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62 साल की शीला बुआ के हौसले को सलाम, इस उम्र में भी घर-घर जाकर साईकिल से बेचती है दूध

जाने कौन है शीला बुआ


कहते है न बुरा समय सब कुछ दिखा देता है परेशानी में घिरे व्यक्ति का मुसीबतें कभी पीछा नहीं छोड़ती, लेकिन जीवन ऐसी चीज है जिसे जीना ही पड़ता है कुछ लोग अपने बुरे समय में हार मान लेते है और अपना जीवन घुट घुट कर जीते हैं. वही कुछ लोग अपने हौसले को बुलंद रखते है और अपने जीवन में हार नहीं मानते.  ऐसी ही कुछ एक कहानी है 62 साल की शीला बुआ की62 साल की शीला बुआ इस उम्र में भी साईकिल पर घर-घर जाकर दूध बेचकर अपने परिवार का खर्चा चलती है. 62 साल की शीला बुआ की शादी चालीस साल पहले आवागढ़ में हुई थी शीला बुआ अपने घर में सबसे बड़ी थी. इसलिए  उनकी शादी भी सबसे पहले हुई थी. लेकिन शीला बुआ की शादी को एक साल भी नहीं हुआ था कि उनके पति की मृत्यु हो गई.  ऐसे में शीला बुआ को ऐसा लगा कि लाल चुनरी ओढ़ जिस देहरी से कल ही गई थी आज उसी देहरी पर सफेद धोती पहन कर वापस आ गयी.  लेकिन शीला बुआ के हौसले को सलाम है जिन्होंने इतना कुछ सहने के बाद भी हार नहीं मानी.

 

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sheela bua
Image Source – Indiatimes

 

जिम्मेदारियां थकने नहीं देतीं

पति की मृत्यु के बाद शीला बुआ अपने पिता के घर वापस आ गयी और फिर उन्होंने दोबारा शादी के लिए नहीं सोचा. घर वापस आने के बाद शीला बुआ अपने पिता के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बंटाने लगी और उसके बाद उन्होंने अपनी चार बहनों और भाई की शादी की. उसके बाद कुछ समय बाद उनके पिता ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया. पिता की मौत के बाद भी शीला बुआ के पास उनकी माँ का सहारा था लेकिन जब उनकी माँ की मौत हुई तो उससे शीला बुआ बुरी तरह झकझोर कर रख दिया. लेकिन उसके बाद भी शीला बुआ ने हार नहीं मानी. माता पिता की मृत्यु के बाद शीला बुआ भैंस पालकर गांव में दूध बेचने लगीं और उसके बाद उन्होंने ओर ज्यादा भैंस खरीदीं. शीला बुआ अपने गांव से पांच किमी दूर अमांपुर कस्बा में साइकिल से जाकर घर-घर दूध बेचने लगीं थी.  62 साल की शाीला बुआ आज भी साइकिल से ही दूध बेचने जाती हैं.

 

रोज 40 लीटर दूध बेचती है शीला बुआ

1996 में शीला बुआ के पिता की मृत्यु हो गयी थी और उसके कुछ समय बाद ही उनकी माँ की भी मृत्यु हो गयी थी वो कहती हैं कि वो कभी स्कूल तो नहीं गईं लेकिन जिंदगी के एक-एक दौर का हिसाब रखती हैं.. शीला बुआ बताती हैं कि वर्ष 1997 में उन्होंने एक भैंस पाली थी और उस समय वो साइकिल चलाना जानती थीं. इसलिए वो उस समय पर अमांपुर कस्बा जाकर दूध बेच पाती थी. लेकिन जैसे जैसे लोगों की दूध की मांग बढ़ी तो शीला बुआ ने और भैंस पाल लीं। शीला बुआ बताती है कि अभी मेरे पास पांच भैंस हैं और हर रोज औसतन 40 लीटर दूध हो जाता है.  सुबह के समय में शीला बुआ खुद साइकिल पर दूध से
भरी टंकियां लेकर बेचने जाती है और शाम को दूधिया घर से ही दूध ले जाता है.

 

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