गजलों की मल्लिका बेगम अख्तर का 103वां जन्मदिन

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बेगम अख्तर

गूगल ने डूडल पर दी श्रदांजलि


मल्लिका-ए-गजल बेगम अख्तर का आज 103वां जन्मदिन है। गजल प्रेमियों के लिए आज एक खास दिन है। इस मौके पर गूगल ने भी उनका जन्मदिन डूडल के द्वारा मनाया।

बेगम अख्तर
बेगम अख्तर

कोलकाता थियेटर से करियर की शुरुआत की

बेगम का जन्म 7 अक्टूबर 1914 मे यूपी के फैजाबाद जिले मे हुआ था। साल 1945 में बेगम अख्तर की शादी इश्तिआक अहमद से हुई थी। जो पेशे से वकील थे।

बेगम ने अपने करियर की शुरुआत साल 1920 को कोलकाता के थियेटर से की थी। उन्होंने ‘नसीब का चक्कर’ ‘द म्यूजिक रुम’ ‘रोटी’, ‘दाना-पानी’, ‘एहसान’ जैसी कई फिल्मों के गीतो को उन्होंने अपनी आवाज दी है। बेगम कई नाटकों और फिल्मों में अभिनय भी किया।

मशहूर गजल ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया… के अलावा बेगम अख्तर ने संगीत प्रेमियों को गजलों को गजलों की कीमत विरासत सौंपी थी।

बेगम ने कई जगहों पर अपनी आवाज का जादू बिखेरा लेकिन उनका दिल हमेशा लखनऊ के लिए धड़कता रहता था। दादरा, ठुमकी और गजल में महारत हासिल करने वाली बेगम अख्तर संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के अलावा पद्मश्री से भी सम्मानित थे। उन्हें मरणोपरांत पद्म भूषण भी दिया गया था।

बेगम को सिगरेट और शराब की लत थी

इतनी ख्याति के बावजूद बेगम को ऐसी लत थी। जिसकी वह आदि हो चुकी थी। उन्हें सिगरेट और शराब की बहुत गंदी लत थी। उनकी शिष्या शांति हीरानंद के मुताबिक उन्हें सिगरेट की इतनी लत थी कि रमजाम के दौरान इफ्तार करते वक्त जल्दी-जल्दी नमाज पढ़ती और एक कप चाय पीने के तुरंत बाद सिगरेट सुलगा लेती। जब दो सिगरेट फूंक लेती उसके बाद फिर आराम से बैठकर नमाज पढ़ती थी।

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