क्रिकेट के भगवान यूँ ही नहीं कहे जाते सचिन तेंदुलकर 

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हर क्रिकेट खिलाडी के मार्गदर्शन हैं सचिन


दुनिया में क्रिकेट पसंद करने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने सचिन तेंदुलकर का नाम न सुना हो, जहां क्रिकेट का नाम आये और सचिन का ना आये ऐसा तो नामुमकिन ही हैं. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेन्दुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1979 में मुंबई के दादर के समीप निर्मल नर्सिंग होम में हुआ ,हुनर से भरे सचिन जन्म एक माध्यम वर्गीय साधारण से परिवार में हुआ जहाँ उनके पिता मराठी नावेल लेखक थे और माँ एक इंश्योरेंस कम्पनी की कार्यकर्ता ,सचिन के पिता की पहली पत्नी से उनके 2 लड़के और 1 बेटी थी जिसके बाद सबसे छोटे थे सचिन  तेंदुलकर.

बचपन से ही थी क्रिकेट में रूचि

अपने घर के सामने सचिन को दिन भर क्रिकेट खेलता देखना बहुत आम बात थी सचिन कभी भी पढ़ाई में होनहार छात्र नहीं थे क्रिकेट जब खून में दौड़ रहा हो तो वैसे भी पढाई में किसका मन लगे ,धीरे -धीरे क्रिकेट के प्रति उनकी लगन को छुपाना मुश्किल हो गया और आख़िरकार बड़े भाई ने  अजित ने अपने पिता रमेश  से इस बारे मैं विचार करने को कहा ,पिता के सचिन से पूछे जाने पर सचिन ने केवल क्रिकेट को ही अपना प्यार बताया उस वक़्त असाचीन महज़ 12 वर्षके थे ,सचिन के  पहले गुरु थे रमाकांत आचरेकर, रमाकांत सर ने इनके हुनर को देख इन्हें शारदाश्रम विद्यामंदिर हाई स्कूल में जाने के लिए कहा, क्योकि इस स्कूल की क्रिकेट टीम बहुत अच्छी है और यहाँ से कई अच्छे खिलाडी निकले है सही मार्गदर्शन के और सचिन के कड़े परशराम से भारत को एक बेहरतरीन क्रिकेटर मिल ही गया .

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ऐसे हुआ सफर का उदय 

सचिन ने 1988 में पहला राज्यस्तरीय मैच  मुंबई के लिए खेला था जिसमे पहली बार सचिन  ने शतक बनाया था ,सचिन के बेहतरीन प्रदर्शन को देख उनका चयन नेशनल टीम में कर लिया गया और उनका पहला मैच पाकिस्तान के साथ  था जब उनकी उम्र केवल 16 वर्ष ही थी , नाक में चोट आने के बावजूद सचिन ने मैदान न छोड़ते हुए पाकिस्तानी खिलाडियों के छक्के छुड़ा दिया और अपनी जीत दर्ज की , अब बात करते हैं सचिन के पहले टेस्ट मैच की जो 1990 में इंग्लैंड के खिलाफ हुआ जिसमे सचिन ने शतक बनाकर सबसे कम उम्र में शतक बनाने का एक नया रिकॉर्ड कायम किया .

 दो बार अपनी कप्तानी छोड़ चुके हैं सचिन 

1996 और 1998 में दो बार बेहतर कप्तान साबित न होने के कारन उन्होंने खुद अपनी कप्तानी छोड़ दी थी इसके बावजूद सचिन 2001 में वनडे मैच में दस हजार रन बनाने वाले ये प्रथम क्रिकेटर बने. 2003 का समय इनका सुनहरा समय था इनके चाहने वाले बड़ते जा रहे थे . 2003 में सचिन 11 मैचो में 673 रन बनाए और टीम इंडिया को विजय के छोर तक ले गए और सभी के पसंदीदा खिलाडी बन गए.

2007 में इन्होने टेस्ट मैच में ग्यारह हजार रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया. इसके बाद साल 2011 के वर्ल्ड कप में ये फिर अपनी पूरी ताकत के साथ सामने आए इन्होने दोहरा शतक मारा और सीरिज में 482 रन बनाए .अपने करियर के सारे वर्ल्ड कप मिला कर ये 2000 रन और 6 शतक मारने वाले प्रथम क्रिकेटर बने . ये रिकॉर्ड अभी तक कोई क्रिकेटर नहीं बना पाया है. इन्होने अपने पूरे करियर में 34000 रन बनाए, जिसमे 100 शतक भी शामिल की, आज तक इस रिकॉर्ड को कोई अन्य खिलाड़ी तोड़ नहीं पाया.

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