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Bihar board 10th result 2020:  इस बार दोबारा चेक हुईं 10वीं के टॉपर्स की कॉपियां 

Bihar board 10th result 2020: आज जारी हो सकते है बिहार बोर्ड के 10वीं के नतीजे


आज बिहार के 10वीं क्लास के 15 लाख स्टूडेंट्स का इंतजार भी खत्म हो जायेगा। आज कभी भी बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड 10वीं क्लास का रिजल्ट जारी कर सकता है जानकारी के मुताबिक बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड ने कॉपी चेकिंग का काम खत्म करने के बाद रिजल्ट तैयार कर लिया है। आज किसी भी टाइम 10वीं कक्षा का रिजल्ट जारी कर सकता है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इससे पहले बिहार बोर्ड ने अप्रैल के पहले सप्ताह में 10वीं क्लास के रिजल्ट 2020 घोषित करने का निर्णय लिया था। परन्तु लॉकडाउन के कारण उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन आधा रह गया था हालांकि बिहार बोर्ड ने 24 मार्च को ही क्लास 12वीं का परीक्षा रिजल्ट घोषित कर दिया था।

कोरोना वायरस लॉकडाउन से हुई देरी

बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड 10वीं के रिजल्ट में कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन से काफी देरी हुई। बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड की घोषड़ा के अनुसार 10वीं और 12वीं क्लास का रिजल्ट मार्च के अंत तक या अप्रैल के पहले सप्ताह में आने की सभावना जताई गई थी जिसमे 12वीं क्लास का रिजल्ट तो सयम पर आ गया। परन्तु 10वीं क्लास का रिजल्ट अब तक नहीं आ पाया। अगर लॉकडाउन न हुआ होता तो 10वीं क्लास का रिजल्ट भी मार्च या अप्रैल के पहले सप्ताह में ही घोषणा हो गया होता।

ऐसे चेक करें अपना रिजल्ट

सबसे पहले इंटरनेट पर बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड की वेबसाइट खोलें। उसके बाद वेबसाइट पर रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद एक नया पेज खुलेगा, जिसमे आपको अपना रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर डालना होगा और उसके बाद सबमिट करना होगा। उसके बाद आपसे कुछ और डीटेल्स मांगी जाएगी जिसे आपको डाल कर सबमिट करना होगा। जैसी आप ये सारी चीजे सबमिट आपके सामने आपकी पुरे साल की मेहनत आपका रिजल्ट होगा।

क्यों दोबारा चेक हुईं टॉपर्स की कॉपियां?

बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड ने 10वीं क्लास की उत्तरपुस्तिका का दोबारा मूल्यांकन 6 मई को शुरू किया था। जो पिछले सप्ताह ही पूरा हुआ था उसके बाद छात्रों के अंकों को कंप्यूटर में फीड किया गया और टॉपर सूची बनाई गई। उसके बाद 10 रैंक धारकों की उत्तरपुस्तिकाओं को दोबारा चेक किया। इसी के साथ पैनल ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए इंटरव्यू आयोजित करने का फैसला लिया था। अब बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड बिना किसी देरी के 10वीं क्लास के रिजल्ट 2020 की घोषित करेगा।

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4 दिन तक मनाया जायेगा छठ पूजा का महापर्व, यह है पूजा का सही मुहूर्त

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य और क्या है इसका महत्व?


हर साल दिवाली के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से ही देवी छठ माता की पूजा अर्चना शुरू हो जाती है और सप्तमी तिथि की सुबह तक चलती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को लोग नहा कर भोजन ग्रहण करते है। इसमें व्रती यानी जो लोग व्रत रखते है उनका मन और तन दोनों ही शुद्ध होते हैं। इस दिन व्रती शुद्ध सात्विक भोजन करते हैं।

आपको बता दें की शुक्ल पक्ष की पंचमी पर जो लोग व्रत रखते है वो सारा दिन निराहार रहते हैं। उसके बाद शाम के समय गुड़ वाली खीर का विशेष प्रसाद बनाकर छठ माता और सूर्य देव की पूजा करके खाते हैं।षष्टि तिथि के पूरे दिन निर्जल रहकर शाम के समय अस्त होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं और सूर्यदेव से अपने मन की कामना कहते हैं।फिर सप्तमी तिथि के दिन सुबह के समय उगते सूर्य को भी नदी या तालाब में खड़े होकर जल देते हैं और अपनी मनोकामनाओं के पूर्ण  होने  के लिए प्रार्थना करते हैं।

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य

डूबते सूर्य को अर्ध्य देने के पीछे एक बहुत बड़ी मान्यता है कि सूर्य की एक पत्नी का नाम प्रत्यूषा है और यह जो डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है यह उन्हें ही दिया जाता है। संध्या के समय में अर्ध्य देने से कई तरह से लाभ होते है। ऐसा कहते है की इसे से आँखों की रौशनी बढ़ जाती है। लम्बी आयु  मिलती है। इस अर्ध्य माता या पिता ही नहीं बल्कि विद्यार्थी भी रख सकते  है जिस से उनको शिक्षा में भी लाभ मिल सकती है।

4 दिन मना जायेगा छठ पूजा का महा पर्व

छठ पूजा नहाय-खाए – 31 अक्टूबर

खरना का दिन – 1 नवम्बर

छठ पूजा संध्या अर्घ्य का दिन – 2 नवम्बर

उषा अर्घ्य का दिन – 3 नवम्बर

और पढ़े: गोवर्धन पूजा के  पीछे  छुपी है यह पौराणिक कथा

अब जाने क्या है छठ पूजा का सही मुहूर्त?

इस बार  छठ पूजा का सही मुहूर्त है  2 नवंबर,को  सूर्योदय का शुभ मुहूर्त- 06:33

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का शुभ मुहूर्त- 17:35

षष्ठी तिथि आरंभ- 00:51 2 नवंबर 2019

षष्ठी तिथि समाप्त- 01:31 3 नवंबर 2019

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भारत के वो आठ मंदिर जिसमे पुरुषों का प्रवेश है प्रतिबद्धित

भारत के कुछ खास ऐसे मंदिर जहा केवल महिलाये को ही मिलता है प्रवेश


सबरीमाला मंदिर 2018 मे काफी चर्चे मे रहा। पर आख़िरकार वहा भी महिलाओ को जाने की अनुमति दे दी गई. इस फैसले को ऐतिहासिक बताया गया। पर क्या आप जानते है भारत में कुछ मंदिर भी है जहाँ पुरषो को जाने की अनुमति नहीं है? चलिए आज जानते है की वो कौन -कौन से मंदिर है जहाँ पर पुरषो का जाना मना है

1. अट्टुकल मंदिर

अट्टुकल मंदिर जो की केरला में है यहा केवल महिलाये ही पूजा कर सकती है. यहा पुरषो को प्रवेश की अनुमति नहीं है. पोंगल के त्यौहार पर यहां 30 लाख महिलाओं ने शिरकत की थी. जिसके चलते ये मंदिर गिनीज़ वर्ल्ड बुक में भी शामिल हुआ

2. भगवती मां मंदिर

भगवती मां मंदिर जो की कन्याकुमारी में है यहा भगवती की कन्या रूप में पूजा की जाती है और यहा पुरषो को प्रवेश की अनुमति नहीं है और यहा केवल अलबत्ता संन्यासी पुरुष ही मंदिर की गेट तक जा सकते है

3. ब्रह्मा मंदिर

ब्रह्मा मंदिर जो की पुष्कर में है यह मंदिर 14 वीं शताब्दी में बना गया था इस में केवल कुंवारे पुरुष ही जा सकते है यहा शादीशुदा पुरुषों को जाने की अनुमति नहीं है लोगो का ऐसा माना था की यहा भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर झील में अपनी पत्नी देवी सरस्वती के साथ एक यज्ञ किया था. लेकिन सरस्वती किसी बात के लिए नाराज हो गईं. तब उन्होंने मंदिर को शाप दिया था की किसी भी शादीशुदा पुरुषों को मंदिर के आंतरिक परकोटे तक जाने की अनुमती नहीं होगी अगर कोई शादीशुदा पुरुषों अंदर जाता है तो उसके वैवाहिक जीवन समस्या आयेगी.

4. संतोषी मां मंदिर

जैसा की सभी लोग जानते है की शुक्रवार को महिलाएं और कुंवारी लड़कियां संतोषी मां का व्रत रखती है और व्रत की दौरान उन्हे खट्टी चीजे खाने की अनुमती नहीं होती. पुरुष भले ही संतोषी मां की पूजा करते होंगे लेकिन शुक्रवार को उनका संतोषी मां की मंदिर में जाना वर्जित होता है.

Read more:  महिलाओं को सबरीमाला मंदिर प्रवेश कराके थाइलैंड नहीं बनाना है

5. कामरूप कामाख्या मंदिर

जो की असम में है यह महिलाओं को मासिक धर्म चक्र के दौरान परिसर में प्रवेशकी अनुमति देता है.यहा केवल महिलाएं और संन्यासी ही सेवा कर सकते है.यहा मां सती के मासिक धर्म कोबहुत शुभ माना जाता है

6. छक्कूलाथुकावु मंदिर

छक्कूलाथुकावु मंदिर जो की केरला में है जिसमे महिलाओं की पूजा होती है.यह मांभगवती का मंदिर है यहां के पुरुष दिसंबर के महीने में महिलाओ के लिए दस दिन  का उपवास रखते हैं और पहले शुक्रवार को महिला श्रद्धालुओं के पैर धोते है इस  दिन को धनु की नाम से जाना जाता है और इन दिनों पुरषो का वहा जाना वर्ज़ित है

7. माता मंदिर मुजफ्फरपुर

माता मंदिर मुजफ्फरपुर, जो की बिहार में है यहां एक तय समय में पुरषो को यहा परिसरमें प्रवेश की  अनुमति नहीं होती.इसके क़ानून इतने कड़े होते है की इस समय मंदिर की पंडितों को भी प्रवेश की अनुमती नहीं होती इस समय केवल  महिलाएंही यह प्रवेश कर सकती है

8. त्र्यंबकेश्वर मंदिर

त्र्यंबकेश्वर मंदिर,नासिक का एक ऐसा मंदिर है जहा एक सीमा की बाद महिलाओ को जानेकी अनुमती नहीं थी उससे आगे केवल पुरुष जा सकते थे लेकिन जब ये बाम्बे हाईकोर्ट में पहुंचा तो पुरुषों के भीआंतरिक परकोटे में जाने पर पाबंदी लगा दिया गया.
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जानें क्यों मनाया जाता है छठ पर्व, क्या है इसका पैराणिक कारण

सूर्य की पूजा की जाती है


श्रद्धा और आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत हो गई है। यह हिंदूओं का साल का आखिरी पर्व है। यह मुख्य रुप से बिहार और पूर्वी यूपी में मनाया जाता है। यह पर्व बहुत कठिन और आस्था का पर्व है। इसके नियम बहुत कड़े हैं। कहते है कि इस पर्व मे अगर कोई गलती हो जाएं तो उसका परिणाम बहुत बुरा होता है।

छठ पूजा करते श्रद्धालु

नहाने खाने से इसकी शुरुआत हो जाती है

चार दिन तक चलने वाले इस पर्व का आगाज नहाने के साथ शुरु हो जाता है। क्योंकि इस पर्व में साफ और सफाई का बहुत पालन होता है तो इसकी शुरुआत भी नहाने खाने से होती है। इसके बाद दूसरे दिन खरना होता है। तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ दिया जाता है। चौथे और अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ दिया जाता है। इसके साथ ही छठ का महापर्व का समापन हो जाता है।

छठ पूजा समृद्ध की कामना और दूसरे मनोरथों की पूर्ति के लिए छठ पूजा की जाती है। कई दिनों तक चलने वाला यह पर्व पवित्रता और प्राकृति से मानव के जुड़ाव का उत्सव है। इसमें उर्जा के अक्षय स्त्रोत सूर्य की अराधना की जाती है और वह भी सरोवरों, नदियों या पानी के अन्य स्त्रोतों के किनारे।

पुराण के अनुसार क्यों मनाया जाता छठ पर्व

पुराण में छठ पूजा के बारे में बताते है कि राजा प्रियंवद की कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवद की पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनाई गई दी। इससे उन्हें पुत्र हआ। लेकिन वह मरा हुआ पैदा हुआ था। प्रियवंद पुत्र को लेकर शमशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे।। उसी वक्त भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई और उन्होंने कहा- सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती है। राजन तुम मेरी पूजा करो और इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करो। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी।

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क्या महागठबंधन का गठबंधन बना रह पाएगा?

कहीं टूट तो नहीं जाएगा महागठबंधन?


बिहार की राजनीति को लगता है किसी की नजर लग गई है। जब भी कोई छोटी से घटना होती है तो यह बिहार की राजनीति के लिए बहुत बड़ा शब्ब बन जाती है। बात छोटी हो या बड़ी मीडिया बहुत जल्द ही यह अनुमान लगने लग जाती है कि कही महागठबंधन टूटने की कगार पर तो नहीं आ गया है?

नीतीश कुमार लालू प्रसाद यादव

महागठबंधन की प्रक्रिया तो साल 2014 के बाद ही शुरु हो गया था

महागठबंधन के बनने की प्रक्रिया तो साल 2014 में देश में सत्ता बदलने के साथ ही शुरु हो गई थी। साल 2015 में बिहार में विधानसभा चुनाव हुए। यह ऐसा दौर था जब बिहार की राजनीति डर के घेरे में घेरी हुई थी, कि कहीं सदियों से बिहार की राजनीति में राज कर रही क्षेत्रिय पार्टियां का अंत न हो जाएं। इसलिए बिहार की दो विपरीत पार्टियों ने भाजपा का सामना करने के लिए हाथ मिला लिया। ताकि भाजपा बिहार में अपने पंख न फैला सकें। हुआ भी कुछ ऐसा ही। इसे ही तो राजनीति में महागठबंधन कहते है जब दो विपरीत पार्टियां तीसरी पार्टी के डर से एक हो जाएं।

साल 2015 में बिहार की क्षेत्रिय पार्टी जनता दल युनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल ने हाथ मिला लिया, और तय हुआ कि अगर महागठबंधन की जीत हुई तो जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनेंगे और राजद को भी अहम पद दिया जाएगा।

बिहार की 243 सीटें के लिए चुनाव कराएं गए। सबसे ज्यादा सीटों के साथ लालू प्रसाद की पार्टी राजद सबसे आगे रही। राजद को 80 सीटें मिले। जदयू के 71 और महागठबंधन की कांग्रेस को 27 सीटें मिली। वहीं दूसरी ओर बीजेपी को 53 सीटें नसीब हुई।

सबसे पहले शराब बंद कराई

सत्ता में आने के बाद जदयू के नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने और लालू के बेटे तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री का ताज मिला।

सत्ता में आने बाद ही नीतीश कुमार ने सबसे पहले बिहार में शराब बंद करवाई। इसके अलावा भी कई अहम फैसले लिए।

लेकिन अब तो लगता है बिहार की राजनीति किसी संकट से गुजर रही है। महागठबंधन की सरकार में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर घोटालों की आंधी से आ गई है। लालू, उनके बेटे और बेटी सबों पर घोटालों का आरोप लग रहा है। क्या इन घोटालों का बिहार की राजनीति पर असर पड़ेगा? क्या बिहार की राजनीति का महागठबंधन टूट जाएगा।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक राग में नहीं महागठबंधन

हाल में ऐसी कई घटनाएं हुई है जिससे यह लगने लगा है। बहुत जल्द ही राष्ट्रपति चुनाव होने वाले है। राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार बिहार से ताल्लुक रखते है। सत्ता पक्ष के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल थे। वहीं दूसरी ओर विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार बिहार की बेटी है। अब राष्ट्रपति चुनाव के लिए महागठबंधन में परेशानी चल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रामनाथ कोविंद के पक्ष में है। वही दूसरी ओर महागठबंधन की दूसरी पार्टियां मीरा कुमार के समर्थन में हैं।

वही दूसरी ओर बिहार में लगातार सीबीआई के छापे मारी से राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के परिवार घिरा हुआ है। इस लिस्ट में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का भी नाम आ रहा है।

तेजस्वी का नाम आने के बाद से ही उनके इस्तीफे के स्वर गूंजने लगने लगे हैं। लेकिन फिलहाल इस बारे में मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं कहा है।

जीरो टॉयलेंरस की नीति अपनाएंगे

लेकिन अगर तेजस्वी और लालू प्रसाद पर लगे आरोप साबित हो जाते है तो क्या होगा? नीतीश कुमार ने पहले ही कहा था कि वह भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉयलेंरस की नीति अपनाएंगे।

अगर तेजस्वी को उनके पद से हटना पड़ता है। तो क्या बिहार का महागठबंधन टूट जाएगा। और अगर टूट जाएगा तो क्या होगा? क्या बिहार में राजनीति संकट पैदा हो जाएगा?

सीटों की गिनती के हिसाब से राजद के पास जदयू से ज्यादा सीटें है। कांग्रेस के विधायकों की संख्या भी अच्छी खासी है। तो क्या नीतीश एक बार फिर बीजेपी का हाथ थाम लेगें। क्योंकि उनके पास और कोई विकल्प बचता ही नहीं है। इससे पहले भी नीतीश कुमार की जदयू पार्टी एनडीए में शामिल थी। लेकिन बाद में वह वहां से अलग हो गई। तो क्या एक बार फिर ऐसा हो सकता है?

अब देखना है कि आगे क्या होता है।

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