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महाराष्ट्र में इस सरकार का होगा गठन

राज्यपाल से मुलाक़ात करेंगे शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी के नेता


महाराष्ट्र में अपनी सरकार बनाने को लेकर शिवसेना में काफी हड़कम्प्प है। साथ ही महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाने पर अड़ी शिवसेना का एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाना लगभग तय माना जा रहा है। इसका एलान जल्द हो सकता है। साथ ही वही शिवसेना को वीर सावरकर को भारत रत्न देने की अपनी मांग और मुस्लिमों को पांच फीसदी आरक्षण के विरोध को खत्म पड़ सकता है। सीएम पद शिवसेना को मिलेगा और कांग्रेस तथा एनसीपी से एक-एक डिप्टी सीएम होेंगे।

खबरों के मुताबिक  तीनों दलों के नेताओं की हुई बैठक में न्यूनतम साझा कार्यक्रम का लिस्ट तैयार किया गया। इसे मंजूरी के लिए तीनों दलों के शीर्ष नेताओं को भेजा गया है। न्यूनतम साझा कार्यक्रम 1998 में एनडीए के नेशनल एजेंडा फॉर गवर्नेंस के मॉडल पर बनाया गया है। इसके तहत तीनों दल अपने वैचारिक मुद्दों को ध्यान देते हुए आगे बढ़ेंगे

इसके अलावा शिवसेना सावरकर, गोडसे, बांग्लादेशी घुसपैठियों और मुस्लिम आरक्षण पर रुख नरम करेगी और इन मुद्दों पर आक्रामक होने से बचेगी। किसानों की कर्जमाफी, मुंबई व अन्य शहरों में आधारभूत विकास, 10 रुपये में थाली, एक रुपये में मरीजों की जांच जैसे जनहित के मुद्दों पर तीनों दल मिलकर काम करेंगे। साथ ही सभी  मुद्दों को छोड़कर एक-दूसरे के प्रमुख चुनावी वादों को पूरा करने में मदद करेंगे।

आज राज्यपाल से मिलेंगे शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के नेता

ऐसा बताया जा रहा है की आज शाम 4 बजे शिव सेना ,कांग्रेस और एनसीपी के नेता राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलेंगे। सूत्रों के मुताबिक यह मुलाक़ात सिर्फ एनसीपी-कांग्रेस नेताओं के बीच होने थी लेकिन वही  फिर शिवसेना ने कहा की उसके नेता भी प्रतिनिधिमंडल  में भी शामिल होंगे। इस बैठक में सभी नेता राज्यपाल से किसानों  समस्याओं का मुद्दा भी उठाएंगे और  उनकी मदद  करने की भी अपील करेंगे इसके अलावा एनसीपी के नेता का कहना है की यह मुलाक़ात सिर्फ सरकार बनाने की दावेदारी को पेश करना ही नहीं है।  

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#MondayMotivation : कैसे महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को स्मृति ईरानी ने दी नई दिशा?

स्मृति ईरानी – मैकडॉनल्ड्स में वेटर की नौकरी करने से लेकर कैबिनेट मिनिस्टर बनने तक का सफ़र 


कहते है हर व्यक्ति का एक अतीत होता है और कुछ लोगों का अतीत ऐसा होता है जो दूसरों के लिए मिसाल बन जाता है। ऐसा ही अतीत रहा है हमारी टेलीविजन की स्टार और “सास भी कभी बहू थी’ की तुलसी यानि स्मृति ईरानी का। जी हाँ, हम बात कर रहे है यूनियन कैबिनेट मिनिस्टर स्मृति ईरानी की जिनका टेलीविज़न से लेकर राजनीति तक का सफर बहुत ही दिलचस्प रहा है।

वेट्रेस से मॉडलिंग और एक्टिंग का सफर 

मॉडलिंग से एक्टिंग और टेलेविज़न इंडस्ट्री की तुलसी राजनीति में अपने पैर ज़मा चुकी हैं। लेकिन क्या आप जानते है वो कभी मैकडॉनल्ड्स में वेटर की नौकरी करती थी। 23 मार्च 1976 को दिल्ली में जन्मी स्मृति ईरानी 3 बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते बचपन से ही समझदार थी। होली चाइल्ड ऑक्जिलियम स्कूल से अपनी स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया। उसके बाद मिस इंडिया कॉम्पिटिशन और 1998 में मिस इंडिया पेजेंट फाइनलिस्ट में अपनी पहचान बनाने के बाद स्मृति ने मीका सिंह के साथ एक एल्बम ‘सावन में लग गई आग’ के गाने ‘बोलियां’ पर परफॉर्म किया। फिर उन्हें छोटे पर्दे पर “सास भी कभी बहू थी” में तुलसी की भूमिका मिली जिसे वो भारतीय महिलाओ के बीच एक प्रसिद्ध चेहरा बन गई।

राजनीति का सफर

एक्टिंग के बाद टीवी ने उन्हें ऐसी पहचान दी जिससे उन्हें राजनीति में एंट्री का मौका मिला और फिर शुरू हुआ उनका राजनीति का सफर जो अभी तक एक सफल दिशा में जा रह है। 2003 में स्मृति ईरानी ने भारतीय जनता पार्टी में आने का फैसला किया। एक साल बाद महाराष्ट्र की यूथ विंग का वाइस प्रेसिडेंट बनकर उन्होंने लोगों का विश्वास जीता। इसी विश्वास के दम पर वो अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में टेक्सटाइल मिनिस्टर के पद पर कार्य कर रही हैं। इससे पहले वो केंद्र में मानव संसाधन मंत्री रह चुकी हैं।

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अब नहीं  चलेगा राजस्थान में हुक्का बार, चलाया हुक्का बार तो हो सकती है 1 से 3 साल की सजा

राजस्थान मे हुक्का बार चलाने पर हो सकती है ३ साल की जेल


सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद सेहत के लिए हानिकारक है। ये चेतावनी तो सभी पढ़ते है लेकिन इस पर अमल करने के लिए राजस्थान सरकार ने कुछ ऐसा कदम उठाये है जो सराहनीय हैं। राजस्थान विधानसभा ने एक विधेयक  पॉक्स केर हुक्का बार चलने पर पाबन्दी लगा दी हैं।
जी हाँ, शुक्रवार को सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद(विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन) (राजस्थान संशोधन) विधेयक और राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2019 से हुक्का बार पर पाबंदी लगा दी गई हैं।

हुक्का बार बंद करने के साथ ही नियम का उलघंन करने पर 1 साल से लेकर तीन साल तक की सजा का प्रावधान हैं। साथ ही आपको इस बात के लिए 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक के जुर्माने भी भरण पड़ सकता हैं।
कैसा पास हुआ विधेयक

इस विधेयक को राजस्थान की कांग्रेस (Congress) सरकार ने कल विधानसभा में  सिगरेट और सभी तम्बाकू उत्पाद के विज्ञापन और व्यापार, उत्पादन, और वितरण, विनियमन और राजस्थान संशोधन बिल, और राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन बिल 2019 पारित कर दिया है। यह विधेयक ध्वनिमत लेकर पारित कर दिया हैं।

नशे की लत के बारे में बात करते हुए राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने अपना कहा की “हुक्का बार की वजह से राज्य में युवाओं को नशे की लत लगती जा रही थी और इस पर रोक लगाना बहुत जरूरी था। हुक्का बार के खिलाफ कोई कानून नहीं होने की वजह से पुलिस कोई भी एक्शन नहीं ले पा रही थी।” ये विधेयक इसी दिशा में एक सुनहरा कदम हैं।

देसी हुक्का चालू रहेगा  

हुक्का बार में जाकर हुक्का करने पर पाबंद जरुरु लगा है लेकिन देशी हुक्का करना अभी भी मान्य हैं। सरकार ने विधेयक की धारा 4 में एक संशोधन किया किया है जिसके अंतर्गत हुक्का बार चलाने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।  हालाँकि घर बैठे देसी हुक्का करने के खिलाफ अभी कुछ नहीं बोला गया हैं।राजस्थान के घरों में देसी हुक्का बहुत प्रचलित हैं जिस पर कोई पाबंदी नहीं लगी हैं। जानकारी के लिए बता दे कि इस बार विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस चुनाव घोषणा पत्र में हुक्का बार पर बैन लगाने का वादा किया गया था जो अब पूरा हो गया हैं।

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‘तीन तलाक triple talaaq – लोकसभा में बिल की पेशी,जेडीयू (JDU) करेगा विरोध 

Triple Talaq to be presented in Lok Sabha


ट्रिपल तलाक़ बिल को भाजपा सरकार लोकसभा में पेश करने जा रही हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने पहले कार्यकाल में भारत की महिलाओं से जो वादा किया था, वो पूरा करने का समय आ आज्ञा हैं। आज ‘तीन तलाक’  ट्रिपल तलाक़ बिल को भाजपा सरकार लोकसभा में पेश करने जा रही हैं। आज चर्चा के बाद बिल को पारित किये जाने की संभावना जताई जा रही है। लोकसभा में बिल दोपहर 12.30 बजे पेश करने के बाद चर्चा का विषय रहेगा।  हाल ही में मिली आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा सरकार ने लोकसभाके पहले सत्र के पहले दिन ही तीन तलाक विधेयक का ड्राफ्ट पेश किया था।  आज के सदन के लिए सरकार ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है। इसके अनुसार सभी सांसदों का सदन में निश्चित समय पर उपस्थित होना होता है।

तीन तलाक़ बिल क्या हैं 
तीन तलाक़ ऐसा बिल है जिसमे तीन तलाक को अपराध बताया गया हैं और इसमें तीन   तलाक़ करने वाले व्यक्ति को अपराधी बताते हुए दोषी माने जाने का प्रावधान हैं। साथ ही व्यक्ति को जेल की सजा सुनाए जाने का प्रावधान है हालाँकि सज़ा की अवधि निश्चित नहीं हुई हैं।
जेडीयू (JDU) करेगा विरोध 
तीन तलाक बिल को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) बिल के मौजूदा स्वरूप को लेकर भाजपा सरकार का समर्थन नहीं करेगा। जेडीयू (JDU) संसद में आज इस बिल का विरोध करेगी। आपको बता दे कि इससे पहले भी जेडीयू तीन तलाक बिल पर अपना विरोध प्रकट कर चुकी है हालाँकि स्पष्ट रूप से कुछ नई नहीं था। जेडीयू सरकार का ये रुख इस कारण है कि सरकार ने इस बिल पर उनसे कोई चर्चा नहीं की थी।

विपक्षी दलों का विरोध

तीन तलाक(Triple talaq) बिल को लेकर कई विपक्षी दलों का कड़ा विरोध हो रहा है और मोदी सरकार को इसका सामन करना पड़ सकता हैं। लेकिन भाजपा सरकार के अनुसार सभी बराबर के हकदार है और उनके अनुसार मुस्लिम महिलाओं की स्थिति में सुधार और लैंगिक समानता के लिए यह कदम जरूरी है। इसी कदम को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी(BJP) ने लोकसभा के पहले सत्र के दौरान कांग्रेस(Congress) से  अपील की थी कि वह देश में समानता और समान नागरिक संहिता के लिए उनका सहयोग करें।

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पॉलिटिक्स

 कांग्रेस को लगा एक और झटका, नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने पद से दिया इस्तीफा

इस्तीफा  देने के पीछे नवजोत सिंह सिद्धू ने बताई यह बड़ी वजह


लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मानो कांग्रेस सरकार पर काले बदल छा गए है जो छटने का नाम नहीं ले रहे. जी हाँ, हाल ही में उपाध्यक्ष राहुल गाँधी और महा सचिव ज्यातिरादित्य सिंधिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया जिसके बाद सरकार में इस्तीफा देने की होड़ लग गई है.वही आज नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है.जिसके बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने इस्तीफा देने  की वजह मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से चल रहे मतभेद को बताया है

10 जुलाई को ही सौप दिया था इस्तीफा 

आपको बता दे कि लोकसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस सरकार को हार का सामना करना पड़ा. हारने का ज़िम्मा अमरिंदर सिंह ने सिद्धू पर फोड़ा था और केंद्रीय आलाकमान से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.फिर 6 जून को हुई कैबिनेट की पहली ही बैठक में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सिद्धू सहित कई मंत्रियों के विभाग बदल दिए थे.जिसके चलते उनके और सिद्धू के बीच मतभेद चल रहा था.

वही आज  नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्विटर अपने इस्तीफे को सार्वजनिक करते हुए जानकारी दी कि उन्होंने 10 जुलाई को ही अपना इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसका खुलासा आज किया है.इसके अलावा सिद्धू ने अपने ट्वीट में कहा कि “कांग्रेस अध्यक्ष से मिला. उन्हें अपना पत्र सौंपा, हालात से अवगत कराया.” उन्होंने ट्वीट के साथ एक तस्वीर भी पोस्ट की थी, जिसमें वे राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा गांधी और अहमद पटेल के साथ खड़े दिखे.

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पॉलिटिक्स

कांग्रेस पार्टी पर छाये संकट के बादल, 21 मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

राजनीतिक संकट से गुजर रही कांग्रेस को एक और झटका


लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राजनीति में कई नए बदलाव देखने को मिल रहे है. बीजेपी अपने पहले बजट को पेश कर अपने कार्य में जुट गयी है. कांग्रेस में आये दिन नेताओ की इस्तीफा देने की होड़ लग गयी है. लोकसभा चुनाव में मिली हार से कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और उनके साथ ज्योतिरादित्य सिंध्या ने भी अपने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है.

कर्नाटका में कांग्रेस-JDS गठबंधन की सरकार चला रहे एच.डी. कुमारस्‍वामी के मंत्रिमंडल से कांग्रेस बाहर हो गई है. कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस के सभी 21 मंत्रियों ने इस्‍तीफा दे दिया है. इस बीच सीएम कुमारस्‍वामी ने कहा है कि ‘मसला सुलझ जाएगा. सरकार आराम से चलेगी.’

वही अब इसके अलावा निर्दलीय विधायक ने भी सरकार से समर्थन वापस लेकर भारतीय जनता पार्टी का समर्थन किया है. साथ ही कांग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ट्वीट कर सभी विधायकों से अपील की है कि वह अपना इस्तीफा वापस ले लें. कांग्रेस मंत्रियों के साथ- साथ जेडीएस पार्टियों के मंत्रियों ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है और कर्नाटक में जल्द ही नया मंत्रिमंडल बनाया जा सकता है

कर्नाटका में जितने भी मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है और मुंबई चले गए है उन पर कांग्रेस पार्टी कड़े एक्शन लेंगी. अगर मंत्री पार्टी में वापस नहीं लौटते तो उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया जायेगा- कुमारस्वामी ने कहा

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पॉलिटिक्स

पूरे भारत में सिर्फ  एक नाम की गूंज – “Modi”

कांग्रेस को 50 से नीचे सीटों पर सिमटा देगी – नरेंद्र  मोदी


देश में जहाँ  गर्मी का पारा 40 डिग्री के पार है तो वही 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर इसकी तपिश दुनिया के कौने- कौने में महसूस  की जा रही है. जहाँ एक तरफ सभी विपक्षी एकजुट होकर  जनसभा के सामने पीएम मोदी  के खिलाफ  आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे है वही अब पीएम मोदी भी विपक्षियों  के हर सवालों के जवाब देने के लिए तैयार खड़े है

सब जानते है पीएम मोदी अगर कोई भी फैसला देश के हित में लेते है तो उसमे भी जनता का भला ही छुपा होता है. यह बात वाराणसी की जनता ने भी ज़ाहिर कर दिया है. जी हाँ, वाराणसी कि जनता ने पीएम मोदी के रोड शो में विपक्षियों को यह साबित कर दिया है की चाहे हर कोई उनके खिलाफ खड़े हो लेकिन बनारस आज भी मोदी का है,था और हमेशा रहेगा.

कांग्रेस को 50 से नीचे सीटों पर सिमटा देगी – नरेंद्र मोदी

अभी हाल ही में पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू के दौरान यह भविष्यवाणी की और बताया की  वह ज्यादा सीटों और भारी बहुमत के साथ विपक्षियों को उनके हर सवालों का जवाब देंगे साथ ही 50  से कम सीटों पर उनको हार का नज़ारा भी दिखाएंगे. इसके अलावा पीएम मोदी ने विपक्षी को भ्रम का दूसरा नाम भी कहा और साथ यह भी कहा की घोषणापत्र में मध्यमवर्ग का नाम भी नहीं है, उनके कुछ नेता इस वर्ग को स्वार्थी और लालची बता रहे हैं.

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 पीएम मोदी ने जनता द्वारा दिए गए प्यार को लेकर भी उनका शुक्रियादा किया. उन्होंने कहा की मैं जानता हूँ कि जनता मुझ पर पूर्ण रूप से भरोसा करती है और इसलिए करती है क्यूंकि वो जानते है की मैं उनकी उम्मीदों पर खड़ा उतर रहा हूँ.जो विपक्षियों को हज़्म नहीं हो रही है. लेकिन जब सच्चाई से उनका सामना  होगा तब उनके सारे भ्रम खत्म हो जाएँगे. अब देखना यह है की सच में पीएम मोदी द्वारा की गयी भविष्यवाणी  सच होती है या नहीं ? क्या इस बार सही में कांग्रेस 50  से कम सीटों में सिमट जाएगी या नहीं  ?

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पॉलिटिक्स सेहत

गुजरात हाई कोर्ट से हार्दिक पटेल को झटका

नहीं लड़  पाएंगे अब  2019 के लोकसभा  चुनाव 


सभी जानते है कि लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 11  अप्रैल को होनी है. ऐसे में चुनाव होने से पहले ही गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल  को मिल गया है  झटका. जी हाँ  अभी कुछ दिन पहले ही हार्दिक पटेल ने कांग्रेस पार्टी का हाथ थामा था जिसके बाद कांग्रेस ने गुजरात से  लोकसभा की  सीट के लिए  चुनाव  लड़ने का टिकट दिया.  लेकिन अब हार्दिक पटेल लोकसभा  चुनाव  नहीं लड़ पाएंगे

आपको बता दे कि हार्दिक पटेल ने गुजरात हाई कोर्ट में अपनी सजा पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की थी, जिसके चलते कोर्ट ने उन्हें दंगा भड़काने के मामले में सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हार्दिक को मेहसाणा के विसनगर में दंगा भड़काने के एक मामले में 2 साल की सजा सुनाई गई है साथ ही  सजायाफ्ता होने पर अब हार्दिक के चुनाव लड़ने पर भी रोक लग गई है.

जाने क्या था मामला ?

हार्दिक को बीजेपी विधायक ऋषिकेश पटेल के कार्यालय में तोड़फोड़ करने के मामले में विसनगर कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए 2 साल की जेल की सजा सुनाई है. 2015 के इस दंगा केस में हार्दिक पटेल के अलावा लालजी पटेल को भी दोषी करार दिया गया है. मेहसाणा की विसनगर कोर्ट ने हार्दिक और लालजी पटेल को दोषी ठहराया है. बता दें कि 2015 में बीजेपी विधायक ऋषिकेश पटेल के दफ्तर पर हमला हुआ था.

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भारत

राहुल गांधी ने चुनावी मौसम में तेजस्वी के साथ किया लंच

गुजरात के चुनावी रैली में व्यस्त है राहुल


गुजरात चुनाव जैसे-जैसे पास आते दिख रहे हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव ला रहे हैं। मंदिरों में जाना, लोगों से मिलना और सबसे प्रमुख किसानों के मुद्दे पर बातचीत करना शामिल कर दिया। इस दरमियान राहुल 2019 की भी तैयारी कर रहे हैं। इसके मद्देनजर वह अपने विपक्षियों को आड़े हाथों ले रहे हैं।

राहुल गांधी

तेजस्वी ने लंच के लिए राहुल का आभार प्रकट किया

गुजरात के बाद आगे की रणनीति को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से मुलाकात की।

तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर राहुल को लंच के लिए शुक्रिया भी किया। लंच के लिए राहुल आपने बिजी शेड्यूल के बीच भी लंच के लिए समय निकाला इसके लिए शुक्रिया.

इससे पहले राहुल गुजरात के दौरे पर हैं। जहां वह लगातार लोगों को संबोधित कर रहे हैं।

विदेश से लौटने के बाद आक्रमक रुप मे हैं राहुल

आपको बता दें राहुल गांधी से अमेरिका के दौर से लौटे है। तभी उनका अंदाज आक्रामक हो गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर राहुल के तीखे ट्वीट, शायराना वार लोगों को खूब भा रहे हैं। यही कारण है कि अभी तक सोशल मीडिया पर बीजेपी से पिछड़ने वाली कांग्रेस अब टक्कर दे रही है। –

इसके साथ ही कांग्रेस का साथ कोई नया नहीं है। साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस-राजद-जदयू ने गठबंधन किया था। इस दौरान तेजस्वी राहुल की जोड़ी भी साथ में दिखी थी। जदयू ने जब महागठबंधन तोड़कर बीजेपी से हाथ मिलाया। उसके बाद भी कांग्रेस-राजद साथ ही रहे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी दोनों दलों के बीच मामला सुलझानें की कोशिशें की थी।

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पॉलिटिक्स

गुजरात मे विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान, दो चरणों में होगा चुनाव

रैली की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी


 

कई दिनों से गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा चल रही थी। आखिरकार आज उसका इंतजार खत्म हो गया है। बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस करके विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है। चुनाव दो चरणों मे होगा। पहले चरण के लिए 9 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण में 93 विधानसभा सीटों पर चुनाव होगा, दूसरे चरण के लिए 14 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। वोट की गिनती 18 दिसंबर को होगी। पहले फेज में 19 जिलें में वोटिंग होगी, तो वहीं दूसरी फेज में 14 जिले में वोट डाले जाएंगे।

गुजरात में विधानसभा चुनाव तारीख का ऐलान

 
वीवीपैड का इस्तेमाल किया जाएगा
प्रेस कांफ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति ने कहा कि गुजरात की 182 सीटों पर कुल 4.30 करोड़ वोटर हैं। चुनावों के लिए 50,128 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि गुजराती भाषा में भी वोटिंग गाइड दी जाएगी। चुनावों में वीवीपैड का इस्तेमाल होगा।
अचल कुमार ज्योति ने कहा कि हर पोलिंग बूथ पर एक महिला चुनावकर्मी मौजूद रहेगी। ऐसी गुजरात के चुनावों मे पहली बार होगा। सभी उम्मीदवारों को हलफनामा भरना होगा। अगर हलफनामे में कोई भी कॉलम खाली रहता है, तो उम्मीदवार को नोटिस भेजा जाएगा। हर सीट को पोलिंग बूथ की वीवीपैट पर्चियों की गिनती होगी। 102 बूथ पर महिला पोलिंग स्टाफ मौजूद रहेगा।
चुनाव की तारीख का ऐलान होती ही राज्य में आचार सहिंता लागू हो जाएगी। जिसके कारण सभी बॉर्डर चेकपोस्ट को सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में रखा जाएगा।
आचार सहिंता के लागू होते ही चुनाव प्रचार की प्रक्रिया भी शुरु हो जाएंगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि सभी बड़ी रैलियों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी ताकि किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो।