Judgemental Hai Kya Movie Review: कंगना है फिल्म देखने की वजह

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कंगना रनौत और राजकुमार राव की साइको थ्रिलर फिल्म जजमेंटल है क्या सिनेमाघर में रिलीज हो गई है। फिल्म में इन दो लीड एक्टर्स के अलावा जिमी शेरगिल भी अहम भूमिका में है। फिल्म का निर्देशन प्रकाश कोवेलामुद ने किया है जबकि इसकी निर्माता एकता कपूर हैं। जैसा कि फिल्म का टाइटल है, इसक कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

कहानी-

बॉबी (कंगना रनौत) एक बिंदास लड़की है जो फिल्म में डबिंग आर्टिस्ट का काम करती है। लेकिन उसमें ऐसी खासियत है या बीमार कह सकते है, जब वह फिल्म में डबिंग करती है तो वह जिस भी कैरेक्टर के आवाज की डबिंग करती है वह उसी के जैसा व्यवहार करने लग जाती है। इसी कारण उसे मानसिक रोगियों वाली दवाइयों की जरुरत पड़ने लगती है।

अपनी इन्हीं आदतों से छुटकारा पाने के लिए उसने अपने घर के कमरे के दीवार पर उन सभी कैरेक्टर्स की फोटोज लगा कर रखती है जिसके लिए उसने अपनी आवाज डबिंग की है।
धीरे-धीरे उसके मन में भी एक्टर बनने की इच्छा जाग उठती है लेकिन उसका मैनेजर वरुण (हुसैन दलाल) जो उसका बॉयफ्रेंड भी है वह उसकी मदद नहीं कर पाता है। वह ना ही बॉबी के साथ कभी डेट पर जाता है और ना ही उसके साथ कभी प्यार वाली बात करता है। ऐसे में बॉबी उसे कहती है- तुम आलू के जैसे नहीं हो सकते…इजी गोइंग एंड एडजस्टिंग। आलू के जैसे बनो।
इसी बीच कहानी में केशव और रमा (राजकुमार राव और अमायरा दस्तूर) की एंट्री होती है। ये दोनों बॉबी के घर पर किरायेदार की तरह आते हैं। बॉबी को उन दोनों का प्यार देखकर काफी अच्छा लगता है। इसी दौरान किसी का मर्डर हो जाता है और यहीं से कहानी में नया मोड़ आता है। बॉबी को लगता है कि केशव ही हत्यारा है। लेकिन यहां चौंकाने वाली बात ये है कि इस दौरान ऐसा कुछ होता है कि बॉबी की तरफ भी शक की सुई दौड़ जाती है। आप यहां समझ नहीं पायेंगे कि असल में हत्यारा कौन है? बॉबी की एक खासियत है, वह कैरेक्टर्स को इमेजिन करती है और उनके आवाज को सुनती है। इसी से वह अपनी एक काल्पनिक दुनिया बना लेती है और इसी पर यकीन करने लगती है। अब मर्डर के पीछे असल गुनहगार कौन है ये क्लाइमैक्स तो आपको थियेटर में जाकर ही पता चलेगा।

डायरेक्शन
डायरेक्शन की बात करें तो प्रकाश कोवेलामुद ने काफी बेहतरीन ढंग से अपनी कहानी कहने की कोशिश की है जो आपको सिनेमाघर में बांधने में काफी हद तक सफल हो जाती है। अलग-अलग सीन्स में लाइट्स और शॉट्स का संयोजन भी बेहद कमाल का है। इसके अलावा बैकग्राउंड म्यूजिक, साउंड डिजाइंस भी ऐसे माहौल पैदा करते है जो कहानी पर आपको रुचि बनाए रखने में काफी मददगार होती है।
हालांकी यहां इंटरवल के बाद आपको थोड़ा सा एहसास होगा कि फिल्म की कहानी खिंच रही है। लेकिन जब क्लाइमैक्स की बारी आती है तो ये खिंचती हुई कहानी भी आपको रोचक लगने लगती है। कहानी का क्लाइमैक्स देखकर आपको फिल्म पैसा वसूल लगेगी।

एक्टिंग
कंगना रनौत की पर्सनल लाइफ भले ही विवादों से भरी हो लेकिन उनकी फिल्म देखकर लगता है कि वे हर एक फिल्म दर फिल्म खुद को और भी निखारती जा रही हैं। राजकुमार राव की एक्टिंग कमाल की है। इन दोनों की जोड़ी दूसरी बार पर्दे पर देखने को मिल रही है ऐसे में दो दमदार एक्टर्स ने अपनी अदाकारी से इस बार भी कहानी से पूरी तरह न्याय करने की कोशिश की है। जिमी शेरगिल का भले ही छोटा किरदार हो लेकिन वे हर बार की तरह अपनी छाप छोड़ जाते हैं। हुसैन दलाल ने फिल्म में कॉमिक लाने की बेहतरीन कोशिश की है।
फिल्म के अंत तक जजमेंटल है या एक सस्पसें बनाए रखने में पूरी तरह से कामयाब होती है। साइको थ्रिलर जॉनर की ये फिल्म एक सोशल मैसेज भी देने की कोशिश करती है जिसे आप इग्नोर नहीं कर सकते हैं। आज के एक्सपेरिमेंटल सनेमा के दौर में ये फिल्म कुल मिलाकर बेहतरीन है जिसे आपको जरुर देखनी चाहिए।

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