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सक्सेस स्टोरी : टीवी सीरियल से लेकर संसद तक का स्मृति ईरानी का सफर!

राजनीति में आने से पहले घर-घर में आदर्श बहू के रूप में पहचान बना चुकी स्मृति ईरान, अब भाजपा का एक ऐसा तेज तर्रार चेहरा है जिससे उलझने से पहले हर कोई 2 बार सोचता है। 40 वर्षीय स्मृति ईरानी को आज देश की केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री के रूप में जाना जाता है।

आइए आज हम आपको बताते हैं, स्मृति ईरानी के सीरियल से लेकर संसद तक के संघर्ष के बारे में…

स्मृति ईरान ने 10वीं कक्षा के बाद पैसा कमाने के लिए ब्युटी प्रोडक्ट्स का प्रचार का काम करना शुरू कर दिया था। 1998 में उन्होंने मिस इंडिया कॉम्पटिशन में हिस्सा लिया, लेकिन फाइनल तक नही पहुंच पाई। मिस इंडिया का मुकाम हासिल नही हुआ, तो क्या.. उन्होंने हार नही मानी और चल पड़ी माया नगरी मुंबई की ग्लैमरस दुनिया की ओर। जहां उनकी मुलाकात हुई एकता कपूर से… एकता ने अपने टेलीविजन धारावाहिक या यूं कह ऐतिहासिक धारावाहिक “क्योंकि सास भी कभी बहू थी” में ब्रेक दिया। इस धारावाहिक में तुलसी के किरदार से स्मृति हर घर में लोकप्रिय हुई, लोगों का प्यार उन्हें मिला।

एक समय ऐसा था कि यह एशिया का सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला सीरियल बन गया था, इसे अफगानिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में डब करके देखा जाता था। लगभग 8 सालों तक इस सीरियल ने लोगों के टीवी पर राज किया था। इसी सीरियल से स्मृति ईरानी सबकी चहेती बहु तुलसी, जो कि आज तक सबके दिलों पर राज कर रही है।

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स्मृति ईरानी

यह तो रहा सीरियल का सफर, अब बात करते हैं संसद तक के सफर के बार में…

स्मृति का राजनीतिक जीवन साल 2003 में तब शुरू हुआ, जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से हाथ मिलाया। बीजेपी से जुड़ने के बाद स्मृति ने दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से हार गईं।

साल 2004 में इन्हें महाराष्ट्र यूथ विंग का उपाध्यक्ष बनाया गया। इन्हें पार्टी ने पांच बार केंद्रीय समिति के कार्यकारी सदस्य के रुप में मनोनीत किया और राष्ट्रीय सचिव के रुप में भी नियुक्त किया।

साल 2010 में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा की कमान सौंपी गई। वहीं 2011 में वे गुजरात से राज्यसभा की सांसद चुनी गई। इसी साल इन्हें हिमाचल प्रदेश में महिला मोर्चे की भी कमान सौंप दी गई।

2014 के आम चुनाव में स्मृति ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास के खिलाफ अमेठी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें वहां से भी हार का सामना करना पड़ा। लेकिन राज्यसभा की सदस्य होने के नाते आज वह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री हैं।

इस पद को संभालने के बाद भी स्मृति को कई विवादों में घसीटा गया, वो चाहें डिग्री विवाद हो या फिर किसी युनिवर्सटी का मामला हो… स्मृति ने हर मुद्दे का सामना डट के किया है, और सबको मुंह तोड़ जवाब भी दिया है।

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