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अगर आप भी हैं खस्ता ठेकुआ के दीवाने, तो इन तीन तरीकों से बना सकती हैं खस्ता ठेकुआ

खस्ता ठेकुआ बनाने की तीन विधि


बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में ठेकुआ काफी मशहूर है. यहाँ तीज त्योहारों में ठेकुआ बनाया जाता है. बिहार और उत्तर प्रदेश में खास कर छठ के त्योहार पर ठेकुआ का खास प्रचलन है. लेकिन जिन लोगों को ठेकुआ बेहद पसंद होता है वो कभी भी इसे खाने को तैयार हो जाते हैं. लोगों को छठ पूजा का इंतजार ठेकुआ के कारण भी होता है. क्योंकि छठ में प्रसाद के रूप में ठेकुआ को शामिल किया जाता है. शायद आपने देखा होगा कि कुछ लोग प्रसाद के लिए सिर्फ गुड़ में बना ठेकुआ ही चढ़ाना पसंद करते हैं. क्योंकि ऐसा माना जाता है कि चीनी की तुलना में गुड़ ज्यादा शुद्ध होता है। इसलिए बहुत सारे लोग छठ पूजा में सिर्फ गुड़ में बना ठेकुआ ही चढ़ाना पसंद करते हैं. तो चलिए आज हम आपको तीन तरीकों से ठेकुआ बनाने की विधि बताएंगे.

आटे का ठेकुआ: बिहार और उत्तर प्रदेश में मशहूर ठेकुआ, जो लोगों को अक्सर छठ पूजा के समय पर ही खाने को मिलता है. छठ पूजा में ज्यादातर लोग गेंहू के आटे का ही ठेकुआ बनाते हैं.  इसे बनाने की लिए हमें कई तरह की चीजों की आवश्यकता होती है, जो हमारे घरों में आसानी से उपलब्ध होती हैं.

सामग्री: 100 ग्राम गेंहू का आटा, देसी घी, रिफाइंड तेल, पानी, चीनी स्वादनुसार, इलायची, ग्रेटेड नारियल, ड्राई फ्रूट्स, सौंफ आदि।

विधि: टेस्टी और स्वादिष्ट ठेकुआ बनाने के लिए सबसे पहले आपको 3 कप पानी उबालना होगा. इसके बाद इस पानी में चीनी डालकर चाश्नी तैयार करनी होगी. चाश्नी तैयार होने के बाद इसमें घी डालें और इसे धीरे-धीरे चलाये. जब यह पूरी तरह मिक्स हो जाए हो इससे एक बर्तन में रख ले. अब एक दूसरे बर्तन में आटे के साथ नारियल, सौंफ, इलायची पाउडर और ड्राई फ्रूट्स डाल दें. इसके बाद इसमें चाश्नी डालकर इसे अच्छी तरह गूंथें. लेकिन आटा सॉफ्ट नहीं होना चाहिए, थोड़ा कठोर गूंथें. आटा गूथें जाने के बाद अब इसकी छोटी-छोटी लोइ बना लें. और उसके बाद सांचे पर रख कर इस पर डिजाइन बनाये और उसके बाद गर्म तेज में ताल लें. इसी तरह आप ठेकुआ बना सकती हैं.

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मैदे के ठेकुआ: मैदे का ठेकुआ भी बिल्कुल आटे की तरह ही बनता है. इसमें सिर्फ आटे की जगह मैदा और सूजी का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसे आप सिर्फ़ आधे घंटे के अंदर बना सकती हैं.

सामग्री: 200 ग्राम मैदा, 50 ग्राम सूजी, चीनी स्वादनुसार, ग्रेटेड नारियल, रिफाइल तेल, घी, सौंफ, ड्राई फ्रूट्स।

विधि: मैदे का ठेकुआ भी बिल्कुल आटे की तरह ही बनता है. इससे बनाने के लिए भी आपको 3 कप पानी उबालना होगा. इसके बाद इस पानी में चीनी डालकर चाश्नी तैयार करनी होगी. चाश्नी तैयार होने के बाद इसमें  मैदे में सूजी, घी, और अन्य सभी सामग्रियों को डालकर अच्छी तरह से मिला लें। जब यह पूरी तरह मिक्स हो जाए हो इससे एक बर्तन में रख ले। अब एक दूसरे बर्तन में मेदा के साथ नारियल, सौंफ, इलायची पाउडर और ड्राई फ्रूट्स डाल दें. इसके बाद इसमें चाश्नी डालकर इसे अच्छी तरह गूंथे.  लेकिन मैदा सॉफ्ट नहीं होना चाहिए, थोड़ा कठोर गूंथे. मैदा गूथे जाने के बाद अब इसकी छोटी-छोटी लोइ बना लें और उसके बाद सांचे पर रख कर इस पर डिजाइन बनाये और उसके बाद गर्म तेज में तल ले. इसी तरह आप ठेकुआ बना सकती हैं।

आटे और चोकर से बनाएं खस्ता ठेकुआ: अगर आपको हेल्दी ठेकुआ खाने का मन हो तो आप आटे और चोकर से भी खस्ता ठेकुआ बना सकते है.यह खाने में स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि हेल्दी भी होता है. साथ ही साथ आप इसे कुछ समय तक स्टोर भी कर सकती हैं.

समाग्री: आटा, चोकर, सूजी, खजूर का गुड़, घी, रिफाइन ऑयल, गुड़, ड्राई फ्रूट्स, सौंफ, दूध।

विधि: आटे और चोकर से खस्ता ठेकुआ बनाने के लिए सबसे पहले आटा, सूजी और चोकर को अच्छी से मिक्स कर लें. आटा गूंथने से पहले चाश्नी बना कर तैयार कर लें और उसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें. अब आटा, सूजी, चोकर, ड्राई फ्रूट्स, गुड़ का दरदरा और खजूर का गुड़ डालें और इसे अच्छी तरह मिला लें. उसके बाद इसे चाश्नी, दूध और घी की मदद से गूंथें.  जब आटा गूंथ जाए तो लोई बनाकर सांचे से डिजाइन बना लें. उसके बाद गर्म तेज में ताल ले।

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4 दिन तक मनाया जायेगा छठ पूजा का महापर्व, यह है पूजा का सही मुहूर्त

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य और क्या है इसका महत्व?


हर साल दिवाली के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से ही देवी छठ माता की पूजा अर्चना शुरू हो जाती है और सप्तमी तिथि की सुबह तक चलती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को लोग नहा कर भोजन ग्रहण करते है। इसमें व्रती यानी जो लोग व्रत रखते है उनका मन और तन दोनों ही शुद्ध होते हैं। इस दिन व्रती शुद्ध सात्विक भोजन करते हैं।

आपको बता दें की शुक्ल पक्ष की पंचमी पर जो लोग व्रत रखते है वो सारा दिन निराहार रहते हैं। उसके बाद शाम के समय गुड़ वाली खीर का विशेष प्रसाद बनाकर छठ माता और सूर्य देव की पूजा करके खाते हैं।षष्टि तिथि के पूरे दिन निर्जल रहकर शाम के समय अस्त होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं और सूर्यदेव से अपने मन की कामना कहते हैं।फिर सप्तमी तिथि के दिन सुबह के समय उगते सूर्य को भी नदी या तालाब में खड़े होकर जल देते हैं और अपनी मनोकामनाओं के पूर्ण  होने  के लिए प्रार्थना करते हैं।

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य

डूबते सूर्य को अर्ध्य देने के पीछे एक बहुत बड़ी मान्यता है कि सूर्य की एक पत्नी का नाम प्रत्यूषा है और यह जो डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है यह उन्हें ही दिया जाता है। संध्या के समय में अर्ध्य देने से कई तरह से लाभ होते है। ऐसा कहते है की इसे से आँखों की रौशनी बढ़ जाती है। लम्बी आयु  मिलती है। इस अर्ध्य माता या पिता ही नहीं बल्कि विद्यार्थी भी रख सकते  है जिस से उनको शिक्षा में भी लाभ मिल सकती है।

4 दिन मना जायेगा छठ पूजा का महा पर्व

छठ पूजा नहाय-खाए – 31 अक्टूबर

खरना का दिन – 1 नवम्बर

छठ पूजा संध्या अर्घ्य का दिन – 2 नवम्बर

उषा अर्घ्य का दिन – 3 नवम्बर

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अब जाने क्या है छठ पूजा का सही मुहूर्त?

इस बार  छठ पूजा का सही मुहूर्त है  2 नवंबर,को  सूर्योदय का शुभ मुहूर्त- 06:33

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का शुभ मुहूर्त- 17:35

षष्ठी तिथि आरंभ- 00:51 2 नवंबर 2019

षष्ठी तिथि समाप्त- 01:31 3 नवंबर 2019

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