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Shabana Azmi Birthday : लाइफ पार्टनर चुनने से लेकर महिलाओं के लिए आवाज उठाने तक शबाना आजमी हैं एक Vocal Feminist

 Shabana Azmi Birthday:जावेद अख्तर की शायरियों पर फिदा हो गई थी शबाना, अपने प्यार के लिए किसी की नहीं सुनी


Highlights –

. शबाना आज़मी का नाम हिंदी सिनेमा के नामचीन अभिनेत्रियों की लिस्ट में शामिल है।

. 18 सितंबर 1950 को जन्मीं शबाना ने बीते 72 सालों में अपनी ज़िंदगी में न जाने कितने उतार-चढ़ाव देखें हैं जिनमें उनका लव लाइफ भी है।

Shabana Azmi Birthday :गुज़रे जमाने की मशहूर अदाकारा शबाना आज़मी आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। ये वेटरन एक्ट्रेस हिंदी सिनेमा की ऐसी मंझी हुई अदाकारा हैं जो खुद को हर किरदार के अनुरूप उसी सांचे ढाल लेती हैं।

शबाना आज़मी का नाम हिंदी सिनेमा के नामचीन अभिनेत्रियों की लिस्ट में शामिल है।  उन्होंने हिंदी फिल्मों में तरह-तरह के रोल अदा किये हैं। वह आज भी फिल्मों में सक्रिय हैं। आज भी उन्हें दर्शक पर्दे पर देख दर्शक झूम उठते हैं।

18 सितंबर 1950 को जन्मीं शबाना ने बीते 72 सालों में अपनी ज़िंदगी में न जाने कितने उतार-चढ़ाव देखें हैं जिनमें उनका लव लाइफ भी है।

शबाना आजमी बॉलीवुड की टैलेंटेड एक्ट्रेसेस में से एक हैं. आज भी वह अपनी एक्टिंग से यंग एक्ट्रेसेस को टक्कर देती हैं. वैसे बता दें कि अपने समय में शबाना काफी खूबसूरत एक्ट्रेस थीं और उनकी खूबसूरती और नेचर को देखकर ही जावेद अख्तर उन पर दिल हार बैठे थे.

 

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वह एक वक्त था जब शबाना और हिंदी सिनेमा के मशहूर लेखक जावेद अख़्तर की प्रेम कहानी हर किसी के जुबान पर थी। उनकी प्रेम कहानी कुछ थी ही ऐसी क्योंकि उस समय में अपने प्यार के लिए बगावत पर उतर जाना बहुत कम ही लोग कर पाते हैं।

तो चलिए आज शबाना के जन्मदिन पर हम आपको उनके जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प पहलू बताते हैं और उनके और जावेद की प्रेम कहानी मंज़िल तक कैसे पहुँची ये भी बताते हैं।

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शबाना का फिल्मी करियर काफी अच्छा रहा है। कलाकारों के परिवार से ताल्लुक रखने वाली शबाना कला से परिपूर्ण थीं। FTII से अपनी एक्टिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद शबाना साल 1974 में फिल्म ‘अंकुर’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिल्म ‘अंकुर’ के बाद लगातार तीन सालों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। ‘अर्थ’, ‘खंडहर’, और ‘पार’ जैसी फिल्मों के भी लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया।

 

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उनकी प्रेम कहानी बिल्कुल हिंदी सिनेमा की कहानियों जैसी रही। जावेद अख्तर और शबाना आजमी की लव स्टोरी काफी दिलचस्प रही है। जावेद अख्तर की शबाना से मुलाकात उनके ही पिता के घर पर हुई थी। जावेद अक्सर कैफी आजमी से कविताओं के लिए मिलने जाया करते थे। इस तरह धीरे-धीरे दोनों ने एक दूसरे से बात करना शुरू किया। ये बात कब प्यार में बदल गई किसी को पता नहीं चला। लेकिन यहाँ ट्विस्ट थी जावेद की पहले से ही हो चुकी शादी। शबाना ने बताया था कि एक बार उन्होंने आखिरी बार मिलने का फैसला किया और उस लास्ट मीटिंग में दोनों ब्रेकअप करने वाले थे। लेकिन जब दोनों मिले तो दोनों बातों में इतना बिजी हो गए कि ब्रेकअप करना भूल गए।

शबाना की मां कैफी आज़मी बिल्कुल नहीं चाहती थीं कि उनकी बेटी की शादी किसी शादीशुदा शख्स से हो। लेकिन शबाना जावेद के प्यार में पड़ चुकी थीं, उन्होंने अपनी मां और पिता से मिन्नतें की थीं। जिसके बाद 1978 में जावेद ने अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी से तलाक ले लिया।

एक इंटरव्यू में अपने रिश्ते पर बात करते हुए हनी ईरानी ने कहा था कि एक बार ताश खेलते हुए जावेद हार रहे थे। मैंने जावेद से कहा था लाओ मैं तुम्हारे लिए कार्ड निकालती हूं। तब जावेद ने कहा अगर पत्ता अच्छा निकला तो मैं तुमसे शादी कर लूंगा। इसके बाद 27 की उम्र में जावेद अख्तर ने हनी ईरानी से शादी कर ली थी।

 

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हनी से तलाक लेने के बाद जावेद और शबाना ने अपने छह साल लंबे रिश्ते को नाम दिया और 1984 में मुस्लिम रीति-रिवाज से दोनों ने निकाह कर लिया। आखिरकार काफी मुश्किलों के बाद दोनों एक – दूसरे के हो गए।

दोनों ने पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में हर उतार-चढ़ाव में एक-दूसरे का साथ दिया है।  शबाना और जावेद के रिश्ते की खास बात ये है कि दोनों पति-पत्नी से ज्यादा अच्छे दोस्त हैं और उनकी दोस्ती ही उनके रिश्ते को मजबूत बनाती है।

शबाना एक उम्दा कलाकार हैं। इसके साथ ही वह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी काम करती हैं। कई इवेंट्स और इंटरव्यू में वह महिलाओं के समर्थन में कई बातें कह चुकी हैं। एक बार उन्होंने मर्दानगी के मिथकों को चुनौती दी और मर्दानगी को फिर से परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपने लड़कों की परवरिश कैसे करते हैं। क्या हमने सवाल किया है कि मर्दानगी हमेशा ताकत और ताकत के बारे में मर्दानगी करुणा और विचारों के बारे में क्यों नहीं हैं। शबाना के ये शब्द सोचने लायक हैं। शबाना उन महिलाओं में से हैं जो महिलाओं की उन्नति , उनके विकास और उनके समानता के लिए हमेशा खड़ी रही हैं।

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