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Solar energy: भविष्य को सुरक्षित रखना है तो सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करें

सूरज के महत्व को समझे, यह कभी न खत्म होने वाली ऊर्जा है


Solar energy: अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने 13 मार्च 2020 को एक टॉक सेशन आयोजित किया, जिसका शीर्षक था, “एनर्जी स्वराज-ऐन एसेंस ऑफ सस्टेनबिलिटी।“ इस सेशन की अध्यक्षता इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) के एनर्जी साइंस और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी ने की।  चेतन सिंह सोलंकी को भारत में सोलर एनर्जी को प्रमोट करने के कोशिशों के लिए सोलर मैन और सोलर गांधी के रूप में  जाना जाता है।

एआईसीटीई में स्टूडेंट्स और फैकल्टी मेंबर्स को संबोधित करते हुए प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी ने भविष्य में सोलर एनर्जी को अपनाने और जीवन में ऊर्जा का संचार करने वाले उसके महत्व के बारे में चर्चा की क्योंकि सौर ऊर्जा धरती पर कभी न खत्म होने वाली ऊर्जा का स्त्रोत है। उन्होंने जीवाश्म ईंधन की बढ़ती खपत के विपरीत प्रभाव की ओर इशारा किया और कार्बन डाई ऑक्साइड के बढ़ते उत्सर्जन से लगातार बढ़ते जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सभा में शामिल हुए सभी लोगों को जागरूक करना है।

प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी ने कहा,  “इस समय मानव समाज जिस सबसे बड़ी समस्या के समाधान के लिए जूझ रहा है जलवायु परिवर्तन।  बहुत बड़े पैमाने पर होने वाले जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन है, जिसे लोग पिछले 100 सालों से देख रहे थे। लगातार बढ़ते हुए कार्बन उत्सर्जन का सबसे प्रमुख कारण जीवाश्म ईंधन प्रमुख कारणों में से एक है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले मानव समाज के सबसे बड़े कार्यों के कारण ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। यह ग्रह की संपूर्ण स्थिरता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।“

प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी ने भारत के 25 शहरों की यात्रा सोलर बस से की। उन्होंने यह यात्रा भविष्य में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के बारे में लोगों को समझाने और आने वाले समय में इसका महत्व बढ़ने की घोषणा की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने लोगों से इस सफर में हुए अनुभव को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया कि हर देश का भविष्य सीधे-सीधे इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस तरह आत्मनिर्भरता से बिना अपने ग्रह पृथ्वी पर विपरीत प्रभाव डाले ऊर्जा का उत्पादन करता है।

उन्होंने कहा कि जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सूरज मानव को उपलब्ध ऊर्जा का कभी न खत्म होने वाला स्त्रोत है। मेरा पूर्ण रूप से विश्वास है कि एनर्जी स्वराज जैसे कॉन्सेप्ट की परिकल्पना और उसको अमल में लाना पूरे देश के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत जरूरी है। एनर्जी स्वराज केवल नवीकरणीय ऊर्जा के स्त्रोत का इस्तेमाल करते हुए ऊर्जा का उत्पादन और उसका प्रयोग करना ही नहीं है। यह तात्कालिक रूप से स्थिर आर्थिक मॉडल है, जो प्रमुख रूप से ऊर्जा के इर्द-गिर्द घूमता है। एनर्जी स्वराज का मूल लक्ष्य देश में सभी लोगों को, चाहे वह अमीर हो या गरीब, भरपूर बिजली प्रदान करना है।“

इस समारोह की अध्यक्षता एआईसीटीई के चेयरमैन प्रोफेसर अनिल डी. सहस्त्रबुद्धे ने की। इसकी सहअध्यक्षता एआईसीटीई के सदस्य सचिव राजीव कुमार और एआईसीटीई के उपाध्यक्ष डॉ. एम. पी. पुनिया ने की। अपने संबोधन के दौरान प्रोफेसर अनिल डी. सहस्त्रबुद्धे ने कहा, प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी जैसे प्रमुख भविष्यदृष्टा के इंटरएक्टिव टॉक सेशंस से लोगों को भविष्य में सोलर एनर्जी के प्रयोग का महत्व समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “ऊर्जा संवर्धन वह सबसे शानदार उपहार है, जो हम अपनी भावी पीढ़ियों को दे सकते हैं।“

सहस्त्रबुद्धे ने कहा, “अब जब जीवाश्म ईंधन की बढ़ती खपत हमारे ग्रह पृथ्वी पर काफी बुरा असर डाल रही है और जलवायु परिवर्तन में एक प्रमुख भूमिका निभा रही है। इस समय अपने अस्तित्व को कायम रखने और सेहतमंद रहने के लिए केवल यही तरीका है कि हम सूरज के प्रकाश को अपनी ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करें। मेरा मानना है कि चेतन सिंह सोलंकी इस समय सबसे परफेक्ट और बेस्ट व्यक्ति है, जो भारत में एनर्जी स्वराज के बारे में बात कर सकते हैं। एआईसीटीई की ओर से आयोजित सेशन में उनके उपस्थित होने से हम बेहद प्रसन्न हैं। मैं इस सभा में मौजूद सभी लोगों से अपील करता हूं कि वह बिजली बचाने और ऊर्जा संरक्षण की शपथ लें क्योंकि इस समय अपने ग्रह धरती को बचाने का यही एकमात्र विकल्प है।“

एआईसीटीई के सदस्य सचिव राजीव कुमार ने कहा, “आज बहुत से देशों को इस तथ्य की बहुत अच्छी तरह से जानकारी है कि मानवता के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन है। भारत जैसे देश के लिए एनर्जी स्वराज का कॉन्सेप्ट बहुत जरूरी है। लोगों का ऊर्जा उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनना बहुत जरूरी है। इससे भारतीय ऊर्जा का खुद उत्पादन कर उसका इस्तेमाल कर सकेंगे।“

एआईसीटीई के उपाध्यक्ष डॉ. एम..पी. पुनिया ने कहा,  “अब जब विश्व जीवाश्म ईंधन के प्रयोग पर लगाम लगाने के तरीकों को खोजने की काफी कोशिश कर रहा है तो इस समय एनर्जी स्वराज का महत्व बहुत बढ़ जाता है। भविष्य में एनर्जी स्वराज देश के भविष्य को उसी तरह आकार देगा, जिस ढंग से भारतीय ऊर्जा का उत्पादन कर उसका प्रयोग करेंगे।“

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