़ेद धातु या चांदी का दीप दान लें। जीवनसाथी के लिए सोना माणिक्य या पुखराज की अंगूठी भी खरीद सकते हैं।

मीन: इस राशि के लोग अपने लिए पीला पुखराज ले सकते है या फिर आप घर के लिए चाँदी या सफ़ेद पिरामिड या गणेश या सरस्वती की मूर्ति लेना शुभ रहेगा। जीवनसाथी के लिए पन्ने या हीरे की अंगूठी लें।

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क्यों करते है दिवाली पर माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा

आखिर क्यों बिठाया जाता है माँ लक्ष्मी को श्री गणेश के बाई ओर


दिवाली के त्यौहार को ‘कौमुदी महोत्सव’ भी कहा जाता है, लेकिन क्या आपको पता है की दिवाली पर लक्ष्मी और गणेश की पूजा क्यों की जाती है, वैसे सभी अच्छे और शुभ कामो में गणेश के साथ गौरी की पूजा की जाती है, लेकिन दिवाली पर यहां गणेश के साथ मां लक्ष्मी का पूजन क्यों किया जाता है? कई पुराणिक कथाओ में इस कहानी का ज़िक्र किया गया है की आखिर क्यों दिवाली के दिन गौरी और गणेश की पूजा क्यों की जाती है। तो चलिए हम आपको इसके पीछे की वजह बतातें है।

पूजा की पीछे की वजह:

पौराणिक ग्रथों में एक कथा है कि लक्ष्मी जी की पूजा गणेश जी के साथ क्यों की जाती है। एक बार एक वैरागी साधु को राजसुख भोगने की लालच होती है तो वो लक्ष्मी जी की आराधना करता है। उसकी आराधना से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती है तथा उसको दर्शन देकर वरदान देती है कि उसे उच्च पद और प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। वरदान मिलने के बाद उस में  घमंड आ जाता है और राजा को धक्का मार देता जिससे राजा का मुकुट नीचे गिर जाता है, राजा व उसके दरबारी के लोग उसे मारने के लिए दौड़ते है परन्तु इसी बीच राजा के गिरे हुए मुकुट से एक काला नाग लेकर भागने लगाता है, यह देख कर सबको लगाता है की साधु चम्तकारी है और उसकी जयकार करने लगते है।

उस साधु से प्रसन्न हो कर उस से मंत्री बना देता है, क्युकी उसी की कारण राजा की जान बची थी। राजा साधु से इतना खुश हो जाता है की उस मंत्री को अलग महल ही दे देता है। फिर राजा को एक दिन वह साधु भरे दरबार में हाथ खींचकर बाहर ले गया। यह देख दरबारी जन भी उसके पीछे भागे। सभी के बाहर जाते ही भूकंप आया और भवन खण्डहर में बदल गया और उसी साधु ने फिर से सबकी जान बचाई। अब इससे साधु का मान- सामन बढ़ जाता है और उसका घमड़ भी बढ़ जाता है।

तो उसी महल में गणेश की मूर्ति थी, उस मूर्ति को साधु ने हटा दी क्योकि दिखने में वो मूर्ति अच्छी नहीं है। साधु के इस काम से गणेश जी काफी गुस्सा हो जाते है और उसी दिन से साधु की बुद्धि पलट जाती है। उसके सारे काम खराब होने लग जाते है। तभी राजा साधू से नाराज हो कर उसे कारागार में दाल देता है।

उस जेल में वो फिर से लक्ष्मी जी की आराधना करता है तब लक्ष्मी जी उससे बताती है की उसने गणेश का उपमान किया था अब उससे गणेश जी को प्रसन्न करना होगा। माता का आदेश मिलने के बाद वो गणेश की आराधना करने लग जाता है जिससे गणेश जी का गुस्सा शांत हो जाता है और वो राजा को सपने आकर आदेश देते है की साधु को फिर से मंत्री बनाया जाये। राजा ने गणेश जी के आदेश का पालन किया और साधु को मंत्री पद देकर सुशोभित किया।

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इस प्रकार लक्ष्मीजी और गणेश जी की पूजा साथ-साथ होने लगी। बुद्धि के देवता गणेश जी की भी पूजा लक्ष्मीजी के साथ ज़रूर करनी चाहिए क्योंकि यदि लक्ष्मीजी आ भी जाये तो बुद्धि के उपयोग के बिना उन्हें रोक पाना मुश्किल है। इस प्रकार दीपावली की रात्रि में लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी की भी आराधना की जाती है।

दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा करने की एक और भावना ये भी कही गई है कि माता लक्ष्मी अपने प्रिय पुत्र की तरह हमारी भी सदैव रक्षा करें और हमें भी उनका स्नेह और आशीर्वाद मिलता रहे।

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यह है दिल्ली की बेस्ट मार्केट्स जहाँ दिवाली का सभी सामान मिलेगा सस्ता

जाने दिल्ली की बेस्ट मार्केट्स के बारे में जहाँ आप कर सकते है दिवाली  की खरीदारी


अक्टूबर के महीने के साथ त्योहारो का सीजन भी शुरू हो गया है। दश्हरा के बाद अब दिवाली का भी त्योहार आ गया है। दीपावली को दीपों का पर्व भी कहा जाता है। दीपावली पर लोग अपने घरों में साफ-सफाई का ख़ास ख्याल रखते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग अपने घर के लिए सजावट का सामान भी ख़रीदते है। अगर आपको अपने घर की सजावट के लिए खरीदना है सामान तो यह है दिल्ली-एनसीआर की कुछ बेस्ट मार्केट्स:

जाने दिल्ली की बेस्ट मार्केट्स के बारे में जहाँ आप कर सकते है दिवाली की खरीदारी

1. चाँदनी चौक

बात चाहे कपड़ो की हो या घर की सजावट की इन सभी सामान  को खरदीने के लिए चाँदनी चौक दिल्ली के बेस्ट मार्केट्स  में से एक है।  इस मार्किट में आपको छोटी से बड़ी सभी चीज़े मिल जाएगी। अगर आपको दिवाली के लिए सजावट का सामान खरीदना है तो आप यहाँ से खरीद सकते है। जहाँ आपको मिट्टी से बने सुन्दर दीये मिल सकते हैं। आपको इस साल दीपावली के खरीदारी के लिए चांदनी चौक जरूर जाना चाहिए।

2. सरोजनी मार्किट

सरोजनी मार्किट दिल्ली की सबसे बेस्ट मार्केट्स में से एक है। सरजोनि मार्किट वैसे तो कपड़ो के लिए काफी मशहूर है लेकिन आपको यहाँ सजावट का सामना भी अच्छा मिलेगा। यह मार्केट अपने सस्तें दाम पर समान बेचने के लिए भी जानी जाती है। तो आपको इस साल की दीपावली की खरीदारी यहां से करनी चाहिए।

3.  सेंट्रल मार्किट

दिल्ली की सेंट्रल मार्किट खाने -पीने को लेकर काफी मशहूर है। लोगो को लगता है की यह मार्किट  साउथ दिल्ली मे हैं तो महंगी होगी लेकिन यह मार्किट बिलकुल भी महंगी नहीं है। इस मार्केट में आपको अच्छे कपडे से लेकर घरों की सजावट का सभी चीजें आपको असानी से मिल जाएगा। इस बार की दीपावली की खरीदारी करने के लिए आपको जरूर लाजपत नगर जाना चाहिए।

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4. पहाड़गंज मार्केट

पहाड़गंज मार्केट के बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं कि यहां पर दीपावली के समय बहुत ही सुंदर घरों के सजानें के लिए सामान मिलते हैं। इस बाजार में आपको चांदी के आभूषण और चमड़े के सामान सस्ते दाम में मिल जाएंगे। इस मार्केट में आपको सड़क के किनारे कुछ बेहतरीन लैंप और मिट्टी से बने दीये आपको मिल जाएंगी। इस दीपावली आपको जरूर यहां पर जाकर खरीदारी करनी चाहिए।

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क्यों करती है माँ लक्ष्मी उल्लू की सवारी?

उल्लू के अल्वा और कौन है माँ लक्ष्मी की सवारी


लक्ष्मी माता का वाहन है उल्लू जो पूरी रात जगता और दिन भर सौता है। भारत के कुछ भागो में उल्लू को शुभ और अशुभ दोनों तरह से देखा जाता है। ऐसा बोला जाता है की उल्लू को पहले ही महसूस हो जाता जब कोई संकट आने वाली होती है, इसलिए उल्लू को अपशगुन भी माना जाता है लेकिन कुछ लोगों ऐसा भी जो मानते है उल्लू के कुछ संकेत अच्छे और शुभ होते है। कहते है अगर कोई व्यक्ति बीमार है और उल्लू उससे छू ले तो व्यक्ति एकदम ठीक हो जाता है। उल्लू की सुबह आवाज़ सुना भी शुभ होता है। मगर क्या आप लोग जानते की लक्ष्मी माता का वाहन उल्लू क्यों है? तो चलिए आपको इसके पीछे की वहज बताते है।

उल्लू-माँ लक्ष्मी की सवारी:

लक्ष्मी माता का वहन उल्लू  ताकत और दुर की नज़र का प्रतीक होता है। दरसअल उल्लू बुरी सोच को हटाकर अच्छी सोच रखने में मदद करता है। वह भीड़ से हटकर विचार करने की शक्ति की तरफ इशारा करता है। इसका मतलब हुआ की उल्लू तब देखने की क्षमता रखता है जब सामान्य जन को नजर नहीं आता। दरअसल उल्लू निडर और शक्ति का प्रतीक माना गया है इसलिए लक्ष्मी का वाहन उल्लू है।

माँ लक्ष्मी के उल्लू के आलावा और  भी है वाहन :

उल्लू के आलावा गज भी माता की सवारी है। गज बुद्धिमत्ता व शक्ति का प्रतीक है। गज एक शक्तिशाली और विनम्र जीव होता है और इसलिए वास्तविक रूप में भी ताकतवर व्यक्ति सदैव विनम्र होता है और उसे अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की ज़रूरत नहीं होती है।

उल्लू और गज के आलावा गरुड़ भी माता की सवारी है। दरअसल गरुड़ लक्ष्मी के पति विष्णु का वाहन होता है और उसी के कारण लक्ष्मी का भी वाहन बन गया। गरुड़ पक्षी अपनी दूरदृष्टि, लक्ष्य, अनुशासन, दृढ़ता और कुशलत का प्रतीक माना जाता है।

और पढ़ें: धनतेरस के दिन क्यों खरीदे जाते है नये बर्तन?

क्यों माना जाता है उल्लू को शुभ:

उल्लू को शुभ और अशुभ दोनों का प्रतिक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है की किसी गर्भाती महिला को उल्लू छुले तो पुत्री होने के संकेत होते है और यहाँ तक की पूर्व दिशा से आ रहे उल्लू की आवाज़ सुने से धन का लाभ होता ही है और दुश्मों का भी नाश होता है। यदि आप घूमने जा रहे हो और पीछे से अपने उल्लू की आवाज़ सुनी तो आपकी यात्रा काफी अच्छी जाएगी। इन सबके अल्वा अगर आपको अपने घर के आँगन में मारा हुआ उल्लू मिलता है तो इसका मतलब होता है की परिवार में कोई कलेश होने वाला है।

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धनतेरस के दिन क्यों खरीदे जाते है नये बर्तन

बर्तन खरीदने के आलावा और क्या मान्यता है धनतेरस की


दिवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज तक रहती है।धनतेरस के दिन लक्ष्मी माता, कुबेर और भगवान धन्‍वंतरि की पूजा होती है, जिसे घर में हमेशा सुख और समृद्धि बनी रहती है। ऐसी माना जाता है इस दिन बर्तन, सोना, चांदी और झाड़ू खरीदना शूभ होता है। जिस तरह माता लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थीं उसी तरह भगवान धन्‍वंतरि भी उत्पन्न हुऐ थे। क्या आप जानते है की धनतेरस पर बर्तन खरीदने का रिवाज़ क्यों है?

बर्तन खरीदने की मान्यता:

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। दरअसल इस दिन भगवान धन्‍वंतरि महालक्ष्मी की तरह सागर मंथन से उत्पन्न हुए थे। ऐसी मान्यता है की जब भगवन धन्‍वंतरि का जन्म हुआ था तो वो एक पात्र में अमृत लिए हुए थे। भगवान धन्‍वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस अवसर पर नये बर्तन खरीदे जाते है

वैसे इसकी एक और मान्यता भी है, धनतेरस के दिन धातु खरीदना भी शुभ माना जाता है लेकिन सिर्फ शुद्ध धातु जैसे की पीतल, तांबा,  चांदी, सोना। ऐसा कहा जाता है की इस दिन ख़रीदे हुए रत्नो में नौ गुने की वृद्धि हो जाती है।

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घर के बहार दिया रखे:

धनतेरस के दिन सिर्फ बर्तन या धातु ही नहीं ख़रीदा जाता बल्कि दिए भी जलाये जाते है, मान्यता है कि अकाल मृत्यु से बचने के लिए घर के मैन गेट पर दिया रखने का भी रिवाज़ है। रात में इस दिन लंभी उर्म के लिए भगवान धन्वंतरि तथा समृद्धि के लिए कुबेर के साथ लक्ष्मी गणेश का पूजन करके लक्ष्मी माता को गुड़ और धान का लावा ज़रूर चढ़ाना चाहिए।

काले रंग के बर्तन ना ख़रीदे:

धनतेरस के दिन काले रंग की चीजों को ना ख़रीदे क्योकी धनतेरस एक बहुत ही शुभ दिन है जबकि काला रंग हमेशा से दुर्भाग्य का प्रतीक माना जाता है इसलिए धनतेरस के दिन काले रंग की चीजें को नहीं खरीदा जाता और सिर्फ यही नहीं बल्कि इस दिन आप चाकू, कैंची और दूसरी दारीदार चीज़ भी नहीं खरीदी जाती

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