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5 बॉलीवुड सितारे जिन्होंने कैंसर को हराकर जीती जिंदगी की जंग

Indian celebrities who fought cancer: मौत के दरवाजे से जिन्दा लौट कर आये ये बॉलीवुड सितारे


Indian celebrities who fought cancer: कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिसका नाम सुनते ही किसी भी व्यक्ति की रुह कांप जाती है। कैंसर व्यक्ति को मौत के दरवाजे तक ले जाता है। हर साल कैंसर के कारण लाखों लोगों की जान जाती है। इस बीमारी से बॉलीवुड भी अछूता नहीं रहा है। बॉलीवुड में भी ऐसी कई हस्तियां हैं जिन्होंने इस घातक बीमारी का सामना किया। इनमें से कुछ ने जिंदगी की जंग जीत ली, वहीं कुछ इस जंग में हार गए। आज हम कुछ ऐसे ही बॉलीवुड सेलेब्रिटीयों के बारे में बात करेंगे जिन्होंने कैंसर जैसी बीमाारी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और कैंसर जैसी बीमारी को हराकर जिंदगी की जंग जीती ली।

इन बॉलीवुड सितारों ने जीती कैंसर से जंग

मनीषा कोइराला: फिल्म संजू में अभिनेता संजय दत्त की मां नरगिस का किरदार निभाने वाली मनीषा असल ज़िंदगी में कैंसर सर्वाइवर रही। 2012 में मनीषा को पता चला था कि वह कैंसर से पीड़ित हैं। उस समय वह काठमांडू में रह रही थीं। शुरू में तो उनको यकीन ही नहीं हुआ कि उनको कैंसर है लेकिन बाद में उन्होंने इसे अपनी जिंदगी की एक जंग माना और इस पर जीत हासिल की। साल 2014 तक उन्होंने कैंसर से पूरी तरह मुक्ति पा लीथी।
अनुराग बासु: मशहूर फिल्म डायरेक्ट अनुराग बासु भी कैंसर के पेशेंट रह चुके है। अनुराग को ल्यूकेमिया था जो कि एक तरह का ब्लड कैंसर होता है। साल 2004 में अनुराग को पता चला की उनको ब्लड कैंसर हो गया है तो अनुराग ने इस बीमारी के आगे हार नहीं मानी और अपना इलाज करवाया। अब वो पूरी तरह ठीक हो चुके है।

और पढ़ें: ऋषि कपूर के बचपन से ले कर निधन तक की जीवनी

लीजा रे: हिंदी फिल्मों में काम कर चुकीं कनाडियन एक्ट्रेस लीजा रे भी साल 2009 में कैंसर से पीड़ित हुई थी। मगर लीजा ने हिम्मत नहीं हारी और बीमारी से लड़ी। आज लिजा कैंसर से पूरी तरह ठीक हो गयी है। आज वो कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई कैंपेंस को भी सपोर्ट कर रही हैं।
राकेश रोशन: ऋत‍िक रोशन के पिता राकेश रोशन को साल 2019 के शुरुआत में पता चला था कि उनको कैंसर हो गया है। इसकी जानकारी  ऋत‍िक रोशन ने दी थी। ऋत‍िक ने बताया, पापा को कुछ हफ्ते पहले Squamous Sell Sarcinoma की बीमारी डायगनॉज हुई है। हालांकि बीमारी के पहले स्‍टेज में ही राकेश रोशन की सक्सेसफुल सर्जरी हुई थी।
सोनाली बेंद्रे: बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली को भी 2019 में कैंसर का पता चला। उन्होंने खुद सोशल मीडया के जरिए अपने फैंस को ये जानकारी दी। अपने इलाज के लिए सोनाली बेंद्रे न्यूयॉर्क गयी थी। इस दौरान सोनाली सोशल मीडिया के जरिए अपने दोस्तों और फैंस से लगातार जुड़ी रही। कुछ समय पहले वो इस बीमारी का इलाज करवाकर न्यूयॉर्क से वापस लौटी है।

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जहरीली हवा से हुआ युवती को कैंसर, दिल्ली का पहला मामला आया सामने

दिल्ली की जहरीली हवा से हो सकता है आपको कैंसर 


सुनने में आपको अजीब लगेगा लेकिन ये खबर सुनकर आप दिल्ली की जहरीली हवा में सांस लेने भी घबराएंगे। जी हाँ, हाल ही में दिल्ली की जहरीली हवा से एक युवती को कैंसर हो गया हैं। इस बात की पुष्टि में सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने की हैं। दिल्ली की हवा पहले सिर्फ प्रदूषित कही जाती थी लेकिन अब ये जहरीली  भी हो गई हैं। दिल्ली की हवा में सांस लेना इतना दुर्भर हो गया  कि लोग अब मास्क पहनकर घूमने लगे हैं। जहरीली हवा से  फेफड़ों के साथ-साथ अन्य कई बड़ी-बड़ी गंभीर बीमारिया हो जाती हैं।
दिल्ली का पहला केस 
सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल में एक युवती जांच के लिए आई जो बीमार थी। युवती को हॉस्पिटल वालों ने कुछ टेस्ट करवाने के लिए कहा लेकिन जब टेस्ट रिपोर्ट आई तो हॉस्पिटल वालों के साथ-साथ  अचंभित थी। टेस्ट रिपोर्ट के अनुसार युवती को कैंसर की गंभीर बीमारी हो गई थी। जब युवती की मेडिकल हिस्ट्री की जांच की गई तो सब कुछ सामने पाया गया तो कुछ और टेस्ट से  की जहरीली गैस  कैंसर हुआ हैं। गंगाराम के सेंटर फॉर चेस्ट के चेयरपर्सन डॉ. अरविंद कुमार (Dr. Arvind Kumar) ने  स्वयं इस बात की पुष्टि की। जहरीली हवा से इस युवती के फेफड़ों का कैंसर होने का दावा किया  जा रहा है जो कि दिल्ली में पहला मामला बताया जा रहाहैं
क्या कहते है सेंटर फॉर चेस्ट के चेयरपर्सन डॉ. अरविंद कुमार
गंगाराम के सेंटर फॉर चेस्ट के चेयरपर्सन डॉ. अरविंद कुमार (Dr. Arvind Kumar) के अनुसार,”उनकी ओपीडी (OPD) में एक 28 साल की युवती जांच के लिए आई थी। युवती ने उनको बताया कि वो जन्म से लेकर स्कूल जाने तक गाजीपुर इलाके में रहती थी। इसके बाद वो और उनका परिवार पश्चिमी दिल्ली में आकर रहने लगा। परिवार के किसी भी सदस्य के धूम्रपान करने का रिकॉर्ड भी नहीं मिला है। ये मामला सीधे वायु प्रदूषण से ही जुड़ा है।”
डॉ. कुमार के अनुसार,”दुनिया के सभी मानवों की संरचना एक जैसी है। दिल्ली में फैली जहरीली हवा एक साइलेंट किलर की तरह काम कर रहा है जिसका असर उम्र के उम्र  शुरूआती चरण में ना दिखकर 20-30 साल की उम्र के बाद दिखता है। डब्ल्यूएचओ (WHO) ने इस समस्या को  दुनिया भर में जन स्वास्थ्य आपात (पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी) घोषित कर रखा है। डॉ. कुमार के अनुसार उन्होंने सरकार से युवती के मामले पर किसी भी संस्था से शोध या अध्ययन कराअपील की हैं।

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सेहत

कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारी से बचना चाहते है , तो इन बातो को अच्छी तरह जान ले :

जाने कैंसर को कैसे कर सकते है जड़ से खत्म ?  


कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिससे शरीर के किसी भी हिस्से की कोशिकाएं पार्ट्स में डिवाइडेड होने लगती है . कैंसर शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्सों में फैलता है. सबसे अहम बात यह है कि  शरीर के किसी एक हिस्से में होने वाले कैंसर को प्राइमरी ट्यूमर कहते है. जिसके बाद शरीर के दूसरे हिस्सों में होने वाला ट्यूमर मैटास्टेटिक या सेकेंडरी कैंसर कहलाता है.

बात करे अगर हम  कैंसर से मरने वाले लोगो के आकड़ो की तो साल 2018 में भारत में कैंसर से मरने वालो की संख्या  है 9.6  मिलियन. जिसमे से 50  प्रतिशत महिलाएंलाएं है जिन्हें ब्रैस्ट और  यूरेटरी कैंसर से जूंझना पडता है. ऐसे में इस  खतरनाक बीमारी  से बचने  के लिए  और जड़  से ख़त्म करने के लिए  यह जान लेना बहुत  जरुरी  है  की इससे कैसे  बचा जाए.

पहले जानते  है की कैंसर होते कितने प्रकार के है ?

1. त्वचा कैंसर

2. ब्लड कैंसर

3. हड्डियों में  कैंसर

4. ब्रेन कैंसर

5. ब्रैस्ट कैंसर

6. लंग कैंसर

7. पैनक्रियाटिक कैंसर

8. माउथ कैंसर

तो यह है 8  प्रकार के कैंसर जिसमे से ज्यादातर लोग में ब्लड , ब्रेन,  लंग , माउथ कैंसर  जो की  तम्बाकू खाने से होता है और महिलाओ में ब्रैस्ट कैंसर पाया जाता है और  जो लोगो में सबसे कम पाया जाता है वो है  पैनक्रियाटिक कैंसर जो बहुत कम लोगो को होता है.

अब बात करते है की कैंसर शरीर में फैलता कैसे है ?

कैंसर तीन तरह से शरीर में फैलता है.

1. डायरेक्ट एक्सटेंशन या इंवेजन, जिसमें प्राइमरी ट्यूमर आस-पास के अंगों और टिशू में फैलता है.

2. लिम्फेटिक सिस्टम में कैंसर की कोशिकाएं प्राइमरी ट्यूमर से टूट कर शरीर के दूसरे अंगों तक चली जाती हैं. लिम्फेटिक सिस्टम टिशू और अंगों का ऐसा समूह है जो इन्फेक्शन और बीमारियों से लड़ने के लिए कोशिकाएं बनाकर इन्हें स्टोर करके रखता है.

3. आपको शायद यह बात नहीं मालूम लेकिन कैंसर ब्लड से भी फैलता है . इसे हीमेटोजिनस स्प्रैड कहा जाता है, इसमें कैंसर की कोशिकाएं प्राइमरी ट्यूमर से टूट कर खून में आ जाती हैं और खून के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच जाती हैं.

कैंसर बीमारी होने के लक्षण क्या – क्या है ?

अगर आपको लगता है की वजन में कमी आ रही  है , या बुखार आ रहा है , आपको भूख नहीं लग रही है , हड्डियों में भी दर्द है , खांसी या मूंह से खून आ रहा है. तो यह सभी लक्षण कैंसर के है जिसके तुरंत बाद  आप डॉक्टर से इलाज करवाए .

Read more:इस तरह से पाए केंसर पर काबू

अब बात करते है की कैंसर का इलाज क्या है ?

कैंसर का इलाज  वैसे तो सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन से किया जाता है. वैसे सर्जरी में डॉक्टर इफेक्टिड एरिया को शरीर से अलग करते हैं. वहीं कीमोथेरेपी में आईवी यानी नसों में सुइयों के द्वारा ठीक किया जाता है, कुछ में आपको दवाई दी जाती है. यह दवाइयां पूरे शरीर में अपना असर दिखाती हैं और हर जगह फैले कैंसर को खत्म करती हैं साथ ही रेडिएशन में  कैंसर की बढ़ती सेल्स को रोका और उन्हें मारा जाता है जो की पूरे शरीर को एक्स-रे मशीन  के द्वारा किया जाता है.

लेकिन इसे खत्म करने का एक घरेलू नुस्खा भी है वो है पपीता जी हाँ  पपीते  की पत्तियों  से कैंसर को  काफी हद तक खत्म करता है क्योंकि पपीता कैंसर रोधी अणु Th1 cytokines की मात्रा  को बढाता है जो की इम्यून सिस्टम को मजबूत  करता है जिससे कैंसर कोशिका को खत्म करना आसान हो जाता है । पपीते की पत्तियों में पपेन नमक एक प्रोटीन को तोड़ने  वाला एंजाइम पाया जाता है जो कैंसर कोशिका पर मोजूद प्रोटीन के आवरण को तोड़ देता है जिससे कैंसर कोशिका शरीर में  पूरी तरह खत्म  होने लगती है. तो इस  कैंसर के सेल्स को पूरी तरह शरीर से खत्म  कर सकते है.

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सेहत सुझाव

जानें किन हरी सब्जियों से मिलता है कैंसर से छुटकारा

हरी सब्जियां रोग प्रतिरोग क्षमता को बढ़ाती हैं


हर व्यक्ति सुरक्षित और रोग मुक्त रहना चाहता हैं। आज लोगों को सबसे ज्यादा अगर कोई बीमारी परेशान करती है तो वह है कैंसर। आजकल छोटी से चोट कब कैंसर का रुप ले लेती है यह पता ही नहीं चलता।

लेकिन इससे बचने के भी घरेलू उपाय है। कई सारे ऐसे फूड्स हैं जिनमें कैंसर से लड़ने और कैंसर सेल्स के प्रसार को कम करने वाले गुण और न्यूट्रीयेंट्रस होते हैं। अगर आप हेल्दी हैं तो आप अपने डाइट में कैंसर से लड़ने वाले फूड्स को शामिल जरुर करें।

हरी सब्जियां

रिसर्च मे यह भी पता चला है कि कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ है जो केवल कैंसर से लड़ने के लिए उपयोगी होते हैं क्योंकि आपके जीवनशैली और आपके खान पान की वजह से भी आपको कैंसर होने का खतरा हो सकता है।

आज आपको ऐसे खाद्य सामग्री के बारे मे बताएं जो कैंसर भी संभावना को कम करता है।

टमाटर

टमाटर लगभग हर घर में रोज ही इस्तेमाल होता है। कई लोग इसे कच्चा खाना भी पसंद करते हैं। टमाटर कच्चा खाना भी सेहत के लिए अच्छा है। टमाटर में लाइकोपीन नाम का एक फाईटोकेमिल्कल होता है जो ऐंडोमेट्रिअ कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है।

हरी पत्तेदार सब्जियं

हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और सलाद आदि में बहुत अच्छी मात्रा में एंटी आक्सीडेंट जैसे बीटा-कैरोटीन और लुटिन पाया जाता है। लैब स्टडी में यह पाया गया कि इनमें जो केमिकल पाए जाते हैं वो कैंसर को रोकने में मदद करते हैं।

लहसून

लहसून में ऐसे केमिकल पाए जाते हैं जो पेट से संबंधित कैंसर को रोकने का काम करते हैं।

क्रुसीफेरस सब्जियां

इन सब्जियों में ग्लूकोसाइनोलेट्स नामक एक ऐसा पदार्थ होता है जिससे सल्फर की मात्रा ज्यादा होती है और वह कैंसर सेल्स के निर्माण को रोकने का काम करता है। यह कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने के लिए अच्छे खाद्य पदार्थ में से एक हैं।

अंगूर

इसमें एंटी-आक्सीडेंट के अलावा बहुत अधिक मात्रा में रेसवेराट्रोल पाया जाता है जो शरीर मे कैंसर को बढ़ाने वाले एंजाइम को ब्लाक करने का काम करता है।

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सेहत

दांतों की परेशानी से दो चार नहीं होना चाहते हैं तो इनका सेवन कम करें

रोज की खाने वाली चीजें होती है परेशनी


हम में से हर तीसरे आदमी को दांतो में प्रॉब्लम होती है। दांतो की प्रॉब्लम को कारण आपके कई बार असहनीय दर्द होता है। तो कई बार मुंह से आने वाली बदबू के कारण आपको शर्मिंदा होना पड़ता है। तो चलिए आज आपको बताते है किन-किन चीजों को खाने से दांतो में प्रॉब्लम होता है। इनमें से ऐसी कई चीजें है जिनका सेवन हम रोज करते हैं।

दांत

आचार

हममें से कई लोग ऐसे हैं जो प्रतिदिन खाने के साथ आचार जरुर खाते हैं। आचार में एसिड होता है जिसके कारण दांतो में सेसिटिविटी बढ़ जाती है। आचार खट्टा होता है। जिसके कारण दांतों की जड़े कमजोर होती है। अगर आपको आचार बहुत पसंद है और रोज खाते हैं, और इसके दुष्परिणाम से बचना चाहते है तो इसको खाने के बाद पनीर का टुकड़ा भी खा सकते हैं।

स्वीट कैंडी

अगर आप कैंडीज खाने के शौकीन है तो इसके काफी भयंकर परिणाम आ सकते हैं क्योंकि कैंडी में शक्कर की मात्रा अधिक होने के कारण आपके दांत क्षयरोग के ग्रसित हो सकते है इससे आपके दांत समय से पहले ही झड़ सकते हैं यदि आपके बच्चे भी स्वीट कैंडी खाने के शौकीन हैं तो उनको तुरंत रोकिए नहीं तो आगे चलकर उसे भी इस परेशानियों से दो चार होना पड़ेगा।

खट्टे फल

खट्टे फलों में विटमिन सी पाया जाता है। विटमिन सी हमारे शरीर के लिए उपयोगी है। लेकिन आपको पता है खट्टे फलों को रस में हाई एसिड होता है। जिसका सीधा असर हमारे दांतों की जड़ों पर पड़ता है। इसलिए अगर आप खट्टा खाता है तो तुरंत ब्रश न करें। अगर ब्रश करना ही है तो पहले कुल्ला करे लें। इससे आपके मुंह में बना एसिड पतला हो जाता है और आपके दांतों को किसी तरह के नुकसान से बचाता है।

चाय कॉफी

चाय में शक्कर होती है जिसके कारण जीवाणु आराम से दांतों में आराम से अपना घर बना लेते हैं। कॉफी में टैनिक एसिड होता है जो आपके दांतो की कोटिंग को प्रभावित करता है इससे हमारे दांत धुंधले और भद्दे लगते लगते हैं। अगर आप ग्रीन टी का सेवन करें तो ये आपके दांत की सेहत के लिए अच्छा है।

वाइन

शराब का सेवन शरीर और दांतो के लिए कतई अच्छा नहीं है क्योंकि शराब में निर्जलीकरण गुण होते है और शराब पीते ही हमारे मुंह लार बनना बंद कर हो जाता है जिससे मुंह सूखने लगते है इससे आपका स्वास्थ्य खराब हो सकता है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी आपके शरीर में घर बना सकती है। अगर आप शराब का सेवन करते है तो इसके तुरंत बाद ब्रश करें आप इससे बचने लिए पनीर का एक भी खा सकते हैं।

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सेहत

कोलेस्ट्रॉल कम करना चाहते हैं तो इसका सेवन जरुर करें

कैंसर के लिए भी है लाभकारी


सुबह-सबुह एक कप चाय मिल जाएं तो दिन बन जाता है। हम में ऐसे कई लोग है जो सुबह बिना चाय को उठ भी नहीं सकते हैं। हम सुबह-सुबह अदरक वाली इलाययी वाली, अजवाईन वाली चाय पीते हैं। लेकिन क्या आपको पता है सुबह-सुबह अदरक वाली चाय पीने से आपको कई तरह-तरह के फायदे होते हैं।

एक रिसर्च में पाया गया है कि अदरक में मौजूद ऑयल्स और जिंज्रोल साथ ही शोगाओल जैसे यौगिकों के कारण ही यह बहुत ज्यादा लाभकारी है।

अदरक के फायदे

तो चलिए आज आपको अदरक वाली चाय के फायदे बताते हैं।

दिमाग को मजबूती प्रदान करती है

रोजाना अदरक वाली चाय का सेवन करने से दिमाग की सोचने की क्षमता बढ़ती है। अगर आपका दिमाग ज्यादा सोचेगा तो काम भी जाहिर तौर पर ज्यादा करेगा। साथ ही याद्दाश्त तेज होती है। इसके कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है और इन्फ्लेमेशन की समस्या से भी राहत मिलती है। 30 -40 वर्ष की महिलाओं को इसका सेवन ज्यादा करना चाहिए।

एंटी कैंसर गुण

अदरक को एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग माना जाता है। जो कैंसर फैलाने वाले कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। इसके सेवन से पंक्रेअटिक, कोलोरेक्टल, प्रोस्टेट और लीवर कैंसर का खतरा काफी कम रहता है।

कोलेस्ट्रॉल कम करता है

अदरक के सेवन से आपका ब्लड सर्कुलेशन नियमित रुप से काम करता है। जिसके कारण आपका कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है। साथ ही इसके सेवन से हार्ट अटैक का खतरा कम रहता है।

पाचन शक्ति बढ़ाने में मददगार

अदरक में मौजूद शोगाओल और जिंज्रोल पाचन प्रक्रिया को बढ़ते हैं। साथ ही शरीर द्वारा पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता भी बढ़ जाती है। इसलिए जिन लोगों को पाचन से जुड़ी समस्या हैं उन्हें इसका सेवन जरुर करना चाहिए।

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सेहत

कैंसर से बचना चाहते है तो करें ब्लैक टी का सेवन

नियमित रूप से ब्लैक टी के सेवन से आप कैंसर से बच सकते है


ज्यादा देर काम कर लिया है तो चाय पी लें, ज्यादा थक गए हो तो चाय पी लो यह अक्सर आपने लोगों को बोलते हुआ सुना है। तो कई लोगों को ऐसा करते हुए देखा भी होगा। हो सकता है आप भी ऐसे ही स्वभाव के हो? क्या आपको पता है इसके सेवन से आप कैंसर जैसी बड़ी बीमारियो से बच सकते है ।

ब्लैक टी

कुछ तो ऐसे लोग जिनके दिन की शुरुआत ही चाय से होती है। कई लोगों का तो ऐसा मानना है कि बिना सुबह की चाय तो उनका दिन ही नहीं बनता है। ज्यादातर हम दूध वाली चाय पीते है। लेकिन क्या आपको पता है दूध वाली चाय हमारी सेहत के लिए अच्छी नहीं होती। और अगर आपको बार-बार चाय पीने की आदत है और आप इसे नहीं छोड़ पा रहे हैं तो दूध वाली चाय के अलावा भी दूसरी चाय के विकल्प है तो आप आसानी से घर पर बना सकते है ।

ब्लैक टी नाम तो सुना ही होगा आपने, भले ही कभी न पी हो। लेकिन आपको पता है उसके अनेकों फायदे है। तो अगर आपको बार-बार चाय पीने की आदत है पर आप अच्छी सेहत चाहते है तो इसके प्रयोग करें। अगर आप चाय में कुछ अलग स्वाद लाना चाहते है तो आप काली मिर्च और थोड़े नमक का भी प्रयोग कर सकते हैं।

तो चलिए आपको बताते है ब्लैक टी के फायदे

1-ब्लैक टी का सबसे बड़ा फायदा, यह हमें कैंसर से बचाता है। चाय में मौजूद पॉलीफिनॉल्स तत्व हमें कैंसर से बचाते हैं।
2- ब्लैक टी के नियमित तौर पर सेवन से हमारी बॉडी का बैड कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। कॉलेस्ट्रॉल कम होने से हार्ट अटैक का खतरा भी कम हो जाता है।
3-प्रतिदिन ब्लैक टी पीने से आपको दांतों की परेशानियों से भी निजात मिलेंगी। इसमें फ्लोराइड और टेनिन्स होते हैं जो दांतों में कैविटी बनाने वाले बैक्टीरिया को रोकता है।
4-अगर आप मोटापे से परेशान है तो ब्लैक टी का सेवन करें। इसमें भरपूर मात्रा में सोडियम, फैट और कैलोरी पाई जाती है। कैलोरी होने के कारण भूख कम लगती है।
5-ब्लैक टी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही इन्फेक्शन से भी बचाती है।

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सुझाव सामाजिक

इस तरह से पाए केंसर पर काबू

कैसे पाए कैंसर पर काबू?


कर्करोग कैंसर का नाम ही किसी व्यक्ति को भयभीत करने के लिए काफी है। मृत्यु का कारण बन चुका है। इस रोग को आरंभिक अवस्था मे आसानी से ठीक किया जा सकता है। कैंसर की शुरुआत देर मे मिदान होना पीङित के उपचार के लिए बेहद आवश्यक है और इसके लिए हमे इस रोग के विविध लक्षणो की पयर्प्ति जानकारी होना भी आवश्यक है। तो कैसे पाए कैंसर पर काबू?

हम इस लेख मे कैंसर के सामान्य लक्षणों की जानकारी दे रहे है-

कैंसर के सामान्य लक्षण इस प्रकार है-

∙ स्तन मे बदलाव: स्तन मे गाँठ या उसके किसी भाग मे कङापन होना। अंदर की ओर मङना से अकस्मात कोई स्ताव निकलना। डाँक्टर जाँच कर आवश्यकता नुसार करने की सलाह हे सकते है।

∙ त्वचा: शरीर के किसी तिल या मस्से के रंग, आकार और रचना मे बदलाव आना।

∙ पाचन: पाचन या शैच संबंधी आदतो मे स्थाई बदलाव आना। बार-बार जुलाब होना।

∙ मुँह: मुँह मे छाले आना। सामान्यत 2 हफ्ते मे कोई भी छाला ठीक हो जाता है परंतु इससे अधिक समय लगने पर चिंता करनी चाहिए। आवाज मे बदलाव आना।

∙ बुखार: लम्बे समय तक ठीक न होने वाला बुखार रक्त के कैसेंर का लक्षण हो सकता है।

रात मे पसीना आना: रात के समय ज्यादा पसीना आना महिलाओ मे रजोनिवति के समय रात मे पसीना आम बात है पर इसकी मात्रा अधिक होने पर डाक्टर से संपर्क करना चाहिए।

यह पाँच फल जो कैंसर से लङने मे मददगार है

कैंसर दुनिया मे सबसे खतरनाक बीमारी से एक के रुप मे मानी जाती है। एक इस घातक बीमारी से लङने के लिए स्वस्थ संतुलित आहार की जरुरत होती है।

∙ अंगूर: अंगूर एंटीऑक्सीडेंट जिसे रेसवाटयोल कहा जाता है का स्त्रोत होने के नाते, यह फल कैंसर रोग के लिए अच्छा है, क्योकि इस बीमारी को शुरु करने या रोग फैलने से रोकने मे सहायक है।

∙ लहसुन: लहसुन नियमित रुप से खाना चाहिए क्योकि यह इस रोग विकसीत होने का चांस कम देता है।

∙ हरी पत्ते वाली वाली सब्जियाँ: हरी पत्ते वाली सब्जियो मे जैसे सलाद और पालक को हर रोज भोजन मे शामिल किया जाना चाहिए, क्योकि वे एंटीऑक्सीडेंट बीटा कैरोटीन और ल्यूटेन जो कैंसर को शिकाओ को कम करने मे मदद करता है।

∙ बेरीज: बेरीज का प्रयोग जैसे ब्यूबेरी ब्लैकबैरी और स्टोबेरी का प्रयोग शुरु कर देते है।

∙ कीवी: कीवी विटामिन से भरी है जो एक कैंसर से लङने मे मददगार एंटीऑक्सीडेंट है और यह फी रेडिकल्स को संतुलित रखने मे सहायता रखता है।

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सेहत सामाजिक

कैंसर से बचना चाहते है तो जिंजर बीयर जरूर ट्राई करें

जिंजर बीयर जिंजर बियर जरूर ट्राई करे


गर्मी के दिनों में लोग बीयर पीना बहुत पसंद करते है। अगर आप भी बीयर पीने के बहुत शौकीन है तो एक बार जिंजर बीयर जरुर ट्राई करें। यह हेल्थ के लिए बहुत ही लाभकारी है। इसके अलावा भी इसके कई फायदे है। यह हमारे शरीर को स्वस्थ रखती है। जिंजर बीयर पीने से केलेस्ट्रॉल और शुगर का लेवल कम रहता है। इसके साथ ही इसके सेवन से कैंसर के खतरों और गठिया जैसी बीमारियों को भी टला जा सकता है। इस जिंजर बीयर को आप आसानी से अपने घर में बना सकते हैं। जिंजर बीयर में विटामिन, प्रोबॉयोटिक्स होने के कारण यह बहुत हेल्दी होने के साथ कार्बोनेटेड ड्रिंक भी है।

जिंजर बीयर

घर में बनाएं जिंजर बीयर

आवश्यक सामग्री

200 ग्राम छिली और कटे अदरक के टुकड़े
450 मिलीलीटर पानी
20 ग्राम नमक
120 मिलीमीटर मिनरल वाटर
एक छोटी कटोरी नींबू का रस
एक लेमन स्लाइस
थोड़ा सा ऑर्गेनिक शहद

बनाने की विधि

पानी को एक बर्तन में डाले और उसे उबाल लें। एक बार जब पानी उबल जाएं, तो उसमें अदरक के सारे टुकड़ें डाल दें। पानी को थोड़ा ठंडा होने दें, अब दूसरे कप में फिल्टर पानी लें और शक्कर को मिला लें। इस मिश्रण को थोड़ी देर और गर्म कर लें। शक्कर का घोल तैयार कर लें। अब एक बर्तन में आधा कप चीनी के इस घोल को मिला लें। इसमें अब शहद और नींबू के रस को मिला लें। अब इसे खाली प्लास्टिक बोटर या सोड़ा के बोतल में भरें। आपकी जिंजर बीयर तैयार।
इसके फायदे

जिंजर बीयर न सिर्फ पेट से जुड़ी समस्याओं के लिए लाभदायक है। इसके अलावा यह डाइजेशन सिस्टम को भी दुरुस्त करने के साथ ही केलोस्ट्रॉल और ब्लड सुगर के स्तर को सामान्य बनाए रखने में भी सहायक होता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन भी इम्प्रूव होता है।

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भारत

90 फीसदी लोग लेते है जहरीली हवा में साँस – डब्लू एच ओ

90 फीसदी लोग लेते है जहरीली हवा में साँस – डब्लू एच ओ


90 फीसदी लोग लेते है जहरीली हवा में साँस – डब्लू एच ओ  :- विश्व स्वास्थ्य संग़ठन की हाल ही में आई एक ताज़ा रिपोर्ट में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आये है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 90 फीसदी लोग जहरीली हवा में साँस ले रहे है।

भारत के सबसे ज्‍यादा राज्‍य प्रदूषित

विश्व स्वास्थ्य संग़ठन की ये रिपोर्ट भारत के सन्दर्भ में बहुत चिंताजनक है, क्योंकि WHO की रिपोर्ट में जिन 11 शहरो का जिक्र किया गया है। उस रिपोर्ट में भारत के तीन राज्य के नाम शामिल है। इस के मुताबक भारत देश में प्रदूषित राज्यों की संख्या सबसे ज्यादा है। ये राज्य है, राजधानी दिल्ली, मुम्बई और कोलकाता।

विश्व स्वास्थ्य संग़ठन

यहाँ पढ़ें : कावेरी जल विवाद- सभी पार्टियों की कैबिनेट बैठक बुलाई गई

दिल्‍ली में बीजिंग से दुगुना प्रदूषण

वहीं अगर हम राजधानी दिल्‍ली की बात करें तो दिल्‍ली का प्रदूषण चीन की राजधानी बीजिंग का दुगुना है। राजधानी दिल्ली की हवा में पीएम10 एकाग्रता मिलीमीटर प्रति वर्ग 225 माइक्रोग्राम में होना पाया गया है। गौरतलब है, कि भारत इस साल अक्टूबर से पैरिस समझौता को लागू करने में एक अहम कदम उठाने जा रहा है।

जिस के दौरन भारत देश दुनिया के बाकि देशों के साथ मिलकर जलवायु परिवर्तन को कम करने में कदम उठाएगा। भारत साल 2050 तक पृथ्वी के तापमान को दो फीसदी तक कम करने के लक्ष्य पर काम करेगा।

दिल्‍ली में बीजिंग से दुगुना प्रदूषण

75 प्रतिशत मौते भारत में

विश्व स्वास्थ्य संग़ठन की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र में वायु प्रदूषण से हर साल करीबन आठ लाख लोगों की मौत हो रही है और जिसमें से 75 प्रतिशत से अधिक मौतें हृदय रोगों और फेफड़े के कैंसर के चलते अकेले भारत में होती हैं।

जलवायु परिवर्तन समझौते में 60 देशों ने किए हस्ताक्षर

आप को बता दें, पिछले साल 2015 के दिसम्बर में सभी देशों के मध्य जलवायु परिवर्तन को लेकर एक सहमति बनी थी और जिसमें भारत ने अहम भूमिका निभाई थी। जिस के तहत ग्लोबल वार्मिग और कार्बन उत्सर्जन के नियंत्रण पर जोर दिया जायेगा। पेरिस में हुए समझौते के दौरान इस में कुल 196 देश शामिल हुए थे, मगर इसमें कुल 60 देशों ने हस्ताक्षर किए है।

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