लाइफस्टाइल

अगर कभी माता पिता के बीच हो गया झगड़ा, तो बच्चे फिर से रिश्ते में ऐसे जगाएं प्यार

लव मैरिज हो या अरेंज मैरिज  पति-पत्नी के बीच नोंकझोक होना आम बात है


जब एक कपल शादी के पवित्र बंधन में बंधता है तो उसके अपने पार्टनर को लेकर कई सारे सपने होते है। फिर चाहे वो अपने इस शादी के रिश्ते को खुशी-खुशी निभाएं, सब कुछ अच्छा हो, दोनों की बीच कोई लड़ाई-झगड़े न हो और दोनों साथ में एक अच्छा समय गुजारे। लेकिन सारी चीजे एक तरफ और पति-पत्नी के बीच लड़ाई-झगड़े होना एक तरफ।

अरेंज मैरिज हो या फिर हो लव मैरिज पति-पत्नी के बीच लड़ाई-झगड़े होना तो एक नार्मल बात है। ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास की नींव पर टिका होता है। जरा सा भी विश्वास खत्म हुआ, तो ये रिश्ता बिखर तक सकता है। आपको बता दे कि इस रिश्ते में जितना प्यार होता है, उतनी ही नोंकझोक भी रहती है। लेकिन कई बार ये झगड़े इतने बढ़ जाते हैं कि कई हफ्तों तक दोनों एक दूसरे से बात नहीं करते। ऐसे में बच्चों को अपने माता पिता के झगड़े को सुलझाना चाहिए और फिर से उनके रिश्ते में प्यार जगाना चाहिए।

 माता पिता के बीच झगड़े

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एक दूसरे की अहमियत: जब पति-पत्नी के बीच झगड़ा हो जाता है तो दोनों एक दूसरे से कई दिनों तक बात नहीं करते। ऐसे में बच्चे अपने माता पिता के बीच सलाह करा सकते है। दोनों को एक दूसरे की अहमियत बता सकते हैं, उन्हें बता सकते हैं कि कैसे माँ आपका हर समय साथ देती है, और अपनी माँ को बता सकते है कैसे पापा आपकी हर ख्वाहिश को पूरा करते हैं।

कैंडल लाइट डिनर से: अगर आपके माता पिता के बीच किसी बात को लेकर लड़ाई हो गयी है और दोनों एक दूसरे से बात नहीं कर रहे है तो ऐसे में दोनों के बीच लड़ाई को खत्म करने का एक बेस्ट तरीका कैंडल लाइट डिनर हो सकता है। इस दौरान दोनों साथ होंगे, तो हो सकता है दोनों सारी बातें भूल कर फिर से बात करने लगे।

माता पिता के बीच झगड़े

दोनों को समय देकर: कई बार माता पिता के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि ऐसे में उन्हें अकेला छोड़ना ही बेहतर होता है। ऐसे में बच्चों को अपने माता पिता को अकेला समय देना चाहिए।

दोनों की बात करवाकर: जब माता पिता की किसी बात पर लड़ाई होती है, तो अक्सर दोनों में गुस्सा भर जाता है। ऐसे में दोनों एक दूसरे से बात नहीं करना चाहते। बात तो दूर की बात है कई बार तो एक दूसरे को देखना भी नहीं चाहते। ऐसे में बच्चों का फर्ज बनता है कि वे अपने माता-पिता की इस लड़ाई को खत्म करवाएं और उनकी फिर से बात शुरू कराए।

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