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काम की बात करोना

किसान आंदोलन में स्लोगन और बॉयकॉट का नारा बना रहा है इसे और मजबूत

महिलाएं  भी हर कदम पर कंधा से कंधा मिलाकर चल रही है.


नए कृषि कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के 26 दिन हो चुके हैं. आज किसान संगठनों ने लोगों से समर्थन के तौर पर एक टाइम का खाना नहीं खाने की अपील की है. इस बीच सरकार और किसान संगठनों को बीच अब तक हुई बातचीत बेनतीजा रही है. दिल्ली के बॉर्डर को चारों तरफ से किसानों ने घेरा हुआ है. सिंघु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर लगातार पंजाब, हरियाणा, पश्चिम यूपी और राजस्थान के किसान कड़ाके की ठंड में डटे हुए हैं. इस बीच किसान आंदोलन को लेकर मीडिया में कई तरह की खबरें आ रही है. कहीं इन्हें खालिस्तानी संबोधित किया जा रहा तो कहीं आंतकवादी. बात इतनी बड़ा गई कि कुछ दिन पहले ही धरने पर बैठे लोगों में नेशनल मीडिया का ही बॉयकॉट कर दिया और उनके पत्रकारों से बात करने से भी इंकार कर दिया. लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बीच पीएम मोदी ने कहा है कि किसानों को भड़काने का काम किया जा रहा है. आज ‘काम की बात’ में हम ‘वन वर्ल्ड न्यूज’ द्वारा की गई ग्रांउड रिपोर्ट को बताएंगे कि लोग कैसे अपने-अपने स्तर नए कृषि कानून कार विरोध करे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्ष को दी नसीहत

26 नवंबर की सुबह से ही खबर आने लग गई थी किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच कर दिया था. जिन्हें रोकने के लिए सरकार द्वारा हर नामुनकिन कोशिश की गई. किसानों पर ठंड में वाटर कैनन द्वारा पानी गिराने से लेकर रास्ते के अवरुद्ध करने तक हर कोशिश की गई. लेकिन किसान रुके नहीं और दिल्ली के बॉर्डर तक आ पहुंचे. अब इस आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान होते हुए सरकार और किसान संगठन दोनों को ही नसीहत दी है. चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने किसानों को सड़कों से हटाने की अर्जी पर दोबारा सुनवाई करते कहा है कि सरकार इस कानून को होल्ड करने की संभावनों को तलाशे. वहीं किसानों के लिए ‘राइट टू प्रोस्टेट’ की बात करते हुए कहा कि  आप लोग शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं. लेकिन यह ध्यान रहे दूसरे के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए.

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ठंड भी किसानों को हौसले के कम नहीं कर पा रही

कड़ाके की ठंड में जब हम घर से बाहर नहीं निकल पा रहे है किसान अपने संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए डटे हुए हैं. रिपोर्टिंग के दौरान कुलदीप भोला नाम के एक शख्स ने बताया कि ठंड बहुत ज्यादा है. हमारे घर में गिजर लगा हुआ है. किसी भी काम के लिए गर्म पानी है. लेकिन यहां तो हमलोग  खुले में ठंड पानी से नहा रहे हैं. लेकिन हम फिर भी खुश हैं क्योंकि हमें यह लड़ाई जीतनी है. हमलोग इस कानून को वापस कराने आएं है और वापस कराकर ही वापस जाएंगे.

स्लोगन बने विरोध का सहारा

इतिहास गवाह रहा है आंदोलन कितना भी बड़ा हो उसमें स्लोगन का अहम रोल रहा है. इस आंदोलन में भी विरोध के तौर पर तरह-तरह के स्लोगन लिखे जा रहे हैं. दीवारों पर भगत सिंह के नारों को लिखा गया है. बुढ़े जवान हर कोई भगत सिंह वाली लड़ाई को जीतने के लिए यह डटा हुआ है.  ज्यादातर स्लोगन पंजाबी में लिख हुए हैं. जिसे लोग लेकर घूम रहे हैं. इनमें से कुछ स्लोगन को बताते हैं.

प्रदर्शन स्थल पर गुरु ग्रंथ साहिब जी को रखा गया है. जहां अरदाश की जा रही है. इस के सामने हमें तीन कुछ महिलाएं दिखी जिन्हें अपने हाथ में एक क्लिप बोर्ड थाम रखा था. जिसमें लिखा था. ‘पगड़ी संभाल जट्टा, एक लहर पहले भी उठी थी, हम सबने मिलकर सरकार को झुका दिया था, जबकि सरकार वो भी टेढ़ी थी. एक महीने तक चला दुनिया का सबसे बडा किसान आंदोलन”.

शाहीन बाग के बाद किसान आंदोलन  में भी महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है. किसान आंदोलन में महिलाएं लंगर की सेवा देने से लेकर टैक्टर, जीप चलाने तक हर कदम पर अव्वल हैं. महिलाओं ने भी पूरा मोर्च संभाला है. रिपोर्टिंग के दौरान हमने देखा कि महिलाएं मीडिया को बाईट दे  रही है. चंडीगड से आई सीरीन अंग्रेजी में लिखा हुई क्लिप बोर्ड लेकर खड़ी थी. वह बता रही थी हम डायरेक्ट खेती से जुड़े नहीं है लेकिन हमें पता है कि यह हमारे किसान भाईयों के लिए यह कानून बहुत ही ज्यादा घातक है. सीरीन के क्लिप बोर्ड पर किसानों की आत्महत्या का भी जिक्र है.

रिपोर्टिंग का करवा जैसे-जैसे आगे  बढ़ा तरह-तरह के क्लिप बोर्ड देखने के मिलें. जिनमें ज्यादातर पंजाबी और अंग्रेजी में स्लोगन लिखा हुए थे. एक ग्रुप में कुछ लोग अलग-अलग स्लोगन लेकर खड़े थे. एक बोर्ड पर नौकरी गंवाने वाले लोगों के लिए एक अपील थी. जिसमें साफ लिखा जितने लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई है. दिल्ली बॉर्डर पर उनके लिए लंगर की व्यवस्था की गई है. वहीं दूसरी ओर जियो और रिलाइंस को बॉयकॉट करने की बात लिखी गई है. गौरतलब है कि जब से किसान आंदोलन हो रहा है जियो की सिम को लेकर लगातार बॉयकॉट करने की बात कही जा रही है.

लोग बॉयकॉट की बात पर ही नही रुके ब्लकि यहां तो लोगों ने अपने क्लिप बोर्ड पर सीजन सेल के जैसे सेल-सेल का भी नारा लिखा है. एक शख्स में अपने हाथ में जो किल्प बोर्ड पकड़ा था जिसमें लिखा था ‘भारत में सेल लगी है. अब तक 23 पीसीयू बिक चुके हैं. अगर आप भी कुछ लेना चाहते हैं तो इनसे संपर्क करें’ और नीचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की फोटो लगी थी.

यही से आगे युवाओं का एक जत्था मुख्य स्टेज की तरफ बढ़ते हुए विरोध में यह लिख रहा है कि “प्रधानमंत्री एक प्रधानसेवक की तरह कार्य करें न कि किसी सम्राट की तरह’.

विरोध का तरीका सिर्फ स्लोगन तक ही नहीं रुका है. यहां तो क्रांतिकारी कविताएं वाले क्लिप बोर्ड लिए लोग घूम रहे थे. कविता पंजाबी में है. जिसका हिंदी अनुवाद इस प्रकार है..

मांस के टुकड़े के लिए कुत्ता जैसे पूंछ मारता हुआ घुमता है

ठीक वैसे ही गोदी मीडिया सरकार की रखैल बनी हुई है

खाने के लाले हैं, हमारी जमीन छीनी जा रही है.

सड़कों पर किसानों और मजदूरों का डेरा है

और भारत का राजा अंधा और बहिरा है.

लेखक- राज काकरे

विश्व के सबसे बड़े विरोध में किसान बड़ी हिम्मत के साथ कड़ाके की ठंड में डटे हुए हैं. इससे पहले रविवार को आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई है. इस आंदोलन को लगभग एक महीना होने वाला है. अब देखना है कि इस मुद्दे पर सरकार कब नरम पड़ती है.

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