Rabindranath Tagore Jayanti: रवींद्रनाथ टैगोर के 159वीं जयंती पर जानिए उनसे जुड़ी 5 खास बातें

रवींद्रनाथ टैगोर ने देश के लिये जीता पहला नोबेल पुरस्कार: यहां जानिये उनसे जुड़ी 5 खास बाते


Rabindranath Tagore Jayanti: भारतीय राष्ट्रगान के रचयिता और साहित्य को देश से लेकर अंतराराष्ट्रीय स्तर तक नई पहचान दिलाने वाले पहले नोबल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की इस बार 159वीं जयंती है। रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता में जोरासंको हवेली में हुआ था। उन्हें पढ़ने लिखने का शौक बचपन से ही था। उन्होंने अपनी पहली कविता आठ साल की उम्र में लिखी थी। रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने जीवन काल में 2000 से ज्यादा गीतों की रचना की। 7 अगस्त 1941 को कोलकाता में उनकी मृत्यु हो गई।

रवींद्रनाथ टैगोर ने देश के लिये जीता पहला नोबेल पुरस्कार

साहित्य की शायद ही कोई ऐसी शाखा हो जिनमें रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाएं नहीं हो। रवींद्रनाथ टैगोर की कविताओं में हमें अस्तित्व के असीम सौन्दर्य और भक्ति के दर्शन होते है। रवींद्रनाथ टैगोर ऐसे पहले शख्स है। जिनकी रचनाओं को दो देशों में राष्ट्रगान के रूप में गाया जाता है। इनमें एक है भारत का जन गण मन… और दूसरा है बांग्लादेश का अमार शोनार बांग्ला…।1877 में जब वो 16 साल के थे, तब उनकी पहली लघुकथा प्रकाशित हुई थी। उसके बाद उनकी सबसे लोकप्रिय रचना गीतांजलि के लिए 1913 में नोबेल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। उसके बाद टैगोर को ‘नाइटहुड’ की उपाधि भी मिली थी।

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रवींद्रनाथ टैगोर की कुछ बातें जो आज भी लोगों को प्रेरणा देती है

1. रवींद्रनाथ टैगोर कहा करते थे कि केवल पानी पर खड़े होकर या उसे देखकर समुद्र पार नहीं किया जाता। उससे पार करने के लिए कदम बढ़ाना होगा। वो विश्वास को जीवन में अहम मानते थे उनका कहना था कि विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में प्रकाश का अनुभव कराता है
2. टैगोर की लोकप्रिय किताबों में से एक ‘द किंग ऑफ द डार्क चैंबर’ है। जिसकी पिछले साल अमेरिका में सात सौ डॉलर में नीलामी हुई है। ये किताब 1916 में मैकमिनल कंपनी ने प्रकाशित की थी।
3. आपको बता दे कि  रवींद्रनाथ टैगोर की 3,500 कविताओं का एक डिजिटल संग्रह भी है। खास बात ये है कि इस संग्रह में ऐसी 15 कविताएं मौजूद है, जिनका पाठ खुद टैगार ने किया था।
4. रवींद्रनाथ टैगोर चित्र बनाने में काफी माहिर थे। उन्होंने 60 साल की उम्र में चित्र बनाने शुरू किए थे। उनकी कई प्रदर्शनी यूरोप, रूस और अमेरिका में लगी हैं।
5. टैगोर की शादी 1883 में मृणालिनी देवी के साथ हुई थी। शादी के बाद उनकी पत्नी ने बाद में उच्च शिक्षा प्राप्त की और इंग्लैंड जाकर भी पढ़ाई की।
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