हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है , हमपर मत थोपो -MNS नेता


गैर हिंदी भाषी राज्य में जबरदस्ती पढ़ाई जाती है हिंदी


#HindiIsNotTheNationalLanguage -धर्म जाति के विवाद के बाद अब भाषा पर विवाद भारत में शुरू हो गया है.राष्ट्रीय शिक्षा निति आयोग ने गैर हिंदी भाषी  राज्यों में हिंदी पढ़ाने का प्रस्ताव रखा था  जिसपर कई लोगो ने अपना विरोध जताया है . इसी बीच महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) के एक नेता ने भाषा पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया की हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा नहीं है, इसे हमपर मत थोपो। दरअसल तमिलनाडु में हिंदी को सिलेबस में शामिल किये जाने पर इस मामले ने ज़ोर पकड़ लिया है .

ट्वीट के बाद केंद्र सरकार ने किया बचाव

MNS के नेता का बयान जैसे ही सुर्खी में आया तो केंद्र सरकार ने बचाव करते हुए कहा की किसी भी राज्य में  कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी.  साथ ही साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन(Nirmala Sitaraman) और विदेश मंत्री एस जयशंकर (S.Jayshankar) ने इस मामले पर नज़र रखते हुए  इस मामले में ट्वीटर पर लिख कर सांतवना दिया है ‘की ये केवल एक विचार है इसे लागू करने से पहले पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी’.आपको बता दें की ये दोनों ही नेता तमिलनाडु से हैं .

MNS MAN TWEET

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तमिलनाडु और कर्नाटक  से आयी आपत्ति

दक्षिण भारत में हिंदी भाषा का प्रयोग नाम मात्र के लिए ही होता है. ऐसे में नयी शिक्षा प्रणाली में जब हिंदी को शामिल करने की बात सामने आयी तो तमिलनाडु और  कर्णाटक से कई लोग विरोध में खड़े हो गए. उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने इस मामले  में  कहा की सभी लोग सब्र से काम लें अभी केवल विचार हो रहा है .इसके साथ साथ कांग्रेस के नेता शशि थरूर(Shashi Tharoor) ने भी हिंदी को कर्नाटक में थोपने की बात कही है.

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Story By : AvatarIfat Qureshi
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